कोकनल सोङर
परसू नन्दिनीक विवाह हेबाक होइतैक, आ आइ भोरे-भोर बाप कपार फ़ोड़ि देलकैक.
निशांबाज मनुख; बेटीकेँ जलखै देबय
लेल कहलकैक. खगल घर. यावत् बेटी किछु इंतजाम कए खयबाक किछु आनि कए सोझाँ रखितैक,
तावत् बाप-अनबुमणि-क तामस कपार पर चढ़ि गेलैक. तामस तँ सदिखन ओकर नाके पर रहैत
छलैक. चिकरय लगलैक, ‘एक मुट्ठी अन्न सेहो जल्दी आनि कए दैत से पार नहि लगैत छैक
एकरा सबकेँ. जेहने माए तेहने बेटी.’
बेटी कहलकैक, ‘किछु बनेबैक तखन ने. सेहो घरमे किछु रहतैक तखन ने. तोरा तँ घरसँ
बहरयना हप्ता भए गेलह.’
बेटीक गप्प अनबुमणिकेँ लेसि देलकैक. पानिक पाइप सोझाँमे छलैक. ओ आव देखलक ने ताव,
पाइप उठौलक आ सोहाइ डाङ नन्दिनीक कपार पर दए बैसलैक. बेटी किकिहारि करैत दुनू
हाथेँ माथ पकड़ि ठामहि बीच अङनामे बैसि गेलैक. गीता दौड़िते दोसर कोठलीसँ बहरायल तँ नन्दिनी
माथसँ छर-छर शोणित बहैत देखलकैक. पहिने ओ जेना-तेना फूटल कपारसँ शोणित बहब बंद करबाक द्वारा ताकय लागल. मुदा, शोणितक पमार ओकरा बुतें सम्हरैक तखन ने. ओकरा अनबुमणिकेँ किछु कहब बेकार लगलैक; मनुखकेँ
ने लोक किछु कहतैक. ओकरा भेलैक, एहन चण्डालक कोन काजक!!
कतहु भागि जाइत, चल जाइत, मरि जाइत तँ, धियापुताक एहन हालत नहि
होइतैक, हमरा समाजक सोझाँ एहन हँसारथ नहि होइत. कुमारि छलहुँ तँ माय-बाप एकटा
मनुखक अंक लगा देलक. सोचलक जे जीवन कटि जायत. मुदा, जँ इएह हमर आ धियापुताक जीवन
थिकैक, तँ मरण केहन होइछ. हम आ हमर धियापुता तँ नित दिन समाज, आ परिवारक सोझाँ मरैत छी. मुदा, ई क्षणिक विचार गीताक मनमे जहिना आयल छलैक, तहिना उड़ि
गेलैक. नन्दिनीकेँ तुरत अस्पताल ल’ जायब ओकरा सोझाँ रहैक.ओ लत्ते-पत्ते नन्दिनीकेँ
ल’ कए सड़क पर आयल, आ जे कोनो ऑटो सामने भेटलैक ओहिमे बैसि अस्पताल विदा भए गेल.
हम भोरहि अस्पताल पहुँचले रही. गाड़ी पार्क कए अस्पतालक पोर्टिकोमे अयलहुँ तँ
गीताकेँ धड़फड़ाइत अस्पतालक भीतर जाइत देखि आश्चर्य भेल. हम आगू बढ़लहुँ. हमरा देखिते
गीता थकमका कए जतहि छल, ठाढ़ि भए गेलि. मूड़ी नीचा झुकल, नोराएल आँखि, आ अस्तव्यस्त
केश.
