Saturday, September 26, 2026

न्यूयॉर्क सिटी, अगस्त २०२४

 

न्यूयॉर्क सिटी, अगस्त २०२४

०९ अगस्त २०२४. अमेरिकन एयरलाइन्स बोइंग ७८७ ड्रीमलाइनर जखन न्यूयॉर्कक जे एफ के एअरपोर्ट पर उतरल रहैक, तँ भोरुका करीब साढ़े छौ बाजल रहैक. हवाई जहाजसँ इमीग्रेशन चेक इत्यादि करैत-करैत यावत् बाहर निकलबा लेल तैयार भेलहुँ, हमर बालक, अमिय, क्लीवलैंडक फ्लाइटसँ ओतय उतरि चुकल रहथि. हमरा सबकेँ प्रतीक्षा नहि करय पड़ल आ ओ हमरा सभक एअरपोर्टसँ बहरयबाक पहिनहि एअरपोर्टक टर्मिनलहिमे आबि गेलाह.
बाहर अयलहुँ तँ भोरुका रौद पसरि गेल रहैक, मुदा, एअरपोर्ट टर्मिनल एकदम सूनसान. अमिय, दिल्ली-बंगलोरहि-जकाँ उबर टैक्सी मंगओलनि आ हमरालोकनि होटल लेल विदा भेलहुँ. ड्राईवर, कमे उम्र महिला, रूसी नागरिक रहथि.

खाली सड़क. तैओ होटल पहुँचैत करीब एक घंटाक लागि गेल.

हमरा लोकनिक होटल मैनहैट्टनमे छल. मैनहैट्टन न्यूयॉर्क महानगरक हृदयस्थल थिक; ई न्यूयॉर्क शहरक प्रशासनिक केन्द्र तँ थिके, महानगरक ई भाग संसार भरिक आर्थिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन, एवं मीडिया व्यवसायक केन्द्र सेहो मानल जाइछ. मैनहैट्टनमे डेरा देब बड़का सुविधा लागल. एहि इलाकाक आसपास अनेक विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल छैक. ततबे नहि, भोरुका समयमे मैनहैट्टन इलाकाक खाली सड़कपर पैदल घुमबा-फिरब, एतुका लोकप्रिय एवं ऐतिहासिक स्थलकेँबाहरसँ देखब सेहो एक नवे अनुभव छल.        

एहि बेरुक होटल मैनहैट्टनक केन्द्रमे छल. होटलक - क्लब क्वार्टर मैनहैट्टन - रूमसँ वन वर्ल्ड सेंटर एवं एवं मेमोरियल पूल आँखिक सोझाँ तँ छैके, ई होटल ‘ग्राउंड जीरो’क समीपस्थ होटल थिक. दोसर दिस, विश्वप्रसिद्ध वाल-स्ट्रीट. ततबे लग जे होटलसँ निकलू  आ पाँच मिनट टहलि, देखि कए आबि जाउ.
एही सुविधाक कारण, अगिला दू दिनमे हमरालोकनि टाइम्स स्क्वायर, वन वर्ल्ड सेंटर टावर, सेंट्रल पार्क, लिबर्टी आइलैंड, आ एलिस आइलैंड इत्यादि घुमलहुँ.

                                                                  वन वर्ल्ड सेंटर टावर

वन वर्ल्ड सेंटर टावर, मेमोरियल पूल एवं संग्रहालय
न्यूयॉर्क शहरमे ११ सितम्बर २००१ (९/११)क वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमला आतंकवादक इतिहासमे एक नव अध्याय जोड़लक. ओहि दिन अंतर्राष्ट्रीय आतँकी संगठन अल-कायदाक आतँकवादी सभक एकटा बड़का गिरोह, अमेरिकाक भीतरहिमे एके बेर अनेक हवाई जहाजक अपहरण कए, हवाई जहाजकेँअस्त्र-जकाँ प्रयोग कय अमेरिकामे अनेक ठाम हमला केने छल. एहि सबमे न्यूयॉर्क शहरमे वर्ल्ड ट्रेड़ सेंटर पर हमला जतबे भयानक छल, ततबे अविश्वसनीय सेहो. एहि आक्रमणमे मैनहैटन स्थित वर्ल्ड ट्रेड़ सेंटरक उत्तरी एवं दक्षिणी टावर तँ पूर्णतः ध्वस्त भइए गेल छल, ओहि हमलामे करीब तीन हज़ार व्यक्तिक हत्या भेल छल. ई घटना जेहने दारुण छल, तेहने भयानक आ अविश्वसनीय सेहो. ई आक्रमण संपूर्ण विश्वकेँ स्तब्ध कए देने छल.
हम ओहि समयमे बंगलोरमे पोस्टेड रही.

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला अनेक अर्थमे विश्व समुदायक एवं अमेरिकाक आँखि खोलि देलक.अमेरिकी जनमानस एवं न्यूयॉर्क शहरक नागरिकक मानसिकतामे एहि घटनाक दूरगामी असरि भेलैक; जे समाज अपनाकेँ सर्वथा सुरक्षित बूझैत छल, तकर मनमे असुरक्षाक भाव भरि गेलैक.
लोक चिंतित आ सतर्क रहय लागल. एहि घटनाक दोसरो पक्ष उजागर भेल. एहि घटनासँ एक दिस जं नागरिकक मनमे देशप्रेम भाव सेहो पुनर्जीवित भेलैक, तँलोकक मनमे विदेशी नागरिकक प्रति संदेह एवं पूर्वाग्रह सेहो भरि देलकैक. जँ एक दिस नागरिकक मनमे एहि राष्ट्रीय विपत्तिक समयमे सैनिक एवं असैनिक सहायक कर्मी समुदायक प्रति कृतज्ञता भावहुक उदय भेलैक, लोक दानक प्रति उदारो भेल, तँ दोसर दिस इस्लाम एवं मध्यपूर्वक नागरिक प्रति नागरिकक मनमे संदेहक भावक सेहो भरि गेलैक.
समाजक ई प्रतिक्रिया अनुचित नहि छल. एकर पाछाँ राष्ट्रक मानसिकता रहैक. अमेरिका सर्वशक्तिमान राष्ट्र थिक. अमेरिका अपन अकूत आर्थिक आ अजेय सामरिक शक्तिसँ विश्व भरिमे अपन वर्चस्व स्थापित करैत आयल अछि. एकर सीमा पर, कतहु शत्रुक गमन नहि छैक. शीतयुद्धक समय अमेरिका शतत् परमाणु बम धरिक आक्रमणसँ नागरिकक सुरक्षाक हेतु तैयार रहैत छल. ताहि अमेरिकाक हृदयस्थलमे विदेशी आतँकी संगठन सोझे आक्रमण कए करीब तीन हज़ार नागरिकक हत्याक कए देलक, नागरिकक ह्रदयमे तकर आघात आश्चर्यजनक नहि. कारण, ११ सितम्बर २००१क आक्रमणमे मृत नागरिकक संख्या, अमरीकी सामरिक इतिहासमे अद्वितीय, पर्ल हार्बरक आक्रमणहुमे मृत (सैनिक)क संख्याकेँ टपि गेल छल.

