Tuesday, November 28, 2017

लेह 3 :माने रिंग्मो, सिन्धु दर्शन , खर्दुंग-ला आ संगम



लेह 3 :माने रिंग्मो, सिन्धु दर्शन , खर्दुंग-ला आ संगम 
माने रिंग्मो
' ॐ माने पद्मे हुं ' तिब्बती बौद्ध लोकनिक हेतु बीज मंत्र थिक. चाहे बौद्ध लोकनिक हाथमें घूमैत धर्म-चक्र ( prayer wheel ) हो वा बौद्ध मन्दिर सबहक परिसरमें स्थापित छोट-पैघ-विशाल धर्मचक्र हो ई प्रभावी मंत्र सब ठाम लिखल भेटत. एहि मंत्रक ध्वनि सबठाम कान में पड़त. आस्था एहन छैक जे बौद्ध इलाकामें छोट-पैघ पाथरपर एहि मंत्र कें अंकित कय स्तूप आकारक एक बीत सं ल कय मर्द भरिक ऊँच, पाथरक ढेर सब भेटत. अभिषिक्त पाथरक ढेर सं बनल एहि आकृति सब कें छोरतेन कहल जाइछ. मुदा, एहने अभिषिक्त पाथरक ढेर जं छोट-पैघ देवालक आकार ल लियअ तं ओकरा माने-देवाल (mani-wall)  कहल जाइछ. बहुतो ठाम बस्तीक बाहर एहन माने-देवाल भेटत. किन्तु, लम्बाई में किलोमीटर सं बेसी, चौड़ाईमें करीब 12-15 फुट आ ऊँचाईमें चारि फुट सं बेसी लेह केर माने- रिंग्मो हमरा जनैत सबसँ पैघ माने-देवाल थिक. स्पष्ट छैक देवाल उपर आ एकर फलक पर ' ॐ माने पद्मे हुं ' लिखल अजस्र पाथर देखबैक. परम्परा सं बाटे-बाट चलैत पथिक जाइत-अबैत माने-देवाल कें अपन दहिने राखि चलैत छथि. आधुनिक युगक अनुसन्धानक मानब छैक, कदाचित ई माने-देवालसब  बाढ़िक पानिक बहावकें रोकबाक बान्ह जकां बनाओल गेल हो.
शहीद स्मारक आ हौल ऑफ़ फेम
राष्ट्र जखन युद्ध लड़ैछ, सीमा प्रदेशकें अनिवार्यतः युद्धमें  भागीदार होबय पडैत छैक. किन्तु, सैनिकक जन्म कतहु होइक ओकरा जतहिं युद्ध हेतैक गेनहिं प्रकार. युद्धमें भागीदारीए  सैनिक-जीवन सार्थकता  थिकैक : हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गः, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम ! 
तथापि युद्धमें मारल गेलापर स्वर्ग होइत छैक, कि नहिं , के कहत. किन्तु, लड़ैत सैनिककें युद्धमें स्वर्गहुक कामना नहिं होइछ, से हमरा सं सुनू . हमरा-सन वा आन कोनो सैनिक ले स्वर्ग अपन  देशे थिक . लड़िकय अपन भूमिक रक्षा केलहुं, तं अपनहिं अपनाले स्वर्ग बचा लेलहुं. बस. आब एहि भूमि पर रही वा एहि भूमिक तर में, से गौण थिक. हमर मृत शरीरकें लेह भेटैक वा लोहित नदीक कछेर, कोनो अंतर नहिं. लेह मिलिटरी जनरल हॉस्पिटल लगक स्मारक 1962 केर युद्धमें शहीद किछु एहने अनामा वीर लोकनिक समाधि थिक. ई समाधि  सैनिक अस्पतालक सोंझा सड़कक कातहिं में देखबामें आओत- शान्त, विस्मृत, आडम्बरहीन. जेना सैनिक सबतरि होइछ.  कारण, जीवित सैनिककें  शासक लोकनिक आभूषण बूझैत छथि. मृत सैनिक स्मारकमें एकाकी विस्मृत भेल पड़ल रहैछ ! एखनुक भारतक इएह विडम्वना अछि. तथापि, लेह अबैत जं कहियो एहि बाटें जाइ, एहि स्मारक पर फूल भले जुनि चढ़ाबी, एक क्षण एतय अवश्य बिलमी आ एहि शहीद लोकनिकें श्रद्धाक भागी अवश्य बुझियनि. हम तं इएह सोचैत छी:
अपन भूमि आ अप्पन देह, निश्यय दुनू हेतइ एक 
धन्य थिकै युद्धक संयोग,आओर ने कोनो चाही भोग !
मिलिटरी अस्पतालक समीपक स्मारक केर अतिरिक्त लेहमें एयर-फ़ोर्सक हवाई-पट्टी क लगहिं सड़कक कातहिं एकटा आओर सैनिक स्मारक दर्शनीय अछि. ई थिक 'हॉल ऑफ़ फेम'. 'हॉल ऑफ़ फेम' में कारगिल युद्धमें दुश्मनसं छीनल बहुत रास अस्त्र-शस्त्र, माल-असबाब देखबामें आओत.
खर्दुंग-ला पास 
भूमि पर पयर आ आकाशमें माथ जं कतहु चरितार्थ होइछ तं केवल पर्वतक माथहिं पर. ताहिमें उत्तरमें नुब्रा उपत्यका आ दक्षिणमें लेहक बीचक गगनचुम्बी लद्दाख़ पर्वतश्रृंखलाकें पार करबाक सबसं सुलभ स्थान थिक खर्दुंग-ला पास. लेहसं करीब 45 किलोमीटर उत्तरमें 18387 फीटक  ऊँचाई पर स्थित खर्दुंग-ला पास हेबनि धरि देसक सब सं ऊँच मोटरबुल पास छल. आब पूर्वी लद्दाख़हिं में एहि सं ऊँच पास बनि गेने खर्दुंग-ला पास नंबर दू पर भ गेले. तथापि ई लेह सं ततेक लग अछि जे, भोर में जलखइ लेह में करू, मोटर कार -टैक्सीमें चढ़ू, दू घंटाक पछाति चाह खर्दुंग-ला पासपर पीबू आ आपस भ दुपहरियाक भोजन पुनः लेह में करू. बीच में खर्दुंग-ला पासपर घिचाओल फोटोके गाम ल जाऊ, गौरवान्वित होउ !
मैगनेटिक हिल

