कोकनल सोङर
परसू नन्दिनीक विवाह हेबाक होइतैक, आ आइ भोरे-भोर बाप कपार फ़ोड़ि देलकैक.
निशांबाज मनुख; बेटीकेँ जलखै देबय
लेल कहलकैक. खगल घर. यावत् बेटी किछु इंतजाम कए खयबाक किछु आनि कए सोझाँ रखितैक,
तावत् बाप-अनबुमणि-क तामस कपार पर चढ़ि गेलैक. तामस तँ सदिखन ओकर नाके पर रहैत
छलैक. चिकरय लगलैक, ‘एक मुट्ठी अन्न सेहो जल्दी आनि कए दैत से पार नहि लगैत छैक
एकरा सबकेँ. जेहने माए तेहने बेटी.’
बेटी कहलकैक, ‘किछु बनेबैक. सेहो घरमे किछु रहतैक तखन ने. तोरा तँ घरसँ
बहरयना हप्ता भए गेलह.’
बेटीक गप्प अनबुमणिकेँ लेसि देलकैक. पानिक पाइप सोझाँमे छलैक. ओ आव देखलक ने ताव,
पाइप उठौलक आ सोहाइ डाङ नन्दिनीक कपार पर दए बैसलैक. बेटी किकिहारि करैत दुनू
हाथेँ माथ पकड़ि ठामहि बीच अङनामे बैसि गेलैक. गीता दौड़िते दोसर कोठलीसँ बहरायल तँ नन्दिनी
माथसँ छर-छर शोणित बहैत देखलकैक. पहिने ओ जेना-तेना फूटल कपारसँ शोणित बहबाक
द्वारा ताकय लागल. मुदा, शोणितक पमार ओकरा बुतें सम्हरैक तखन ने. ओकरा अनबुमणिकेँ किछु कहब बेकार लगलैक; मनुखकेँ
ने लोक किछु कहतैक. ओकरा भेलैक, एहन चण्डालक कोन काज!! कतहु भागि जाइत, चल जाइत,
मरि जाइत तँ, धियापुताक एहन हालत नहि होइतैक, हमरा समाजक सोझाँ एहन हँसारथ नहि
होइत. ई क्षणिक विचार गीताक मनमे जहिना अयलैक, तहिना उड़ि गेलैक. नन्दिनीकेँ
तुरत अस्पताल ल’ जायब ओकरा सोझाँ रहैक.ओ लत्ते-पत्ते नन्दिनीकेँ ल’ कए सड़क पर आयल,
आ जे कोनो ऑटो सामने भेटलैक ओहिमे बैसि अस्पताल विदा भए गेल.
हम भोरहि अस्पताल पहुँचले रही. गाड़ी पार्क कए अस्पतालक पोर्टिकोमे अयलहुँ, तँ
गीताकेँ धड़फड़ाइत अस्पतालक भीतर जाइत देखि आश्चर्य भेल. हम आगू बढ़लहुँ. हमरा देखिते
गीता थकमका कए जतहि छल, ठाढ़ि भए गेलि. मूड़ी नीचा झुकल, नोराएल आँखि, आ अस्तव्यस्त
केश.
हम यावत् किछु पुछितिऐक, तावत् हमर नजरि
अस्पतालक द्वारिक भीतर बेंच पर बैसलि लड़की पर गेल. गीताक बेटी नन्दिनी रहैक. करीब
बरख बीसेक वयस, पिंडश्याम वर्ण, फूटल कपार. कपारक घाओसँ बहैत शोणित गाल धरि टघरि
आयल रहैक आ शोणितायल केशक किछु भाग गाल पर सटि गेल रहैक. हम सोझे भीतरे दिस
बढ़लहुँ. लड़कीक एहल हाल देखि हमरा किछु पुछबाक आवश्यकता नहि छल. गीता अपने
अपरतिभ-जकाँ लागल. दू दिन बाद नन्दिनीक विवाह हेबाक रहैक से हमरा बूझल छल. एहन
परिस्थितिमे ई घटना गीताक हेतु केहन छल हेतैक, से कल्पना करब कठिन नहि. चिकित्साक
आवश्यकता रहैक, देखिए लेले रहियैक. टाँका तँ लगबहि पड़ितैक. हम आगू भेलहुँ. दुनू
माय-बेटी सेहो हमर पाछू-पाछू विदा भेल. सीनियर रेजिडेंटक कमरा लग आबि हम बाहरेसँ
ड्यूटी- डाक्टरकेँ बाहर बजओलियनि आ जे किछु निर्देश देबाक छल, से दैत आगाँ बढ़ि
गेलहुँ.
