पिंजड़ा, चिड़ै, आ खीसा
दीनानाथकेँ नवे वयससँ धिया-पुताक बड्ड आवेश रहनि. अनको धिया-पुताकेँ कतहु
देखथिन, टोकि देथिन. कखनो समय देखि, होइनि तँ संगे खेलाइयो लागथि. अपन धिया-पुताक तँ
कथे कोन.
मुदा, जखन अपन नाति-नातिन, पौत्र-पौत्रीक बेर एलनि, तँ ओलोकनि ततेक दूर चलि रहनि,
जे केओ लग नहि रहनि. तखन जे लग, से अपने. मुदा, अपन, आ अपना समीपक, बीचमे अंतर कोना
नहि हेतैक.
तैओ जाधरि ओ नौकरीमे रहलाह, समाजक संग जुड़ाओक कारणें, कखनो एहन प्रतीत नहि भेलनि,
जे धिया-पुता लग नहि छथिन.
पछाति, जखन रिटायर भए महानगरवासी भए गेलाह, तखनो परिवारक कमीक अनुभव नहि भेलनि.
सोशल मीडिया आ टेलीफोनक सुविधा एवं विडियो कॉलसँ अपन
पौत्र-पौत्री-दौहित्र-दौहित्रीक संग खेला लेथि, समय बीति जाइनि. मुदा, मोन नहि
भरनि.
पछाति मन भेलनि जे धिया-पुताक लेल कथा लिखी, कविता गाबी आ अपन परिवारक नेना सब
ई सब सुनय, पढ़य आ आनन्द उठाबय. मुदा, समाजक प्रगति मनुखक सोचकेँ पाछाँ छोड़ैत, तेना
निच्छोह भगैत चल गेलनि जे दीनानाथ हकमय लागथि. अपनहु सोचथि, एहि युगक बच्चा कतहु
गुलाबछड़ी आ हवा मिठाई बुझै! हमर लिखल गीत आ कथा-कविता ओकरा सबकेँ कतहु रुचैक.
मुदा, युग भले बदलि गेलैक, धिया-पुताक जीह भले आन रस ताकौ, बूढ़-पुरान कहिया धरि
नव सुर-ताल पर गायब सिखैत रहत!
ई सब सोचि, दीनानाथकेँ अपन लिखब आ गायब निरर्थक लगनि, मुदा, मन हताश नहि
होइनि. सोचथि, जँ पुरान लोकक गप पुरान नहि होइतैक, तँ पुरान कथा-पिहानीकेँ लोक
दादी-नानीक कथा-कहिनी किएक कहितैक! अस्तु, ओ निरंतर अपन सृजनक अभिव्यक्तिक नव बाट तकबाक हेतु अपन कल्पनाकेँ प्रेरित
करथि.
एक राति बड्ड जोर बिहाड़ि आयल रहैक. दीनानाथ भोरमे उठलाह तँ अपन फ्लैटक द्वारिक
आगाँ एकटा चिड़ैक गेल्ह खसल देखलखिन. ओ ओहि गेल्हकेँ
उठाकय भीतर अनलनि. घरक भीतर आश्रय आ किछुए दिनक कनिएक सेवासँ ओ गेल्ह स्वस्थ सूगाक रूप लए लेलक. घरक पोसा कुकुर सेहो छोटे रहनि.
पहिने तँ किछु दिन ओहि कुकुरकेँ ओ सूगा खेलौना-जकाँ बूझि पड़ैक. ओ सूगाक संग खेल कएल करय.
पछाति, कुकुरक बच्चा आ सूगाक बीचक नोक-झोकसँ
दीनानाथकेँ होइनि जे कदाचित ओहिसँ सूगाक हानि ने भए जाइक.
तथापि, किछु दिन धरि सूगा आ कुकुर एकहि घरमे संग-संग पलैत-बढ़ैत रहल. आ दीनानाथ एही
दुनूकेँ परिवारक नेना बूझि, कविता आ कथा लिखैत जाथि.
