Thursday, August 27, 2026

आइना

तोड़ डाले मैंने हर इक शीशे,

कर दिया आइनों का काम तमाम. 

बचा गया फिर भी,

तालाब, नदियों और कुंओं में पानी,

सूरत मेरी देख कर,

मांगने लगा मुझ से हिसाब ! 
 

No comments:

Post a Comment

अहाँक सम्मति चाही.Your valuable comments are welcome.

मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो