Sunday, November 5, 2023

ककहरा का अभियान (समसामयिक हिन्दी कविता )

     ककहरा का अभियान

सत्तर बरस के लोग, समझते है सत्तर पार को नादान
इसलिए, चला रखा है,
उम्रदराज को ककहरा पढ़ाने का अभियान
क्योंकि,
तर्क चलता कहाँ ,
अगर मित्र ने
मान लिया बाबा वाक्य प्रमाण!
किन्तु हे, मित्र! न बाबा हैं चिर नवीन,
न आप ही हैं मोतियाबिन्दु से अभय !
इसलिए, बदलते रहिए चश्मे,
साफ रखिए कान।
क्या पता बदलते वक्त की आवाज,
और दीवारों पर लिखे शब्द से
रह जायें आप बेखबर,
क्योंकि,
बाबा
कभी भी
चोला भी बदल सकते हैं
और चाल भी!
(ककहरा का अर्थ = वर्णमाला )

No comments:

Post a Comment

अहाँक सम्मति चाही.Your valuable comments are welcome.

मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो