Monday, July 17, 2017

योरप यात्राक किछु आओर पन्ना



फ्रांस
बेल्जियम केर बेफरें शहर सं भोरे पेरिस ले बस सं विदा होइत गेलहुं. पेरिस धरि करीब अढ़ाइ घंटाक यात्रा. मुदा हमरा लोकनि सोझे पेरिस नहिं गेलहुं. शहर केर बाहरे शान्तिली ( स्थानीय लोककें  शांतीई कहैत सुनलियइ ) नामक गाओं. एकटा पैघ प्रासाद- फ़्रांसिसी भाषामें, सातो  . चारू तरफ़ गढ़-खइ, आ घोड़सार . विशाल बगीचा, मुदा फूल कत्तहु नहिं . पेरिस शहर केर बाहर ई भवन सुपरिचित टूरिस्ट स्पॉट थिक. फ़्रांसिसी टूर ऑपरेटर कहलनि, एहि भवनक बगीचाक अनुकरणमें फ्रांस केर रानी मेरी अन्तोनेत्ते वर्साय प्रासादक बगीचा बनबओने छलीह . मुदा, हमरा किछु आने पक्ष आकृष्ट केलक . भवन केर बाहर एक जोड़ा स्वस्थ आ सुदर्शन कारी शिकारी कुकुर . दोसर दिस बारहसिंगा . टूरिस्ट गाइड कहलनि , शिकार एतुका सामंत लोकनिक मुख्य पेशा छलनि . एहि सब ठाम शिकारी कुकुर सामंत लोकनिक सहचर छलनि. तें , कुकुरक मूर्ति नीक शिकारी कुत्ता  सबहक स्मारक थिकैक .

सातो शांतीई भेल एकटा प्रासाद- विशाल भवन. स्पष्ट छैक राजा वा सामन्त लोकनि जतय कतहु, जाहि भव्य भवन सब में रहैत छलाह तकर आकार एक व्यक्तिक आवश्यकता सं कतेक अधिक पैघ होइत छलैक . किन्तु, प्रत्येक व्यक्तिक आवश्यकता ओकर आवश्यकता पर आ दायित्व पर निर्भर करैछ ; भारतक राष्ट्रपति भवनमें  सेहो लगभग 360 टा कमरा छैक. अस्तु, सातो शांतीई सेहो एकटा सामन्तक भव्य आवासक प्रतीक थिक जाहिमें अनेक आवास-गृह, विशाल पुस्तकालय, चित्र-वीथी (फोटो गैलरी ), शस्त्रागार क संग मूर्तिकला, घरेलू उपस्कर, कपड़ा-लत्ता, आ भोग-विलासक  अनेक उपकरणक भव्य संग्रह छैक. वस्तुक विविधता आ संकलित वस्तु-जातक एतेक विस्तृत आयामकें देखि सकैत छी, थोड़ समयमें  सूक्ष्म दृष्टिए देखब आ बूझब असम्भव छैक.

