निर्मल वायु, स्वच्छ शीतल जल
आओर गाछ केर छाहरि
धरती कोर माइक थिक, अपन
कावेरी केर आँचर।
हमर जनम कमला कोसी लग
सिंधु- सियाङ् धरि धाङल,
कमला आइ क्षीण दुर्बल छथि
चारू कातेँ बान्हल।
केहन मन जमुनाकेँ हेतनि,
भेली फेनसँ म्लान,
कारी कांति मोहक दूषित छनि,
कोना कए बचबथु प्राण!
मनुख जाति सोदर संतति थिक
जेहने नदी, समीर
प्राण सभक एके संग बान्हल
जोड़ने तंतु महीन ।
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