हम यावत् किछु पुछितिऐक, तावत् हमर नजरि
अस्पतालक द्वारिक भीतर बेंच पर बैसलि लड़की पर गेल. गीताक बेटी नन्दिनी रहैक. करीब
बरख बीसेक वयस, पिंडश्याम वर्ण, फूटल कपार. कपारक घाओसँ बहैत शोणित गाल धरि टघरि
आयल रहैक आ शोणितायल केशक किछु भाग गाल पर सटि गेल रहैक. हम सोझे भीतरे दिस
बढ़लहुँ. लड़कीक एहन हाल देखि हमरा किछु पुछबाक आवश्यकता नहि बूझि पड़ल. गीता अपने
अपरतिभ-जकाँ छल. दू दिन बाद नन्दिनीक विवाह हेबाक रहैक से हमरा बूझल रहय. एहन
परिस्थितिमे ई घटना गीताक हेतु केहन छल हेतैक, से कल्पना करब कठिन नहि. चिकित्साक
आवश्यकता रहैक, से देखिए लेले रहियैक. टाँका तँ लगबहि पड़ितैक. हम आगू भेलहुँ. दुनू
माय-बेटी सेहो हमर पाछू-पाछू विदा भेल. सीनियर रेजिडेंटक कमरा लग आबि हम बाहरेसँ
ड्यूटी- डाक्टरकेँ बाहर बजओलियनि आ जे किछु निर्देश देबाक छल, से दैत आगाँ बढ़ि
गेलहुँ.
करीब दस वर्ष पहिने जखन हमरालोकनि पांडिचेरी आयल रही, तहियेसँ गीता हमरा सबहक काज करब शुरू केने छल. ने ओकरा
हिन्दी-अंग्रेजी अबैत रहैक, ने हमरालोकनिकेँ तमिलक कोनो ज्ञान छल. देश भरिक नौकरी
करैत ई अनुभव हमरा सबहक लेल नव नहि छल. काज आ दरमाहाक अतिरिक्त ने ओकरा किछु
पुछबाक रहैक, ने हमरालोकनिकेँ आन कथूमे रुचि छल. ओतय कतेक गोटे घरमे काज देबासँ
पहिने खबासिनीक संग अनेक शंका-समाधान करथिन. जाति आ छूआछूतक विचार सेहो. मोन पड़ल
छल, नेपालहुमे हमर एकटा विद्यार्थी कहने छलि, सर, अहाँक घरमे सुनीता काज करैत अछि,
ने. हम सब ओकरा अपना घरमे नहि ने राखि सकबैक.
हम गप बूझि गेल रहिऐक; सुनीताक पानि नहि चलैत रहैक. माने, ओ अछोप भेल. ई समस्या
दक्षिण भारतमे नहि छैक, से नहि. मुदा,
हमरालोकनिकेँ तकर चिंता नहि. आन जे बूझथु, बूझथु.
गीता स्वस्थ छलि. नीक-जकाँ काज करितहि छलि. अनेरे छुट्टी, आ बिनु पूर्व सूचनाक काज
नागा कए परेशान नहि करैत छलि. ओकरा रहैत घरसँ एकटा सूई धरि नहि हेड़ायल. खबासिनिक
हेतु एहिसँ कोन बेसी गुण चाहिऐक. जँ, लाख टाका मासिक दरमाहा पओनिहार सरकारी अफसर आ
कर्मचारीसबकेँ एतबा गुण होइतैक, तँ, देशक एहन हाल रहितैक. मुदा, बिनु पढ़ल गीताकेँ कोन
सरकारी नोकरी भेटितैक नहि! तखन अफसर सबहक घरमे झाडू-पोछा-बरतन-बासन करैत दस साल
धरि निमाहि लेलक ई कोनो कम भेलैक. गीताक लेल इएह नौकरी पंथक पाकड़ि रहैक.
2
गीताक घरबला छलैक स्वस्थ-बलिष्ठ युवक. मुदा, रहैक निकम्मा. ओतबे रहितैक तँ
बड्ड बेस. मुदा, ओ मरतरिया आ पियाक सेहो छल. तेँ, गीता बतर एसगरे कमाकए घर चलबैत छलि.