राष्ट्रीय क्षति एवं भयानक शोकक ओएह पृष्ठभूमि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसरक सोलह एकड़ क्षेत्रक भीतरहि राष्ट्रीय सितम्बर ११ स्मारक एवं संग्रहालयक निर्माणक प्रेरणा बनल. ई स्मारक सबल राष्ट्रक अविजेय संकल्प प्रतिमान बनल.
अस्तु, नव वन वर्ल्ड सेंटर टावर, मेमोरियल पूल एवं संग्रहालय आतंवादी हमलाक स्मारक थिक, मानवता सोझाँ आतंकवादक स्थायी खतराक मूर्तिमान स्मारक थिक; आतँकवादक गालपर दृढ़प्रतिज्ञ राष्ट्रक चमेटा थिक!
आब एहि स्मारकक भ्रमणक चर्चा करी. यात्राक गाइड अमिय, आ संगबे पत्नी रहथि.

                                                                       रेफ्लेक्टिंग पूल

एहि परिसरमे वर्ल्ड ट्रेड सेंटरक नव भवन, ऑब्जरवेशन डेक, बगीचा, दू गोट रेफ्लेक्टिंग पूल, एवं म्यूजियम नव निर्माण थिक.
आरंभ सड़क तल पर स्थित रेफ्लेक्टिंग पूलहिसँ करी. पहिलुका (धराशायी भेल) वर्ल्ड ट्रेड सेंटरक उत्तरी एवं दक्षिणी टावरक स्थान दू गोट चौकोर ‘रेफ्लेक्टिंग पूल’ वा रेफ्लेक्टिंग, ओही दुनू टावरक स्मारक थिक. एकरा ‘रेफ्लेक्टिंग पूल’ वा रेफ्लेक्टिंग एब्सेंस – विचारणीय शून्य / रिक्ति- कहल जाइछ. 
वर्ल्ड ट्रेड सेंटरक १७७६ फुट नव ऊँच गगनचुम्बी टावरक समीपहि, आ एहि परिसरमे लगाओल सैकड़ों नव ओक केर नवगछुली सभक बीच, ई शून्य जँ एक दिस विध्वंसक स्मारक थिक, तँ दोसर दिस ई दुनू पूल विनाशक पछातिक शांतिक प्रतीक सेहो थिक.
एक दोसरासँ किछुए दूरी पर बनल, एहि दुनू पूलकेर चारू कोरसँ तीस फुट नीचा धरि बहैत जलधार, पूलकेर तलहटी बाटें करीब बीस फुट आओर गहींड़ अन्हार आ निःशब्द शून्यमे विलीन भए जाइछ. ई सांकेतिक वास्तु एक तरहें, मनुष्यक जीवनक ओहि सत्यक संकेत थिक, जे एक बेर जँ चलि गेल ओ पुनःघूरि नहि अबैछ, ओकरा फेर नहि देखबैक.
एहि दुनू पूलक चारू कात सैकड़ों ओकक गाछ छैक. निःशब्द पूल, गाछ सभक छाहरि, भूतकालक संहारक आ भविष्यमे ओहिसँ आसन्न खतराक विचार, एहि परिसरमे एक गंभीर चिंतनीय वातावरणक सृजन करैछ.
दुनू मेमोरियल पूलक चारूक कातक लहराक उपरी फलक पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर वर्ष १९९३ ई., एवं वर्ष २००१ ई.क  आतँकी हमलामे न्यूयॉर्क एवं वाशिंगटन डी. सी. शहरमे मृत करीब ३००० व्यक्तिलोकनिक नाम अंकित अछि.

जखन संहारक प्रतिध्वनिसँ मन विरक्त होबय लागल, तँ एकटा गाछ पर नजरि गेल. एहि नव नाम थिक, survivor tree, पुनर्जीवित गाछ. मैथिलीमे एकरा मृत्यंजय गाछ सेहो कहि सकैत छियैक. कैलरी प्रजातिक एहि (अखाद्य) छोट-छोट आकारक नासपातीक गाछ (Callery Pear tree )क इतिहास सुनबा योग्य अछि.
ई गाछ, साविकक
world trade सेंटरक अनेको गाछक बीच एक छल. मुदा, ९/११/२००१ क आतंकी हमलाक कतेक दिन पछाति जखन परिसरक सफाई शुरू भेलैक, तखन ककरो नजरि मलबाक ढेरक नीचा दबल, एहि गाछ पर पड़लैक. गाछ दबल आ म्रियमाण छल. मुदा,जीवनक स्पन्दन बंचल रहैक, गाछक प्राण धुक-धुक करैत छलैक.अस्तु, कोनो सहृदयक निर्माणकर्मीक सदाशयतासँ ई वृक्ष बचल, आ पछाति ओही परिसरमे दानवीसंहारक साक्षी आ प्रतिकूलताक संग लड़ि विजयीक योद्धाक रूपमे एकरा दोसर ठाम रोपल गेल. ई वृक्ष सेहो ओहि आतंकी आक्रमणक साक्षी थिक.