करीब दस वर्ष पहिने जखन हमरालोकनि पांडिचेरी आयल रही, तहियेसँ गीता हमरासबहक काज करब शुरू केने छल. ने ओकरा
हिन्दी-अंग्रेजी अबैत रहैक, ने हमरालोकनिकेँ तमिलक कोनो ज्ञान छल. देश भरिक नौकरी
करैत ई अनुभव हमरा सबहक लेल नव नहि छल. काज आ दरमाहाक अतिरिक्त ने ओकरा किछु
पुछबाक रहैक, ने हमरालोकनिकेँ आन कथूमे रुचि छल. ओतय कतेक गोटे घरमे काज देबासँ
पहिने खबासिनीक संग अनेक शंका-समाधान करथिन. जाति आ छूआछूतक विचार सेहो. मन पड़ल
छल, नेपालहुमे हमर एकटा विद्यार्थी कहने छलि, सर, अहाँक घरमे सुनीता काज करैत अछि,
ने. हम सब ओकरा अपना घरमे नहि ने राखि सकबैक.
हम गप बूझि गेल रहिऐक; सुनीताक पानि नहि चलैत रहैक. माने, ओ अछोप भेलि. ई समस्या
दक्षिण भारतमे नहि छैक, से नहि. मुदा,
हमरालोकनिकेँ तकर चिंता नहि. आन जे बूझथु, बूझथु.
गीता स्वस्थ छलि. नीक-जकाँ काज करितहि छलि. अनेरे छुट्टी, आ बिनु पूर्व सूचनाक काज
नागा कए परेशान नहि करैत छलि. ओकरा रहैत घरसँ एकटा सूई धरि नहि हेड़ायल. खबासिनिक
हेतु एहिसँ कोन बेसी गुण चाहिऐक. जँ, लाख टाका मासिक दरमाहा पओनिहार सरकारी अफसर आ
कर्मचारीसबकेँ एतबा गुण होइतैक, तँ, देशक एहन हाल रहितैक. मुदा, बिनु पढ़ल गीताकेँ कोन
सरकारी नोकरी भेटितैक नहि! तखन अफसर सबहक घरमे झाडू-पोछा-बरतन-बासन करैत दस साल
धरि निमाहि लेलक ई कोनो कम भेलैक. गीताक लेल इएह नौकरी पंथक पाकड़ि रहैक.
2
गीताक घरबला छलैक स्वस्थ-बलिष्ठ युवक. मुदा, रहैक निकम्मा. ओतबे रहितैक तँ
बड्ड बेस. मुदा, ओ मरतरिया आ पियाक सेहो छल. तें, गीता बतर एसगरे कमाकए घर चलबैत छलि.
कोरोना कालमे मनरेगामे मटिकट्टीओ केलक. तहिया अनबुमणि सेहो कखनो काल कने-मने काज
केलकैक. मुदा, ओकरा काज करबाक हिस्सक नहि रहैक. दिन-दू दिन काज पर गेल आ थस खा कए
फेर घरहिमे पड़ल-पड़ल दिन बिता दैक.
गीता जाहि दिन मटिकट्टीमे जाय ओ अपना घरक भानस-भात अहलभोरे निमाहि, हमरा ओतय आबय आ
काज ख़तम कए आठ बजेसँ पहिनहि आपस चल जाय. कहुना ओ ‘काल’-सन काल कटि गेलैक. आखिरी
सबहक प्राण तँ बचलैक.
अपन घरमे गीताक संग की होइत छलैक, ने ओ बजैत छल आ हम सब कहिओ पुछलियैक. मुदा, जहिया
कहिओ गीता देह-दुखयबाक, माथ-बाँहि-पीठ दुखयबाक गोटी मङैत छलनि, आ से हप्तामे एक-दू
बेर होइते छलैक, हमरालोकनिकेँ ओकर घरमे किछु खटपटक अनुमान भइए जाइत छल. एक-दू बेर हमरालोकनि
गीताक माथ पर टेटर सेहो देखने रहियैक. मुदा, ओकर खोदबेध कियैक करबैक. घरक कलह आ
मारिसँ हेतु गीता बहरयबाक कोन बाट आ युक्ति तकैत छल, वा नहि से ओ अपनहि जानय. तखन एतबा बुझब कठिन नहि जे माउगिक
हेतु पतिसँ मारि खाएबसँ पैघ कोनो लाज नहि. ईहो बलात्कारसँ कम नहि. शरीर आ मन पर
चोट तँ दुनूमे पहुँचिते छैक. पतिक हाथेँ मारिसँ धियापुता आ समाजक सोझाँ सेहो नारि अपमानित
होइछ.