सातो शांतीईक भ्रमण केर पछाति, ओहि परिसरमें टूर ऑपरेटर- थॉमस कुक - भोजनक व्यवस्था केने छलाह . कोनो वेजाय नहिं कहैत छैक, ह्रदय केर बाट पेट होइते जाइछ (way to the heart is through stomach). लगैत अछि,थॉमस-कुक एहि गप्पकें गेठरी बान्हि रखने छथि. सबठाम अपन रूचिक, पवित्र आ स्वादिष्ट भोजन सब कें नीक लगैत छैक. फैशन में भले कहियौक हम नव-नव भोजन चीखए  चाहैत छी , मुदा, संतुष्टि चिन्हले-जानल-स्वादले  भोजन में भेटैत छैक. तें, गरम-गरम पूड़ी, पुलाव आ आन सब किछुक आलावा अलफोंसो आमक रस एतय खूब हिट भेलैक. अंततः भरल पेट आ संतुष्ट मन. बस में बैसलहु आ बस पेरिस दिस विदा भेल.
फ्रांस केर पर्यटन कनेक संक्षिप्त बुझू. एक दिन दुपहरियामें पहुंचल रही आ दोसर दिन भोरहिं यूनाइटेड किंगडम (UK) केर लेल प्रस्थान. मोन में प्रश्न उठैछ एतबे काल में की सब देखब ! मुदा आब जखन आपस आबि गेलहुं तं लगैत अछि ओतबे काल में जे किछु देखलहु से अवश्य अविस्मरणीय.
सातो शांतीईक भ्रमण केर पछाति हमरा लोकनि सोझे दोसर पड़ाव छल सीन नदीपर नौका विहार. टूर ऑपरेटरकेर बस शांतीई गाओं सं सोझे एफिल टावर लग सीन नदीक किनेर पर उतारलक. कंडक्टेड-टूर केर बड़का गुण छैक- अपना कोनो चिन्ता नहिं. टूर ओपरटर पूरा ग्रुप ले टिकट किननहिं छलाह. बड़का मोटर बोटकेर ओपन डेक. सब कें अपन- अपन मनपसंद स्थान चुनबा ले पर्याप्त विकल्प. मोटर-बोट केर सीढ़ी-ए पर फोटोग्राफर पतियानी में ठाढ़, फोटो झिकैत.सबहक फोटो झिकल गेलैक. मुदा, अहाँकें  फोटो चाही तं टाका दियउ, फोटो ल लिअय . नहिं चाही, जुनि लिअय. डिजिटल फोटोमें फिल्म दूरि हेबाक, टाकाक बरबादी कोनो भय नहिं. सीन नदीक एहि नौका विहार सं आस पासक पेरिस देखबाक अवसर भेटल . एहि नदीक किनेर पर पेरिसवासी लोकनि कोना दिन बितबैत छथि तकरो किछु अनुभव भेल. जहिया सं ज्ञान-प्राण भेले, हमरा लोकनि पेरिसक नाम फैशनक पर्यायकेर रूप में सुनैत एलियैके. देखी, पेरिस में फैशन केहन छैक ! मुदा हमरा लगैत अछि फैशन एकटा दृष्टि थिकैक, जीवन पद्धति थिकैक जकरा केवल पहिनावा सं नहिं जोड़बाक चाही. एहि तर्क कें जं कनेक आगू धरि ल जाइ तं नेहरुक आलावा महात्मा गाँधी सेहो एकटा फैशनक प्रवर्तक छलाह. मात्र धोती, जनउ आ कान्हपर अंगपोछाक पहिरनामें गूढ़ शाश्त्रक चर्चा करैत हमरा लोकनि गामक पण्डित लोकनि सेहो एकटा एकटा फैशनकेर प्रतिनिधि छलाह, भले ओहि  फैशनक भौगोलिक आ सामयिक सीमा थोड़े छल होइक. अस्तु, हमरा लोकनि नाओपर चढ़बाक आ पेरिस देखबाक दुनू आनन्द लेल आ पुनः एफिल टावर लग आबि एहि विश्व प्रसिद्द टावर केर तेसर मंजिल धरि चढ़बाक पतियानी में लागि गेलहुं.
एफिल टावर : देस-कोस घुमनिहार आ पेपर-समाचार-पत्र पढ़निहार में अभावृत्तिए एहन केओ हेताह जे एफिल टावरक नाम सुनने नहिं होथि. तथापि नाम सुनबा, फोटो आ सिनेमामें देखबामें आ सद्यः एफिल टावरपर चढ़बाक अनुभव में अन्तर नहिं छैक से कोना कहब. की थिक एफिल टावर ? ई एकटा विश्वप्रसिद्ध ऊँच टावर थिक जकर नामकरणमें  'एफिल' गुस्ताव नामक इंजिनियरक नाम जुड़ल अछि ; एफिल गुस्ताव ओहि कम्पनीक स्वामी छलाह जे कम्पनी एहि टावरक निर्माण केने छल. एफिल टावर क निर्माण फ्रांसिसी क्रान्ति शताब्दीक अवसर पर 1889 ई. में विश्व-सम्मेलनक स्वागत द्वारक रूप में भेल छल. किन्तु, अपना युगमें ई टावर एकटा अजूबा इंजीनियरिंग कृतिक रूप में विश्व-प्रसिद्द भ गेल. आइ जखन विश्वक आन शहरकेर तं गप्प छोडू , फ्रांसहिं में एहि सं ऊँच अनेक टावर छैक, तखनो, विकिपीडियाक अनुसार  वर्ष 2015  में करीब 70 लाख यात्री एफिल टावर पर चढ़इत गेलाह. से भेल दुनियाक गप्प. हमरा लोकनि तं मेडिकल कॉलेज छात्रावस्था क जमानासं एकर यशोगाथा सुनि रहल छलहु.  हमरा लोकनिक टिकटमें टावरक तेसर महल धरि चढ़बाक अधिकार छल. लिफ्ट सं चढ़लहु. चारूकात घूमि जतय धरि नज़रि जायत बिना कोनो अवरोधक सम्पूर्ण पेरिस केर नज़ारा लियअ. मुदा रोचक लागल जे चोर उचक्का सब सेहो टिकट ल कय एफिल टावर पर चढ़इत अछि; ठाम-ठाम पर तकर चेतावनी- जेबकतरा सं सावधान ! धुर, महाराज एत्तहु  वएह हाल. ताहि पर लोकक मेला एहन जे सावधान नहिं रहब तं धक्कम-धुक्का सं बंचब असम्भव.
एफिल  टावरक भ्रमण केर पछाति हमरा लोकनि विश्व-प्रसिद्द लौव्रे म्यूजियम (louvre museum) गेलहुं. लौव्रे-म्यूजियम म्यूजियमके देखबाले एक दिन पर्याप्त नहिं, प्रायः एक मासहु नहिं. म्यूजियम केर संकलन एतेक विविध आ संकलित वस्तुक संख्या एतेक अधिक छैक जे ओकरा सबकें देखब आ बुझब ने एक व्यक्तिक रूचिमें निहित भ सकैत छैक आ ने एक व्यक्ति एकटा जीवनमें विविधाक एतेक विस्तृत आयामके अपन रूचिमें समेटि-ए सकैत अछि. मिस्रकेर प्रागैतिहासिक छोट-छोट मूर्ति सं ल कय, विशालतम स्थापत्य धरिक विभिन्नताक क बीच लेओनार्दो दा विंसीक मोनालिसाक पेंटिंग एतुका सब सं पैघ आकर्षण थिक. एहि संग्रहालयमें लोकक मेलामें एक दोसराक संग छूटब, कोनो वीथी वा हालमें भुतिया जायब खूब सम्भव छैक. तथापि, पैघ आकार आ धार्मिक आस्था सं दूर हेबाक कारणें लौव्रेमें वैटिकन सिटीक तुलनामें एतय धक्कम-धुक्की नहिं-ए बराबरि.  किन्तु, एहन विश्वप्रसिद्ध संग्रहालयमें फोटो झिकबाक कोनो मनाही नहिं, से सब कें नीक लगैत छैक. ओना तं एखनुक युगमें  विश्वक कोन एहन संग्रहालय नहिं जकर भीतर केर टूर (virtual tour) इन्टरनेट पर नहिं क सकैत छी. तथापि, सिनेमामें देखब, इन्टरनेट पर टूर करब आ प्रत्यक्ष देखबामें बड अंतर छैक.
लौव्रे-म्यूजियम (louvre museum) देखलाक पछाति वर्साय प्रासाद देखय गेल रही. वर्साय प्रासादकेर वर्णनकरब सरल नहिं. प्रायः आब तकर आवश्यकता सेहो नहिं. इन्टरनेटकेर वेब-पेज पर सूचना उपलब्ध छैक. किन्तु एखनो सब तं ने इन्टरनेट पर हवाखोरी करै-ए आ' ने सब इन्टरनेट सं परिचिते. तें, बहुत संक्षेपमें एतबा कहि सकैत छी, पेरिसक वर्साय प्रासाद आकार, ऐश्वर्य, आ ऐतिहासिकतामें विश्वप्रसिद्द अछि. ई वएह प्रासाद थिक जकर ऐश्वर्य, आ तत्कालीन राजाक निरंकुश जीवन शैली, फ़्रांसिसी जनताक असंतोष आ फ्रांसिसी क्रान्तिक कारण बनल छल आ विद्रोहक सुनगैत चिनगी अंततः एहन ज्वालामुखीक रूप लेलक जे राजा लुइस 16म आ रानी मेरी अन्तोनेत्ते क सार्वजनिक फांसीक पछाति-ए मिझायल. ओ भेल ऐतिहासिक प्रकरण. किन्तु, वर्साय पैलेस ओहुना अनेक ऐतिहासिक शीर्ष-सम्मलेन आ  कालजयी सन्धि सबहक प्रत्यक्षदर्शी थिक. प्रथम विश्वयुद्धक पछातिक प्रसिद्द वर्साय-सन्धि (treaty of Verseilles) एही वर्साय-पैलेस केर शीश-महलमें भेल छल. मानल जाइछ, वर्साय-सन्धिए (treaty of Verseilles) ओ घटना थिक जाहिमें द्वितीय विश्व-युद्धक बीजारोपण भेल छल. एखनहु, एहि शीश-महल में कतेक राजनेताक सार्वजनिक सम्मान होइछ आ कतेक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मलेनक आयोजन होइछ.                                              
