1
दम ने मारय, थम्हय न कखनो
पिरथी, सूर्य, आ चान
शत योजन ओ भागय क्षणमे
जड़केँ से नहि भान।
नापि अबै छथि वायुयानसँ,
धरती पर नहि छनि जोर,
मन-विचार पर सक्क ने ककरो,
तकरा करता थोड़!
2
कान्ह कोदारि आ भूखल पेटेँ
जे तामय भरि दिन खेत,
लगने भूख जँ माङय भोजन,
असली नक्सल भेल!
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