आ दुनूकेँ संग लए बैसथि, कविता पाठ करथि, खीसा दुनूकेँ सुनबथिन. कुकुर कखनहु
हुनक पयर लग बैसनि, कखनहु सोफा पर. सूगा सेहो कखनहु बैसय, कखनहु फुदकय, कखनहु ओ आबि
कए दीनानाथक जांघ वा कान्ह पर सेहो बैसि जाइनि. एतावता, ई दुनू दीनानाथक अनमना बनल
रहय.
चिड़ै आ कुकुर संग-संग रहैत संगी भए गेल छल.
कखनहु सूगा कुकूरक पीठ पर बैसि सवारिओ करय. मुदा, सब दिन, मनक स्थिति कतहु एक रंग
रहैक.
एकदिन एकटा बिलाड़ि कोम्हरोसँ बौआइत आयल आ दीनानाथक बालकोनीमे बैसल. कुकूर जखन बिलाड़िकेँ
बालकोनीमे बैसल देखलकैक तँ ओकरा अनसोहाँत लगलैक. सूगा सेहो तत्पर छले. बालकोनीक खूजल
केबाड़ बाटें कुकूर बिलाड़िपर झपटलक. सूगा सेहो किएक पाछू रहत. ओहो कुकूरक संगहि आगू
गेल. बिलाड़िकेँ सेहो मौका भेटलैक आ दुनू
पक्षमे एक पक्कड़ हेबासँ पहिनहि दीनानाथ ओतय पहुँचि स्थितिकेँ नियंत्रणमे लेलनि.
ककरहु कोनो नोकसान नहि भेलैक.
ओही दिन दीनानाथ सोचलनि जे सूगाकेँ कुकुरक संग आ सेहो खूजल राखब उचित नहि. ओ ओही
दिन बाज़ार गेलाह आ एकटा पैघगर पिंजड़ा कीनि अनलनि आ ओही दिनसँ सूगा अपन नव घरमे रहब
शुरू केलक. पिंजड़ाक दुआरि खूजल रहैत छलैक. तें, कुकूर आ सूगा जहिना संग-संग रहैत
छल, तहिना रहय.
मुदा, दीनानाथकेँ नेना भुटकाक कमीक अनुभव जहिना होइत छलनि, होइते रहलनि. होइनि जे
नाति-पोता-पोतीक हेतु लिखल कविता आ कथा ओ सब नहि तँ कोनो आनो बच्चा सब सुनय, खुशी
होअय, थोपड़ी पाड़य, ठहक्का मारि हँसय. मुदा, से कोना होइतनि. तें, मनोरथ पूर नहि
भेने, दीनानाथकेँ कखनो-काल उद्विग्नताक अनुभव होइनि.
कॉलोनीमे नेनाक कमी नहि रहैक. मुदा, शहर-बाजारक कॉलोनी आ गाँओक टोल-मोहल्लामे अंतर
होइछ. शहरमे अनकर नेनाकेँ टोकबो अपराध श्रेणीमे आबि सकैछ. तखन ककरासँ परिचय कोना
हो, आ संबंध कोना बनय वा बनाबी, से लाख टाकाक प्रश्न! ओहुना, जँ एक दोसरासँ काज
नहि पड़ैत हो, तँ संबंधक कोन काज!
एही गुनधुनमे एकदिन दीनानाथक मनमे एकटा नव विचार एलनि. आ ओही दिनसँ ओ सूगाकेँ
पिंजड़ामे लए ओ कॉलोनीक पार्कक एक कोनमे जा कए किछु काल बैसब शुरू केलनि.
दीनानाथ पार्कमे जाथि, पिंजड़ा राखथि, पिंजड़ाक केबाड़ खोलि देथिन आ सूगाकेँ खीसा
सुनायब शुरू करथि. सूगा कखनो पिंजड़ाक भीतर बैसय, कखनो बाहर आबि दीनानाथक जांघ पर,
कखनो माथ पर बैसि जाइनि, वा कखनो फुदकि कए घास पर सेहो बैसि जाय. मुदा, दीनानाथ
निर्विकार भावें कविता आ कथा पाठ करथि. सूगाकेँ अपन कृति सुना हुनका अपूर्व
तृप्तिक बोध होइनि.
बहुत दिन एहिना बीति गेल. तकर बाद कोनो दिन एक छोट बच्चाक नजरि सूगा पर पड़लैक.
सूगा आकृष्ट केलकैक. मुदा, अनचिन्हार वृद्धक लग अयबामे ओकरा भय सेहो भेलैक. मुदा,
जिज्ञासा भेने, बच्चाक मनमे अनजान वस्तुसँ भय बेसी दिन नहि रहि पबैत छैक. संगहि,
धखाइतो, जखन अपरिचय परिचयमे बदलि जाइछ, तखन सौहार्द्र भयक स्थान लए लैछ. अस्तु,
क्रमशः नेना सब दीनानाथक लग आबय लगलनि. जे नेना सूगाक लोभें आबय, खीसा सुनय लागय.
पछाति जे खीसाक लोभें आबय, सूगाक संग खेला कए आपस जाय. केओ आबय आ भागिओ जाय.
मुदा, दीनानाथ ने ककरो अपना लग शोर करथिन, ने ककरो बैसय कहथिन. हिनका पार्कमे
बैसल सीनियर सिटीजनक अनेक ग्रुपसबसँ सेहो कोनो लगाओ नहि रहनि. कोनो ग्रुप समोसा
जिलेबीक पार्टी करथि, केओ भजन-कीर्तन. कोनो ग्रुप जोर-जोरसँ हँसबाक प्रैक्टिस करय,
तँ केओ छोट-मोट प्रवचन सेहो. मुदा, दीनानाथ आ हुनकर सूगा एकटा स्वतँत्र वक्ता आ
श्रोताक ग्रुप छल. बच्चा सभक ओतय आयब दीनानाथक हेतु बोनस छलनि.
क्रमशः नेना सबहक संख्या बढ़य लगलैक. खीसाक लोभें कम, सूगाक लोभें बेसी. प्रश्नक
भरमार:
बाबा, सूगाक नाम की थिकै ?
ओकरे पुछिऔ.
अहाँक सूगा गप करैए?
नहि, क’ कए देखियौक ने!
सूगा! सूगा!! तोहर नाम की छौ ?
दोस्त ! दोस्त!!
बाबा, ई तँ दोस्त कहैए.
इएह तँ ओकर नाम छियैक!
बाबा, ई की सब खाइए?
देखिऔ ने ओएह तँ ओकर कटोरीमे राखले छैक.
ओ तँ पाकल लताम छै.
तँ मधुर लताम सूगाकेँ नीक नहि लगतैक!
आ आम?
खायत. मुदा, हम देबैक नहि.
किएक?
आम बारहो मास भेटतैक? पछाति नहि देबैक तँ हुज्जत करय तँ?
नेना सोचमे पड़ि माथ हँसोथय लागल.
अच्छा. हम अपन सेव दियैक ?
नहि.
किएक ?
ओ केवल अपने टा खाना खायत.
बुधियार छैक ने?
तेँ, ने हम एकरा रोज खीसा सुनबैत छियैक. बुडिबककेँ के खीसा सुनौतैक!
क्रमशः दीनानाथ आ सूगा पार्कमे सुपरिचित भए गेल छल. दीनानाथकेँ सेहो किछु नेना
परिचित भए गेल रहनि. मुदा, प्रति दिन नव नेनाक आयब आ नव-नव प्रश्न पूछब दीनानाथकेँ
नीक लगनि. सूगाक बहन्ने नेना सब हिनकर कथा-कविता सूनि लेनि, ताहिसँ हिनका बड़का
संतोष होइनि.
दिन बितैत गेल. एक दिन एकटा बुधियर बच्चा दीनानाथक लग आबि बैसि गेलनि. हिनका
एवं सूगाक संबंधमे ओकरा किछु बूझल तँ रहैक, मुदा, नेने छल. धखाइत आयल रहय. मुदा,
हिम्मत केलक, आ ओ शुरू भेल:
बाबा, अहाँ केवल सूगे टा केँ खीसा सुनबैत छियैक.
नहि.
हमरा सुनायब ?