एहि दुनू विश्व-पर्यटन स्थलक दर्शनक बीचक बाट कॉन्कर्ड-स्क्वायरक, सांज एलिजी (Champs Elysees), आ विजय द्वार (The Arc de Triomphe de l'Étoile) सबटा बाटे बाट देखैत गेलहुं. कॉन्कर्ड-स्क्वायरक वएह ऐतिहासिक स्थल थिक  राजा लुइस 16म आ रानी मेरी अन्तोनेत्ते कें सार्वजनिक रूपें फांसीक देल गेल रहैक. विजय द्वार (The Arc de Triomphe de l'Étoile) कें दिल्लीक इण्डिया गेट जकां बूझि सकैत छी ; पेरिस केर चार्ल्स द' गॉल चौक परक ई द्वार  फ्रांसिसी क्रान्तिक शहीद  आ नेपोलियनक नेतृत्वमें भेल युद्धसबमें वीर-गति प्राप्त सैनिक लोकनिक  स्मारक थिक. द्वारिक भीतर, छाहरि में अज्ञातनामा वीर-सैनिक समाधि  छैक जतय श्रद्धाक ज्योति अनवरत प्रज्वलित रहैछ .
एक दिनुक यात्रा ले एतेक काफी. आन ठाम रहितहु तं कतेक गोटे थाकि कय थस खा लेने रहितथि. किन्तु, योरप के अनुकूल जलवायु आ टूर ऑपरेटर केर व्यवस्था कतहु आयासक अनुभव होमय नहिं देलक.एकटा गप्प आओर: जाहि में मोन लागि गेल ताहि सं ने जल्दी मोन अघाइत छैक आ ने देह थकैत  छैक. बेमोनक काजमें थकन, नींद आ मोन अकछायब एकदम स्वाभाविक. सम्पूर्ण योरपक यात्रामें आब इंगलैंडहिं टा बांकी अछि. मुदा, पेरिस केर होटल -नोवोटेल- नीक नहिं लागल. पहिल बेर फल-मूलक क्वालिटी अनेक उन्नैस बुझबामें आयल. बाथ-रूम छोट. टब असुविधाजनक. ओढ़ना-बिछाओन ठीक. करू आराम. किन्तु, हमरा सब-सन जे यात्री लोकनि लीडो-शो देखबाक हेतु नाम लिखौने रहथि तनिका हेतु रतुका भोजन केर पछाति आओरो प्रोग्राम रहैक; लीडो-शो केर टिकट 100 यूरो, माने करीब दस हज़ार टाका. बड बढ़िया. जीवन में पहिल बेर पेरिस में छी. लीडो शो सेहो नहिं देखब तं अयबे किएक केलहुं. अस्तु, भोजन-भातक पछाति कनेक विश्राम भेलैक. निर्धारित समयपर सब गोटे शो जयबा ले तैयार भेलहुँ. टूर गाइड दिनहिं सं कतेक बेर कहने छलाह, आई राति में विशेष प्रोग्राम छैक. किन्तु, पुछलापर बाजथि नहिं. अंततः, भेद लीडो शो जेबाकाल बाट में खुजल. रातिक करीब दस बजे एफिल टावरक लाइट एकाएक जराओल जाइछ. सम्पूर्ण टावर स्वर्णमय आभामें अपूर्व रंग लगैछ . ई अनुभव तखनहिं सम्भव जं रोशनी बरबा सं पूर्व टावर लग पहुंचि गेल रही. हमरा लोकनि टूर गाइड सचढ़ छलाह सब किछु क्लॉक-वर्क- घड़ीक काँटा- जकां. हमरा लोकनि समय पर एफिल टावर लग पहुँचलहु. एफिल टावरक रातुक आभा मोन कें मुग्ध क देलक.किन्तु एहि प्रकरण एकटा आओर अनुभव भेल. जूनियर टूर ऑपरेटर केर इच्छा रहनि जे बस चालक हमरा लोकनिकें टावरक ठीक सामने उतारय जाहि सं दिन भारिक थाकल यात्रीलोकनि के बेसी चलय नहिं पड़नि, आ थॉमस कुक कें यश-यश भ जाइक. किन्तु, बस चालक किन्नहु नहिं मानलकनि. योरपमें सब ठाम  बस ठाढ़ हेबाक नियत स्थान छैक. नियत स्थान छोडि बस-कार कें आन  ठाम ठाढ़ करब दंडनीय छैक. ततबे नहिं, क़ानूनक उल्लंघनसं  ड्राईवरकेर जीविका धरि पर आघात पहुंचि सकैछ. अस्तु, ड्राईवर कें जे करब उचित छलनि, केलनि.कारण योरप-अमेरिका में ने अहां अपन धौंस जमा सकैत छियैक, आ ने, ओतय लोकक आत्म सम्मानकें आजीविकासं जोड़बाक परिपाटी छैक; जकर जे काज छैक ओकर मालिक ओएह भेल. ओहुना,  हमरा लोकनि कें कोनो असुविधा नहिं भेल. जगमगाइत स्वर्णिम आभामें नहाइत एफिल टावरकें भरि मोन देखलहु. फोटोग्राफी भेलैक, आ पुनः सब गोटे बस में जमा भेलहु आ आगू चललहु लीडो शो.
लीडो-शो: पेरिस केर लीडो शो विश्व-प्रसिद्द लाइव शो थिक जाहिमें स्टैंड-अप-कॉमेडी सं ल कय, कैबरे-शो धरि आ जिमनास्टिक्स सं ल कय सांस्कृतिक झांकी सब किछु भेटत. हमरा लोकनि तं एहि शो ले बहुत उत्साहित रही. शो केर स्थान सेहो केन्द्रीय पेरिस में सांज-एलिजी-ए पर छैक. भीतरकेर व्यवस्था एक्सक्लुसिव क्लब जकां. मद्धिम रोशनी में छोट-छोट समूह में बैसबाक व्यवस्था. स्वागतमें एक ग्लास शैम्पैन; दू गिलास रहितैक तं आओर नीक ! मुदा, हमरा तकर मलाल नहिं, हमर पत्नी, रूपमकें शैम्पेनकेर स्वाद पसिन्न नहिं छनि. तें ओ सेलिब्रेशनमें एक चुस्की ल मधुपर्क केलनि आ हम दुनू ग्लास आस्वादपूर्वक पीबि लेल.किछुए काल में शो आरम्भ भेलैक सांस्कृतिक शो सं . किछु नाच गाना-, ग्रुप शो. बीच में भव्य कैबरे; आम कैबरे जाहि वीभत्सताक दिस संकेत करैछ तकर छूति नहिं. बीच-बीच में मंचकेर अद्भुत परिवर्तन. कतय नृत्य आ तुरत आइस स्केटिंग. दर्शक केर संग कॉमेडी. कतहु गणपतिक आगमन. अंतमें हाथी आ महावत. हमरा विचारें एखनुक युग में ने लीडो शो कोनो अजूबा आ ने कैबरे किछु आश्चर्यनक. एहि प्रकारक शो आब विश्वकेर अनेक भाग में होइत छैक जे लोक घर बैसल देखैत अछि. कैबरे कें छोडि दी तं बैंकाक-थाईलैंड केर सियाम-निरामित शो सेहो एहि कोटिक थिक, मुदा एहन नहिं. किन्तु, पेरिस एलहु आ लीडो-शो नहिं देखल तं कदाचित कचोट ने रहि जाय तें देखि अवश्य ली. तथापि, प्रत्यक्ष लीडो शो देखबामें आनंद नहिं आयल से कोना कहब. विद्यार्थी जीवन में दरभंगा 1970 दशकमें उमा-सोसाइटी-नेशनल-लाइट हाउस-पूनम थियेटर में सवा तीन रुपैयामें बालकोनीमें बैसि सिनेमा देखैत रही. सिंघाडा-पकौड़ा खाई. बाद में पटना-दिल्ली-बंगलोर सब ठामक कार्यक्रम देखल. किन्तु, लीडो शो-सन शो तं देखब एखन धरि बांकीए छल. अस्तु, पेरिसक लीडो शो एकटा नव अनुभव भेल. 
लीडो शो करीब मध्यरात्रिक लगीच समाप्त भेलैक. मुदा मध्य रात्रिमें तं पेरिस जगैत अछि. तय सूर्य डूबले पर, मध्य रात्रि बितलेपर  तं पेरिस में दिन होइत छैक ! तथापि, पेरिस-बाइ-नाईट फेर कहियो ! आइ  हमरा लोकनिक गाड़ी लगहिंमें प्रतीक्षारत छल, तें बाटे-बाट जे देखबामें आयल, देखल. आ फेर होटल आबि विश्राम. भोरे यू के क हेतु ट्रेन पकड़बाक अछि.