जीवनक निरन्तरता आ प्राणी समाजक अजेय जिजीविषाक प्रतीक-जकाँ एहि गाछकेँदेखि, हमरा ‘जिजीविषा’ शीर्षकसँ वर्ष २००१ई. मे ‘वैदेही’ प्रकाशित हमर अपन कविताक स्मरण भए आयल. कविताक पृष्ठभूमि एहि कवितेमे भेटत:

सौ-डेढ़ सौ वर्षक जवान

कतेक युगक इतिहास जलवायुक प्रमाण

विशाल, दीर्घकाय

कतेको बीघामे पसरल अश्वत्थ-

पीपरक गाछ,

जखनि गेल छल काटल,

भूमिसँ, बस, दुइए फुट ऊपरसँ,

किएक तँ,

पीपरक गाछतऽर वा ल’ग नहि

ओहि धराशायी पीपरक समाधि पर,

उठतैक नव घर,

तँ, सरिपहुँ, भेल रहैक सबकेँ –

बस, गेलाह इहो बुढ़ा जवान !

किन्तु, ऋतु जहिना-जहिना बदललै-ए

तहिना-तहिना

पीपरक धड़ विहीन शाखा आ जड़िसँ,

पहिने बहरएलैक,

नान्हि-नान्हि टा टुस्सा,

फेर, छोट-छोट डारि

आब देखैत छिऐक,

बिहुँसैत पल्लव,

आ तखनि

बुढ़बा जवानक उठैत,

जोरगर बाँहि- नवका डारि,

तनने हवामे सक्कत-सन मुट्ठी,

मने क’ रहल हो उदघोष -

बाउ, उपाड़ने टा जड़ि,

आ कटने टा डारि,

के सकैत छह मारि ?

जँ छह, जिजीविषा !


वन वर्ल्ड सेंटर ऑब्जरवेशन डेक एवं न्यूयॉर्क सिटीक विहंगम दृश्य
न्यूयॉर्कमे अनेक ऊँच भवनसँ शहरक विहंगम दृश्य देखि सकैत छी. सब ठामसँ भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण भेटत.
पहिल बेर, शहरक बीचमे स्थित रॉकफेलर टावर वा ‘टॉप ऑफ़ द’ रॉक’ केर छत परसँ  हमरालोकनि चारूकात नजरि घुमौने रही. तकरा सोलह वर्ष भए गेलैक. ओ ऊँचाइओमे छोट.
 एहि बेर शहरक दछिनबरिया भाग आ आओर अधिक ऊँचाईसँ (१००म तल्लासँ) शहरकें पुनः देखल.
ओतेक ऊँच, तथापि लिफ्ट एक मिनटसँ कममे ऊपर धरि पहुँचि गेलैक. ओतबे कालमे बाटें-बाटें एल ई डी स्क्रीन पर पछिला ५०० वर्षक अवधिमे न्यूयॉर्क शहरकेर बदलैत स्वरूप सेहो देखैत गेलहुँ. क्षण मात्रक ओहि अनुभवमे कतेक स्मरण रहल, कहब कठिन.
                                                 

                                                     न्यूयॉर्क सिटीक विहंगम दृश्य

डेकसँ  हडसन नदी, न्यू जर्सी शहर आ स्टेचू ऑफ़ लिबर्टीक संग-संग महानगरक चारू कातक परिदृश्य पर नजरि घुमाओल, फोटो लेल. मुदा, कंक्रीटक गगनचुम्बी अट्टालिका सभक जंगलमे, सत्य पूछी, तँ सेंट्रल पार्कक गाछ-वृक्षक अतिरिक्त हरियरी अभावृत्तिए.
तथापि, एहि ऑब्जरवेशन डेकसँ न्यूयॉर्क देखब नीक लागल.

वन वर्ल्ड सेंटर म्यूजियम

वन वर्ल्ड सेंटर म्यूजियममे आम नागरिक, ९/११ हमलाक भुक्तभोगी, सहायता आ बचावकर्मी, एवं सुरक्षाकर्मीलोकनिक संपर्कमे तं रहिते अछि, ई संगठन पर्यटक, छात्र, एवं अध्येताक हेतु अनेक सूचना आ सामग्री सेहो उपलब्ध करबैछ.

लिबर्टी आइलैंड

                                                          

                                                        लिबर्टीक मूर्ति 

अमेरिकाक पछिला यात्रामे लिबर्टी आइलैंड एवं लिबर्टी माईकें मोटर बोटहि परसँ देखने रहियनि. एहि बेर मोटर बोटसँ आइलैंड धरि गेलहुँ आ लगसँ मूर्ति देखल. एहि मूर्तिक विषयमे विश्वभरिमे एतेक सूचना उपलब्ध छैक जे एकर वर्णन आवश्यक नहि.
मुदा, एकटा अजगुत दृश्य पर नजरि पड़ल: फेरीमे चढ़बाक हेतु जे जेट्टी बनल छैक, ताहि पर बाटक दुनू कातक संकीर्ण नालामे नहि जानि कोन-कोन देशक अजस्र सिक्का भरल देखलिऐक. स्मरण अछि, रोमकेर ट्रेवाई फब्बारामे लोककें सिक्का फेकैत देखने रहिऐक. मान्यता ई जे सिक्का फेकने पुनः अयबाक अवसर भेटत. मुदा, न्यू यॉर्कमे कोन भावनासँ पर्यटक समुद्रमे सिक्का फेकैत छथि, कहब कठिन. हँ, सिक्काक ढेर आ ततबा दूर जे स्मारकक रूपमे सेहो बीछि कए आनब कठिन.
                                 