लेह सं करीब 25 किलोमीटर पश्चिम गुरुद्वारा पत्थर साहेबक समीपहिं, मैगनेटिक हिल एकटा एहन पर्यटन स्थल थिक जतय सत्य वा भ्रमकेर बीचक रेखा मेटा जाइछ  आ पर्यटक आश्चर्य में माथ हंसोथय लागैथ छथि. मैगनेटिक हिलक समतल सड़कक एहि खण्डपर अपन मोटर गाड़ीक इंजनकें चलैत राखि गाड़ीकें  न्यूट्रल में छोडि दियौक आ देखू तमाशा.  गाड़ी ढलानकेर विपरीत दिशामें अपनहिं चलब शुरू क देत. ई सत्य थिक वा भ्रम हम एहि विवाद सं दूर छी. किन्तु, पर्यटन ले आयल छी, मजा उठाउ.
जान्सकार आ सिन्धुक संगम    
संगम
छोट नदीक पानि पैघ नदीमें आ नदी सबहक पानि अंततः समुद्रमें खसैछ. ई स्वाभाविक थिक. किन्तु, दू नदीक संगम कें किएक पावन मानल जाइछ हमरा नहिं बूझल अछि. तथापि जं संगमके केवल सुन्दरताक दृष्टि सं देखल जाय तं लेह सं करीब 40 किलोमीटर पश्चिम जान्सकार आ सिन्धु नदीक संगम अपूर्व अछि. एतय जान्सकारक नीलम-सन स्वच्छ पानि आ सिन्धुकेर घोर-मट्ठापानिमें  मिझडाक एकाकार भ जाइछ. जेना, अभिजात्य आ अति साधारण अपन स्वरुप बदलि एक भ गेल हो. लगक ऊँच सड़क पर ठाढ़ होउ, आ संगमम सुषमाक आनंद लिअय.
एहि सबहक अतिरिक्त लेहक चारू कात पर्यटन स्थलक कमी नहिं. किन्तु. से सब लेह जायब तं देखब वा नहिं देखब. कारण लेह में सबसं कीमती वस्तु थिक समय. एतय आयब, रहब, आ जलवायुके सहब तीनू कठिन. किन्तु, स्वस्थ होई आ रूचि हो तं एकबेर सिन्धु दर्शन अवश्य करी.

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