 फ्रांस सं यूके(UK) हेतु यात्रा : योरप यात्राक अंतिम चरण
योरप में अयला करीब दू हफ्ता पुरबाले अछि. एखन धरिक सब यात्रा बसहिं सं भेलैये. आब यात्रा ट्रेन सं हेतैक. UK एकटा द्वीप थिक. आन कोनो देश सं संपर्क नहिं से नहिं सकैत छियैक, किन्तु, से  UK क हेतु छातीक कांट, आयरलैंड गणराज्यक कारण. अन्यथा UK एसगरे अछि, एसगरे रहैत. अतः, स्पष्ट छैक आयरलैंड गणराज्यक अलावा एहि देसकें आन कोनो देश सं भूमिक संपर्क नहिं . सदतानि सं चल अबैत ई स्थिति 1994 में बदलि गेलैक जखन फ्रांस आ UK भूमिगत रेल-मार्ग यूरो-टनल सं जुड़ल. ई भूमिगत रेलमार्ग फ्रांस आ UK केर बीचक समुद्र- इंगलिश चैनल - केर नीचाक भूमिक सतह सं कतेक नीचा होइत डबल रेलवे लाइन सं जुड़ल अछि. यद्यपि इंगलैंड-फ्रांसक बीचक समुद्रक (इंगलिश चैनल) पाट करीब  51 कि. मी. मात्र छैक किन्तु, हमरा लोकनि पेरिस सं लंदन पहुँचबा में करीब साढ़े तीन घंटा लागि गेल; बहुत रास समय इमीग्रेशन आ समय सं पहिने पहुँचबाक बाध्यता दुआरे सेहो. दोसर पेरिस केर घड़ीक समय लंदन सं 1 घंटा पूर्वक हिसाबे चलैत छैक. पेरिस केर स्टेशन गार दे नोर्ड सं ट्रेन में चढ़ब अन्तर्राष्ट्रीय यात्रा भेल तें एतय यात्री लोकनि के प्रब्रजन ( immigration ) केर औपचारिकता. UK क अतिरिक्त योरपकेर आन सब देशक यात्राले एकहिं टा वीसा Schengen Visa चाही. केवल  UK क यात्राले सब कें फूट ब्रिटिश वीसा चाही, कारण यूरोपियन यूनियन में होइतो ( वर्ष 2014 में ) ब्रिटेन अपन राष्ट्रिय  सीमाकें  अनका सब सं फूट घेड़ने-बेढ़ने अछि. अस्तु, स्टेशन पर वीसाक जांच भेल. कनेक पूछ-ताछ आ पासपोर्ट पर ब्रिटिश इमीग्रेशन ठप्पा लागल. इमीग्रेशनक पछाति प्लेटफार्म पर अयलहुं. ट्रेन बुझू , नीक क्वालिटीक मेट्रो ट्रेन आ चेयर-कार. ट्रेन नीक गतिसं चलैत छैक. आस-पासक परिदृश्यपर नजरि गडौने रही. बीच-बीचमें स्टेशन सब एलैक. मोन लागल छल, देखियैक, कोना, कतय ट्रेन  समुद्रक तर पहुँचैत छैक. किन्तु, से कतहु नजरि नहिं पड़ल. ट्रेन जखन सुरंगमें पैसलैक से बुझलियैक. ट्रेन जखन भूमिगत मार्ग सं बहरयलैक तं हमरा लोकनि UK क भूमि में रही. हमरा लोकनिक टिकट सेंट पान्क्रास अन्तर्राष्ट्रीय स्टेशनक छल, ओत्तहि उतरलहु. सब गोटे अपन-अपन सामान उतारल आ आगू  बढ़लहु.
आब किछु  नव अनुभव. वैश्वीकरणक एहि युगमें सम्पूर्ण विश्व एकीकृत भेल जा रहल छैक. सबठाम एके रंग, एके ढंग. भारतकेर स्तर पर देखी तं छोला-भटूरा आ इडली-दोसा कश्मीर सं कन्याकुमारी तक भेटत . आ विश्वस्तर पर देखी सब ठाम वएह मैक-बर्गर आ के ऍफ़ सि चिकन, पेप्सी, आ कोका-कोला. पहिरनामें जीन्स आ जूतामें वएह रीबोक, प्यूमा आ अडिडास. शहर सब में प्यासे मरि जायब कतहु सड़कपर पीबाक पानि नहिं. न्यू यॉर्क एयरपोर्ट पर पानि पीबाक स्थान देखलिएक तं पानि बहरयबाक टोंटी नदारद. पानि कोना पीयब. आब दिल्लीअहु एयरपोर्ट पर वएह तमाशा. अस्तु, देखिएक UK में की नव भेटैत अछि. एतय रेलवे स्टेशनहिं पर एकटा नव चीज देखलियैक. समानक ट्राली लेब तं 1 पाउंडक सिक्का ओहि सिकड़ीक छेद में दियउ जाहि सं ट्राली सब एक-दोसरा सं बान्हल छैक. मुदा, अजगुत गप्प ई लागल जे अपन समान उतारलापर जं ट्रालीके नियत स्थान पर राखि आउ आ ट्रालीकें ओतय राखल राखल आओर ट्राली सबहक जंजीर में जोडि दियौक तं ट्रालीक जाहि छेदमें जंजीर फिट होइत छैक तकर दोसर भागसं 1 पाउंडक सिक्का वापस भेटि जायत. ई भेलैक ने गप्प. ई हमरा अद्भुत लागल. आखिर केओ तं एहि में बुद्धि लगौने हेतैक. हं, ब्रिटिश सरकार जं ब्रिटिश 1 पाउंडक सिक्काक आकार एकाएक बदलि दैक तं ई पद्धति भरिए राति में बेकार भ जेतैक. मुदा, ब्रिटेन में चमड़ाक सिक्का चलयबाक ई पद्धति एखनि बाकीं छैक; आखिर ब्रिटेन अनेरे विश्वविजेता राष्ट्र बनल छल !
रेलवे स्टेशन सं हमरा लोकनि बससं शहर दिस विदा भेलहुँ. दुपहरिया भ गेल रहैक, पहिने भोजन तं होइक. भोजन ले जतय गेलहुं, देखला सं लागल, भीड़-भाड सं दूर, कोनो साफ़ सुथरा शहरक छोट इलाकामें छी. छोट-सन रेस्टोरेंट. भारतीय भोजन आ हमरे लोकनिक  समूह. भोजनक पछाति लोकल टूर केर प्रोग्राम छलैक. बेसी किछु तं बाटे-बाट देखैत जाउ. जेना लॉर्ड्स केर क्रिकेट केर मैदान आ इलाका. मैडम तुसाद आ विम्बेल्डन  टेनिस क्लब. विम्बेल्डन टेनिस क्लब में भितरो जाइत गेलहुं. मैडम तुसाद तं विश्वप्रसिद्द व्यक्तित्व लोकनिक मोमक बनल मूर्ति सब ले प्रसिद्द अछि. किन्तु, आब अनेक ठाम किछु-किछु आओर चीज सब जोड़ल गेलैये. एतय म्यूजियमक भीतरे ब्रिटेनकेर इतिहासक एकटा झांकी देखाओल गेल. गाड़ीपर बैसू आ नजारा लियअ. एकर अलावा ओतय एकटा 4-D शो सेहो रहैक. की थिक ई 4-D  शो ? एहिमें सिमेमा-शो 3-D चश्मा सं देखू आ जीव-जन्तु- गोला-बारूद कें सोझे नाक दिस अबैत अनुभव करू आ रोमांचित होउ. मुदा, ई भेल 3-D. जं बरखा अबैक दृश्यमें पानिक फुहार देह पर पडय, योद्धाक मुक्का, भले हल्लुके सं, मुदा छाती आ पीठ पर बजरय तं ओ भेल 4-D. भेलै. इहो अनुभव कयल. तकर पछाति हमरा लोकनि विम्बेल्डन स्टेडियम देखल आ विजेता लोकनि जाहि मंचपर बैसि प्रेसकें संबोधित करैत छथि ताहू पर बैसि फोटो खिचाओल. ई भेलैक व्यापार. ककरो ई मोन में एलैये जे दरभंगा महाराजाक प्रासादक रखरखाव ले टिकट बेचीं आ हुनक ड्राविंग रूम में बैसि फोटो झिकयबाले फूट टिकट बेची. ई बुद्धि गोरा लोकनि कें छैक. ओ सब महलकेर अलावा महलकेर भीतरक  भूत-प्रेत कें सेहो टूरिस्ट सर्किट में सम्मिलित केने अछि. फेकू पैसा आ देखू तमाशा ! हमरा लोकनि कें एहि में बहुत दिन लागत. पहिने हमरा लोकनि अपन विरासत कें तं चीन्ही, ओकरा प्रति गौरव बोध होअय. ओकर संरक्षण करी, पर्यटन केर सुविधा बढ़ाबी तखन ने विदेशी सब गाम-घरमें आओत, एतुका अजगुत वस्तु सब कें देखत आ गाम-घरक रोजगार बढ़तैक,     आमदनी बढ़तैक. मुदा, एहि सब में एखन बहुत बाधा छैक, जाहि में पहिल थिक आधारभूत संरचनाक अभाव, शिक्षा आ व्यवसयिका बुद्धि. मुदा, एहि सब सं जहिना आर्थिक लाभ केर सम्भावना छैक , तहिना गाम-घरपर पर्यटन सं हमरा लोकनि सं विपरीत आयातित सामजिक-सांस्कृतिक दुष्प्रभावक खतरा सेहो छैक. मुदा, हमरा लोकनि अपना शहर-नगरक विशिष्टतासं कोना लाभ उठाबी से समाजकें सोचि उचित कदम उठाबहिं पड़तैक. 
भोजनकेर पछाति लन्दनकेर भ्रमण शुरू भेलैक. स्वतंत्रता पूर्वक , वा हमरा लोकनि-सन स्वतंत्रताक तुरत पछातिक भारतीय पीढ़ी, भले इंगलैंड नहिं गेल हो मुदा, इंगलैंडक दू चारि टा शहर, इंगलैंडक कवि-साहित्यकार, राजनेताक नाम, दर्शनीय स्थलक नाम सं परिचय अवश्य हयतैक. ताहि में हमरा लोकनि मेडिकल कॉलेज में पढ़ने छी. सत्तरिक दशक में मेडिकल शिक्षाक अधिकतर पुस्तक इंगलैंडहिं सं छपि कय अबैत रहैक , किछु अमेरिका सं सेहो; तहिया सस्ता थोक उत्पादकक रूप में चीन केर उदय नहिं भेल रहैक. तें, हमरा लोकनि भले भारतीय अस्पताल सबहक नाम नहिं सुनने रही, लंदनक सेंट थॉमस, मूरफील्ड, रॉयल इनफर्मरी- सन अस्पतालक नाम अवश्य सुनने रही. अस्तु, लंदन कें अपने आँखिए देखबाक मनोरथ पूर भेल. यद्यपि, हमरा लोकनिक युगक डाक्टर ले लंदन में काज करब वा पढ़ब बड़का गप्प नहिं रहैक. किन्तु हमरा लोकनि ने तकर सपना देखने रही आ ने साकार केलहुं. अतः आइ आम पर्यटक जकां बस सं लंदन में भ्रमण होइ. गाइड बाटें-बाट देखबैत गेलाह, लंदन ब्रिज, वेस्टमिन्स्टर, नोट्टिंग हिल, ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट, टाटा हाउस, 'स्क्वायर माइल' इत्यादि, इत्यादि. मुदा, पहिल ठहराव भेलैक 'लंदन आइ' लग. 'लंदन आइ' एकटा विशाल फेरिस-व्हील थिक जाहिपर बैसि सम्पूर्ण लंदन केर विहंगम दृश्य देखि सकैत छी. थेम्स नदीक एक कछेर पर वेस्टमिन्स्टर- पार्लियामेंट हाउस छैक आ  दोसर दिस लंदन-आइ. अतः, एहि जायंट- व्हील पर सं पार्लियामेंट बिल्डिंग,टावर म्यूजियम, लंदन ब्रिज सब किछु देखबा में अबैत छैक. एहि जायंट=व्हील पर गोड बीसेक कैप्सूल-नुमा केबिन छैक. व्हीलकेर संगे-संग सब किछु तेना घूमैछ जे सवारी कें चढ़बा-उतरबाले व्हीलके रोकय नहिं पड़ैत छैक. लंदन-आइकेर भ्रमणकेर पछाति हमरा लोकनि होटल आपस गेलहुं: रैडिसन-ब्लू-एड्वरडियन,हीथ्रो. एहि सबठाम थॉमस-कुक केर यात्रीले अलग निर्धारित स्थान पर रतुका भोजनक व्यवस्था छलैक. रातुक भोजन भेलैक आ विश्राम केलहुं.

