पाठकीय प्रतिक्रिया
प्रयोगशालाक जीवन
(राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समाजक चर्चक संग किछु
आत्मचर्चा)
2005 ई. मे प्रकाशित
‘पसरैत वृत्त: सँकुचैत बिन्दु’ नामक एक आलेखमे पण्डित गोविंद झा लिखने रहथि:
‘देखल जाइत अछि जे मैथिली मे केवल मध्यम स्तरक लोक कलम उठबैत अएलाह अछि. उच्च
स्तरक प्रतिभा मिथिलासँ आ मैथिलीसँ पड़ाइत रहल
अछि.......................................वर्त्तमान दशक मे मैथिलीक प्रतिष्ठा
बढ़लैक अछि आ उच्च स्तरहुक लोक मैथिली मे
कलम उठबय लगलाह अछि.’
गोविन्द बाबूक ई उक्ति एक कथा संग्रह समीक्षामे लिखल गेल
छल. मुदा,जँ उपन्यास-कथा-कविता आदिक विधासँ भिन्न विधाक गप करी तँ हेबनि धरि
स्थिति उत्साहजनक नहि रहैक. तें, एहि स्थितिक चर्चा हमहू अपन ब्लॉग ‘मैथिली
लेखनक एकफेंड़ा गाछकें चारू दिस चतरब आवश्यक छैक’ केने रही. मुदा, नाभिकीय भौतिकी(Nuclear
Physics)क सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डाक्टर योगेन्द्र
पाठक वियोगीक विपुल लोकप्रिय विज्ञान लेखन (writings on Popular Science)एकर
अपवाद थिक. कोलकातासँ प्रकाशित (आब बंद भेल) ‘मिथिला दर्शन’क पाठक मे विरले केओ
हेताह जे डाक्टर पाठकक विज्ञान संबंधी विस्तृत प्रमाणिक लेख सबसँ अपरिचित हेताह.
स्मरणीय थिक, ओहि लेख सबहक संकलन डाक्टर वियोगी जी ‘विज्ञानक बतकही’ नामक पोथीक
भाग 1,2 एवं 3मे प्रकाशित भेल अछि.गत वर्ष, 2025 मे डाक्टर वियोगीक नव पोथी ‘प्रयोगशालाक
जीवन’ प्रकाशित भेल अछि. प्रस्तुत लेखमे एही पोथीक चर्चा अछि.
डाक्टर वियोगी एहि पोथीकेँ ‘राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समाजक चर्चाक
संग किछु आत्मचर्चा’ कहैत छथि. अछियो ई सएह. मुदा, एहि पोथीमे अधिकतर एहन विषयक
चर्चा छैक जे अंग्रेजी भाषाक वैज्ञानिक संस्मरणमे तँ भेटत, मुदा, मैथिलीमे हमरा
देखबामे नहि आयल अछि.
‘प्रयोगशालाक जीवन’ करीब सवा दू सौ पृष्ठकेँ पाठक विषयक संदर्भक दृष्टिसँ तीन
भागमे बाँटि सकैत छथि: पहिल भाग- पोथी पहिल पचास पृष्ठ- मे लेखकक बाल्यकालसँ ल’ कए
प्रयोगशालाक जीवनमे प्रवेशसँ पूर्वक जीवनक चर्चा अछि. ई खण्ड भारतक स्वतंत्रतासँ
ल’ कए साठिक दशककक अंत आ सत्तरिक दशकक आरंभ धरिक कालखण्डकेँ धङैत, ओहि समयक
मिथिलाक सामाजिक आ शैक्षणिक जीवन पर संक्षिप्त, किन्तु, वस्तुनिष्ठ रूपेँ प्रकाश
दैछ. पोथीक एहि खण्डमे लेखकक आन ठाम प्रकाशित एहन अओरो लेख सबहक संदर्भ भेटत जे
पहिने हुनक भिन्न-भिन्न पोथीमे प्रकाशित भेल अछि, एवं प्रशंसित भेल अछि.
ज्ञातव्य अछि, विगत शताब्दीक पचासक दशक मिथिलामे विपन्नताक काल छल. तहिया मेहनती आ
महत्वाकांक्षी छात्रसबकेँ केवल शिक्षासँ उन्नतिक आस छलैक. फलतः, अनेक गाममे समाज,
शिक्षक आ छात्रक संकल्पसँ उत्कृष्ट परिणाम देखबामे अबैत छलैक. अजुका मधुबनी जिलाक
मधेपुर गामक जवाहर उच्च विद्यालय शिक्षाक एहने केन्द्र छल जतयसँ डाक्टर वियोगीसँ
पूर्व, वैज्ञानिक शचीनाथ झा, शिक्षाविद् डाक्टर लक्ष्मण झा एवं डाक्टर ब्रजकिशोर
वर्मा सदृश मूर्धन्य साहित्यकार बहरायल छलाह. अस्तु, एहि पुस्तकमे ओहि युगक
ग्रामीण जीवन अतिरिक्त स्कूली जीवनक संक्षिप्त वर्णन सेहो भेटत.