                                                  जेट्टी पर सिक्काक ढेर 
मुदा, लिबर्टीकें देखि हमरा मनमे किछु भाव आयल, से सुनू.
 लिबर्टी एक युगमे दासताक भंजन- मूर्तिक पयरमे बान्हल कड़ी टूटल छैक- प्रतीक छलीह. हिनक हाथक ज्योति मुक्तिक अछि. कवि एमा लज़रस लिबर्टीकें ‘निष्कासित (लोकक) माता’ कहि संबोधित कयने छथिन.
तखन, की अमेरिकाक आजुक सामाजिक आ राजनीतिक परिस्थिति, ओहि परिकल्पना अनुकूल अछि? उत्तर कए देत?
तें, ई प्रश्न हम ऑनलाइन
AI विद्वान Chat GPTकें पुछलिऐक. जे जवाब आयल से सुनू.
Chat GPT कहलनि, ‘असलमे एहि मूर्तिक स्थापनाक पाछाँ एमा लज़रसक कवितामे अभिव्यक्त भाव रहबे नहि करैक. ततबे नहि, ई कविता-
The New Colossus - मूर्तिक स्थापनासँ तीन वर्ष पूर्वहि १८८३मे लिखल गेल छल. तैओ, ई सत्य थिक, जे १८८२ आ १९५४ ई. बीच केवल न्यूयॉर्क बन्दरगाह बाटें एक करोड़ बीस लाख आप्रवासी अमेरिकामे आयल छल. तथापि, मूर्तिक प्रतीकात्मकता आ यथार्थमे सदाएसँ तनावक भाव रहलैक अछि. ’
एहिमे दू मत नहि, अमेरिका सदाएसँ निष्कासित-बहिष्कृतक हेतु आसरा रहल अछि.आइओ विश्व भरिक आप्रवासी अमेरिका अबिते अछि. हँ, अमेरिकामे हेबनिमे प्रजातांत्रिक मूल्यमे किछु ह्रास भेलैए, आ गरीबी एतहु छैक.
अस्तु,
Chat GPT कहब जे ‘समयक संग लिबर्टी, मूर्तिक स्थापकलोकनिक उद्देश्यसँ भिन्न अर्थबोध ग्रहण कए लेने अछि, आ (क्रमशः)लिबर्टीक मूर्तिकें एतुका लोक ‘नैतिक दर्पण (moral mirror)’ बूझय लागल अछि. इएह एहि विश्वप्रसिद्ध मूर्तिक चिरस्थायी प्रासंगिकता आ शक्ति थिकैक’, तर्क संगते लागल.
एलिस आइलैंड : अमेरिकाक ऐतिहासिक प्रवेशद्वार आ आजुक संग्रहालय

                                              
एलिस आइलैंड राष्ट्रीय आप्रवासक संग्रहालय न्यूयॉर्क

न्यूयॉर्क बन्दरगाहक समीप स्थित एलिस आइलैंड लम्बा अवधि धरि अमेरिकाक प्रवेशद्वार छल. ई सर्वविदित थिक. एहि द्वारिकें अपन आँखिए देखल. विशेष गप सएह. तें दू पाँति एकरो विषयमे.
एलिस आइलैंड आब अमेरिकाक प्रवेशद्वार नहि थिक. मुदा, एतुका एलिस आइलैंड राष्ट्रीय आप्रवासक संग्रहालय न्यूयॉर्क शहरक अनेक पर्यटन स्थल सबमे एखनो प्रमुख अछि. जे पर्यटक लिबर्टी आइलैंड अबैत छथि, एलिस आइलैंड देखैत जाइते छथि, कारण, ई म्यूजियम स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी राष्ट्रीय स्मारक केर हिस्सा तं थिके, मोटर बोटसँ यात्रा कए दुनू स्मारक देखि सकैत छी.
लोअर मैनहैट्टनमे बैटरी पार्क लग जखन हमरालोकनि मोटर बोट पर चढ़बाक प्रतीक्षा करैत रही, तं लगमे एक गोटे एक कार्टनमे सेनुरिआ आम काटि-काटि बेचैत रहथि. मेक्सिकोक निवासी, मेक्सिकन आम- भीतर बोनायल, सक्कत आ मधुर. काँचे खाउ. मुदा, मिथिलाक आमक स्वाद कहाँ! एक आमक दाम पाँच डॉलर. सस्त नहि भेलैक. मुदा, पर्यटन स्थल पर दाम पुछ्बैक. खयबाक अछि, खाउ. नहि तं आओर किछु देखू.
हमरा जिज्ञासा भेल. मेक्सिकोमे आम अयलैक कतयसँ? पछाति, बुझबामे आयल, मेक्सिकोमे फिलीपिंससँ आम आयल छल. मेक्सिकोक जलवायु आमक गाछक हेतु अनुकूल छैक. अस्तु, आम ओतुका परिचित आ प्रिसिद्ध फल थिक. अमेरिका पड़ोसी देश थिकैक, तं एतय मेक्सिकोक नागरिक कानूनी  आ गैरकानूनी तरीकासँ एटी अबितो छथि, आ एटी मेक्सिकोक उत्पाद बिकाइतो अछि. आब एलिस द्वीपक गप करी.
एलिस द्वीपक ऐतिहासिक महत्व एतबे जे ई स्थान पहिने सामरिक अड्डा छल, तखन आप्रवासीक जाँच-पड़ताल एवं हिरासतक केन्द्र भेल. पछाति, बीच-बीचमे विश्वयुद्धक अवधिमे एतुका भवन सबमे शत्रु सैनिक सब सेहो राखल गेल.
किन्तु, आम पर्यटकक हेतु एतुका संग्रहालय प्रमुख आकर्षण थिक. जतय मुख्य भवनमे स्थित रजिस्ट्री हॉल, बहुत रास बक्सा-पेटी सामान, मेडिकल जाँचक उपकरण आ फोटो इत्यादि  प्रदर्शित अछि, जाहिसँ आप्रवासक युगमे आप्रवासी लोकनिक राष्ट्रीयता, स्वरुप, धर्म, परिवार आ संग-संग आनल वस्तु-जातक रोचक झाँकी भेटैछ.
भवनक आन कक्षमे घुमैत कतहु हाथसँ लिखल गद्य, पद्य वा चित्रमे आप्रवासक हर्ष आ देश छुटबाक पीड़ा तथा पलायनक परिस्थितिक मार्मिक वर्णन सेहो देखबामे आयल.

गप एतबे, मनुख कतहुक होअए, हर्ष-विषाद आ पीड़ा-सन संवेदना सब ठाम एके होइछ. भाषा वा शब्द भले भिन्न होइक, अभिव्यक्तिक स्वरुप भले भिन्न-भिन्न होइक भावमे समानता देखबे करबैक.

                                                                        रजिस्ट्री हॉल
                                 
                                                ग्राफिटी: हाथसँ लिखल संदेश  
तथापि, योरोपीय समुदायमे भारतक जनमानसक भावनासँ विपरीत, उद्यमसँ आ अपरिचित भूमिमे सफलताक अन्वेषणक प्रेरणा प्रबल रहलैक अछि. ई भाव ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’क अवधारणा विपरीत थिक. योरोपीय समुदाय द्वारा नव दुनिया-अमेरिका- एवं भारतक खोज ओही भावना आ उद्यमक परिणाम थिक.