कोरोना कालमे मनरेगामे मटिकट्टीओ केलक. तहिया अनबुमणि सेहो कखनो काल कने-मने काज
केलकैक. मुदा, ओकरा काज करबाक हिस्सक नहि रहैक. दिन-दू दिन काज पर गेल आ थस खा कए
फेर घरहिमे पड़ल-पड़ल दिन बिता दैक. गीता मनहि मन सोचय, लोक परिवार डेबैत अछि सहारा
लेल. जखन अदिनमे घर-परिवार ढहय लगैत छैक, तँ, पति-पत्नी एक दोसराक लेल सोङर बनि
परिवार सम्हारि लैत छैक. मुदा, कोकनल काठ ककरा लेल सोङर बनतैक. सोङरक विचारसँ
गीताक मन विह्वल भए जाइक. सोचय हमर एतेक टा जिनगी आगू अछि. धियापुतामे केओ रास्ता
नहि धेने अछि. हम कतयसँ अपना लेल सोङर आनब, के हमर ढहैत घरक सोङर हएत! किन्तु, केओ
ओकर नजरि पर नहि अबैक, ओ सहानुभूतिक संग ककरो अपना दिस अबैत नहि देखैक. तैओ ओ
हारि नहि मानय. सोचय हारि मानने जीवन चलत, धियापुताक पालन हेतैक.
तें,जहिया गीता मटिकट्टीमे जाय ओ अपना घरक भानस-भात अहलभोरे निमाहि हमरा ओतय आबय आ
हमर काज ख़तम कए आठ बजेसँ पहिनहि आपस जा मटिकट्टीमे लागि जाय.
कहुना ओ काल-सन ‘कोरोना काल’ कटि गेलैक. सबहक प्राण बचि गेलैक. मुदा, ओहनो
प्रलयकालमे घरमे गीताक संग की होइत छलैक, से ओकर मने जनैत छलैक. यद्यपि, ओ अपन
दुर्दशाक गप कहियो ओकर मुहसँ नहि बहरयलैक. आन केओ पुछ्तैक किएक.
मुदा, जहिया कहिओ गीता देह-दुखयबाक, माथ-बाँहि-पीठ दुखयबाक गोटी हमर पत्नीसँ मङैत
छलनि, आ से हप्तामे एक-दू बेर होइते छलैक, हमरालोकनिकेँ ओकर घरमे मारि-पीटक अनुमान
भइए जाइत छल. एक-दू बेर हमरालोकनि गीताक माथ पर टेटर सेहो देखने रहियैक. मुदा, ओकर
खोदबेध कियैक करबैक. तखन घरक कलह आ मारि-गारिसँ बचबाक हेतु गीता ओतयसँ बहरयबाक कोनो बाट तकैत छल, वा नहि तकैत छल से ओकर मने जनतैक.
माउगिक हेतु पतिसँ मारि खाएबसँ पैघ कोनो लाज नहि. ईहो बलात्कारसँ कम नहि. शरीर आ
मन पर चोट तँ दुनूमे पहुँचिते छैक. पतिक हाथेँ मारि खाइत माउगि धियापुता आ समाज दुनूक सोझाँ अपमानित होइछ.
3
गीता ओम्हर बेटीकेँ ल’ कए अस्पताल विदा भेल, एम्हर अनबुमणिक दोस्त-मित्र सब
अङनामे आबि धमकलैक. घरे पर घर, सब कान पथनहि रहैत छलैक. संगी-साथी ओकरा हुथय लगलैक:
‘तोरा अक्किल छौक! परसू एहि लड़िकी विवाह होइतैक, आ आइ तों कपार फ़ोड़ि देलही!!’
दोसर कहलकैक: ‘आब जे भेलैक से भेलैक. कम-सँ-कम अस्पताल तँ अपना संगे ल’ जैतें.’
‘बड्ड बढ़िया! तों तँ तेहन शिक्षा दैत छहिक जे अनबुमणि सोझे हवालातहि चल जाइत. हमरा
संगे जे भेल छल, से कि हमरा बिसरल अछि: जहाँ डाक्टर पुलिस केस बनबैत छैक,
इंस्पेक्टर सोझे आओत आ बस ! पुलिस तँ टक लगौनहि रहैए!’ कहि कए केओ तेसर चुप भए
गेल.