स्मरणीय थिक, अगिला दशक, साठिक दशक, सेहो बिहारमे विषम काल छल. साठिक दशकमे राजनेता
लोकनिक अदूरदर्शिता आ महत्वाकांक्षा शिक्षाक अवनति जनक प्रमाणित भेल. तहिया ओलोकनि
शिक्षाक क्षेत्रमे एहन बबूरबोनी लगबैत
गेलाह,जे शीघ्रे शिक्षण आ परीक्षा व्यवस्थाकेँ अस्तव्यस्त तँ कइए देलक, ओकर
दुष्प्रभावसँ बिहारक शिक्षा व्यवस्था आइओ
धरि उबरि नहि सकल अछि. ‘प्रयोगशालाक जीवन’मे विश्वविद्यालयक जीवनक ओहि दुखद युगक
एहन झाँकी भेटत, जाहिमे शिक्षाक अवनतिए टाक नहि, प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षण
संस्थानक प्रति शिक्षक लोकनि अभिज्ञता आ उदासीनता छात्रक भविष्यकेँ कोना प्रभावित
करैत छल, तकरो चर्चा अछि.
लेखकक प्रयोगशालाक जीवनक आख्यानक आरंभ वस्तुतः पोथीक अगिला भागमे तेसर अध्यायसँ
होइछ, जखन लेखक अगस्त 1971मे भाभा नाभिकीय अनुसन्धान केन्द्र (BARC), मे प्रशिक्षु
वैज्ञानिक (Trainee scientist) रूपमे योगदान केलनि. ट्रेनिंग समाप्तिक पछाति लेखक भारतमे
विज्ञानक स्वदेशीकरण अभियानक अंतर्गत कलकत्तामे प्रस्तावित VEC Project (Variable Energy Cyclotron Project) क निर्माणक संग जुड़लाह. वैज्ञानिक जीवनक आगूक यात्रा,
शिक्षा, अनुसन्धान आ नव उपकरण एवं सॉफ्टवेयरक निर्माण एवं वैज्ञानिक आविष्कारक
चुनौतीपूर्ण जीवन छल. ई यात्रा मुम्बई (तत्कालीन बंबई)सँ आरंभ होइत, हुनका
अमेरिकाक लौरेन्स बर्कले राष्ट्रीय लेबोरेटरी, कैलिफोर्निया तथा फ्रान्सक गैनिल (प्रयोगशाला)
होइत अंततः अगिला तीन दशकमे स्विट्ज़रलैंड
स्थित एल एच सी (Large Hydron Collider) धरि लए केवल लइए टा नहि
गेलनि, बल्कि एहि दीर्घ अवधिमे हुनका विश्वभरिक अनेक विख्यात वैज्ञानिक सबहक संग
काज करबाक अवसर देलकनि. ओहि अवधिमे ई भौतिकीक अनेक मूलभूत वैज्ञानिक अनुसन्धानक
अतिरिक्त ब्रह्माण्डक उत्पत्ति सम्बन्धी अनुसन्धानक दुनू चरणक प्रयोगमे सहभागी भेलाह
एवं अविष्कारमे योगदान एवं नेतृत्वक अवसर भेटलनि. जर्मनीक ‘हेमहोज हम्बोल्ट रिसर्च
अवार्ड’ एवं ‘ब्रेकथ्रू लौरिएट’ सदृश प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारसँ सम्मान
विज्ञानमे हिनक योगदानेक परिणाम थिक. अपन कार्य कालमे ई अनेक राष्ट्र्रीय योजना
सबमे महवपूर्ण योगदान केलनि, जाहिमे छोट ग्रुपक स्तरसँ पैघ-सँ-पैघ विज्ञान आ पैघसँ
पैघ सहयोग (mega collaboration) सँ संचालित वैज्ञानिक प्रयोगमे सहभागिता आ नेतृत्वक अवसर
भेटलनि. एहि सबहक वर्णनक किछु अंश आम रूचिसँ बाहरक विषय थिक, तें, लेखक स्वयं एहि
पोथीक किछु अंशकेँ तारांकित कए ओहि अंशकेँ बीछि-बेराकए पढ़बाक सुझाव देने छथि. मुदा,
विज्ञानमे रूचि रखनिहार पाठक, आ छोट एवं पैघ स्तरक मूलभूत वैज्ञानिक प्रयोगक भीतरक
गतिविधि आ समस्यामे रूचि रखनिहार विद्यार्थीक हेतु पोथीक एहि अंशमे आयल अनेक रोचक
संस्मरण आ घटनाक चर्चा एहि पोथीक विशेष आकर्षण थिक. ओना एहि पोथीमे जाहि अनेक
विषयक वैज्ञानिक पक्षक विस्तार वर्णन भेल अछि, ओकर सबहक रोचक संस्मरण 2014 मे
प्रकाशित हिनक पोथी ‘किछु तीत मधुर’ मे सेहो भेल अछि.