सेंट्रल पार्क न्यूयॉर्क सिटी
नई दिल्ली हो वा न्यूयॉर्क नगर आ शहरमे भवन, म्यूजियम, पार्क, सिनेमा आ बाज़ार भेटबे करत. तखन लोक जतय रहैत  अछि, स्कूल-कालेज वा काज पर जयबाक समय बाट पर भले प्रतिदिन विश्वप्रसिद्ध स्मारक वा वस्तु पड़ैत हो, देखबाक फुरसति कहाँ! मुदा, नव शहरमे अयलासँ लोककें पर्यटनक हेतु समय सेहो रहैत छैक, आ नवीनताक अनुभव सेहो होइत छैक. अस्तु, लोक घुमैत-फिरैत अछि आ संस्मरण संग लए जाइत अछि.
न्यूयॉर्क सिटीक सेंट्रल पार्क एतुका पैघ उद्यान आ शहरक हृदयस्थलमे अवस्थित सुपरिचित सार्वजनिक पर्यटन स्थल थिक. एहि पार्कमे समय-समय पर अनेक स्थानीय आ विदेशी राजनेता लोकनि सेहो सार्वजनिक सभा करैत छथि; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सेहो सितम्बर २०१४मे सेंट्रल पार्कमे एक पैघ सभाकें संबोधित कयने रहथि.

हमरो लोकनि सेंट्रल पार्क देखय गेलहुँ. टैक्सी पार्कक बाहरे छोड़ि, रिक्शा कयल आ भीतर गेलहुँ.
विशाल इलाका. अनेक प्रकारक वृक्ष आ फूल, वास्तु आ झरना. योरपकेर पार्क सब मन पड़ि आयल. किछु घुमलहुँ. कतहु-कतहु बैसलहुँ. एकठाम एक व्यक्ति गिटार लेने गीत गबैत रहथि. सोझाँमे पर्यटकक दू गोट नेना नचैत छल.
योरप एवं अमेरिकामे सड़कक कात, चौक-चौराहा आ पार्कमे गीत गायब, कलाकृति बनायब, राजनैतिक विचारधाराक प्रचार, वा विश्व स्तरक समस्या पर मुहिम चलायब आम थिक.
एहि सब कलाकारकें केओ केवल देखैत अछि. केओ प्रभावित भए टाका-पैसा सेहो दैत छैक. केओ सुदुक प्रशंसा करैछ आ चलि जाइछ. वस्तुतः, कतेको कलाकार केवल आत्मसंतुष्टिक लेल कला साधना करैत छथि. केओ गुजर करबा लेल सेहो. ई सब ठाम होइत छैक; अपनहुँ देशहुमे.

                                                                          बोल्टोक प्रतिमा 

सेंट्रल पार्कक वृत्तांत अंत एक स्मरणीय वास्तुसँ हो. ई वास्तु थिक ‘बाल्टो’ नाम कुकूरक. बोल्टोपर कतेक पोथी लिखल गेल अछि; हमर पौत्र, अग्निव, हमरा बोल्टोक लम्बा खीसा सुनओलनि. एहि कुकूरक अभियान पर सिनेमा सेहो छैक.

बाल्टो नामक ई साइबेरियन हस्की प्रजातिक कुकूर १९२५ ई. मे अमेरिकाक अलास्का प्रान्तमे कुकूर द्वारा घिचल जाइत गाड़ी- स्लेड- केर नेतृत्व कए, कठोर शीतकालमे, घातक संक्रामक रोग डिफ्थिरियाक टीका पहुँचयबामे अद्भुत सफलतासँ लोकसेवामे अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित कयने छल. ई कांस्य प्रतिमा ओकरे स्मारक थिक.
मुदा, अजगुत से नहि. अजगुत ई थिक जे जाहि दिन ओहि कुकूरक प्रतिमाक अनावरण भेलैक ओहि दिन बोल्टो अपन मालिकक संग ओतय उपस्थित छल.
ततबे नहि, बोल्टोक शरीरक ओहायो राज्यक
The Cleveland Museum of Natural Historyमे स्थायी रूपें प्रदर्शित अछि. चूंकि, एहि बेर हमरालोकनि कुल समय क्लीवलैंडहिमे बिताओल,तें, बोल्टोक पार्थिव शरीरकें सद्यः सेहो देखल.

Saturday, September 5, 2026

पिंजड़ा, चिड़ै, आ खीसा

 

पिंजड़ा, चिड़ै, आ खीसा

दीनानाथकेँ नवे वयससँ धिया-पुताक बड्ड आवेश रहनि. अनको धिया-पुताकेँ कतहु देखथिन, टोकि देथिन. कखनो समय देखि, होइनि तँ संगे खेलाइयो लागथि. अपन धिया-पुताक तँ कथे कोन.
मुदा, जखन अपन नाति-नातिन, पौत्र-पौत्रीक बेर एलनि, तँ ओलोकनि ततेक दूर चलि रहनि, जे केओ लग नहि रहनि. तखन जे लग, से अपने. मुदा, अपन, आ अपना समीपक, बीचमे अंतर कोना नहि हेतैक.
तैओ जाधरि ओ नौकरीमे रहलाह, समाजक संग जुड़ाओक कारणें, कखनो एहन प्रतीत नहि भेलनि, जे धिया-पुता लग नहि छथिन.
पछाति, जखन रिटायर भए महानगरवासी भए गेलाह, तखनो परिवारक कमीक अनुभव नहि भेलनि. सोशल मीडिया आ टेलीफोनक सुविधा एवं विडियो कॉलसँ अपन पौत्र-पौत्री-दौहित्र-दौहित्रीक संग खेला लेथि, समय बीति जाइनि. मुदा, मोन नहि भरनि.

पछाति मन भेलनि जे धिया-पुताक लेल कथा लिखी, कविता गाबी आ अपन परिवारक नेना सब ई सब सुनय, पढ़य आ आनन्द उठाबय. मुदा, समाजक प्रगति मनुखक सोचकेँ पाछाँ छोड़ैत, तेना निच्छोह भगैत चल गेलनि जे दीनानाथ हकमय लागथि. अपनहु सोचथि, एहि युगक बच्चा कतहु गुलाबछड़ी आ हवा मिठाई बुझै! हमर लिखल गीत आ कथा-कविता ओकरा सबकेँ कतहु रुचैक. मुदा, युग भले बदलि गेलैक, धिया-पुताक जीह भले आन रस ताकौ, बूढ़-पुरान कहिया धरि नव सुर-ताल पर गायब सिखैत रहत!