हवालातक नाम सुनिते अनबुमणिक कान ठाढ़ भए गेलैक. हवालात ओकरा रेहले-खेहल छलैके. मुदा,
केओ आन डर देखौतैक! ओकरा आनि लागि गेलैक. सोचलक, बेटी हमर आ ई सब हमरे टिटकारैए! ओ
सोझे उठि कए ठाढ़ भए गेल, आ कहनिहारक गरदनि पर हाथ देलकैक आ कहलकैक: ‘निकल हमर
अङनासँ! नहि तँ कोनो दशा बाँकी नहि रखबौ!! परिवार हमर आ हमरे बिटगरहा पढ़बैए’ कहैत,
अनबुमणि ओकरा नौ ढाकी फज्झति कए देलकैक.
अनबुमणिक दोस्त सबमे ओकरे समाजक लोक रहैक. मुदा, सब ने ओकरे सन नहि छल आ ने सब
ओकरासँ डेराइते रहैक. कण्णन टेलीफ़ोन विभागमे लाइन-मैन छल. दुनूक अङनासँ सटले रहैक.
ओ अनबुमणिकेँ पकड़ि कए कात कए देलकैक आ कहलकैक: ‘तों बड़का पहलवान छें. मानल. मुदा,
तोरा गोपाल कोनो बेजाय कहलकौ-ए. आब नीक-जकाँ सुन. आ इहो सुन जे जखन सब बात कलकुशल
भए सुनबिही तँ पैन्टहिमे लग्घी भ’ जेतहु.’
कण्णनक गप सुनि अनबुमणि साकांछ भेल. अनबुमणिकेँ साकांछ देखि, कण्णन कहब शुरू
केलकैक: ‘आब सुन. एक तँ वियाह ले’ तैयार बेटीक कपार फोड़ि देलही. दू टा अपराध- मौगी
पर हाथ उठायब, सेहो दारू पीबि कए. जमानत तँ बिसरिए जो. सजाए बुझैत छही? जँ सजाए
भेलौक, तँ कोन ठेकान सहजहि पाँच साल धरि घर परिवारक कोनो चिन्तो नहि रहतौ. सेहो
तोरा ले ठीके हेतौक. बैसल ठाम खाइत रहिहें.’
कण्णन गप सूनि गोपाल टोनलकैक: ‘तों अनबुमणिकेँ डर देखबै छही. जकरा अपने पीठ पर
नगाड़ा बजैत रहैत छैक, ताहि ऊँटक आगू तों सूप डेङबै छें!’
‘किएक ने!’ अनबुमणिक माय अङना पैसिते कहलकैक ‘आइ धरि गीताकेँ तँ भोर-साँझ डेङबिते
छले, आइ समर्थि बेटिओक कपार फ़ोड़ि उतकिरना केलक!’
‘सएह तँ. हमरालोकनि बुझाकए थाकि गेलियैक. ओ तँ गीते थिक जे एतेक सहैए आ एकरा घरमे
रखने अछि. एकरा कतेक बेर बुझौलिऐक: गीताकेँ नीक-जकाँ राख. एतुका एस.पी. लेडी छैक. जँ
कहिओ गीताक मगज फिरि गेलैक आ ओ थाना-पुलिसमे शिकायत कए देलकौक , तँ फेर अपने बुझिहें.’
कहैत कण्णन चुप भए गेल.
अनबुमणिक माएक अयलाक बाद सब सहटि गेल आ अपन-अपन रास्ता धेलक. भेलैक जे आब
माए-बेटाकेँ जे फुरैक, करओ. मुदा, अनबुमणिक माए सेहो आयल आ फेर अङनासँ बहरा गेल.