पोथीक तेसर अंश, अंतिम तीन
अध्यायमे लेखक प्रयोगशालाक जीवन पछातिक अनुभवक चर्चा कयने छथि. ओहि अवधिमे , स्थापक
निदेशकक रूपमे ई भारत सरकारक परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) क अंतर्गत भुवनेश्वरमे नाइसर (NICER)-[National Institute of
Science Education and Research]- क स्थापना केलनि. राष्ट्रीय स्तरक नव संस्थाक स्थापनामे
अनेक प्रकारक प्रशासनिक चुनौती अबैत छैक; केन्द्र आ राज्य सरकारक अनेक स्तरसँ
तालमेल बैसाबए पड़ैत छैक, एवं संस्थाक प्रमुखकेँअनेक आकस्मिक परिस्थितिसँ निबटय
पड़ैत छैक. ‘भुवनेश्वरक प्रवास आ नाइसरक स्थापना’ नामक अध्यायमे ओहि सबहक रोचक वृत्तांत भेटत.
नवम अध्याय- भारत-आधारित न्यूट्रिनो वेधशालाक सपना- मे न्यूट्रिनो वेधशालाक
प्रोजेक्ट एवं राजनैतिक कारणसँ ओहि योजनाक अकालमृत्युक घटनाक चर्चा कयल गेल छैक.
एहि वर्णनसँ ई देखल जा सकैछ, जे समाजमे पसारल भ्रान्ति कोना महत्वाकांक्षी
अन्तर्राष्ट्रीय योजनाक भ्रूण ह्त्या कए दैछ.
अंतिम अध्यायमे लेखक ग्रामीण इलाकाक अपन आवासीय परिसरमे प्रयोगशाला खोलि कोना
जिज्ञासु छात्र लोकनिक मार्गदर्शन करैत रहथि, तकर संक्षिप्त वर्णन अछि. ओहि
प्रयोगशालाक माध्यमसँ लेखक अनेक मेधावी छात्रक मार्गदर्शन कयलनि. हिनक मार्गदर्शनसँ
अनेक छात्र लाभान्वित आ विभिन्न क्षेत्रमे सफल भेलाह. छात्रलोकनिक सफलता हिनक व्यक्तिगत
प्रयोगशालाक योगदानक सफल परिणामक प्रमाण थिक.
सारांशमे ‘प्रयोगशालाक
जीवन’, सरल बोधगम्य भाषामे लिखल मैथिलीक पहिल एहन पोथी थिक, जाहिमे स्थानीयसँ राष्ट्रीय,
छोटसँ विशाल, तथा बेसिकसँ विराट् विज्ञानक क्षेत्रक अनुसन्धानक विहंगम दृश्य
प्रस्तुत भेल अछि. एहि पोथीक केवल स्वागते टा नहि हेबाक चाही, ई पढ़ल जेबाक चाही.
मैथिलीमे अपना तरहक ई पहिले पोथी थिक. लेखक डाक्टर योगेन्द्र पाठक वियोगी एहि
प्रकाशनक हेतु साधुवादक पात्र छथि.
संदर्भ:
1.झा, गोविन्द. पसरैत
वृत्त: सँकुचैत बिन्दु, कर्णामृत, कोलकाता, 2005.
2. झा, कीर्तिनाथ. मैथिली
लेखनक एकफेंड़ा गाछकें चारू दिस चतरब आवश्यक छैक. https://kirtinath.blogspot.com/2023/09/blog-post.html accessed 20 Feb 2026.
प्रयोगशालाक जीवन
(राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समाजक चर्चाक संग किछु आत्मचर्चा)
लेखक डाक्टर योगेन्द्र पाठक वियोगी
प्रकाशक: pothi.com प्रथम संस्करण
2025
पृष्ठ संख्या :224; मूल्य रु.400
प्रप्तिस्थान: https://pothi.com