Sunday, June 21, 2026

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर लक्षण होइछ अनेक

जेहने विविध माटि अछि अप्पन

तेहने विविध अछि लोक,

भाषा मधुर, अनेको बोली

माटिओक रंग अनेक।

 

शोणित सभक एक रंग जहिना

श्वासो एके थीक,

आगि-पानि विभेद ने मानय

संशय तखन कथीक?

 

सूर्य-चान बसै छथि ऊपर

एके ताप आ छाया,

तखन मनुख जे भेद कराबय

बेचय स्वार्थ, ओ माया।

 

गाछ-वृक्ष नहि भेद करै अछि,

मेघ ने बाँटय पानि

मनुखक तखन बाँट-बखराकेँ,

लेबै कोना मानि!

 

मूर्ख रहौ, कपड़ा नहि तन पर,

धन नहि दैछ विवेक

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर

लक्षण होइछ अनेक।


चलिये संभलकर, कहिये खुलकर


Courtsey: The Statesman

पुल नया है, जरा संभल कर चलिये।
सरकार अपनी है
, खुल कर कहिये ।
रेत और मिट्टी से बना है पुल
, फौलाद नहीं है!
पुल गिरते हैं
, पल भर में सरकारें भी गिरती हैं,
आप की है सरकार
, आप इसके मोहताज नहीं हैं।
नहीं बनते हैं अस्पताल तो बोलिये
,
चले बेवजह बुलडोजर तो रोकिये।
बंद है आवाज
, तो साफ कीजिये गला,
सीने को बनाइये फौलादी
इस में ही है सबका भला।


Monday, June 8, 2026

मृत्युक भयसँ छोड़य नहि ओ

मृत्युक भयसँ छोड़य नहि ओ
मोर्चा बूझय प्राण
मुदा, सत्य केर खातिर
केओ नहि अरपय जान।
एहन बसात कोम्हरसँ आयल
बना गेल ई क्लीव
ताल ठोकि कय चढ़थि मंच पर
बंध्या छैन्हि शरीर।
रहय ओ, एतहि छल जनमल
नाङट आधा आङ
लाठी हाथ चलै छल तैओ
निर्भय गेलै प्राण।
कीड़ा केओ रहय, वा बिढ़नी
ओकरो होइछ दंश
डांड़ सोझ कय होइऔ सोझाँ
सुमिरत देशक वंश ।    

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