लंदन में दोसर दिन
अजुका भ्रमण लंदन-टावर म्यूजियम सं आरम्भ भेलैक. टावर म्यूजियम पार्लियामेंट बिल्डिंग  केर समीपहिं वएह संग्रहालय थिक जतय ब्रिटिश महारानीकेर कोहिनूर हीरा जडल राजमुकुट राखल छनि. टावर म्यूजियमक  किलाक अपन इतिहास छैक. एखन ई किला सेनाक अधीन अछि. समय-समयपर एहि किला में राज-निवास, कारागार, चिड़ियाघर, खजाना, आ अपराधी लोकनिक वलिवेदी ( फांसी देबाक स्थान ) सब किछु छलैक. किन्तु एखन एतुका म्यूजियम  मात्र प्रमुख आकर्षण थिक. म्यूजियमक बाहर सब सं पहिने  लोहाक तार सं बनल जंगली जीव-जन्तु, जेना, बाघ-सिंह-भालु, सबहक आकृति भेटत. सैनिक साज-सामनक नाम पर किछु पुरान तोपखाना. अर्थात आब देखबाक वस्तुमें एतय केवल राष्ट्राध्यक्षक बेशकीमती मुकुटसब छनि जे ओ लोकनि विभिन्न अवसर पर पहिरैत आयल छथि. कडा सुरक्षाक बीच सबटा मुकुट सब स्लो-मूविंग कोन्वेयर बेल्टपर चलैत छैक. प्रदर्शित बहुमूल्य रत्न-जटित राजमुकुट सब कें  केओ पर्यटक लोकनि  आश्चर्य सं, केओ ईर्ष्या सं, तं केओ घृणा सं देखैत छथि. कारण, राजा-रानीक जीवन आ ऐश्वर्य आ गाथा जतबे मायावी लगैछ, ओकर पाछू प्रायः ततबे छल-छद्म-ईर्ष्या-हिंसा आ मानवीय अधिकारक हननकेर इतिहास होइछ. तें, दूरक चानकें वा राजा-रानीकें जाहि कोनो मनोभाव सं देखी, सबकेर किछु ने किछु तर्कसंगतता अवश्य छैक. अस्तु, हमरो लोकनि टावर म्यूजियम देखल आ बाहर अयलहुं. टावर म्यूजियम देखलाक बाद हमरा लोकनि दूरहिं सं ऐतिहासिक लंदन ब्रिज सेहो देखल. काल्हि टूर समाप्त भ जेतैक. हमरा लोकनि सबगोटे अपन-अपन बाट धरब. तें, टावर म्यूजियम आ लंदन ब्रिज केर पृष्ठभूमि में ग्रुप फोटोग्राफी भेलैक, हँसी मजाक भेलैक, गप्प-सप्प भेलैक. मुदा, एखन धरि हमरा लोकनिकें ब्रिटिश समाजक अनुशासन सं सोझ-सोझ भेंट नहिं भेल छल. टावर म्यूजियम भ्रमण केर पछाति पता लागल जे आइ टूर आरम्भ हयबामें करीब पांच मिनटकेर बिलम्ब भ गेल रहैक. भारत में तं 5 मिनट किछु नहिं थिकैक. किन्तु, गोरा समाजमें समयक बड महत्व छैक; 5 मिनट वा घंटाभरि , बिलम्ब बिलम्ब थिकैक. तें, अस्वीकार्य. अस्तु, हमरा लोकनिक स्थानीय गाइड, एकटा वयसाहु महिला, एहि बिलम्ब सं असंतुष्ट छलीह. अपन समयकें बचेंबाले हुनक प्रस्ताव रहनि जे ट्राफलगर स्क्वायरक भ्रमण केर छोडि देल जाय. हमरा लोकनि लग पन्द्रह दिन यात्रा में लंदन ले केवल दू दिन छल. टूर ऑपरेटर पसोपेश में पडि गेलाह. कहय लगलखिन, ' भारत सं आयल लोक कें ट्राफलगर स्क्वायरे नहिं देखेबैक, तं, की देखेबैक ! मुदा, महिला-गाइड टूर-ऑपरेटरक गप्प कें सोझे मानबाले तैयार नहिं. विलम्ब भ गेलैक, ओ समय पर वापस गेले ताकथि. खैर, बहुत मोहेजरोक पछाति गाइड तैयार भेलीह आ हमरा लोकनिकें  ट्राफलगर स्क्वायरक दर्शन भेल. 

