Saturday, February 3, 2018

योरप यात्रा : बोस्टन , विलियम शेक्सपियरक शहर, आ सर आइजक न्यूटनक हवेली

बोस्टन (लिंकनशायर)
बोस्टन इंग्लैंडक पूर्बी तटपर एकटा छोट, किन्तु ऐतिहासिक शहर थिक. हमर पत्नीक   जेठ भाई, मिथिलेशजी, बहुत दिन सं एत्तहि रहैत छथि. अस्तु, एतय हमरा लोकनि  हुनके ओहिठाम पहुनाई में आयल छी. आइ वृहस्पति थिकैक. रवि दिन भोरे लन्दन-हीथ्रोसं  हमरा लोकनिक चेन्नईक  वापसीक फ्लाइट अछि. आइ हमरा लोकनि भोरे ट्रेन सं एडिनबरा सं विदा  भेलहु. यॉर्क में ट्रेन बदलि लिंकनशायरमें, ग्रैन्थम स्टेशन अयलहु. भय छल, छोट स्टेशनपर  उतरबा सं पहिनहिं ने ट्रेन खुजि जाय. टी टी ई आश्वस्त कयलनि, ' विश्वास राखू, यावत अहांलोकनि नहिं उतरब, ट्रेन नहिं खुजतैक.' सएह भेल. ग्रैन्थम स्टेशनतं बुझू अपन लोहना रोड. तथापि समानता सं बेसी भिन्नता छैक. स्टेशनपर मिथिलेशजी स्वयं आयल छलाह. हुनकर ठेहुन एखन कज्जी छनि, हाथमें छड़ी ल कय चलैत छथि. तथापि, अपने गाड़ी चलाकय आयल छथि, ताहि सं द्रवित तं भेवे केलहुं, हुनक सौजन्य सं अभिभूत हयब उचिते. भारतमें हमरा लोकनि आगंतुककें स्टेशनपर सं ल अबैत छियनि  आ पुनः पहुंचाइओ दैत छियनि. से नव नहिं, किन्तु, ई बिलेंत थिक. एहि ठाम ऑफिस में टोपी खूटी पर टांगि भरि नगर घूरि एबाक संस्कृति नहिं.
रूपम आ मिथिलेशजी
ग्रैन्थम सं बोस्टन, करीब तीस मीलक दूरी में करीब एक घंटाक समय लागल. दिनक समय, साफ़ मौसम. इलाका देखैत, गप्प-सप्पमें कखन बोस्टन आबि गेलहुं, बुझबो नहिं केलिएक. प्रसन्न मन आ प्रिय जनक संगति जतबे नीक होइछ, ओ ततबे द्रुत गतिएँ बीति जाइछ. मिथिलेशजीक आवास अपने भवनमें एतुका गार्डनर-वाक इलाका में छनि. इलाका शान्त आ हरियर छैक. सुनैत छी एतुका शान्ति आ जनशून्य वातावरण देखैत, सद्यः भारतसं  आयल एकटा सज्जनके ततेक आश्चर्यनक लगलनि जे, गृहपतिकें पूछि देलखिन, 'आइ एतय कर्फ्यू लागल छैक कि ?' हमरा लोकनि ताहि चिंता सं मुक्त छी. आब दू दिन एतय विश्राम, गप्प-सप्प आ भ्रमण हेतैक.
