Friday, October 23, 2026

पुरस्कार आ पाग-डोपटासँ स्कूल आ पढ़ाई दिस

सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाक दायित्व  

पुरस्कार आ पाग-डोपटासँ स्कूल आ पढ़ाई दिस

शिक्षा सशक्तीकरण थिक. समुचित शिक्षाक अभाव अक्षमताक जनक थिक.अक्षम युवा रोजगारक बाजारमे पंगु अनुभव करैछ, आ ओकर आर्थिक उन्नतिक मार्ग बन्न भए जाइछ. ई समाजक भविष्य पर बड़का खतरा थिक; दुर्बल शिक्षासँ समाज पंगु भए जाइछ.बिहार आ मिथिलामे शिक्षाक अवनति सत्तरिएक दशकमे आरंभ भेल छल. स्कूल कालेजक निरंतर अधोगातिसँ आब जँ एक दिस आंकड़ा बल पर सरकार शिक्षामे सुधारक दावा करैछ,तँ दोसर दिस खाली स्कूल-कालेज आ ट्यूशनक मारि छात्रकेँ हताश करैछ, आ अभिभावकक कोंढ़ तोड़ि दैछ.
दुर्बल शिक्षा व्यवस्था समाजक हेतु विषम समस्या थिक से बुझितो, राजनेता लोकनि बेपरवाह छथि, आ समाज निस्संक सूतल अछि वा समाधानक सब बाट बन्न देखि, सब किछु देह लगा कए मारैत अछि.
तथापि, ई के नहि मानत जे शिक्षाक अव्यवस्था विषम समस्या थिक आ एकर समाधान सामाजिक प्राथमिकता थिक.
अस्तु, एहि लेखमे हम मिथिला क्षेत्रमे प्राथमिक आ माध्यमिक शिक्षाक स्थिति पर नजरि फेरैत, शिक्षाक वर्तमान स्थितिमे सुधारक हेतु अपन विचार प्रस्तुत करब.

समस्याक स्वरुप
पछिला मास ३० सितम्बर, २०२६. बुध दिन. मधेपुर(मधुबनी)सँ हम अपन गाम, अवाम (दरभंगा) अबैत रही. बीचमे बाटक कातहि पर हमर अपन हाई स्कूल पड़ल. मोन भेल स्कूल देखि आबी. करीब पचास वर्ष भए गेल छल स्कूलक परिसरमे प्रवेश केना. आब ई स्कूल मोडल स्कूल थिक.

बेरू पहर करीब पौने तीन बजे. स्कूलक परिसरमे प्रवेश कयल. देखलियनि, किछु शिक्षकलोकनि स्कूलसँ आपस जाइत रहथि. हम पुछारि करैत स्टाफ रूममे गेलहुँ. गोड़ आठेक शिक्षक लोकनि ओतय रहथि; पुरुष आ महिला दुनू. संख्या करीब आधा-आधा.
मुदा, छात्र नदारद. कतहु केओ नहि! जे स्कूल एक युगमे जिज्ञासु छात्र आ उर्जावान शिक्षकक गतिविधिसँ जीवंत रहैत छल, तकर ढन-ढन करैत परिसर निर्जीव-सन लागल. हमरा हेतु ई बड़का आघात छल.
महादेव एवं पूरण टिबरेवाल हाई स्कूल, स्थानीय माड़वारी व्यापारी बंधु, महादेव एवं पूरण टिबरेवाल,क  दानसँ १९५२ इसवीक आसपास स्थापित भेल छल. स्थापनाक दस-पन्द्रह वर्षक भीतरहि ई विद्यालय संपूर्ण इलाकामे उत्कृष्ट विद्यालयक रूपमे प्रतिष्ठित भए चुकल छल. सएह स्कूल पूर्ण सरकारीकरणक पछाति एहन विपन्न-सन लागल से देखि चकितो भेलहुँ आ दुखी सेहो.
सोचने रही जे छात्र सबसँ गप करबाक अवसर भेटत. हम स्कूलक पुस्तकालयक हेतु पोथीओ देबैक. मुदा,से संभव नहि भेल. बोर्ड परीक्षामे स्कूलक छात्र लोकनिक उपलब्धि केहन छनि, हम तकर जिज्ञासा नहि कयल. प्रधानाध्यापक ऑफिसमे उत्कृष्ट छात्र लोकनिक नामक सम्मान सारिणी (
Roll of Honour) सेहो नहि देखलिऐक.
की एक स्कूलक परिस्थिति सम्पूर्ण राज्यक स्कूली शिक्षाक प्रतिनिधि थिक? नहि. तथापि, समाचार पत्र एवं स्वतंत्र अनुसन्धानक आंकड़ा बिहारमे शिक्षाक दयनीय स्थितिकेँ निरंतर रेखांकित करैत आयल अछि:

