गीताक पति अनबुमणि जहिया फाँसी लगा लेलकैक, गीता जेना बौक भए गेल छलि. ने
आँखिमे नोर, ने मुहसँ बकार. लगैक जेना एकटा विशाल भूस्खलन अचानक नदीपर बान्ह
बान्हि देने होइक; छोट-सन गप आ एहन परिणाम.
अनबुमणिक मारिसँ केओ नहि बचल छल, ने बेटा-बेटी आ ने स्त्री. तामस ओकर नाकहि पर
रहैत छलैक. तखन जखन मन भेलैक, हाथमे जे रहैक ताहीसँ परिवारकेँ डेङा दैक. ओकर इएह
बानि छलैक.
वयस चालीसक करीब. गीता छलि दुब्बर पातरि; ठाढ़ नाक, पैघ-पैघ आँखि. जमुनिया रंग. छलि
काजुलि. फूसि-फटक, चोरि-छिनरपनक हिस्सक रहितैक तँ केओ घरमे पयर राखय दितैक ? काज
तँ पैघे लोकक घरमे करैत छलि, मुदा कहिओ केओ कोनो शिकाइति नहि केलकैक. समय पर अबैत
छलि, बरतन-बासन आ फ्लैट चमका देलक आ चलि गेल. भानस-भात ओकर बुत्ताक गप नहि. चाहक
हिस्सक ओकरा रहैक. मुदा, अनकर बनाओल चाह ओकरा पसिन्न नहि; हमरा घरमे चाह ओ अपने
हाथेँ बनबय- दुधगर आ मिठगर. जखन काज पूरा भए जाइक, ओ स्टीलक कपमे चाह लए बैसय. जँ
पसिन्नक मिठगर ब्रेड भेटलैक, तँ खा लेलक. नहि तँ जे वस्तु ओकरा पसिन्न नहि, मुहमे
नहि दैत. आन कोनो खयबाक वस्तु भेटैक, तँ खा लिअय. मुदा, जँ नीक नहि, लगैक तँ मुह
खोलि कहि दैत. लगैक जेना, अनकर बनाओल वस्तुमे कमी बहार करबकेँ ओ अनका ऊपर उपकार
बूझैत छलि. हँ, खा तँ लैत छलि ओ
हमरो घरक दक्षिण भारतीय भोजन, मुदा, प्रशंसा केवल ओ अपने बनाओल इडली-दोसाक करिते.
उत्तर हो या दक्षिण, भारत वा नेपाल, नारिक कपार फुटैत छैक तँ केवल क’ल पर खसलासँ. हाथ टुटैत छैक तँ बाट पर पिछड़िकय खसलासँ, देह दर्द होइत छैक
काजक भारसँ आ माथ-कपार फुटैत छैक तँ केवल कोनो दुर्घटनासँ! साई-बहु एक दोसराकेँ
छोड़ि जायत कतय? बड्ड हेतैक जहर-माहुर खा लेत, फाँसी लगा लेत, देहमे आगि लगा लेत,
इनार-पोखरिमे डूबि मरि जायत! मुदा, अपन लोक-वेदक निंदा करत! नवका युगक रेआय एखन
धरि नवे धरि सीमित छैक. पुलिस-दरोगा लग जायब तँ
कुकुर कौआसँ बचबालेल गीधकेँ नोतब भेल.
2
अनबुमणिक आत्महत्याक बाद तँ गीता काठे भए गेल छलि. ने बाजब ने भूकब. ने कोनो
शिकाइति, ने हताशाक भाव. हित-मीत, जकरा जे फुरैक, कहैक: ‘दोसर बियाह कए ले’ तँ,
कतेक गोटे कहलकैक. मुदा, गीता? ई विचार संभव थिक गीताक मनहुमे अबैत होइक. केओ
पुरुख-पात्र सेहो दया देखयबाक बहाने ओकर मन टोबैत होइक, से संभव. मुदा,ने गीताक मुहसँ जवाबमे एको शब्द सुनलकैक आ ने
चेहरापर कोनो भाव-संकेत देखलकैक. अनबुमणिक जीविते एक बेर हित अपेक्षित इहो कहने
रहैक, हमर एहन मर्द रहिते तँ हम तँ एके दिनमे सोझ कए दितिऐक. बजनिहारिकेँ दोसर उपहास
करैत पुछलकैक: तों कालीमाता छियें?