3
गीता ओम्हर बेटीकेँ ल’ कए अस्पताल विदा भेल, एम्हर अनबुमणिक दोस्त-मित्र सब
अङनामे आबि धमकलैक. घरे पर घर, सब कान पथनहि रहैत छलैक. संगी-साथी ओकरा हुथय लगलैक:
‘तोरा अक्किल छौक! परसू एहि लड़िकी विवाह होइतैक, आ आइ तों कपार फ़ोड़ि देलही!!’
दोसर कहलकैक: ‘आब जे भेलैक से भेलैक. कम-सँ-कम अस्पताल तँ अपना संगे ल’ जैतें.’
‘बड्ड बढ़िया! तों तँ तेहन शिक्षा दैत छहिक जे अनबुमणि सोझे हवालातहि चल जाइत. हमरा
संगे जे भेल छल, से कि हमरा बिसरल अछि: जहाँ डाक्टर पुलिस केस बनबैत छैक,
इंस्पेक्टर सोझे आओत आ बस ! पुलिस तँ टके लगौने रहैए!’ कहि कए केओ तेसर चुप भए
गेल.
हवालातक नाम सुनिते अनबुमणिक कान ठाढ़ भए गेलैक. हवालात ओकरा रहल-खेहल छलैके. मुदा,
केओ आन डर देखौतैक! ओकरा आनि लागि गेलैक. सोचलक, बेटी हमर आ ई सब हमरे टिटकारैए! ओ
सोझे उठि कए ठाढ़ भए गेल, आ कहनिहारक गरदनि पर हाथ देलकैक आ कहलकैक: ‘निकल हमर
अङनासँ! नहि तँ कोनो दशा बाँकी नहि रखबौ!! परिवार हमर आ हमरे बिटगरहा पढ़बैए’ कहैत,
अनबुमणि ओकरा नौ ढाकी फज्झति कए देलकैक.
अनबुमणिक दोस्त सबमे ओकरे समाजक लोक रहैक. मुदा, सब ने ओकरे सन नहि छल आ ने सब
ओकरासँ डेराइते रहैक. कण्णन टेलीफ़ोन विभागमे लाइन-मैन छल. दुनूक अङनासँ सटले रहैक.
ओ अनबुमणिकेँ पकड़ि कए कात कए देलकैक आ कहलकैक: ‘तों बड़का पहलवान छें. मानल. मुदा,
तोरा गोपाल कोनो बेजाय कहलकौ-ए. आब नीक-जकाँ सुन. आ इहो सुन जे जखन सब बात कलकुशल
भए सुनबिही तँ पैन्टहिमे लग्घी भ’ जेतहु.’
कण्णनक गप सुनि अनबुमणि साकांछ भेल. अनबुमणिकेँ साकांछ देखि, कण्णन कहब शुरू
केलकैक: ‘ एक तँ बेटी आ दोसर दू दिन बाद ओकर विवाह हेबाक छैक. तों तकर कपार फोड़ि देलही. दू टा अपराध- मौगी
पर हाथ उठायब, सेहो दारू पीबि कए. जमानत तँ बिसरिए जो. सजाए बुझैत छही? जँ सजाए
भेलौक, तँ कोन ठेकान सहजहि पाँच साल धरि घर परिवारक कोनो चिन्तो नहि रहतौ. बर बढ़िया. सेहो
तोरा ले ठीके हेतौक. बैसल ठाम खाइत रहिहें.’
कण्णन गप सूनि गोपाल टोनलकैक: ‘तों अनबुमणिकेँ डर देखबै छही. जकरा अपने पीठ पर
नगाड़ा बजैत रहैत छैक, ताहि ऊँटक आगू तों सूप डेङबै छें!’
ई सुनि आन सब हँसय लगलैक. तखने अनबुमणिक माय अङना पहुँचल.