मिथिलेशजी एवं हुनक पत्नी, सीमा, हमरा लोकनि स्वागत-सत्कारमें पूरा तत्पर तं छथि. सीमा गृहणीक अतिरिक्त  लेखिका सेहो छथि. हमरा हुनकर रचनाकारक व्यक्तित्व  आकृष्ट करैत अछि. कारण, 'स्वान्तः सुखाय ( writing for pleasure)' रचनाक हेतु मनुष्यकें जेहन स्वप्न-द्रष्टा हेबाक चाहियैक, सीमा से  छथि. अपन दंभमें हुनका  हम समान-धर्मा कहि सकैत छियनि. किन्तु, लेखक हेबाक हमर अपन अनुभूति एखन हमर चेतना धरि नहिं पहुँचल अछि. सीमा निरंतर लिखैत छथि.  पछिला दस वर्षमें करीब दर्ज़न भरि अंग्रेजी उपन्यास लिखि चुकल छथि. ई कोनो छोट उपलब्धि नहिं. वस्तुतः, हम कोनो आओर एहन मैथिल आप्रवासी नारिसं परिचित नहिं छी जे एतेक निरन्तरतासं लिखबा में लागल होथि. सीमा  कहलनि,  ओ प्रतिदिन दू-चारि पृष्ठ अवश्य लिखैत छथि.  हमरा लगइए, प्रत्येक लेखक जं प्रतिदिन किछु-ने-किछु अवश्य लिखय तं अल्प जीवनकालहु में बहुत उपलब्धि सम्भव छैक. किन्तु, बहुत गोटे जे हमरा जकां मूलतः लिखबाक व्ययसाय में नहिं छथि, अनियमित लेखनक कारण किछु कीर्तिमान नहिं बना पबैत छथि. मिथिलेशजी सेहो प्रायः ताही कोटिक सुशुप्त, सुनगइत कवि छथि, जनिक साहित्यकारक छवि  मित्र आ परिवारजन कें छोडि अनका बीच अपरिचिते छनि .  तें एखन दुनू  गोटक बीच केवल सीमा अपन प्रकाशित कृतिक  बलें  साहित्यकारक मंचक अधिकारी छथि.

25  जुलाई 2014.
आइ मिथिलेशजी हमरा लोकनिकें बोस्टनक लोकल मार्केट, वा हाट कहू , देखबय ल गेलाह .  एत्तहि लगे में ऐतिहासिक चर्च 'द बोस्टन स्टंप ' देखल.

बोस्टन स्टंप
एतेक पुरान पूजा-स्थल इतिहासकार लोकनिक हेतु अनुसन्धानक विपुल सामग्री द सकैछ. तथापि हमरा-सन जनसामान्य ले सेहो अनेक जगजियार ऐतिहासिक तथ्य  आकृष्ट केलक. एहिमें प्रमुख अछि, ओहि बोस्टन निवासी लोकनिक सूची जे एतय सं अमेरिका जाकय ओतुका अनेक राज्य आ शहरमें महत्वपूर्ण पदकें सुशोभित करैत गेलाह वा ओतय जीवनक अनेक क्षेत्रमें कीर्ति पताका फहरौलनि. ज्ञातव्य थिक, 17-18 वीं शताब्दी में सम्पूर्ण योरप सं हजारोंक संख्यामें उद्यमी लोकनि अमेरिका तटपर पहुँचैत गेलाह. बुझबाक थिक ओहि युग में योरप विश्वले एहन बैमान पडोसी नहिं छल जे खेतक आरिकें सहे-सहे थोड़-थोड़ क घुसकबैत छल. बल्कि, योरोपीय आप्रवासी लोकनि ओहि युगक एहन लैंड-शार्क सब छलाह जे सम्पूर्ण विश्वमें जतय जे भूमि खाली भेटलनि  हथियबैत चल गेलाह. तथापि, अजुका लैंड-शार्क लोकनिक विपरीत, जे एकड़-दू  