वर्ष २०२३ मे  जन जागरण शक्ति संगठन (JSSS)क एक सर्वे, जे अंग्रेजी पाक्षिक फ्रंटलाइन(Frontline)मे प्रकाशित भेल छल, ताहि सर्वेक अनुसार सर्वेक दिन स्कूलमे २० % प्रतिशतसँ कम छात्र उपस्थित छल. स्कूलमे छात्रक नहि अयबाक अनेक कारण अछि, जाहिमे दूरी आ यातायातक समस्या, स्कूलक आधारभूत संरचना-भवन आ शौचालय- क अभाव; शिक्षकक अयोग्यता, अभाव एवं अनुपस्थिति; पढ़ाईक कमजोरीक कारण छात्रक प्राइवेट ट्यूशनमे पढ़ब; गरीबीक कारण छात्रक जीविकोपार्जन प्रमुख थिक. एहि सभ समस्याक समाधान तँ सरकारेक दायित्व थिकैक. तखन सरकार अपन दायित्वसँ कोना पल्ला झाड़ि सकैछ! आ जँ सरकार एहि पर ध्यान नहि दैछ, तँ शिक्षा सामजिक एवं राजनीतिक मुद्दा बनबाक चाही. कारण, केवल शिक्षा मात्रसँ मनुष्यक जीवन आगू बढ़ैछ वा गरीबीमे धकेलल जाइछ.        

बिहार, दिल्ली, पंजाब, आ केरलमे स्कूली शिक्षाक तुलना    
आब बिहार राज्यक सरकारी स्कूल एवं हाई स्कूलक तुलना दिल्ली एवं पंजाब राज्यक सरकारी स्कूल एवं हाई स्कूलक व्यवस्था, आ छात्रक उपलब्धिसँ करी.
सर्वविदित अछि, केरल, दिल्ली, एवं पंजाब स्कूली शिक्षाक क्षेत्रमे राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी अछि. कहबाक काज नहि, शिक्षाक क्षेत्रहुमे बिहार आइओ पिछड़ले अछि. बिहारक स्थिति तुलनात्मक चार्ट-१ सँ स्पष्ट भए जायत.
चार्ट १ : स्कूलक आधारभूत संरचना, छात्रक नामांकन आ छात्रक उपलब्धि: दिल्ली, पंजाबक तुलनामे बिहार

 

आधारभूत संरचनाक स्थिति

छात्र आ छात्रक उपलब्धि

उपलब्धि आ दुर्बलता

बिहार

दुर्बल

अधिकतर स्कूल गामसँ पाँच किलोमीटर दूर,
अर्थक अभाव,
शिक्षाक अधिकारक हेतु उपलब्ध राशिमे सँ   
३०% वा ताहूसँ कम केर उपयोग 

नामांकन एवं स्थायित्वमे सुधार
हायर सेकेँडरी स्तर पर कन्या छात्रक अनुपात ४०.४ %

छात्रक अनुपातमे शिक्षकक अभाव (>३६ छात्र पर एक शिक्षक )

दिल्ली राज्य

अत्याधुनिक आधारभूत संरचना

कन्याक GER ८७.२ %
शिक्षाक गुणवत्तामे शीर्ष स्थान

 

पंजाब

नीति आयोगक School Education Quality Index (SQEI)मे प्रथम श्रेणी पर

तेसर वर्गक स्तर पर छात्रक दक्षतामे भारतमे शीर्ष स्थान (भाषामे ८२%, गणितमे ७८ % )

मिशन समर्थक पालनमे सफल


सारांशमे यद्यपि गैर सरकारी संस्था प्रथम केर शिक्षाक वार्षिक परिस्थितिक रिपोर्ट (
ASER), २०२४क अनुसार हालमे भलहि किछु मामूली सुधार भेले, तथापि, बिहारमे शिक्षाक अवव्यस्था शीर्ष पर अछि. ताहि पर, उत्तरी बिहारक शिक्षाक स्थिति आ छात्रक उपलब्धि (learning outcome) दक्षिण बिहारसँ न्यून अछि. अतः तुरंत सुधार नितांत आवश्यक अछि.

