Tuesday, April 23, 2013

वसन्तोत्सव आ पांडिचेरी

वसन्तोत्सव आ पांडिचेरी 

एक वर्ष वसंत पंचमी दिन राजस्थान में रही .अबीर क कोन  कथा , सुच्चा बालु उडैत रहै . एही बेर पांडिचेरी में छलहूँ . एतहु कीकर केर झाड , तिक्ख रौद आ सुच्चा बालू छै. उत्तर भारतीय लोकनि धरि अबीर-गुलाल सं  अछूत छथि. इएह  थिकै एतुका वसंत .समुद्री प्रदेश में भरि  वर्ष ऋतु एके रंग रहैत  छै , प्रायः तें . ने केसर, ने कुसुम . तं , ऋतुपति कतय सँ अओताह .सांझ में , फेसबुक - विश्व फलक वा ग्लोबल कैनवास - देखल तं रंग में रंगल नेपाल मन मोहि लेलक .परिचित लोकक छवि , देखि मधुर स्मृति क अनुभूति भेल . अस्तु , अमृतं प्रिय दर्शनम . सएह .धिया-पूता कें फ़ोन केलियनि . जोधपुर फगुआ में सरबोर. बैंगलोर में अमिय - अदिति कतहु नहिं बहरैलाह . हमारा लोकनि मालपुआ खायल . मुदा रंग नहि लगाओल .सिंदुरो धरि नहि . पांडिचेरी क फगुआ एहने सही !

1 comment:

  1. Inspite of all efforts transliteration results in unacceptably high spelling errors.

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