‘से तँ नहि छी, हमहू, सरला-जकाँ मिनटे, मे सोझ कए दितिऐक. बुझल नहि छौक?’ आ कनेक
लग जा कए कानमे कहलकैक, ‘सरलाक आदमी हरसट्ठे ओकरा पीटि दैक. आजिज भ’ कए सरला एक
दिन मौका ले’ ओ धपौने छलि. जहाँ आदमी हाथ उठौलकैक, ओ लग गेलि आ एके हाथे मनसाक आँड़
पकड़िकए, तेना कए मचोड़ि देलकैक जे मनसाकेँ ठामहि दांती लागि गेलैक. मुहझौंसाकेँ ओहि
दिनसँ हिस्सके छूटि गेल!’
गीताक बेटी, नन्दिनी, पन्द्रह-सोलह बरखक रहैक. बेटा तेरह-चौदह बरखक. घरक हालत
देखि बेटी अस्पतालमे काज करब शुरू कए देने रहैक. गीताकेँ मनोरथ रहैक जे नन्दिनी
नर्स बनय. मुदा, कालेजक फीस कतयसँ जुटितैक! बाप अकर्मण्य. गीता अपने नचार. भाई
छोट. तखन गरीबक मनोरथ मेघक उड़ैत टिक्कर छी, आयल आ बिनु बरसनहि हवाक संग उड़ि गेल.
तैओ गीताकेँ अनबुमणिक रहैत, समर्थ बेटीक लेल ओहन चिंता नहि रहैक, जेहने घरमे आन
पुरुखकेँ रहने होइतैक.मनहि मन सोचय, नन्दिनी अपन बाट पकड़िये नेने अछि. जँ, बेटा,
मारुती अपनो पेट पालबा जोकर कमाए लागल तखन कथिक चिंता. मुदा, मारुतीक संगति देखि
कए ओकरासँ बेसी आस नहि होइक. होइक जे इहो जँ बापेक बाट धेलक, तँ इहो घर बैसल खायत, आ दारू पियत. ऊपरसँ जँ कोनो
छौड़ी-मौगीकेँ घर लए अनलक तँ हमर नरकक अंत नहि.
गीताक डरक कारण रहैक: घरमे नीक चालि-बानि धियापुता सिखय वा नहि, ख़राब किरादानीक
लसेढ़ बड्ड ख़राब होइत छैक. धिया-पुता पर ओकर असरि बड्ड जल्दी पड़ैत छैक. गीताक दियर,
मुरुगन रहैक ड्राईवर, मुदा दारूबाज; पछिले बरख देहमे आगि लगा प्राण हति लेने रहैक.
एहि बेर जेठ भाई-अनबुमणि- सेहो फाँसीलगा सब किछुसँ मुक्त भए गेल. सेहो क़ेहन बात
पर! अपन समर्थि बेटीकें अदना-सन बात पर कापर-फोड़ि देने रहैक. ताहि परसँ नहि जानि
कोन उरमा उठलैक, गीता यावत् बेटीक कपारमे टांका लगबाकए अस्पतालसँ आपस अबैत, घरमे
एसगर बैसल अनबुमणि उठल, आ फाँसी लगा लेलक. पाछू, गीताक माथ पर कतेक हुज्जति;
पुलिस-दरोगा, बयान आ केस. अनबुमणिक ऊपर तँ ने कोनो थाना-पुलिस लग कहिओ शिकाइति भेल
रहैक, ने गीता ओहि दिन गीताकेँ किछु कहबाक फुरसति रहैक. ओ तँ लत्ते-पत्ते
नन्दिनीकेँ ल’ कए अस्पताल भागल छल. तखन अनबुमणिक मनमे की भेलैक, कोन ग्लानि आ कथिक
भय, सएह गीताकेँ किछु ने फुरैक.
3
अनबुमणिक मृत्युक दूइए हप्ताक पछाति गीता काज पर आपस आइलि. एकदम गुम्म. जखन हित-मीत
लग बैसैत छलि,तँ, लोक खोध-बेध करिते रहैक. एके गप: केहनो रहैक, मरद रहैक. एसगरि
कोना रहति. सबहक अपने अनुभव, आ सुनले गप पर विश्वास. सब तकरे भय देखबैक. गीता सोचय, सबकेँ एके चिंता: हम आब कोना रहब. मुदा,
एतबे दिनमे सब बिसरि गेल, हम कोना रहैत छलहुँ! लाख दोष भेने पुरुख भेल पति, आ लाखो
गुण भेने एसगरि माउगि भेल अनाथ !! ककरो मुहसँ कदाचित् इहो बहरा जाइक: धुर ! नीके
भेलैक: गीताकेँ नरकसँ मुक्ति भेटि गेलैक. एहने गप आन केओ सुनैक, तँ जीहो कूचि लैक:
एहनो गप केओ बाजय! चुप बैसल आन माउगि सब केओ एक बेर बजनिहारिक मुह दिस तकैक, आ फेर
गीताक मुह दिस. मुदा, गीता ने ककरहु प्रतिवाद करैक, ने ककरो दिस नजरिए उठाकए देखय.
माने, जकरा जे फुरौक, बाज>
गीताक परोक्षमे केओ इहो कहि बैसैक: धुर ! केहन पाथर भए गेलैक गीता! दैवक एहन डाङ आ
आँखिसँ एक ठोप नोर धरि नहि खसलैक!! दोसर कहैक: आँखिमे नोर कतयसँ अओतैक; एकर आँखिक
सबटा नोर तँ अनबुमणिक जीविते बहि गेलैक. कंस-काल! दुपहरियाक भोजन बैसाड़मे सबहक
खायक सधि जाइक, सब अपन-अपन बाट धरय आ काज पर विदा होअय आ सभा उसरि जाइक.
गीताक माय ककरो फज्झतिओ कए दैक: गीता पर एहन वज्र खसलैए आ तोरा सबकेँ मनमे कोनो
विचार नहि. मुदा, केओ गीताक माई, अंजलिओकेँ दबाड़ि दैक: कोनो अनुचित कहै छै?
अनबुमणि अपने मरि गेल. मुदा, गीताक जिनगी छैक. ओ ककरा बलें जिनगी काटत? बेटी अपन
घर जेतैक. बेटा आइ ने काल्हि कोनो मौगीकेँ बियाहि अनतैक. तखन तँ ई अपने घरमे सूपक
भाटा भए जायत.
‘बड्ड बढ़िया.’ कहैत अंजलि सेहो अपन बाट धरय आ दोसरो सब विदा होअय.
4
अनबुमणिक मृत्यु करीब छौ मास भेल हेतैक. एक दिन बेरुक पहर हमर घंटी बाजल. हमर
पत्नी केबाड़ खोललखिन. गीता ठाढ़ि छलि. हाथमे स्टीलक थारी. थारीमे एकटा नारिकेर,
पाँच टा पानक पात, एक गद्दी सिनुर आ सबहक ऊपर तमिल भाषामे एक कार्ड.
मूड़ी झुकओने शान्त आ स्थिर स्वरमे गीता कहलकनि: ‘नन्दिनीक विवाह थिकैक. लड़का
नेलिकुप्पम गामक अस्पतालमे काज करैत छैक. ओतहि नन्दिनी नर्सिंगक ट्रेनिंग करति.’
हमर पत्नी गीताकेँ भीतर आबय कहलखिन, तँ, ओ कहलकनि, ‘मैडम, एखन नहि. काल्हि
भोरे तँ अयबे करब. एखन एही कोलोनीमे आओर दू-चारि घर जयबाक अछि. सबसँ पहिने अहींक
ओतय आयल छी.’
गीता कनिएक थम्हल, आ कहलकनि, ‘मैडम, अयबैक अबस्स. सर सेहो अओथिन.’ एतबा कहैत गीताक आँखिसँ दू ठोप नोर खसि पड़लैक. मुदा, अबिलंब बिनु सोझाँ तकनहि ओ झटकारनहि तेसर फ्लोरक सीढ़ीसँ नीचा उतरि गेल.