ओना ट्राफलगर स्क्वायर वा आन  कोनो स्क्वायर थिकैक की ? एकटा चौराहा. छोट वा पैघ. तखन स्थान सं जुड़ल इतिहास स्थानकें आभामंडित करैछ. तहिना ट्राफलगर स्क्वायरक सेहो इतिहास छैक, यशोगाथा छैक, युद्धमें विजयक गौरवमय इतिहास छैक. रूचि हो तं सुनू, आओर रूचि हो तं पढ़ू-गुनू. चकित होउ. एखन तं एहि चौराहापर एकटा विजय स्तंभ छैक आ सेनानायक एडमिरल नेल्सनक मूर्ति. मुदा, एहि सबहक बीच दालि-भातमें मूसलचंद,एक कात, नील रंगक बड़का टा मुर्गा सेहो पीठासीन अछि. सुनैत छी, रूस्टर फ्रान्सक राष्ट्रिय पक्षी थिकैक, आ निल रंग सेहो फ्रांसहिंक प्रतीक थिकैक. ताहिपर इंगलैंड आ फ्रान्समें सब दिन सं छत्तीसकेर आंकड़ा. तें ने कहल , दालि-भातमें मूसलचंद. किन्तु, समय बदलैत छैक, समाज बदलैत छैक, सामजिक मान्यता आ सहिष्णुता-असहिष्णुता आ सौन्दर्यबोध बदलैत छैक. हमरा नहिं लगैत अछि, विंस्टन चर्चिलकेर युगक साम्राज्यवादी ब्रिटेन ट्राफलगर स्क्वायरमें सेनानायक लोकनिक एहि वीथीमें फ्रांसक प्रतीक एहि रंगीन मुर्गाकें बर्दाश्त करैत . किन्तु आब ने साम्राज्य छैक आ ने साम्राज्यवादी प्रशासन. नव साम्राज्यवादी- विश्व व्यापारी-  लोकनिमें प्रायः आब सांकेतिकताक ओतेक महत्व नहिं छैक. अस्तु, हे मुर्गा, योद्धा सबहक अभामंडित चतुस्पाटी-चौकक एक कात तोंहों कुक-डू-कू करैत रहह ! एतय अयानिहार पर्यटक सबहक बीच जर्मन कलाकारक यशोगाथा पसरतनि आ नेना-भुटका कें कौतूहल हेतैक.
लंदन केर यात्रामें शहरक बीच बसमें जाइत बहुत किछु आकृष्ट कयलक. किन्तु, लंदन ब्रिज, पार्लियामेंट हाउस केर अलावा कोनो छवि चिन्हल नहिं छल. सुनल नाम सब बहुत छल. ताहि में हेरोड्स नामक डिपार्टमेंट स्टोर्स, सेल्फ्रिद्ज स्टोर्स, रॉयल अल्बर्ट हॉलक ऑडिटोरियम आदि छलैक. एहि सब म सं टूर ऑपरेटर हमरा सब कें सेल्फ्रिद्ज-स्टोर्सक भीतर ल गेलाह. मुदा, स्टोर्स केर बाहर पहिने हमरा लोकनि कें ताजा फल में लाल-लाल चेरी पर लोभ भ गेल. अस्तु, एक पाव किनल आ दुनू गोटे लंदन में बाटें-बाट मटरगस्ती करैत चेरी खयलहु ;दरभंगा-पटना-दिल्ली-कलकत्ताक सड़क पर चना-जोर-गरम आ झाल मुरही सेहो खेने छी. मुदा, दुनू म सं ककर स्वाद बेसी नीक से सोचू . हमरा तं लगइए, खूब भुखायल मनमें जे सब सं पहिने आगू पड़ैत छैक, तकर स्वाद सबसं विशिष्ट होइछ.तें, फुटबॉल खेलाकय वापस  अयलापर वा कॉलेज सं वापस अबिते भेटल चूड़ा-मुरही- चाउर- बादामकेर करू तेल- नोन आ अंचारक मशाला में सानल झसिगर भूजा क सेहो कोनो बराबरी नहिं छैक !  जे किछु. सेल्फ्रिद्ज स्टोर्स में किनबाक बस्तुक कमी नहिं. मुदा, हमरा सब तं देखबाले गेल रही. क्रिस्टलकेर जे ग्लास पसिन्न पड़ल प्रति गिलास 55 यूरो. बड महग लागल. अस्तु, देखल आ समय पूरा भेलैक तं  आ बहार आबि गेलहुं.                           
लंदन  शहर में जतय-ततय विभिन्न प्रकारक मूर्तिकला, जीव-जन्तुक प्रतिमा चौक-चौराहाक सजावट नीक लागल.सजावट आ मूर्ति कला यूरोपके प्रत्येक शहर में आकृष्ट करत. किन्तु, लंदनकेर  चौक-चौराहा सब आकारमें अमेरिकाक वाशिंगटन वा न्यूयॉर्क केर चौक-चौराहाक बनिस्वत छोट-छोट .
अजुका दुपहरियाक भोजनक स्थान पर एकटा अलग उत्साह छल हमर माम, आ किरणजी जेठ भाई, मैथिली साहित्यक एकटा आरंभिक साहित्यकार, स्वर्गीय काशीनाथ झा( प्रसिद्द बलदेवजी) क पौत्र, हमर भातिज बब्बू -कौतुक रामन- आ हुनक परिवार सं भेंट. लंदन आब कोनो दिल्ली दूर नहिं. तथापि, अपन सम्बन्धी सं भेंट नीक लागल. दिन भरिक पर्यटन केर पछाति होटल पहुँचलहु . होटल नीक छैक. राति में रूपम केर भातिज, बनी, अयलाह. बनी पहिला क्लासमे एडमिशन ल कय बरेली में हमरा सबहक संग रहैत छलाह. पुनः, बंगलोर में पढ़इत रहथि तं किछु दिन  हमरा लोकनिक डेरा पर रहथि. आब लंदन में नौकरी करैत छथि. बहुत दिन भ गेलैक. किन्तु, कतबो दिन भ जाइक अपन लोक, अपन धिया-पुता सं भेंट भेला पर जे आनन्द होइत छैक, से भेल . बनी हमरा सबहक संग भोजन केलनि आ आपस रेडिंग गेलाह. अजुका रातुक भोजन एहि पर्यटनक पक्षक अंतिम प्रीति-भोज रहैक. तें, विशिष्ट भोजन, गप्प-सप्प, स्पीच-भाषण, फोटोग्राफी आ बिज़नेस-फीड बैक, टेलीफोन नंबर आ ईमेल आइ डी, सब कथुक आदान -प्रदान भेलैक. काल्हि भोरे जलखइ-पनिपियाइ हेतैक आ हमरा लोकनि अपन-अपन बाट पकड़ब. हमरा लोकनि एडिनबरा, स्कॉटलैंड जायब. बांकी गोटे भारत जयताह.                    