ई सब सोचि, दीनानाथकेँ अपन लिखब आ गायब निरर्थक लगनि, मुदा, मन हताश नहि होइनि. सोचथि, जँ पुरान लोकक गप पुरान नहि होइतैक, तँ पुरान कथा-पिहानीकेँ लोक दादी-नानीक कथा-कहिनी किएक कहितैक! अस्तु, ओ निरंतर अपन सृजनक अभिव्यक्तिक नव बाट तकबाक हेतु अपन कल्पनाकेँ प्रेरित करथि.
एक राति बड्ड जोर बिहाड़ि आयल रहैक. दीनानाथ भोरमे उठलाह तँ अपन फ्लैटक द्वारिक आगाँ एकटा चिड़ैक गेल्ह खसल देखलखिन. ओ ओहि गेल्हकेँ उठाकय भीतर अनलनि. घरक भीतर आश्रय आ किछुए दिनक कनिएक सेवासँ ओ गेल्ह स्वस्थ सूगाक रूप लए लेलक. घरक पोसा कुकुर सेहो छोटे रहनि. पहिने तँ किछु दिन ओहि कुकुरकेँ ओ सूगा खेलौना-जकाँ बूझि पड़ैक. ओ सूगाक संग खेल कएल करय. पछाति, कुकुरक बच्चा आ सूगाक बीचक नोक-झोकसँ  दीनानाथकेँ होइनि जे कदाचित ओहिसँ सूगाक हानि ने भए जाइक.
तथापि, किछु दिन धरि सूगा आ कुकुर एकहि घरमे संग-संग पलैत-बढ़ैत रहल. आ दीनानाथ एही दुनूकेँ परिवारक नेना बूझि, कविता आ कथा लिखैत जाथि.

आ दुनूकेँ संग लए बैसथि, कविता पाठ करथि, खीसा दुनूकेँ सुनबथिन. कुकुर कखनहु हुनक पयर लग बैसनि, कखनहु सोफा पर. सूगा सेहो कखनहु बैसय, कखनहु फुदकय, कखनहु ओ आबि कए दीनानाथक जांघ वा कान्ह पर सेहो बैसि जाइनि. एतावता, ई दुनू दीनानाथक अनमना बनल रहय.
चिड़ै आ कुकुर संग-संग रहैत संगी भए गेल छल. कखनहु सूगा कुकूरक पीठ पर बैसि सवारिओ करय. मुदा, सब दिन, मनक स्थिति कतहु एक रंग रहैक.
एकदिन एकटा बिलाड़ि कोम्हरोसँ बौआइत आयल आ दीनानाथक बालकोनीमे बैसल. कुकूर जखन बिलाड़िकेँ बालकोनीमे बैसल देखलकैक तँ ओकरा अनसोहाँत लगलैक. सूगा सेहो तत्पर छले. बालकोनीक खूजल केबाड़ बाटें कुकूर बिलाड़िपर झपटलक. सूगा सेहो किएक पाछू रहत. ओहो कुकूरक संगहि आगू गेल.  बिलाड़िकेँ सेहो मौका भेटलैक आ दुनू पक्षमे एक पक्कड़ हेबासँ पहिनहि दीनानाथ ओतय पहुँचि स्थितिकेँ नियंत्रणमे लेलनि. ककरहु कोनो नोकसान नहि भेलैक.
ओही दिन दीनानाथ सोचलनि जे सूगाकेँ कुकुरक संग आ सेहो खूजल राखब उचित नहि. ओ ओही दिन बाज़ार गेलाह आ एकटा पैघगर पिंजड़ा कीनि अनलनि आ ओही दिनसँ सूगा अपन नव घरमे रहब शुरू केलक. पिंजड़ाक दुआरि खूजल रहैत छलैक. तें, कुकूर आ सूगा जहिना संग-संग रहैत छल, तहिना रहय.
मुदा, दीनानाथकेँ नेना भुटकाक कमीक अनुभव जहिना होइत छलनि, होइते रहलनि. होइनि जे नाति-पोता-पोतीक हेतु लिखल कविता आ कथा ओ सब नहि तँ कोनो आनो बच्चा सब सुनय, खुशी होअय, थोपड़ी पाड़य, ठहक्का मारि हँसय. मुदा, से कोना होइतनि. तें, मनोरथ पूर नहि भेने, दीनानाथकेँ कखनो-काल उद्विग्नताक अनुभव होइनि.
कॉलोनीमे नेनाक कमी नहि रहैक. मुदा, शहर-बाजारक कॉलोनी आ गाँओक टोल-मोहल्लामे अंतर होइछ. शहरमे अनकर नेनाकेँ टोकबो अपराध श्रेणीमे आबि सकैछ. तखन ककरासँ परिचय कोना हो, आ संबंध कोना बनय वा बनाबी, से लाख टाकाक प्रश्न! ओहुना, जँ एक दोसरासँ काज नहि पड़ैत हो, तँ संबंधक कोन काज!  

एही गुनधुनमे एकदिन दीनानाथक मनमे एकटा नव विचार एलनि. आ ओही दिनसँ ओ सूगाकेँ पिंजड़ामे लए ओ कॉलोनीक पार्कक एक कोनमे जा कए किछु काल बैसब शुरू केलनि.

दीनानाथ पार्कमे जाथि, पिंजड़ा राखथि, पिंजड़ाक केबाड़ खोलि देथिन आ सूगाकेँ खीसा सुनायब शुरू करथि. सूगा कखनो पिंजड़ाक भीतर बैसय, कखनो बाहर आबि दीनानाथक जांघ पर, कखनो माथ पर बैसि जाइनि, वा कखनो फुदकि कए घास पर सेहो बैसि जाय. मुदा, दीनानाथ निर्विकार भावें कविता आ कथा पाठ करथि. सूगाकेँ अपन कृति सुना हुनका अपूर्व तृप्तिक बोध होइनि.
बहुत दिन एहिना बीति गेल. तकर बाद कोनो दिन एक छोट बच्चाक नजरि सूगा पर पड़लैक. सूगा आकृष्ट केलकैक. मुदा, अनचिन्हार वृद्धक लग अयबामे ओकरा भय सेहो भेलैक. मुदा, जिज्ञासा भेने, बच्चाक मनमे अनजान वस्तुसँ भय बेसी दिन नहि रहि पबैत छैक. संगहि, धखाइतो, जखन अपरिचय परिचयमे बदलि जाइछ, तखन सौहार्द्र भयक स्थान लए लैछ. अस्तु, क्रमशः नेना सब दीनानाथक लग आबय लगलनि. जे नेना सूगाक लोभें आबय, खीसा सुनय लागय. पछाति जे खीसाक लोभें आबय, सूगाक संग खेला कए आपस जाय. केओ आबय आ भागिओ जाय.