4
पछिले बर्खक गप तँ छिऐक, हम दुपहरियामे अस्पतालसँ अबैत रही. गोड़ दसेक माउगिसब
सड़कक कातमे घोदामाली भेल बैसलि जोर-जोरसँ गप करैत छलि. भीड़मे गीताक माए अंजली सेहो
रहैक. हम जखन अंजलीकेँ आँचरसँ नोर पोछैत देखलिऐक, तँ, एतबा तँ बुझबामे आबिए गेल
छल, कोनो बड़का दुर्घटना भेलैए. हमरा जल्दी छल. ताहू पर ओकरा सभक गप सुनबाक हमरा फुरसति नहि छल. आधा घंटाक लंच-ब्रेक, ताहिमे आयब भोजन करब आ आपस जायब.
हम सोझे आगू बढ़ैत डेरा आबि गेल रही. पछाति, बुझलिऐक जे पछिला दिन गीताक देओर,
मुरुगन देहमे आगि लगा मरि गेल रहैक. एहन दुर्घटना पर हमरा कोनो आश्चर्य नहि भेल
छल. तमिलनाडु-पांडिचेरीमे शराबक बिक्रीकेँ एक तरहें सरकारे बढ़ावा दैत छैक. शराबक बिक्री
पर राज्य सरकारक एकाधिकार सेहो छैक. शराबक बिक्री सरकारक आमदनीक एक प्रमुख श्रोत थिक.
सरकार एहि आमदनीक उपयोग राज्यक लेल करैत अछि. तखन शराबक जतेक
बिक्री, सरकारकें ओतेक नफ़ा. फलतः, एहि राज्य सबमें दारू-शराबक सेवनक दुष्प्रभावक
रोग मज़दूर वर्गक बीच एक बड़का सामाजिक समस्या थिक. एहि इलाकामे मद्यसेवनक कारण
आत्महत्याक संख्या आन राज्य सबसँ सेहो बहुत अधिक छैक. मुदा, तेँ कि सरकार विकासक
काज छोड़ि देतैक!
एहि व्यवस्थाक फल ई छैक जे भोरे दस बजे शराबक दोकान खुजबासँ पहिनहि एतय शराबक दोकान सबहक काउन्टरक आगाँ गहाकि सबहक पतिआनी लागि जाइत छैक. हमरा लेल ई नव अनुभव छल. एकदिन हम
एक परिचित, श्रीराम कृष्णमूर्तिकेँ पुछने रहियनि: ‘एतय एतेक लोक प्रतिवर्ष शराबक
दुष्प्रभावसँ मरैत अछि, आ सरकारकेँ कोनो उपाय नहि सुझैत छैक?’ श्रीराम कृष्णमूर्ति
शिक्षक रहथि. ओ समीपहिक गाममे एक मध्य विद्यालयमे पढ़बैत रहथि.
हमर गप्प सूनि कृष्णमूर्ति भभाकए हँसय लागल रहथि आ ओ उत्तरमे तिरुवल्लुवरक एक कुरल (दोहा) पढ़ने रहथि जकर भाव
ई छलैक जे नशाबाज आ तर्क! ई तँ पानिमे डूबल
मनुखकेँ तकबाक लेल हाथमे दीप ल’ कए पानिमे डुबकी लगायब भेल!
हमरा हँसी लागि गेल. हँसी रोकैत हम कहलियनि, ‘से तँ बेस. मुदा, सरकार?’
कृष्णमूर्ति पुनः हँसय लगलाह. कहलनि, ‘दुनूमे कोनो अंतर छैक ? से रहितैक तँ सरकार
शराब बेचिकय विकासमे निवेश करितैक. कहिऔक ने, इनारेमे भाङ घोरल छैक.’ हम बात बूझि गेलियैक.
ताहि बातकेँ बरख दिनसँ बेसी भए गेल रहैक.
5
नन्दिनी गीताक संगहि अस्पतालसँ आपस आयल. डाक्टर टाँका लगाकए घाव सीबि देलकैक.
शुकुर रहैक, माथमे तेहन चोट नहि रहैक. गीताकेँ एक मोन भेलैक सोझे अस्पतालक स्टाफ
क्वार्टरमे चल जाय आ काज खतमे कए घर आपस आबय. मुदा, फेर ओकरा की फुरलैक की ने, ओकरा
भेलैक जे नन्दिनीकेँ अपनहि संग डेरा तँ पहुँचा दियैक. काजमे करबाक देरी तँ पहिनहि भइए गेले.