Thursday, June 22, 2017

पत्र-पत्रिका आ सम्पादकीय दायित्व

पत्र-पत्रिका आ सम्पादकीय दायित्व 
आजुक युगमें पुस्तक-पत्रिका-विश्वकोषक कमी नहिं. मुदा, लेखन ले लिखबाक लूरि तं चाही, लिखल के सुधारबाक समय आ रूचि तं चाही. छपाई कतेक सुलभ छैक से सर्वविदिते अछि. छपल सामग्रीक प्रतिष्ठा एखनो छैक, नहिं तं रचनाकें छपयाबाले लोक किएक आफन तोड़इत ! तथापि, हमरा जनैत,  एखनुक युगमे पत्र-पत्रिकाक शुद्ध छपाई आ सामग्रीक  प्रमाणिकतामें ह्रास भेलैये. ई नीक नहिं, से तं सब मानब. पांडिचेरीमें किछु बन्धु-मित्र गप्पक क्रम मे कहलनि, भारतक स्वतंत्रताक पूर्व ' हिन्दू' दैनिक अखबारकें तमिलनाडूक लोक 'माउंट रोड-महाविष्णु' कहैत छलैक आ 'हिन्दू'मे प्रकाशित सामग्रीकें सरकारी 'गजेट' जकां प्रमाणिक मानल जाइत छलैक . आइ 'हिन्दू'में सेहो अनेको अशुद्धि भेटत . एहन परिस्थिति में पोथी-पत्रिकामे छिडियायल तथ्यात्मक अशुद्धि निर्विवाद पत्र-पत्रिकाक एवं पोथीक प्रमाणिकता आ प्रतिष्ठा दुनूपर प्रश्न चिन्ह लगबैत अछि. एकर छार-भार ककरा पर ? एहि समस्यापर  प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सब अपन संस्थाक  भीतर आत्म-मंथन करैत छथि आ स्वतंत्र पर्यवेक्षक (ombdsman) नियुक्त केने छथि. मुदा, सब पत्र-पत्रिकाकें ने तकर साधन छैक आ ने सुधि. तें, प्रकाशनक एहि पक्षपर दृष्टिपात आवश्यक.
एक लेखकक कृतिक हेतु प्रमाणिकता आ शुद्धि-अशुद्धि सब कथुक दायित्व लेखक-प्रकाशकक थिकनि . किन्तु, बहुलेखक ग्रन्थ आ पत्र-पत्रिकाक ममिलामें सामग्रीक प्रमाणिकताक हेतु लेखक आ सम्पादक दुनू  उत्तरदायी छथि. एहि थोड पृष्ठभूमिक संग आजुक मैथिली पत्र-पत्रिका सबमे सम्पादकीय वृत्ति पर संक्षिप्त विचार प्रस्तुत करब हमर उद्देश्य अछि. एहि लेखक सम्बन्ध कोनो एकटा पत्रिका सं नहिं, बल्कि, सम्पादकीय वृत्तिपर विस्तृत चर्चा आरम्भ हो से हमर अभीष्ट अछि.
सम्पादक के थिकाह . सामान्य अर्थमें जे 'कोनो काज (सम्पादन) करथि ओ भेलाह सम्पादक. ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी' अनुसारें, ' पत्र-पत्रिका आ बहुलेखक पोथीक विषय-वस्तु आ स्वरुपक निर्णायक सम्पादक थिकाह'. मुदा, जं एखुनका पितामह ' गूगल विकिपेडिया' के पुछियनि तं 'संपादन, संशोधन, संक्षेप, संरचना आ संगठन द्वारा  कोनो भाषा, चित्र वा ध्वनिकें  प्रदर्शनक हेतु सुधारबाक / नीक बनयबाक प्रक्रिया थिक; आ संपादन केनिहार संपादक कहबैत छथि .'   
मैथिलीमें ने कोनो समाचार पत्र नहिं छैक. एखनुक पत्र-पत्रिका अपन प्रमाणिकताक मानदण्ड स्वयं स्थापित केने होथि से सम्भव. मैथिलीक हस्तलिखित पत्रिका सब सं हम परिचित नहिं छी. ओहि युगमे सम्पादक लोकनि केहन पत्रिका छपइत  छलाह से शोधकर्ता लोकनि कहि सकैत छथि . मुदा, (स्व. प्रोफेसर रमानाथ झा द्वारा सम्पादित) मैथिली साहित्य पत्र, मिथिला मिहिर, मिथिला दर्शन ( वर्तमान सहित ) ,वैदेही,  विद्वतमण्डली में समादृत छल से सर्वविदित अछि .  तथापि, तहियो सब छपल सामग्री सर्वथा दोषमुक्त नहिं होइत छलैक से संभव. नहिं तं, स्व. हरिमोहन झा 'प्रेसक लीला' सन कथा कोना लिखितथि. मुदा, ओ भेल केवल छपाईक गप्प.
एखुनक  पत्र-पत्रिका में जं सम्पादकीय वृत्तिक गप्प करी तं सम्पादक लोकनिक समस्याकें अनदेखी नहिं कोना क सकैत छियनि. मुदा, अपन समस्याक समाधान सम्पादक लोकनि अपने ताकथु. तथापि कंप्यूटरक प्रयोग लेखन-सम्पादनमें क्रांति आनि देलकइ-ए से के नहिं मानत. आब लेखन-प्रकाशन केर एक-एक विन्दु पर नजरि घुमाबी.
पत्रिकाक सबसं पैघ समस्या होइत छैक सहज बुझबायोग्य भाषामें लिखल  प्रमाणिक रचनाक अभाव. सब रुचिक रचनाकें एकठाम  संकलित करब दोसर समस्या थिक. जं सामग्रीक  विविधताक गप्प करी, तं, कथा, कविता भेटब प्रायः सुलभ छैक. अनेक कारणसं, विज्ञान विषयक, चिकित्साशास्त्रक, राजनैतिक, यात्रा-वृत्तांत, पाक-विज्ञानक स्तरीय  लेखक अभाव एखनो छैक. स्तरीयताक परवाहि नहिं करी तं एहि इन्टरनेट युगमें सबतरि विभिन्न विषय पर ढउए-ढाकी लेख भेटत. भाषा कोनो होइक 'गूगल अनुवाद' पर अनुवाद क लियअ. चेफड़ी लगाउ, चिप्पी सब (cut and paste ) जोडि-जोडिक नौ हाथक बनारसी-पटोर-साड़ी, माने लेख, तैयार क लियअ ! मुदा, जाहि युग में लोक कें फेसबुक (facebook) आ व्हाट्सएप (Whatsapp) पढ़बा सं फुर्सति नहिं छैक, ताहि युग में समेटल बंगौरकें के पढ़त ! तें, जं लेखकेर सामग्रीक उपयोगिता आ रोचकताक  दायित्व लेखकक थिकनि, तं, लेखकेर चुनावक दायित्व तं सम्पादकके थिकनि. एखन जखनि कि सबतरि सूचनाक बाढ़ि छैक, लेख सबहक  प्रमाणिकताकें भाजारबाक  कष्ट पाठक किएक उठओताह ! अतः एकबेर जे छपल से भ गेल प्रमाणिक. आ प्रमाणिक पत्रिका में छपल तं भ गेल ब्रह्म-वाक्य. एही दुआरे एहि युग में 'पोस्ट-ट्रुथ' (post-truth) सन शब्दक अविष्कार भेले ; 'पोस्ट-ट्रुथ' एहन परिस्थिति थिक जाहिमे प्रचारित सामग्रीकें वस्तुनिष्ठ रूपें बिनु भजारनहिं, पूर्वाग्रह वा अपन विश्वासक अनुकूल लोक (फूसिओकें) सत्य मानि लैछ. तथापि, अनर्गल वा दोषपूर्ण सूचनासं पत्रिकामें पाठकक विश्वास तं अवश्ये घटैत छैक. आ जं पत्रिकासं पाठकक विश्वासे उठि गेलैक तं लोक पत्रिका किनत किएक, आ पत्रिका ले बांकी बंचलैक की ?
दोसर गप्पक सम्बन्ध कहबाक शैली सं छैक . सहज-सरल भाषा लोककें नीक भ' कय बुझबामें अबैत छैक . कठिन भाषा सक्कत फुटहा चिबायब-सन प्रतीत होइछ. सम्पादक भाषा पर माथापच्ची करथि कि नहिं से सोचू. मुदा एतबा तं अवश्य, जं, लेख पढ़िकय सम्पादककें किछु भांजे  नहिं लगलनि तं पढ़निहार के बुझबामें की अओतनि ! आ पत्रिकामें एहन लेख जं छपि  गेल  तं दोष ककर ? आ लाभ की ?
एकटा आओर समस्या. समालोचनात्मक (?) लेख सब जहां-तहां अनेरुआ घास-जकां पत्र-पत्रिका सबकें छारने भेटत. जनिका जखन मोन होइत छनि, समालोचना लीखि बैसैत छथि. तकर ई अर्थ किन्नहु नहिं जे गम्भीर समालोचक नहिं छथि. मुदा, नव गप्प, नव दृष्टि कदाचिते देखबैक. बेसी काल ओहने गप्प, 'चूड़ा-दही बड मधुर होइत छैक.किएक ? तं, 'महराजी पोखरि पर सिपाही सब चूड़ा-दही खाइत छलैक , कहलैक बड मधुर होइत छैक.' माने, अमुक विद्वान ई कहलनि , दोसर ई कहलथिन . तेसर, ई ..... , आदि-आदि. अस्तु, जखन लेख  पढ़ला उत्तर हमरा किछु भांजे नहिं लागल, विद्यार्थी परीक्षामे लिखिए नहिं सकैत छथि, लेखककें  विद्वताक सर्टिफिकेट नहिंए भेटतनि, तखन, सम्पादक अपन दायित्वक निर्वाह किएक ने करथि ? सम्पादकसं पाठककें एतबा अपेक्षा तं होइते छैक.
सम्पादकीय उदासीनताक उदाहरण देब बिढ़नी छत्तामें हाथ देब थिक. हम केवल मैथिलीक पाठक छी. पोथी-पत्रिका कीनि कय पढ़इत छी आ नीक सामग्रीक अपेक्षा रखैत छी. तें, हमर विचार पाठकक दृष्टि थिक. मुदा, एकटा गप्प एतय अप्रासंगिक नहिं होयत . ई थिक वैज्ञानिक आ मानिविकीय क्षेत्रमें peer-review क परम्परा. शोधकर्ता लोकनि ले ई शब्द नव नहिं. तथापि, एतय peer-review के फरिछायब आवश्यक. peer-review में लेखकक  परिचयकें गोपनीय रखैत, एक वा अधिक सुपरिचित विद्वान लग प्रतिपादित तथ्यकेर नवीनता, तर्क, प्रमाण, उपयोगिता, आ भाषाक  निकतीपर तौलबा ले लेख कें गणमान्य विशेषज्ञ लग पठाओल जाइछ. विद्वान लोकनिक सुझावक आधारपर लेखक अपन लेखमें संशोधन करैत छथि आ अंततः लेख स्वीकृत वा अस्वीकृत होइछ. प्रक्रिया श्रम-साध्य छैक, आ लेखकें छ्पबामें बिलंब होइत छैक, मुदा, ताहि सं लेख, लेखक, आ पत्रिकाक सबहक प्रतिष्ठा बढ़इत  छैक. सामान्य रुचिक पत्रिका ले peer-review संभव नहिं. तें तथ्यकेर मोट-मोट अशुद्धिक, भाषा आ छपाईक एकरूपता, आ बांकी सब कथूक दायित्व संपादके केर छियनि. अर्थात, सम्पादके भेलाह peer-reviewer. आ ओएह लेथु सब रूचिक रोचक सामग्रीक चयन, स्तरीयता, भाषा आ कानूनी पक्षक दायित्व. हमरा जनैत, पत्रिका, लेखक आ प्रकाशक सबहक हितमें एतबा अपेक्षा स्वाभाविक. आ एतबा भार उठायब पर्याप्त छैक. हँ, कंप्यूटर सं परिचित, दूरस्थ लेखक सेहो प्रूफ-रीडिंगमें सम्पादकक सहायता तं कइए सकैत छथिन.वर्तमान  युगक  सम्पादक लोकनि ई सुविधा उठाबथि ; विकल्प तं अपनहिं हाथ छनि.        
 