बैसि जाउ.
लेकिन, सूगाकेँ तामस नहि चढ़तै?
किएक ?
हम ओकर खीसा सुनबै, तेँ? अहाँ ओकरे बाबा छियैक ने?
दीनानाथ हँसैत कहलखिन: अहूँ तँ हमरा बाबा कहिते छी. अहूँ सुनू.
बच्चा कनेक काल संच भए बैसल. खीसा सुनलक आ भागि गेल.
दोसर दिन, एकटा कनेक छेटगर नेना आयल. ओकर प्रश्न बुधियारिक रहैक. मुदा,
दीनानाथकेँ कोनो बच्चाक गप अनसोहाँत नहि लगनि. बच्चा शुरू भेल.
बाबा, सूगाक नाम की छियैक?
पुछियउ.
नाम की छी ?
दोस्त-दोस्त-दोस्त.
बाबा, ई तँ हमरा दोस्त कहैए. सूगा तँ हीरामन होइ छै, ने?
सब सूगाक अलग-अलग नाम होइ छैक.
अच्छा ? तँ एकटा प्रश्न पुछू बाबा?
हँ .
हमरा बाड़ीमे लतामक गाछ अछि. बहुत लताम छैक. बहुत सूगा अबैए. लतामो खाइए. मुदा,
ई तँ बेचारा बन्न अछि. एकरा किएक बन्न केने छियैक, बाबा ? पनिशमेंट भेटल छैक. हम
किछु गलत करैत छिऐक, तँ माँ कहैत छथि, बाथरूममे बंद कए देब.
दीनानाथकेँ हँसी लागि गेलनि. हँसी रोकैत कहलखिन:
ई कोनो अपराध नहि केने अछि. मुदा, हमरा घरमे कुकुर अछि. बिलाड़िओ आबि जाइछ. भय होइत
अछि, बिलाड़ि एकरा झपटि ने लैक. तेँ एकरा अलग रखै छियै.
मुदा, एतय पार्कमे तँ किछु नहि छैक.
एकर केबाड़ खोलि दिऐक?
“खोलि दिऔक.” ई कहि दीनानाथ उठि कए पार्कक दोसर दिस विदा भए गेलाह. बच्चा सूगाक
संग बैसि खेलाए लागल. ओ कनेक काल धरि उठल, बैसल, घास पर घुड़मुड़िया मारलक. सूगाकेँ किछु पुछलकैक. सूगा किछु
बजलैक, नेना सेहो किछु कहलकैक. सूगा एक बेर पिंजड़ाक खूजल खिड़की लग आबि मुड़ी बहार
केलक.
“बाहर जेबे.”
“जरूर, जरूर”
फेर पुछलकैक, ‘लताम नीक लगैत छौक?’
सूगा मुड़ी हिलौलक. नेना बुझलक ‘हँ’ कहैए. पिंजड़ामे आधा लताम तखनो रखले रहैक.
“हमरा ओतय जेबें. हमर गाछक लताम खेबें”
“जरूर. जरूर”
“उड़ल हेतौ?”
“जरूर, जरूर”
“चल.”
“चल दोस्त.”
बच्चाक मन ख़ुशी भए गेलैक. ताधरि सूगा पिंजड़ासँ बहरा कए बहार भए दूबि पर आबि
बैसल छल. ओ ओतहि एक दू बेर फुदकल. आ उड़ि गेल. बच्चाकेँ विश्वास भए गेलैक, दोस्त
लताम खयबालेल ओकरे गाछ दिस उड़ल अछि. ओहो पिंजड़ा लगसँ उठि विदा भेल.
साँझक समय छलैक. पार्क एकाएकी खाली भए गेल रहैक. जकरा जेम्हर जेबाक छल हेतैक गेल. मुदा,
ओहि कॉलोनीक पार्कमे ओ खाली, खूजल पिंजड़ा, अनेक दिन धरि घास पर ओतहि पड़ल छल.
दीनानाथकेँ ओतय फेर कहिओ केओ नहि देखलकनि.
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अहाँक सम्मति चाही.Your valuable comments are welcome.