एकड़, बीघा - दस बीघा हथियबैत छथि , योरोपीय उपनिवेशवादी लोकनि देशक- देश, महासागरक  द्वीप, सागर-समुद्र , आ पहाड़ किछु नहिं छोड़लनि. एहि में -अस्त्र-शस्त्रक बल, छल-छद्म, साम, दाम, दण्ड, भेद सब किछुक प्रयोग भेल. किन्तु, साम्राज्यक निर्माण सुलभ तं छैक नहिं. हँ, विश्वक बन्दर बाँटमें हिनका अपना लोकनिक बीच   द्वन्द-युद्ध,  शत्रुता  सेहो  भेलनि. किन्तु, से तं सबल-सामंत लोकनि में सब दिन होइते एलैये. विश्वभरिक हथिययबाक एहि अभियानक फलस्वरूप  18-19 शताब्दीमें उपनिवेशवादी लोकनि विश्वक लगभग 96 % भागपर अधिपत्य स्थापित क लेने रहथि. फलतः, विश्वभरि में नव-नव सीमा , नव-नव राष्ट्र आ नव-नव गुट बनल. नव-नव अधिपतिक उदय भेल. विश्व भरि में नव-नव आ अपरिचित नामक शहर-नगर सब बसल. ब्रिटेन सं दूर अमेरिकामें यॉर्क  सं न्यू यॉर्क , इंगलैंड  सं न्यू इंगलैंड, जर्सी सं न्यू जर्सी , बोस्टन, प्लायमाउथ, बरमिंघगम आ रानी-राजकुमारीक नाम पर कैरोलिना, चार्लोट्सविले आदि स्थापित भेल. बोस्टनक एहि चर्चक सम्मान-सारणीपर  ओही अप्रवासी लोकनिक नाम अंकित अछि जे अमेरिकाक विभिन्न शहर-नगरक मेयर, राज्यक गवर्नर, वा सेना-नायकक पद समय-समय पर सुशोभित कयलनि.
नव क़द्रदानक आशामें कुकुर
एहि ठाम हाटक आस-पास एकटा आओर नव वस्तु देखबा में आयल. स्वस्थ सं ल कय बूढ़- ठेढ़ धरि, अनेक वयसक आ अनेक जातिक कएक टा कुकुर एडॉप्शन ले स्वामीक संग, नव स्वामीक आशामें  प्रतीक्षारत छल. कुकुर सं प्रेम अछि, ल जाऊ. किन्तु, कुकुर पोसब सुलभ नहिं. ई बड़का दायित्व थिक. कुकुर  अहांक रक्षा करत. किन्तु, ओकरो आंग-स्वांग हेतैक. अहूँ के सेवा करय पडत. ख़ास क आइ-काल्हु फ्लैट धरि सीमित  जीवनमें गाम-गमाइत, यात्रा -टूरक समय कुकूर गराक घेघ साबित भ सकैत अछि. ताहि पर विकसित देशमें पशु-पक्षीक अधिकारकें नहिंइ बिसरी. मानवाधिकार ? मनिवाधिकारक परिभाषा अहाँ कतेक सबल छी ताहि पर निर्भर अछि !
26 जुलाई 2014:शेक्सपियरक नगर स्टेटफोर्ड-ऑन-एवन
शेक्सपियर बर्थ ट्रस्ट
आई हमरा लोकनि मिथिलेशजि संग प्रसिद्द नाटककार-कवि विलियम शेक्सपियरक नगर स्टेटफोर्ड-ऑन-एवन  (अर्थात एवन नदीक कछेर पर स्टेटफोर्ड ) जायब. ई नगर शेक्सपियरक जन्मभूमिक रूपें प्रसिद्द अछि, जेना विस्फी विद्यापति जन्मभूमि थिक. किन्तु, दुनू में महान अंतर छैक. एतय विश्वभरिसं वर्षमें  लाखो पर्यटक अबैत छथि , किन्तु, बिस्फ़ी बहुत मैथिलकें बुझलो ने हेतनि.