Thursday, June 8, 2017

लेह में पहिल बेर : अगस्त 2002



लेह में पहिल बेर : अगस्त 2002
'लामाक भूमिमें गामा जुनि बनी' से बहुत दिन सं सुनल छल. किन्तु, जखन बंगलोरसं सोझे लेहकेर पोस्टिंग ऑर्डर आयल तं एहि कहावत केर असली अर्थ बूझब बांकीए छल.लेह पहुंचलापर हवाई अड्डापर ले. कर्नल विधान चन्द्र त्रिवेदी, दरभंगा मेडिकल कालेजक 1974 बैचकेर जूनियर, ठाढ़ छलाह. हुनक मुसुकाइत छवि आश्वस्त कयलक  आ हम स्वभावतः धफडि कय विदा भेलहुँ तं कर्नल त्रिवेदी  सावधान करैत   कहलनि, 'सर, धीरे-धीरे चलू'. माने, तेज चलब तं श्वासने फूलय लागय, फेफड़ा ने बम बाजि जाय ! तखन मोन पड़ल एहि कहावत अर्थ. एतबा तं बूझल छल, समुद्रतल सं 10500 फुट केर ऊंचाईपर लेह में गाछ-वृक्षेक नहिं, ऑक्सीजनकेर कमी सेहो छैक.  तें, सावधानी नहिं रखलहु तं हाई-ऑल्टच्युड पल्मोनरी इडिमा ( फेफड़ाक सूजन ) आ  हाई-ऑल्टच्युड सेरेब्रल इडिमा ( मस्तिष्क क सूजन ) सं अचानक प्राण जा सकैत अछि. ई समस्या स्वस्थ सैनिक आ सैलानी दुनूकें समान रूपें प्रभावित करैछ. इहो बूझल छल, जे हाई-ऑल्टच्युड एरियामें रक्त-चाप     ( Blood pressure ) बढ़ि जाइछ, श्वासमें कष्ट होइछ. उपर सं खूब जाड़. कनेक भय नहिं छल से कोना कहब.  मुदा, स्वस्थ शरीर आ जोश में लोक बहुत किछु बिसरि जाइछ. मुदा कर्नल त्रिवेदीकेर चेतावनीक पछाति असावधानी असम्भव छल. अस्तु, ऑफिसर मेसक आवास में आबि निर्देशानुसार ' 6-days' acclamatization schedule' आरम्भ केलहुं. अर्थात् , दू दिन बेड-रेस्ट ( बिछाओन पर आराम ), अगिला दू-दिन समतल भूमिपर किछु-किछु दूरक टहलान, आ आखिरी दू दिनमें आओर दूर आ ऊंचाई दिस चलबाक रूटीनक. ई भेल लेहमें अयनिहार सैनिक लोकनिक पहिलुक छ दिनुक निर्धारित दिनचर्या.
नव स्थान, अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल, आ हमरा-सन  यायावर मोन हताशा तं भेले एहि हाउस-अरेस्ट सं. अस्तु, पहिल दिन परिश्रान्त रही, कहुना बीतल. किन्तु, दोसर दिन भोरहिं सं वायुक कम दवाबक प्रभाव देखबा में आबय लागल: बाथरूम में राखल शेविंग क्रीम आ टूथ पेस्टक ट्यूबक मुनना खोलितहिं क्रीम आ पेस्ट अनायास बाहर बहय लगलैक. पछाति, हाथ-मुंह धोलाक बाद टेबुलपर राखल नमकीन भुजियाक पोली-पैक पर नजरि गेल तं हँसी लागि गेल: भीतर बंद वायुक प्रसार सं भुजियाक पैकेट गोल-मटोल भ गेल छलैक. ई सब छल वायुमंडलमें हवाक कम दवाबक प्रत्यक्ष प्रमाण.                                                                             तथापि, यदि वायुमंडलक कम दवाब, शुष्क वायु, आ शीतल मरुभूमिक गप्प जं छोडि दी तं लेह में आकर्षण कमी नहिं छैक.  तकर कारणों छैक : लद्दाख़क विशेषज्ञ, प्रसिद्द लेखिका, जेनेट रिज़वी, लेहकें पहाड़ी एशिया   (high Asia) क चौबटिया कहैत छथि.  चौबटिया तं वएह भेल जतय चारि दिसुक बाट आबि कय मिलैत हो, वा बाट चारि दिस फूटइत हो. लेह में पूब दिस तिब्बत-चांगथांग-मनालीक बाट , पश्चिम में कारगिल आ कश्मीर-बाल्टिस्तान, उत्तर में नुब्रा वैली-काराकोरम- चीन केर सिंक्यांग प्रान्त आ दक्षिण दिस जान्स्कार आ हिमाचलक बाट तं छैहे. तखन, जतय चारि दिसक मनुक्ख, हवा-पानि, माल-असबाब, कला संस्कृति आ मनुक्खक रक्तकेर संगम होइत होइक ओ स्थान कोना ने अद्भुत हेतैक ! आ तें लेह अछि अद्भुत. कोना ? सएह तं एहि लेख केर विषय थिक. तें, दम धरू.
हम लेह पहुंचल रही तखन अगस्तक मास रहैक. दिनक तापमान प्रायः 11 डिग्री सेंटीग्रेड छल हेतैक, राति में प्रायः 1-2 डिग्री सेंटीग्रेड. लेह केर हिसाबे गर्मिए जकां भेलैक. मुदा, जाड़सं नोकसानक भय नहिं छल से कोना कहब. तें, पहिल राति सुत्बा काल अपना लग जतेक उनी कपड़ा छल पहिरि, ऊपर सं दू गोट तुराई ओढ़ि लेल.  मुँह झाँपि सुतबाक हिस्सक छले, सेह केलहुं. कपड़ाक ओतेक परत, तुराईक ओतेक भार आ झाँपल मुँह सं देह में तेहन ने खौंत फेकलक, जे संदेह होमय लागल जे प्रायः लेह पहिले राति अपन झटका देलक. राति कहुना बीतल. भोरहिं अस्पताल गेलहुं. ECG कराओल. फेफड़ाक जांच- lung function test- भेल . सब ठीक. आश्वस्त भेलहुँ . माता-पिताक देल पचास साल पुरान मॉडलक शरीर पर विश्वास दृढ़ भेल, भेल, शरीरक मॉडल ठीके चलि रहल अछि. मुदा, एतबा अवश्य अनुभव भेल जे जाड़ सं बेसी कपड़ा आ ज़रुरत सं बेसी भय दुनू घातक ! 
दोसर दिन होइत-होइत हाउस-अरेस्ट सं मोन अकछा गेल. सांझ होइत-होइत कोठली सं बहरा करीब 1 किलोमीटर दूर मिलिटरी जनरल अस्पताल दिस एसगरे बिदा भ गेलहुं. चारू कात नजरि घुमाओल, कनेक लेह तं देखी. मुदा, उपत्यकाक हरियर झमटगर गाछ सबहक कारण ऊँचपर बसल मिलिटरी एरियासं एखन धरि लेह बाज़ार देखब सम्भव नहिं; पतझड़क बाद पूरा इलाका नग्न भ जाइछ. मुदा ताहि में एखन देरी छलैक. तें, दृष्टि-पथक ई बाधा हमरा नीक नहिं लागल. कहिया तं हम 1983 में लेह एबा ले रही. आ कहिया आई लगभग बीस बर्षक बाद एतय एलहु. मुदा, लगैछ लेह बाज़ारक भ्रमण ले हमरा आओर दू दिन क प्रतीक्षा करहिं पड़त.                                       तथापि आस-पास नज़रि घुमौलासं  आरीक धार-सन, बंजर पर्वत शिखर, सर्वत्र फहराइत रंग-बिरंगी बौद्ध पताका, बालु सं पाटल भूमि, आ दूर दक्षिण में हिमाच्छादित पर्वतमाला देखबामें आयल. आई एतबहिं सं संतोष कयल.
अनिवार्य आराम (Compulsory acclamatization schedule) क 6 दिन पूर्ण भेला पर पहिल दिन गाड़ी सं लेह बाज़ार होइत सिन्धुक दर्शन ले बिदा भेलहुँ. शहर सं पूब दक्षिण करीब 5 कि. मी. बाटमें जतय देखू, पग-पग पर छिडियायल बौद्ध स्मारक (छोर्तेन), मंदिर (गोम्पा). एकर सबहक फूट वर्णन आवश्यक. तें एखन सोझे सिन्धु चरणतल. एहि स्थानकें आइ काल्हि लोक सिन्धु दर्शन कहैत छैक. एहि ठाम लेह सं मनाली आ चांगथांग दिस जाइत हाईवे केर दक्षिण आ पूव सं पश्चिम दिस बहैत सिन्धु नदीक उत्त्तर समतल भूमिक पाट चौड़ा भ जाइछ. वाजपेयी सरकार अपन शासनकाल में एतय समतल भूमि में बहैत सिन्धुक उतरबरिया कछेर पर पक्का घाट बनबा सिन्धु दर्शन उत्सवक आयोजन कें छल. तहिया सं एहि स्थानकें सिन्धु दर्शनक नामसं जानल जाइछ. हमरो लोकनि एतहि गाड़ी रोकि घाट पर एलहु. सिन्धु पवित्र शीतल जल कें स्पर्श कयल. आ सिन्धुक जलक स्पर्श आ सिन्धु दर्शनक मनोरथ पूर्ण कयल. अनन्त कालसं  कल-कल बहैत हरियर कचोर सिन्धु, अपन अमृतमय आसव सं एहि प्रदेशकें तं सिचैते छथि, एकर आगू नीचा बहुत दूर, अरब सागर धरि कछेरे-कछेर बसल बासिन्दा सबहक जीवन-रेखा छथि. प्रसारमें संकीर्ण, कतहु उत्थर कतहु गहींर, प्रकृतिए चपल-चंचल, आ नयनाभिराम सिन्धुकेर पवित्र शीतल जल कें स्पर्श करैत भेल, जेना जीवन सफल भ गेल. सरिपहुं, राष्ट्र-गान में भले सिन्धुक चर्चा हो ,भारतमें कतेक गोटे कें सिन्धुक पवित्र जलक स्पर्शक सौभाग्य हेतैक !

तें , लेह अयलापर ऑफिसर मेस केर बाहर हमर पहिल पड़ाव सिन्धु-एक तट थिक. अतः, दू पांती सिन्धुक प्रशस्तिमें :
दूर-सुदूर गगन कें छूने
दृढ़ता सं पृथ्वीके धेने
हिमगिरिकेर मायावी उर सं
कविक मनक कविता-सन मधुमय
तरल-विरल कमनीय धार लय
सिन्धु अहाँ छी हार कंठ केर
भारत भूमिक नाम,
दर्शन भेल, सफल भेल जीवन
शत-शत नम्र प्रणाम .

मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो