कविकोकिल विद्यापति ठाकुरसँ ल'कए कविकुलगुरु रबीन्द्रनाथ ठाकुर धरि माई भाषाक बखान केने छथि। आधुनिक युगक मैथिललोकनि मैथिलीक लेल कतेक संघर्ष केलनि, से इतिहास विदित अछि। संघर्षक भिन्न-भिन्न चरणमे किछु-किछु सफलता तत्काल भेटैत गेलैनि। एहि सबमे सबसँ पैघ सफलता संविधानक आठम अनुसूचीमे मैथिलीक स्थान पायब छल। एहिमे बहुत समय लगलैक, मुदा, मैथिलीक सेनानीलोकनिक मनोरथ अंततः पूर भेलनि। एहि हेतु हमरालोकनि प्रधानमंत्री वाजपेयीजीक ऋणी तँ छीहे, हम ओहि मैथिली सेनानी लोकनिक समक्ष सेहो नतमस्तक छी जनिक लंबा संघर्षक कारण केन्द्र सरकार हमरालोकनिक उचित माङ पूरा केलक आ मैथिली संपूर्ण भारतीय भाषा सबहक बीच सम्माननीय स्थान पओलनि। लड़ाई एखनो बाँकी अछि। ई लड़ाई आंतरिक आ बाह्य दुनू छैक।
बाहरी लड़ाईमे प्रमुख अछि, मैथिलीक माध्यमसँ प्राथमिक शिक्षा। एहिमे सफलता भेटब बाँकी तँ अछिए,सफलता भेटबो करत वा नहि, कहब कठिन। कारण, मातृभाषामे शिक्षा तखने ने सफल हेतैक, जखन हमरालोकनि अपन-अपन नेनाकेँ मैथिलीक माध्यमसँ पढ़यबैक। अंग्रेजी माध्यमसँ पढ़ायब सफलताक सोपान बुझल जाइछ। मुदा, हमरालोकनि बिसरि जाइत छी, दुर्बल शिक्षा व्यवस्थामे किछुओ सबल नहि भए पबैत छैक।
कनेक विषयांतर हयत, मुदा तैओ। परसू हमरा ओतय एक गोट आठवां वर्ग छात्र अयलाह। हमरालेल ओ किछु औषध अनने रहथि। दाम ₹160 आ ₹140। पुछलियनि, जोड़ि कय कहू कतेक भेलैक? कहलनि, 'बाबा, हम मैथमे कनेक दुर्बल छी।' हम कागज कलम देलियनि, तखन ठीक जोड़लनि।
हमरा नहि लगैत अछि, अंग्रेजी माध्यमसँ पढ़निहार ई मैथिल छात्र अपन क्लासक दृष्टिएँ अंग्रेजीओमे दक्ष हेताह। मातृभाषाक माध्यमे शिक्षा भेने छात्रक अहित नहि, हिते होइत छैक।
आब पुनः विषय पर आबी। किन्तु, पहिने कनेक इतिहास : हम 1971 ई. मे पढ़बा लेल गामसँ दरभंगा पहुँचल रही। ओतय मित्र लोकनिक आग्रहसँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केर शाखामे जायब आरंभ कयल। ओही क्रममे एक दिन आदरणीय सुमन जी शाखामे एलखिन। दरभंगा मेडिकल कालेजक पुरान परिसरक कातहि गुरखा सैनिकक ट्रेनिङक बड़का मैदानमे रहैक शाखा लागल रहैक। सुमनजीक नाम के नहि सुनने रहनि। मैथिलीक प्रमुख खाम्हक रूपमे हमरा हुनका प्रति असीम श्रद्धाभावक संग अपेक्षा सेहो छल। हुनक गंगास्तुति पढ़ल छल।
मुदा, जखन ओ भाषण देलखिन तँ हमर मोन छोट भए गेल; सुमन जी हिन्दीमे भाषण देलखिन। कारण प्रायः जनसंघक तत्कालीन भाषानीति रहैक; तहिया जनसंघ मैथिली नहि अपनओने छल। दुर्भाग्यवश नहि, हमरालोकनिक अकर्मण्यताक कारण, आइओ मैथिली चुनावक मुद्दा तँ नहिए अछि, राजनीतिक मुद्दा धरि नहि बनल सकल।
आब असली गप पर आबी: दरभंगामे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघक शाखामे हिन्दीमे सुमनजीक भाषणसँ जेना हमर मोन छोट भेल छल, तहिना आइओ अछि।
आब मार्च 2026 मे आबी। आब समय बदलि गेलैए। आई मैथिली भारतक संविधानक आठम अनुच्छेदमे सम्मिलित भाषा सबहक बीच गौरवान्वित भए स्थापित छथि। आब जन प्रतिनिधिसबकेँ संसदमे मैथिलीमे भाषण देबामे लाज नहि होइत छनि। माने, सत्ये गणतंत्र भारतमे मैथिली बहुत दूर चलि एलीहे। तथापि, आइ पुनः हमर मन हुस अछि। कारण,मातृभाषाक प्रति हीनभावनाक मोटरीक भार आइओ हमरालोकनिक माथहि पर अछि।
अस्तु, मैथिली, साहित्य अकादेमीक पुरस्कार लेबय दिल्ली तँ गेलीह, किन्तु, पुरस्कार वितरण समारोहमे पुरस्कृत साहित्यकार मंच पर गेलाह, पुरस्कार लेलनि, सम्मान पओलनि, मुदा, अपने मैथिली आन भाषा सब-जकाँ मंचक उपर बैसबाक बदला, मंचक नीचहि दर्शक दीर्घमे मुह तकैत बैसलि रहि गेलीह, आ मुँह लटकौने गाम आपस घूरि एलीह।
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