Sunday, August 16, 2026

भ्रम

1

दम ने मारय, थम्हय न कखनो

पिरथी, सूर्य, आ चान

शत योजन ओ भागय क्षणमे 

जड़केँ से नहि भान।

नापि अबै छथि वायुयानसँ,

धरती पर नहि छनि जोर,

मन-विचार पर सक्क ने ककरो,

तकरा करता थोड़!

2

कान्ह कोदारि आ भूखल पेटेँ 

जे तामय भरि दिन खेत,

लगने भूख जँ माङय भोजन,

असली नक्सल भेल!


झिंगुर

आन्हर सबकेँ चश्मा देलक,

नान्हि-नान्हि टा झिंगुर,

युग भरिसँ दुबकल समाज ले' 

अयना किनलक झिंगुर ।

आँखिक सोझाँ दिन-देखारमे 

किछुओ नहि सूझै छल,

किछुए दिन केर व्रत-उपाससँ

जोश बढ़ौलक झिंगुर। 

कोना कहबै, ककर सुनत के?

ठकमूड़ी छल लागल,

हाथेँ-हाथेँ सुदुक मोबाइलसँ,

अलख जगौलक झिंगुर!



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