‘किएक ने!’ माय अङना पैसिते देबाड़य लगलैक ‘आइ धरि गीताकेँ तँ भोर-साँझ डेङबिते
छले, आइ समर्थि बेटिओक कपार फ़ोड़ि कए बड़का उतकिरना केलक!’
‘सएह तँ. हमरालोकनि बुझाकए थाकि गेलियैक. ओ तँ गीते थिक जे एतेक सहैए आ एकरा घरमे
रखने अछि. एकरा कतेक बेर बुझौलिऐक: गीताकेँ नीक-जकाँ राख. एतुका एस.पी. लेडी छैक. जँ
कहिओ गीताक मगज फिरि गेलैक आ ओ थाना-पुलिसमे शिकायत कए देलकौक , तँ फेर अपने बुझिहें.’
कहैत कण्णन चुप भए गेल.
अनबुमणिक माएक अयलाक बाद पड़ोसिया सब सहटैत अपन-अपन रास्ता धेलक. भेलैक जे आब माए-बेटाकेँ जे फुरैक, करओ. मुदा, अनबुमणिक माए सेहो आयल. ओकरा लेल ई रङताल कोनो नव नहि रहैक. ओकरो अपन फूट आश्रम रहैक, काज रहैक. ओ ओतय बैसि एहि बेटाकें ज्ञानक गप दितैक ताहिसँ कोनो लाभ होइतैक तखन ने. तें, ओहो जहिना आयल छल, माथ-कपार पिटलक आ जहिना आयल छल फेर अङनासँ बहरा गेलि.
4
पछिले वर्खक गप तँ छिऐक, हम दुपहरियामे अस्पतालसँ अबैत रही. गोड़ दसेक माउगिसब
सड़कक कातमे घोदामाली भेल बैसलि जोर-जोरसँ गप करैत छलि. भीड़मे गीताक माए अंजली सेहो
रहैक. हम जखन अंजलीकेँ आँचरसँ नोर पोछैत देखलिऐक, तँ, एतबा तँ बुझबामे आबिए गेल
छल, कोनो बड़का दुर्घटना भेलैए. हमरा जल्दी छल. ताहू पर ओकरा सभक गप सुनबाक हमरा
कोन फुरसति. हमरा आधा घंटाक लंच-ब्रेक रहैत छल, ताहिमे आयब भोजन करब आ आपस जायब.
हम सोझे आगू बढ़ैत डेरा आबि गेल रही. पछाति, बुझलिऐक जे पछिला दिन गीताक देओर,
मुरुगन देहमे आगि लगा मरि गेल रहैक. एहन दुर्घटना पर हमरा कोनो आश्चर्य नहि भेल
छल. तमिलनाडु-पांडिचेरीमे शराबक बिक्रीकें एक तरहें बढ़ावा दैत छैक. शराबक बिक्री पर
सरकार राज्य सरकारक एकाधिकार सेहो छैक. ई सरकारक आमदनीक एक प्रमुख श्रोत थिक.
सरकार एहि आमदनीक उपयोग राज्यक आधारभूत संरचनाक विकासमे करैत अछि. तखन शराबक जतेक
बिक्री, सरकारकें ओतेक नफ़ा. फलतः, एहि राज्य सबमें दारू-शराबक सेवनक दुष्प्रभावक
रोग मज़दूर वर्गक बीच एक बड़का सामाजिक समस्या थिक. एहि इलाकामे मद्यसेवनक कारण
आत्महत्या संख्या आन राज्य सबसँ सेहो बहुत बेसी छैक. मुदा, तें कि सरकार विकासक
काज छोड़ि देतैक!
फल ई जे भोरे दस बजे शराबक दोकान खुजबासँ पहिनहि एतय शराबक दोकान सबहक बिक्री
काउन्टरक आगाँ गहाकि सबहक पतिआनी लागि जाइत छैक. हमरा लेल ई नव अनुभव छल. एकदिन हम
एक परिचित, श्रीराम कृष्णमूर्तिकेँ पुछने रहियनि: ‘एतय एतेक लोक प्रतिवर्ष शराबक
दुष्प्रभावसँ मरैत अछि, आ सरकारकेँ कोनो उपाय नहि सुझैत छैक?’ श्रीराम कृष्णमूर्ति
शिक्षक रहथि. ओ समीपहिक गाममे एक मध्य विद्यालयमे पढ़बैत रहथि.
