1
दम ने मारय, थम्हय न कखनो
पिरथी, सूर्य, आ चान
शत योजन ओ भागय क्षणमे
जड़केँ से नहि भान।
नापि अबै छथि वायुयानसँ,
धरती पर नहि छनि जोर,
मन-विचार पर सक्क ने ककरो,
तकरा करता थोड़!
2
कान्ह कोदारि आ भूखल पेटेँ
जे तामय भरि दिन खेत,
लगने भूख जँ माङय भोजन,
असली नक्सल भेल!
झिंगुर
आन्हर सबकेँ चश्मा देलक,
नान्हि-नान्हि टा झिंगुर,
युग भरिसँ दुबकल समाज ले'
अयना किनलक झिंगुर ।
आँखिक सोझाँ दिन-देखारमे
किछुओ नहि सूझै छल,
किछुए दिन केर व्रत-उपाससँ
जोश बढ़ौलक झिंगुर।
कोना कहबै, ककर सुनत के?
ठकमूड़ी छल लागल,
हाथेँ-हाथेँ सुदुक मोबाइलसँ,
अलख जगौलक झिंगुर!
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