तोड़ डाले मैंने हर इक शीशे,
कर दिया आइनों का काम तमाम.
बचा गया फिर भी,
तालाब, नदियों और कुंओं में पानी,
सूरत मेरी देख कर,
मांगने लगा मुझ से हिसाब !
कीर्तिनाथक आत्मालाप, आत्ममंथनक क्षणमें हमर मनक दर्पण थिक. 'Kirtinathak aatmalap' mirrors my mind in moments of reflection.
तोड़ डाले मैंने हर इक शीशे,
कर दिया आइनों का काम तमाम.
बचा गया फिर भी,
तालाब, नदियों और कुंओं में पानी,
सूरत मेरी देख कर,
मांगने लगा मुझ से हिसाब !
"चित्त जेथा भयशून्य"क अनुवाद
जतय चित्तमे भय नहि कोनो,
तानल सोझाँ माथ;
बुद्धि-विवेक पर रोध ने कोनो,
ने बांटल जग, ने संकीर्ण देबाल;
वाणी जतय उठय सत्यसँ प्रेरित,
दक्षता हेतुक, अथक उठय हमर नित हाथ;
जतय जड़ स्वभावक कारण,
निर्मल स्वच्छ तर्क केर धारा,
नहि मरुभूमहिमे बहि जाय;
अहिंक प्रेरणेँ, हे नाथ,
व्यापक हमर विचार आ कृतिसँ,
एहने स्वतंत्र स्वर्गमे जागय,
उठय, हमर ई देश।
अनुवाद: कीर्तिनाथ झा
When you don't fear the fear, you're the winner
जेहने विविध माटि अछि अप्पन
तेहने विविध अछि लोक,
भाषा मधुर, अनेको
बोली
माटिओक रंग अनेक।
शोणित सभक एक रंग जहिना
श्वासो एके थीक,
आगि-पानि विभेद ने मानय
संशय तखन कथीक?
सूर्य-चान बसै छथि ऊपर
एके ताप आ छाया,
तखन मनुख जे भेद कराबय
बेचय स्वार्थ, ओ
माया।
गाछ-वृक्ष नहि भेद करै अछि,
मेघ ने बाँटय पानि
मनुखक तखन बाँट-बखराकेँ,
लेबै कोना मानि!
मूर्ख रहौ, कपड़ा
नहि तन पर,
धन नहि दैछ विवेक
आगि-पानि आ झूठ-साँच केर
लक्षण होइछ अनेक।

Courtsey: The Statesman
पुल नया
है, जरा संभल कर चलिये।
सरकार अपनी है, खुल कर कहिये ।
रेत और मिट्टी से बना है पुल, फौलाद नहीं है!
पुल गिरते हैं, पल भर में सरकारें भी गिरती हैं,
आप की है सरकार, आप इसके मोहताज नहीं हैं।
नहीं बनते हैं अस्पताल तो बोलिये,
चले बेवजह बुलडोजर तो रोकिये।
बंद है आवाज, तो साफ कीजिये गला,
सीने को बनाइये फौलादी
इस में ही है सबका भला।
सब किछु छल अनुकूल
आ शांत छल बसात,
दूर सहस्र योजनाक पार
ट्रम्पकेँ उठलनि खौंत
आ कुड़ियाय लगलनि कपार,
आँखिमे असमान प्रजातंत्रक गेजड़
आ टेटर सन-सन धनकुबेरक अगुआई;
सत्य देखथिन कोना कनाह आँखिए!
तथापि, विदा भेलाह सरिआबय संसार,
लोकतंत्र (!)क जड़िमे देबय पानि,
जड़िसँ उखाड़ि, समूल नष्ट कए
मानवाधिकारहिकेँ!
बिसरि गेलनि कोरिया
बिसरि गेलनि वियतनाम,
फुसिएक बल पर तँ
कयने रहथि, इराकहुक सत्यानाश!
समर्थ थिक अमेरिका,
समर्थ थिक रूस,
भेलैक जँ युद्ध-विराम
तँ खजाना हेतनि झूस।
तेँ कोनहु पक्षसँ
पमरियाक तेसर-जकाँ
अड़ा देताह टाङ,
भले हो बांग्लादेशमे नरसंहार
वा बलूचिस्तानमे
पाकिस्तानी बमबारीक अभियान!
लगौक आगि, वा धधकौक देश,
जाओ जनता जहन्नुममे
वा हुनकर पार्टीक सेनानी सब
करौक संसदक बलात्कार,
वा एक दिस चलबैत रहथु
इरानमे नरसंहारक अभियान
लैत रहथु
ओतुका सभ्यताकेँ भूमिसात्
करबाक संकल्प,
मुदा, ओ करताह जनतंत्रहिक गुणगान।
दोसर दिस छी हमरालोकनि:
जखन संप्रभुता-संपन्न राष्ट्रक
भ' रहल छैक सामूहिक बलात्कार
तखन कोन ठेकान के हएत
मगरमच्छक अगिला शिकार!
मुदा, रीढ़मे चाहिऐक बल
आ कंठसँ फुटौक तँ बेकार!
कहथुन तँ कोनो मुहपुरुख:
खेल तँ थिकैक तेल केर,
तेँ, बन्न करह ई खेल!
किएक तँ
बहरा रहल अछि,
हमरालोकनिक तेल!!
नठि गेल नाटो, नहि आयल चीन
ने फ्रांस, बिलेँत, ऑस्ट्रेलिया आ जापान
मुदा, आब मोदी करताह कोन प्रतिकार?
कारण, चित हो वा पट
जीतत डाॅलर, अमेरिका आ ट्रम्पे सरकार!
कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म लेख मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...