मुदा, दीनानाथ ने ककरो अपना लग शोर करथिन, ने ककरो बैसय कहथिन. हिनका पार्कमे बैसल सीनियर सिटीजनक अनेक ग्रुपसबसँ सेहो कोनो लगाओ नहि रहनि. कोनो ग्रुप समोसा जिलेबीक पार्टी करथि, केओ भजन-कीर्तन. कोनो ग्रुप जोर-जोरसँ हँसबाक प्रैक्टिस करय, तँ केओ छोट-मोट प्रवचन सेहो. मुदा, दीनानाथ आ हुनकर सूगा एकटा स्वतँत्र वक्ता आ श्रोताक ग्रुप छल. बच्चा सभक ओतय आयब दीनानाथक हेतु बोनस छलनि.

क्रमशः नेना सबहक संख्या बढ़य लगलैक. खीसाक लोभें कम, सूगाक लोभें बेसी. प्रश्नक भरमार:
बाबा, सूगाक नाम की थिकै ?

ओकरे पुछिऔ.
अहाँक सूगा गप करैए?
नहि, क’ कए देखियौक ने!
सूगा! सूगा!!  तोहर नाम की छौ ?

दोस्त ! दोस्त!!

बाबा, ई तँ दोस्त कहैए.
इएह तँ ओकर नाम छियैक!
बाबा, ई की सब खाइए?

देखिऔ ने ओएह तँ ओकर कटोरीमे राखले छैक.
ओ तँ पाकल लताम छै.
तँ मधुर लताम सूगाकेँ नीक नहि लगतैक!
आ आम?

खायत. मुदा, हम देबैक नहि.
किएक?
आम बारहो मास भेटतैक? पछाति नहि देबैक तँ हुज्जत करय तँ?

नेना सोचमे पड़ि माथ हँसोथय लागल.
अच्छा. हम अपन सेव दियैक ?

नहि.

किएक ?

ओ केवल अपने टा खाना खायत.

बुधियार छैक ने?
तेँ, ने हम एकरा रोज खीसा सुनबैत छियैक. बुडिबककेँ के खीसा सुनौतैक!

क्रमशः दीनानाथ आ सूगा पार्कमे सुपरिचित भए गेल छल. दीनानाथकेँ सेहो किछु नेना परिचित भए गेल रहनि. मुदा, प्रति दिन नव नेनाक आयब आ नव-नव प्रश्न पूछब दीनानाथकेँ नीक लगनि. सूगाक बहन्ने नेना सब हिनकर कथा-कविता सूनि लेनि, ताहिसँ हिनका बड़का संतोष होइनि.

दिन बितैत गेल. एक दिन एकटा बुधियर बच्चा दीनानाथक लग आबि बैसि गेलनि. हिनका एवं सूगाक संबंधमे ओकरा किछु बूझल तँ रहैक, मुदा, नेने छल. धखाइत आयल रहय. मुदा, हिम्मत केलक, आ ओ शुरू भेल:

बाबा, अहाँ केवल सूगे टा केँ खीसा सुनबैत छियैक.

नहि.

हमरा सुनायब ?

बैसि जाउ.
लेकिन, सूगाकेँ तामस नहि चढ़तै?

किएक ?

हम ओकर खीसा सुनबै, तेँ? अहाँ ओकरे बाबा छियैक ने?

दीनानाथ हँसैत कहलखिन: अहूँ तँ हमरा बाबा कहिते छी. अहूँ सुनू.

बच्चा कनेक काल संच भए बैसल. खीसा सुनलक आ भागि गेल.

दोसर दिन, एकटा कनेक छेटगर नेना आयल. ओकर प्रश्न बुधियारिक रहैक. मुदा, दीनानाथकेँ कोनो बच्चाक गप अनसोहाँत नहि लगनि. बच्चा शुरू भेल.

बाबा, सूगाक नाम की छियैक?

पुछियउ.

नाम की छी ?

दोस्त-दोस्त-दोस्त.
बाबा, ई तँ हमरा दोस्त कहैए. सूगा तँ हीरामन होइ छै, ने?

सब सूगाक अलग-अलग नाम होइ छैक.

अच्छा ? तँ एकटा प्रश्न पुछू बाबा?
हँ .

हमरा बाड़ीमे लतामक गाछ अछि. बहुत लताम छैक. बहुत सूगा अबैए. लतामो खाइए. मुदा, ई तँ बेचारा बन्न अछि. एकरा किएक बन्न केने छियैक, बाबा ? पनिशमेंट भेटल छैक. हम किछु गलत करैत छिऐक, तँ माँ कहैत छथि, बाथरूममे बंद कए देब.

दीनानाथकेँ हँसी लागि गेलनि. हँसी रोकैत कहलखिन:
ई कोनो अपराध नहि केने अछि. मुदा, हमरा घरमे कुकुर अछि. बिलाड़िओ आबि जाइछ. भय होइत अछि, बिलाड़ि एकरा झपटि ने लैक. तेँ एकरा अलग रखै छियै.

मुदा, एतय पार्कमे  तँ किछु नहि छैक. एकर केबाड़ खोलि दिऐक?
“खोलि दिऔक.” ई कहि दीनानाथ उठि कए पार्कक दोसर दिस विदा भए गेलाह. बच्चा सूगाक संग बैसि खेलाए लागल. ओ कनेक काल धरि उठल, बैसल
, घास पर घुड़मुड़िया मारलक. सूगाकेँ किछु पुछलकैक. सूगा किछु बजलैक, नेना सेहो किछु कहलकैक. सूगा एक बेर पिंजड़ाक खूजल खिड़की लग आबि मुड़ी बहार केलक.

“बाहर जेबे.”