हमर गप्प सूनि कृष्णमूर्ति भभाकए हँसय लागल रहथि आ ओ उत्तरमे तिरुवल्लुवरक एक कुरल (दोहा) पढ़ने रहथि जकर भाव
ई जे नशाबाज आ तर्क! ई तँ हाथमे दीप ल’ कए
पानिमे डूबि, डूबल मनुखकेँ ताकब भेल!
हम कहलियनि, ‘से तँ बेस. मुदा, सरकार?’
कृष्णमूर्ति पुनः हँसय लगलाह. कहलनि, ‘दुनूमे कोनो अंतर छैक ? से रहितैक तँ सरकार
शराब बेचिकय विकासमे निवेश करितैक. कहिऔक ने, इनारेमे भाङ घोरल छैक.’ हम बात बूझि गेलियैक.
ताहि बातकेँ बरख दिनसँ बेसी भए गेल रहैक.
5
नन्दिनी गीताक संगहि अस्पतालसँ आपस आयल. डाक्टर टाँका लगाकए घाव सीबि देलकैक.
शुकुर रहैक, माथमे तेहन चोट नहि रहैक. गीताकेँ एक मोन भेलैक सोझे अस्पतालक स्टाफ
क्वार्टरमे चल जाय आ काज खतमे कए घर आपस आबय. मुदा, फेर ओकरा की फुरलैक की ने, ओकरा
भेलैक जे नन्दिनीकेँ अपनहि संग डेरा तँ पहुँचा अबिऐक. काजमे करबाक देरी तँ पहिनहि भइए गेले.
अङना पहुँचल तँ अङना सुन्न मसान रहैक. अङना सुन्न देखि एकर पिल्ही चमकलैक. कतय
गेल अनबुमणि? फेर भेलैक, कतहु गेल हएत, जाओ. रहिए कए कोन पहाड़ तोड़ैत. ठीक छैक, पहिने
नन्दिनीकेँ किछु खोआ कए अपनहि हाथें दवाई खोआ दियैक, आ हबर-हबर दुपहरियाक भोजनक
किछु व्यवस्था कए ली तखन भागि कए काज पर जाएब. ओ अपने भूखल छलि ताहि पर ओकरा धेयानो नहिं गेलैक. ओ सोझे ओसरा पर चढ़ल. तँ देखलकैक घरक केबाड़क दुनू
पट्टा बंद रहैक. केबाड़ बंद देखि एकरा किछु बुझबामे नहि एलैक. भेलैक जे की जानि
केबाड़ भिड़ाकए अनबुमणि कतहु भीतर-बाहर गेल
होअय, वा सुतले होअय. दिन भरि सूतब तँ ओकर सोहागे भाग छियैक. ओ केबाड़ ठेलकैक.
केबाड़ भीतरसँ बन्न रहैक. छन भरिमे गीताक सौंसे देह पसेनासँ भीजि गेलैक. ओ
जोर-जोरसँ चिकरय लागल आ दुनू माए-बेटी केबाड़मे जोरसँ केबाड़मे धक्का देलकैक. मुदा, केबाड़
किएक खुजतैक! गीताक चिकरब सुनि लगपासमे जे रहैक, दौड़ल एलैक. केबाड़ तोड़ल गेल.
सत्ये, ओतुका दृश्यपर ककरो विश्वास नहि भेलैक: अनबुमणि लाश घरक धरनिसँ लटकल रहैक.
निष्प्राण! देखिते गीता ठामहि बैसि गेल.
6
ओहि दिन हम अस्पतालसँ आपस अयलहुँ-ए तँ सौंसे कॉलोनीमे आयालोकनिक बीच
घोल-फचक्का, एके टा गप; गीताक पति फाँसी लगा लेलकैक! बरख भरिक भीतरे दू सहोदर भाईक
आत्महत्या. एक दारू पीबि देहमे आगि लगौलक. दोसर फाँसी पर लटकि गेल.
हमर सुनि मन क्षुब्ध भए गेल. अस्पताल पहुँचि हम अपन सहयोगीलोकनिकेँ पुछलियनि. सब
केओ कहलनि, जे गीताक ओतय जा कए जिज्ञासा करिऐक आ किछु सहायता सेहो. मुदा आइ तँ नहि.