अङना पहुँचल तँ अङना सुन्न मसान रहैक. अङना सुन्न देखि गीतक पिल्ही चमकलैक. कतय
गेल अनबुमणि? फेर भेलैक, कतहु गेल हएत, जाओ. रहिए कए कोन पहाड़ तोड़ैत. ठीक छैक, पहिने
नन्दिनीकेँ किछु खोआ कए अपनहि हाथें दवाई खोआ दियैक, आ हबर-हबर दुपहरियाक भोजनक
किछु व्यवस्था सेहो कइए ली, तखन भागि कए काज पर जाएब. ओ ओसरा पर चढ़ल तँ घरक केबाड़क दुनू
पट्टा बंद रहैक. केबाड़ बंद देखि एकरा किछु बुझबामे नहि एलैक. भेलैक जे की जानि
केबाड़ भिड़ाकए अनबुमणि कतहु भीतर-बाहर गेल
होअय, वा सुतले होअय. दिन भरि सूतब तँ ओकर सोहागे भाग छियैक. ओ केबाड़ ठेलकैक.
केबाड़ भीतरसँ बन्न रहैक. छन भरिमे गीताक सौंसे देह पसेनासँ भीजि गेलैक. ओ
जोर-जोरसँ अनबुमणिक नाम धए चिकरय लागल. कोनो उत्र नहि. तखन दुनू माए-बेटी केबाड़मे जोरसँ केबाड़मे धक्का देलकैक. मुदा, केबाड़
किएक खुजतैक! गीताक चिकरब सुनि लगपासमे जे केओ रहैक, दौड़ल एलैक. केबाड़ तोड़ल गेल.
सत्ये, ओतुका दृश्यपर ककरो विश्वास नहि भेलैक: अनबुमणि लाश घरक धरनिसँ लटकल रहैक.
निष्प्राण! देखिते गीता ठामहि बैसि गेल.
6
ओहि दिन हम अस्पतालसँ आपस अयलहुँ-ए तँ सौंसे कॉलोनीमे आयालोकनिक बीच
घोल-फचाक्का; गीताक पति फाँसी लगा लेलकैक! बरख भरिक भीतरे दू सहोदर भाईक
आत्महत्या. एक देहमे आगि लागौलक. दोसर फाँसी पर लटकि गेल. दुनू एक रोगक रोगी: तन्नी- शराबक लति।
हमर सुनि मन क्षुब्ध भए गेल. अस्पताल पहुँचि हम अपन सहयोगीलोकनिकेँ पुछलियनि. सब
केओ कहलनि, जे गीताक ओतय जा कए जिज्ञासा करिऐक आ किछु सहायता सेहो.
दुर्घटनाक चारिम दिन हम गीताक ओतय गेलहुँ. गीता मेडिकल कालेज अस्पताल परिसरक
छहरदेवालीसँ किछुए दूर पर रहैत छलि. सुन्न-मसान अङनामे गीता एसगरि बैसलि छलि.
निःशब्द. चेहरा पर कोनो भाव नहि. हमरा अबैत देखि उठि कए ठाढ़ भेलि. नहि जानि ओकर
मनमे की-की होइत रहैक. ओ अनाथ भेल छलि वा मुक्त, कहब कठिन.
बेटी नन्दिनी लगक कोनो छोट प्राइवेट अस्पतालमे हाउसकीपिंग वा नर्सक सहायकमे
काज करैत रहैक. जखन हम ओतय गेल रही, नन्दिनी घरक भीतर किछु करैत छलि. दू दिनक बाद ओकर विवाह
होइतैक. मुदा, आब एहन परिस्थितिमे कहिया विवाह हेतैक, कहब कठिन.