ततबे नहि, मिथिला क्षेत्रमे 6-14 वर्षक नेनाक कुल संख्या म सँ मात्र ७९-८९% केर नाम सरकारी स्कूल सबमे लिखाओल पाओल गेल. अर्थात् , छौ वर्षक आयुक कुल नेना म सँ  करीव २३% नेनाक सरकारी स्कूलमे नामांकित नहि छाथि. ई अनुपात करीब नेनाक कुल संख्याक १/५ सँ  अधिक भेल.

छात्रक पढ़बाक अवगतिक स्थिति सेहो चिंताजंक अछि; तेसरसँ आठम वर्गक छात्रमे, तेसर वर्गक केवल ४३.६% आ पांचम वर्गक केवल ५८.४%, एवं आठमाक केवल ७२.८ प्रतिशत छात्र दूसरा वर्ग पोथी पढ़बामे सफल पाओल गेल! ई आंकड़ा बिहारमे शिक्षाक परिस्थिति, व्यवस्थाक असफलता, एवं शिक्षाक गुणवत्ताक अयना थिक. एतबे नहि, १५ सँ १६ वर्षक वयसहिमे स्कूल छोड़ि देबयवला छात्रक संख्या सेहो काफी अछि.

बिहार सरकारी हाई स्कूल सभक परिस्थिति

एक रिपोर्टक मुताबिक़ बिहारक सरकारी हाई स्कूलमे छात्रक उपस्थिति २०% सँ ५०-६० प्रतिशत धरि पाओल गेल. जखन कि सरकारी हाई स्कूलमे छात्रक उपस्थितिक राष्ट्रीय एवरेज ७२ % क करीब अछि! ततबे, नहि बहुतो सरकारी हाई स्कूलमे छात्रक उपस्थिति शून्य धरि अछि!

आ से तखन जखन कि छात्रकेँ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (
Direct Benefit Transfer) क सुविधा, मुफ्त साइकिल, यूनिफार्म, एवं मध्याह्नक भोजनक हेतु सरकार खर्च वहन करैछ. सोचबाक थिक, जँ छात्रकेँ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) क सुविधा, मुफ्त साइकिल, यूनिफार्म भेटियो जाइत छनि, तथापि जखन क्लासरूम खाली रहैत छैक,तँ मध्याह्नक भोजनक हेतु जे टाका सरकार वहन करैछ, ओ टाका ककरा पेटमे जाइछ? अंधेर नगरी चौपट राजाक स्थितिमे ई सत्य सरकार आ शिक्षककेँ नहि सूझैत छनि? आ कि सबगोटें मीलि भ्रष्टाचारक लाभार्थीक रूपमे लाभ उठबैत छथि. जँ सरकारक शिक्षा विभाग आ शिक्षक लाभार्थी थिकाह तैओ समाज छात्रक अहित देखैत किएक चुप बैसल रहैछ, आ ट्यूशन माफियाक सहायक बनैछ? ई आश्चर्यजनक थिक! एहन स्थिति किएक छैक? सुधारक जिम्मेवारी ककरा पर छैक? ई प्रश्न समाजकेँ पुछबाक चाहियैक.

सर्वविदित अछि, सरकारी शिक्षकक चुनावक प्रक्रिया लंबा आ ‘दोष-रहित’ अछि. शिक्षकक वेतनमान पर्याप्त छनि; निम्नलिखित चार्टसँ स्पष्ट अछि जे सरकारी स्कूलक शिक्षक वेतनमान, भविष्यनिधि, स्वास्थ्य सुविधा, आवास भत्ता, वेतनवृद्धि पेंशन तथा अवकाशक दृष्टिसँ टियर- प्राइवेट स्कूलक शिक्षक सबसँ कुल आयमे बहुत आगू छथि. मुदा, उपलब्धिमे नितांत पाछू. शिक्षकक अवगति (Pedagogical and instructional skill) क जाँच तँ नहि होइछ.

तखन छात्रक उपस्थिति आ उपलब्धि न्यून किएक ? स्कूलमे उपस्थिति थोड़  किएक? से समाज देखैत अछि, किन्तु, सरकार किएक नहि देखैत अछि? अभिभावक छात्रक अधिकार दियअबाक हेतु उदासीन किएक छथि? ई प्रश्न अहम थिक. ई तथ्य शिक्षककेँ अपनहु सोचबाक थिकनि. संगहि, शिक्षक इहो सोचथु जे हमर स्कूल हमर अपन नेनाक हेतु उपयुक्त किएक नहि अछि?
एखन अनेक स्वतंत्र पत्रकार - जेना, मिथिलावासी- शिक्षाक अव्यवस्थाक एहि पक्षकेँ उजागर करैत छथि. मुदा, शिक्षा विभागक अधिकारी की करैत छथि ? जँ ओलोकनि सरकारक नीतिक पालनमे कर्तव्यच्युत होइत छथि,तँ नीक जे शिक्षा विभाग बन्न कए देल जाय. शिक्षाक परिस्थितिक मोनिटरिंग पत्रकारे करथि. छात्र आ अभिभावके छात्रक अधिकार लेल लड़थि. मुदा, से समाधान नहि भेल; समाधानक जिम्मेवारी सरकारपर छैक.

