Sunday, June 21, 2026

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर लक्षण होइछ अनेक

जेहने विविध माटि अछि अप्पन

तेहने विविध अछि लोक,

भाषा मधुर, अनेको बोली

माटिओक रंग अनेक।

 

शोणित सभक एक रंग जहिना

श्वासो एके थीक,

आगि-पानि विभेद ने मानय

संशय तखन कथीक?

 

सूर्य-चान बसै छथि ऊपर

एके ताप आ छाया,

तखन मनुख जे भेद कराबय

बेचय स्वार्थ, ओ माया।

 

गाछ-वृक्ष नहि भेद करै अछि,

मेघ ने बाँटय पानि

मनुखक तखन बाँट-बखराकेँ,

लेबै कोना मानि!

 

मूर्ख रहौ, कपड़ा नहि तन पर,

धन नहि दैछ विवेक

आगि-पानि आ झूठ-साँच केर

लक्षण होइछ अनेक।


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