Sunday, August 16, 2026

भ्रम

1

दम ने मारय, थम्हय न कखनो

पिरथी, सूर्य, आ चान

शत योजन ओ भागय क्षणमे 

जड़केँ से नहि भान।

नापि अबै छथि वायुयानसँ,

धरती पर नहि छनि जोर,

मन-विचार पर सक्क ने ककरो,

तकरा करता थोड़!

2

कान्ह कोदारि आ भूखल पेटेँ 

जे तामय भरि दिन खेत,

लगने भूख जँ माङय भोजन,

असली नक्सल भेल!


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