दुर्घटनाक चारिम दिन हम गीताक ओतय गेलहुँ. गीता मेडिकल कालेज अस्पताल परिसरक
छहरदेवालीसँ किछुए दूर पर रहैत छलि. सुन्न-मसान अंगनामे गीता एसगरि बैसलि छलि.
निःशब्द. चेहरा पर कोनो भाव नहि. हमरा अबैत देखि उठि कए ठाढ़ भेल. नहि जानि ओकर
मनमे की-की होइत रहैक. ओ अनाथ भेल छलि वा मुक्त, कहब कठिन.
बेटी नन्दिनी लगक कोनो छोट प्राइवेट अस्पतालमे हाउसकीपिंग वा नर्सक सहायकमे
काज करैत रहैक. जखन हम ओतय गेल रही, नन्दिनी घरक भीतर किछु करैत छलि. दू दिनक बाद ओकर विवाह
होइतैक. मुदा, आब कहिया विवाह हेतैक, एहन परिस्थितिमे कहब कठिन.
गीताक बेटा दू गोट भाई बहिनिमे छोट. बेटी अपन घर जइतैक. गीता बेटा पर आस लगौने
छलि. आइ ओकरा अङनामे देखलिऐक नहि. हम दू मिनट बीच अङनामे ठाढ़ भेलहुँ. एहन विकट
परिस्थितिमे हमरा मुँहसँ हठे किछु बहराइत नहि अछि. की कहितिऐक? जाहि परिस्थितिमे
गीता फँसल छलि, सांत्वनाक कोन स्वर स्वाभाविक लगितैक. पतिक हाथें निरंतर प्रताड़ना
सहैत नारिक हेतु पतिक जीवनक पटाक्षेप मुक्ति थिकैक वा वज्रपात. वा दुनू ? हम किछु
निश्चित नहि कहि सकैत छी.
हमरा जे किछु उचित बूझि पड़ल छल, किछु टाका एक लिफाफामे दए लए गेल रही. जेबीसँ
लिफ़ाफ़ निकालि हम गीताक हाथमे दए देलिऐक आ सोझे पर डेरा आपस आबि गेलहुँ.
करीब अगिला पन्द्रह दिन गीता काज पर
नहि आयल. मुदा, काज पर एबे करत ताहिमे कोनो शंका नहि छल. नोकरीक बिना गुजर कोना
होइतैक. अनबुमणिक मृत्युक सोलहम दिनसँ ओ काज पर आपस आबय लागल.
हमरालोकनिकेँ हरदम होअय, गीताक बेटी भले विवाह योग्य होइक, गीताक अपन वयस तँ
चालीससँ बेसी नहिए हेतैक. जँ ओकरा एकटा नीक पुरुख भेटि जइतैक, तँ.... तें, होअय
कोण ठेकान गीता कहियो आबि किछु नव गप हमर पत्नीकें कहतनि. मुदा, गीता कहिओ अपना दए
किछु चर्चा नहि केलक. अपन अनुभव, आ समाजक परिस्थिति मनुखक आँखि खोलि दैत छैक.
माउगिक तँ कथे कोन. आइओ समाज नारि पर बड्ड निर्दय अछि.
अनबुमणिक मृत्युक करीब छौ महिनाक भितरे एक दिन दुपहरियामे घंटी बाजल. हमर पत्नी
केबाड़ खोललखिन. गीता छलि. ई गीताक अयबाक समय नहि रहैक. देखलखिन, गीताक हाथमे एकटा स्टीलक
थारी रहैक. थारीमे एकटा नारिकेर, पाँच गोट पानक पात, एक गद्दी सिनुर आ ऊपर एकटा
कार्ड. चेहरा पर क्षीण मुसुकी. हिनको चेहरा चमकलनि. आगू बढ़ि लग गेलखिन. गीताक नजरि
नीचा झुकि गेलैक. कहलकनि, लड़काबलाकेँ बड्ड अगुताई रहैक. कहलकैक, नन्दिनीकें
नर्सिंगमे पढ़बाक लेल नाम लिखौतैक. अगिला पूर्णिमा दिन कल्याणम् (विवाह) छैक. अहाँ
दुनू गोटे अयबैक अवश्य. हमर पत्नी कार्ड राखि लेलखिन.
गीता जहिना आइलि छलि, धड़धड़ाइते सीढ़ीसँ तेसर महलसँ नीचा उतरैत आपस भए चलि गेलि.