चार्ट २: बिहारमे सरकारी, गैर सरकारी एवं गैरसरकारी टियर-१ स्कूलमे शिक्षकक वेतनमान

 

सरकारी स्कूल (प्रतिमाह वेतन रूपयामे)

गैरसरकारी स्कूल (प्रतिमाह वेतन रूपयामे)

गैरसरकारी स्कूल टियर-1(प्रतिमाह वेतन रूपयामे)

प्राइमरी स्कूल शिक्षक

३८०००-४२०००

६०००-१२०००

१५०००-२५०००

मध्य विद्यालय शिक्षक

४३०००-४६०००

८००००-१५०००

२००००-३२०००

सेकेँडरी स्कूल शिक्षक

४७०००-५२०००

१२०००-१८०००

२५०००-४००००

सेकेँडरी स्कूल शिक्षक

५२०००-६००००

१५०००-२५०००

३५०००-५५०००


गाम-घरमे शिक्षाक स्थितिक हम अनुभव कहैत छी. हम जखन दरभंगा जिलामे अपन गाम-अवाम- जाइत छी,तँ पड़ोसक जे छात्र, जखन किछु पुछय अबैत अछि, पढ़ा दैत छियैक. पछिला दू वर्षमे पड़ोसक दू बहिनि अबैत छलि. जेठि बहिनि बारहमाक आर्ट्सक छात्र, आ छोटि बहिनि दसमाक छात्र. जेठि बहिनिकेँ हमर पत्नी अंग्रेजी आ सामाज विज्ञान पढ़ा दैत छलखिन. छोटि हमरासँ सायंस, अंग्रेजी, तथा मैथिली. पढ़ैत छलि. अपन श्रमसँ दुनू परीक्षामे सफल भेलि. पछाति, जेठि बहिनि तँ परिवारक दवाब आ अपन इच्छासँ  दिल्ली कमाए चलि गेलि. छोटकीक पढ़ाई एखनो जारी छैक.
पिछला मार्चमे हम फेर गाम गेलहुँ. छोटकी बहिनि जे आब एगारमामे पढ़ैत अछि, अंग्रेजी पढ़बा लेल आबय लागल. हम गद्यसँ पढ़ायब आरंभ कयल; पहिने, कोर्सबुकमे निहित लघुकथा.
विद्यार्थी बोधगर. तथापि, हमरा लागल जे छात्रकेँ विषय नीक-जकाँ बुझबामे नहि अबैत छैक. एक-दू दिनक बाद हम पुछलिऐक: ई सब अंश स्कूलमे नहि पढ़ाओल जाइत अछि? तँ ओ कहलनि, ‘केओ विद्यार्थी स्कूल-कालेज नहि जाइछ! ट्यूशन जाइ छियै’. माने, ट्यूशनमे केवल प्रश्न आ उत्तर रटबालेल देल जाइछ. कोर्सक किताब आ ओकर पढ़ाईक कोनो गपे नहि!

सवाल छैक, जखन उत्तम वेतन आ सुविधाक अछैतो शिक्षक स्कूल नहि जाइत छथि, तखन वेतन किएक भेटैत छनि. जँ छात्र स्कूलमे अनुपस्थित रहैत छथि,तँ छात्रकेँ लाभ किएक भेटैत छनि?
अर्थात् एतेक सुविधाक वावजूद जँ सरकार शिक्षामे सुधार नहि आनि पबैछ तँ समाजकेँ आत्ममंथन करबाक चाही, सरकारी तंत्र पर दवाब देबाक चाही जाहिसँ  आ सरकारकेँ तुरत काररवाई करय, दण्डक प्रावधानक उपयोग करय आ अनुशासन सुनिश्चित करय. मुदा, से किएक नहि होइत छैक?
उत्तर सोझ छैक: समाजक गह-गहमे व्याप्त भ्रष्टाचार. तेँ, जहिना सरकारक योजना कागज पर बनैत छैक,योजनाक कार्यान्वयन सेहो कागजहि पर भए जाइछ! आ राज्यसँ ल’ कए केन्द्र सरकार धरि सब रिपोर्ट चुस्त-दुरुस्त पहुँचि जाइछ!
आ शिक्षकलोकनिक नेना सेहो सरकारी स्कूल नहि जाइछ, ओहो ट्यूशने पढ़ैत अछि. मुदा, शिक्षककेँ तँ मोट वेतन भेटैत छनि. जे आर्थिक रूपें दुर्बल अछि ओकर धियापुता कतय जेतैक ? आ किएक?
ई तँ ओहिना भेल, जेना, राज्यमे जर्ज्जर स्वास्थ्य व्यवस्थाक कारण मंत्रीजीतँ अपन इलाज सिंगापुरमे करा लैत छथि, मुदा, बेचारा ग्रामीण नकली डाक्टरक प्राइवेट क्लिनिकमे ठोकर खाइत रहैछ. आ सरकार निभेर नीन सूतल रहैछ.

