प्रश्न
ऊँची उठती मूर्तियाँ
ठिगने होते लोग
कचरे चुनती कुमुदिनी
नयन भरे हैं नोर।
गली-गली में भक्त हैं
करते अत्याचार
चौराहे पर प्रश्न खड़ा
प्रभु, कब लोगे अवतार ?
कीर्तिनाथक आत्मालाप, आत्ममंथनक क्षणमें हमर मनक दर्पण थिक. 'Kirtinathak aatmalap' mirrors my mind in moments of reflection.
कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म लेख मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...
बहुत सटीक लिखल।
ReplyDeleteधन्यवाद। परिचयक जिज्ञासा अछि।
Deleteपत्थरों को पूज कर देवता तो बना दिया तुमने,
ReplyDeleteज़िंदा इंसानों की भी कोई हस्ती है क्या ?
और मंदिर मंदिर घूम घूम कर माथा टेका,
घर में एक कोने में बैठी वो बुढ़िया भी कभी दिखती है क्या ?
अद्भुत!
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