गीताक बेटा दू भाई-बहिनिमे छोट. बेटी आइ ने काल्हि अपन घर जइतैक. गीता बेटा पर आस लगौने
छलि. गीता बेटाकेँ हम अङनामे नहि देखलिऐक. हम दू मिनट बीच अङनामे ठाढ़ भेलहुँ. एहन विकट
परिस्थितिमे हमरा मुँहसँ हठे किछु बहराइत नहि अछि. की कहितिऐक? जाहि परिस्थितिमे
गीता फँसल छलि, सांत्वनाक कोन स्वर स्वाभाविक लगितैक. पतिक हाथें निरंतर प्रताड़ना
सहैत नारिक हेतु पतिक मृत्यु ओकरा हेतु मुक्ति थिकैक वा वज्रपात. वा दुनू
? हम किछु निश्चित नहि कहि सकैत छी.
हमरा जे किछु उचित बूझि पड़ल छल, किछु टाका एक लिफाफामे दए लए गेल रही. जेबीसँ
लिफ़ाफ़ निकालि हम गीताक हाथमे दए देलिऐक आ सोझे पर डेरा आपस आबि गेलहुँ.
करीब अगिला पन्द्रह दिन गीता काज पर
नहि आयल. मुदा, काज पर अयबे करत हमरा ताहिमे कोनो शंका नहि छल. नोकरीक बिना परिवारक गुजर कोना
होइतैक. अनबुमणिक मृत्युक सोलहम दिनसँ ओ काज पर आपस आबय लागल.
हमरालोकनिकेँ हरदम होअय, गीताक बेटी भले विवाह योग्य होइक, गीताक अपनो वयस तँ
चालीससँ बेसी नहिए हेतैक. तखनि जँ ओकरहु एकटा नीक पुरुख भेटि जइतैक, तँ.... तेँ, होअय कोन
ठेकान गीता कहियो आबि किछु नव गप हमर पत्नीकेँ कहतनि. मुदा, आगू की होइतैक के कहत! मुदा, गीता कहिओ अपना दए हमरा सबहक सोझाँ किछु
चर्चा नहि केलक. अपन अनुभव, आ समाजक मनुखक आँखि खोलि दैत छैक. ओकरो जीवन कटु अनुभव छलैके।
अनबुमणिक मृत्युक करीब छौ महिनाक भितरे एक दिन दुपहरियामे घंटी बाजल. हमर पत्नी
केबाड़ खोललखिन. गीता छलि. ई गीताक अयबाक समय नहि रहैक. आश्चर्य भेलनि. देखलखिन गीताक हाथमे एकटा स्टीलक
थारी रहैक. थारीमे एकटा नारिकेर, पाँच गोट पानक पात, एक गद्दी सिनुर आ ऊपर एकटा
कार्ड. चेहरा पर क्षीण मुसुकी. कोनो नीक समाचार आशासँ हिनको चेहरा चमकलनि. ई आगू बढ़ि गीताक लग गेलखिन, आब भीतर आबय कहलखिन. गीता ओतहि ठाढ़ि रहल। ओकर चेहरा हर्ष आ आश्वस्तिक मुसुकी पसरि गेलैक. कहलकनि, लड़काबलाकेँ बड्ड अगुताई रहैक. कहलकैए, नन्दिनीकेँ
नर्सिंगमे पढ़बाक लेल कालेजमे जल्दिए नाम लिखौतैक. अगिला पूर्णिमा दिन कल्याणम् (विवाह)
छैक. अहाँ दुनू गोटे अयबैक अवश्य. हमर पत्नी कार्ड राखि लेलखिन. एतबा तँ बुझबामे
आबिए गेलनि गीता कोकनल सोङर टुटनहु गीताक घर ठाढ़े छैक आ सबकेँ सम्हारि लेलकए. पछाति अपना हेतु ओ जहिया जे सोचय.
कहलकनि, एखन एही कॉलनीमे आओर दू-तीन घर कार्ड देबाक अछि। आ ओ धड़धड़ाइते तेसर महलसँ नीचा उतरैत आपस चलि गेलि.