शेक्सपियरक पैत्रिक आवासक एक दृश्य
 स्टेटफोर्ड-ऑन-एवनमें 'शेक्सपियर बर्थप्लेस ट्रस्ट' नामक संस्था शेक्सपियरक जन्मस्थानकें राष्ट्रिय स्मारकक रूपमें चलबैत अछि. ई संस्था शेक्सपियरक  जन्मस्थान, हुनक कृति, पाण्डुलिपि, एतुका संग्रहालय, आ  शेक्सपियरसं सम्बन्धित अभिलेख, फोटो सब किछुक संरक्षण आ प्रदर्शनक भार उठौने अछि. बाहर सं अयनिहार आगंतुक-पर्यटक पहिने संग्रहालयक प्रदर्शन कक्ष होइत जन्म-स्थानक परिसर में अबैत छथि जाहिमें अनेक भवन छैक. एहि सब म सं शेक्सपियरक जन्मस्थान बला भवनमें उपलब्ध सामग्री आ शेक्सपियरेक युगक परिधानमें उपस्थित कार्मिक लोकनि विगत युग एकटा रोचक परिदृश्य प्रस्तुत करैत छथि, जे पर्यटककें सोझे ओहि बीतल युगमें ल चलैछ जहिया ई प्रसिद्द विभूति एहि भूमि पर जनमानस आ प्रशासकक मनोरंजन करैत रहथि . एहि परिसरक फुलवारीमें एककात कविकुल गुरु रवीन्द्रनाथ  ठाकुरक बस्ट हमरा लोकनिक हेतु गौरव थिक.
कविकुलगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर
 दू विभिन्न युग दू टा समानधर्मा कीर्ति पुरुषक एक ठाम दर्शन सं  गौरव बोध भेल. सुनैत छी, एहि ठाम एहि शहरक दोसर भागमें शेक्सपियरसं सम्बन्धित अओर अनेक स्थल छैक. किन्तु, हमरा लोकनि आइ  स्टेटफोर्ड-ऑन-एवनक एहि महत्वपूर्ण यात्रासं संतुष्ट भ  एत्तहि यात्रा समाप्त कयल, आ घरमुहां भेलहु.

27 जुलाई 2014 : सर इस्साक न्यूटन केर हवेली: वूल्सथोर्प मैनर
सर न्यूटनक पैत्रिक आवास
आइ पुनः आस पासक इलाका देखबाक योजना छैक. प्रसन्नताक विषय जे आइ हमरा लोकनिक गाइड में मिथिलेशजीक बालक सुयश सेहो हमरा लोकनिक संग छथि. एहिसं पूर्व हमरा लोकनिक लन्दन प्रवासक बीच सेहो सुयश हमरा लोकनिक भेंट करय आयल छलाह. नीक लगैत अछि. सुयश नेना सं युवक भ गेल छथि. लन्दनकेर रीडिंग इलाकामें कार्यरत छथि. आइ सप्ताहान्तमें माता-पिताक संग छथि, आ हमरा लोकनिक संग पूरि रहल छथि. एहि सं नीक की चाही. अजुका यात्रा लगेक ग्रैन्थम शहर लग, प्रसिद्द गणितग्य, वैज्ञानिक आ दार्शनिक सर इस्साक न्यूटन केर आवास वूल्सथोर्प मैनर धरि हेतैक. ई कृषि प्रधान इलाका थिक. एतय न्यूटनक  गांओ में आब हुनक  वंशधर प्रायः केओ नहिं छथिन . अस्तु राष्ट्र एवं  विश्व स्वयं हुनक कीर्तिक आभामें अपना कें सम्मानित बूझैत अछि, आ हुनक विरासतकें भविष्यले जोगाकय रखने अछि. 
वूल्सथोर्प मैनर आवासीय भवन सबहक ओ समूह थिक जतय सर इस्साक न्यूटन अपन आरंभिक जीवन बितओने छलाह. कहल जाइछ,  हुनकर केम्ब्रिज प्रवासक अवधिमें ओतय  एकबेर प्लेगक प्रकोप भेल रहैक. अस्तु, न्यूटन ओहि समय में  केम्ब्रिज सं पुनः  अपन पैत्रिक आवासमें आबि गेल रहथि. एतय ओ  अनेक महवपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग आ अविष्कार केलनि जाहिमें गुरुत्वाकर्षणक सिद्धांत आ सम्यक गतिक सिद्धान्तक  प्रतिपादन शामिल अछि. गणितक क्षेत्रमें कैलकुलसक गणितीय विधि सेहो गणितमें  न्यूटनक मौलिक   योगदान  थिक. आब भारतमें नवराष्ट्रवादी लोकनि दावा करैत छथि, गुरुत्वाकर्षणक  सिद्धान्तक  मूल सेहो वेदे थिक ! अहोभाग्य !!
वूल्सथोर्प मैनर परिसर में देखबाक तीन टा प्रमुख आकर्षण अछि; न्यूटनक पैत्रिक आवासक भवन , न्यूटनक आविष्कार सबहक वर्किंग मॉडलक संग्रहालय , आ ओ ऐतिहासिक सेबक गाछ जकर फलक भूमि पर खसब, कहल जाइछ, गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्तक बीआ न्यूटनक मस्तिष्कमें रोपलक.  सत्य जे होइक, किन्तु सेब केर भूमिपर खसलासं मस्तिष्कमें नव चेतनाक उदयक कथा एकटा गंभीर संकेत थिक. कारण, छोट वा पैघ घटना घटिते रहैछ. घटना प्रमुख नहिं थिक. घटनाक संज्ञान लेब, आ घटनाक पाछूक रहस्यक प्रति जिज्ञासा आ ओकर कारणक वस्तुनिष्ठ अनुसन्धाने नव तथ्यक रहस्योद्घाटन आ आविष्कारक जननी थिक. हमरा लोकनिक देशक तर्क शास्त्र आ मीमांसाक परम्परा एही श्रेणीक  जिज्ञासाक पृष्ठपोषक छल जे आब विलुप्तप्राय  भ चुकल अछि. कहितो छैक, 'वादे-वादे जायते तत्व बोधः' एकर चर्चा प्रसिद्द अर्थशास्त्री अमर्त्य सेनक पुस्तक ' The Argumentative Indian में भेटत .हमरा लोकनिक एखनुक शिक्षा प्रणालीमें जिज्ञासा आ नव  अनुसन्धानक स्थानपर केवल अंक हंसोथबाक प्रवृत्तिकें बढ़ाबा देल जाइछ. ई परिपाटी ज्ञान-विज्ञानंक प्रगतिक  बाधक थिक. शिक्षा पद्धतिक इएह अन्तर विकसित आ विकाशशील देश सबहक बीचक शिक्षा पद्धतिक मौलिक अंतर थिक. एखनुक समयमें  जं तर्क करबैक, प्रश्न पुछ्बैक, तं स्कूल-कालेज तं छोडू, विधान-सभा, लोक-सभा धरिमें कपार फोडि देत ! इएह थिक एखनुक नया भारत !किन्तु, वर्तमान शिक्षा पद्धति , जिज्ञासाक कमी आ वाद-विवादक अभाव भारतके knowledge economy नहिं बना सकत .
न्यूटन परिवारक बगीचामें इतिहास प्रसिद्द सेबक गाछ
वूल्सथोर्प मैनर परिसरक थोड़बे ऊँच,  किन्तु बेस चतरल ई सेबक गाछ ऐतिहासिक वृक्ष सम्पूर्ण विश्व सं अबैत पर्यटक आ शोधार्थी लोकनिक आकर्षण केंद्र थिक. एहि गाछक अनेक बह दूर-दूर धरि गेल अछि, आ एखन केम्ब्रिजक ट्रिनिटी कालेज  सं ल कय अमेरिकाक एम् आइ टी एवं चीनकेर टिनजियान विश्वविद्यालय  धरिक फुलबारीमें रोपल अछि, जेना अपना लोकनिक बोधगया क बोधि-वृक्षक बह श्रीलंका, जापान आ कतय-कतय ने गेल अछि .ततबे नहिं एतुका सेबक बगीचा में अनेको गाछ ऐतिहासिक सेबक बहे थिक.
हमरो लोकनि एहि गाछक पृष्ठभूमिमें फोटो झिकाओल आ आपस भ गेलहुं.  






1 comment:

अहाँक सम्मति चाही.Your valuable comments are welcome.

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