समाधान
एहि सभक इलाज एकेटा: समाज छात्रक अधिकार लेल लड़य. जे शिक्षक स्कूल नहि अबैत छथि, ट्यूशन करैत छथि, बर्खाश्त होथि. सरकारी शिक्षकक प्राइवेट ट्यूशन पर प्रतिबन्ध समाज सुनिश्चित करय.  शिक्षक वार्षिक रिपोर्टमे जाहि शिक्षकक काज उत्कृष्ट नहि होइनि, हुनक वेतन वृद्धि रोकल जाय. जे स्कूल स्वतंत्र गैरसरकारी संस्था द्वारा जाँच पर खरा नहि उतरय, वा जाहि स्कूलक छात्रक उपलब्धि न्यून होइक, ताहि स्कूलक प्रधानाध्यापकसँ स्पष्टीकरण मांगल जाय. मुदा, एहि सब लेल समाजसँ भ्रष्टाचारक उन्मूलन आवश्यक अछि, मुदा, से जँ असंभव अछि,तँ दिल्ली आ पंजाबक सरकारी स्कूल अपन लक्ष्य कोना प्राप्त करैत अछि? आब एहि प्रश्नक उत्तर मंगबामे, सुधार सुनिश्चित करबामे आओर विलम्ब स्वीकार नहि! तेँ, एहि ठाम सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था, मीडिया, नागरिक, सभक प्रासंगिकता समाजक सोझाँ अबैछ, जे समाज सुधारमे रूचि रखैछ.
केवल कविता पढ़ने, गीत गओने, वा गांधी, नेहरू वा विद्यापति आ चंदा झाकेँ माला पहिरओने, आ एक दोसराकेँ पुरस्कार देने आ पाग पहिरओने, डोपटा ओढ़ौने शिक्षामे सुधार नहि हएत, काज नहि चलत. समाज यथास्थितिकेँ स्वीकार नहि करत, समाजक तकर संकेत भारतसँ इंग्लॅण्ड-फ्रान्स धरि आँखिक सोझाँ अछि. अस्तु, यावत् धरि अगिला पीढ़ी अपन सपना साकार होइत नहि देखत, ओ चैनसँ नहि बैसत.
आब समय अछि जे सामजिक-सांस्कृतिक संस्था अपन सुरताल बदलथि आ शिक्षाकेँ केन्द्रमे राखि भाषा, संस्कृति आ साहित्यक लक्ष्य प्राप्त करथि. ततबे नहि, राजनीतिक पार्टी शिक्षाक अधिकारक सख्त अनुपालन हेतु सक्रिय होथि, शिक्षा राजनीतिक मुद्दा बनय. ताहीसँ समाजक आ भाषा आ संस्कृतिक उन्नति हयत. तेँ, सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था, मीडिया, आ नागरिक राजनीतिक पार्टी पर दवाब बनाबथि आ समयक मांग- सार्वजानिक सुलभ आ सफल शिक्षा- क सामाजिक सपना लक्ष्यक प्राप्तिकेँ साकार करथि.     
        
संदर्भ
:

1. Annual Statue of Education Report (ASER), 2024.

https://www.pratham.org/programs/education/aser/    

2. Nearly 3,000 Bihar government schools run without buildings, Assembly data reveals

https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/bihar-schools-without-buildings-2276-schools-across-35-districts-lack-own-premises-2965698-2026-08-07     

3.Where have the children gone? New survey focusses on Bihar’s education crisis

https://frontline.thehindu.com/news/bihar-schooling-crisis-survey-report/article67157898.ece


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