“जरूर, जरूर”

फेर  पुछलकैक, ‘लताम नीक लगैत छौक?’
सूगा मुड़ी हिलौलक. नेना बुझलक ‘हँ’ कहैए. पिंजड़ामे आधा लताम तखनो रखले रहैक.
“हमरा ओतय जेबें. हमर गाछक लताम खेबें”

“जरूर. जरूर”

“उड़ल हेतौ?”
“जरूर, जरूर”
“चल.”
“चल दोस्त.”

बच्चाक मन ख़ुशी भए गेलैक. ताधरि सूगा पिंजड़ासँ बहरा कए बहार भए दूबि पर आबि बैसल छल. ओ ओतहि एक दू बेर फुदकल. आ उड़ि गेल. बच्चाकेँ विश्वास भए गेलैक, दोस्त लताम खयबालेल ओकरे गाछ दिस उड़ल अछि. ओहो पिंजड़ा लगसँ उठि विदा भेल.
साँझक समय छलैक. पार्क एकाएकी खाली भए गेल रहैक. जकरा जेम्हर जेबाक छल हेतैक गेल. मुदा, ओहि कॉलोनीक पार्कमे ओ खाली, खूजल पिंजड़ा, अनेक दिन धरि घास पर ओतहि पड़ल छल. दीनानाथकेँ ओतय फेर कहिओ केओ नहि देखलकनि.     

                   

Thursday, August 27, 2026

आइना

तोड़ डाले मैंने हर इक शीशे,

कर दिया आइनों का काम तमाम. 

बचा गया फिर भी,

तालाब, नदियों और कुंओं में पानी,

सूरत मेरी देख कर,

मांगने लगा मुझ से हिसाब ! 
 

Sunday, August 16, 2026

भ्रम

1

दम ने मारय, थम्हय न कखनो

पिरथी, सूर्य, आ चान

शत योजन ओ भागय क्षणमे 

जड़केँ से नहि भान।

नापि अबै छथि वायुयानसँ,

धरती पर नहि छनि जोर,

मन-विचार पर सक्क ने ककरो,

तकरा करता थोड़!

2

कान्ह कोदारि आ भूखल पेटेँ 

जे तामय भरि दिन खेत,

लगने भूख जँ माङय भोजन,

असली नक्सल भेल!


झिंगुर

आन्हर सबकेँ चश्मा देलक,

नान्हि-नान्हि टा झिंगुर,

युग भरिसँ दुबकल समाज ले' 

अयना किनलक झिंगुर ।

आँखिक सोझाँ दिन-देखारमे 

किछुओ नहि सूझै छल,

किछुए दिन केर व्रत-उपाससँ

जोश बढ़ौलक झिंगुर। 

कोना कहबै, ककर सुनत के?

ठकमूड़ी छल लागल,

हाथेँ-हाथेँ सुदुक मोबाइलसँ,

अलख जगौलक झिंगुर!



महाकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुरक अमर काव्य "चित्त जेथा भयशून्य"क अनुवाद

"चित्त जेथा भयशून्य"क अनुवाद 


जतय चित्तमे भय नहि कोनो, 

तानल सोझाँ माथ;

बुद्धि-विवेक पर रोध ने कोनो,

ने बांटल जग, ने संकीर्ण देबाल;

वाणी जतय उठय सत्यसँ प्रेरित,

दक्षता हेतुक, अथक उठय हमर नित हाथ;

जतय जड़ स्वभावक कारण,

निर्मल स्वच्छ तर्क केर धारा,

नहि मरुभूमहिमे बहि जाय;

अहिंक प्रेरणेँ, हे नाथ,

व्यापक हमर विचार आ कृतिसँ,

एहने स्वतंत्र स्वर्गमे जागय, 

उठय, हमर ई देश।

अनुवाद: कीर्तिनाथ झा

Monday, July 27, 2026

When you don't fear the fear, you're the winner

 When you don't fear the fear, you're the winner

Innocence may be a bliss and experience a handicap. The recent agitation by the Gen Z  has shown it amply. 
Last twelve years in our National life has been a period of continuity and calm. It was first a calm of hope, and then of fear. People many times felt cheated, yet they didn't raise their voice. Since whether they raised voice or not, the outcome was the same; the govt, following its defined agenda, often bulldozing the parliament, remained unresponsive.
Those who pressed futher, faced persecution. The process often turned the punishment. Yet, the Press, the civil society, the urban  middle class in particular, and the Judiciary either could not help, or ignored popular distress. 
Recently, the war in the Middle East raising inflation increased people's distress. Then came repeated leaks of papers of the examinations, widespread errors in the evaluation of the class XII examination, etc. These resulted in restlessness among the youth facing unemployment and uncertain future.
Repeated postponement of qualifying examinations in various departments across the states added further to the woes of the unemployed. It was under such a volatile situation, that the Chief Justice of India with his insensitive remark, provided the proverbial the spark to the fuse.
Even then, if the Executive had accepted, there was a problem, they could have managed to convince people for some time. But the government which rose to power on the planks of wiping out corruption, did not fail to smell the coffee; actually, it was seen to be itself embroiled in widespread corruption.
Fear had so far proved a useful weapon against dissenters. Even the trusted weapons don't work every time. And it didn't work this time.
There are simple reasons. The Gen Z do not see manufactured debates on the so-called 'mainstream media'. They are not infected by the communal virus. They don't hesitate to speak truth. They know no fear.
And when you don't fear the fear, you're the winner! And the Gen Z won the argument.
. 

Sunday, June 21, 2026

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर लक्षण होइछ अनेक

जेहने विविध माटि अछि अप्पन

तेहने विविध अछि लोक,

भाषा मधुर, अनेको बोली

माटिओक रंग अनेक।

 

शोणित सभक एक रंग जहिना

श्वासो एके थीक,

आगि-पानि विभेद ने मानय

संशय तखन कथीक?

 

सूर्य-चान बसै छथि ऊपर

एके ताप आ छाया,

तखन मनुख जे भेद कराबय

बेचय स्वार्थ, ओ माया।

 

गाछ-वृक्ष नहि भेद करै अछि,

मेघ ने बाँटय पानि

मनुखक तखन बाँट-बखराकेँ,

लेबै कोना मानि!

 

मूर्ख रहौ, कपड़ा नहि तन पर,

धन नहि दैछ विवेक

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर

लक्षण होइछ अनेक।


मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो