पुस्तक समीक्षा
तेस
ऑफ़ द डर्बरभिल्स
(डर्बरभिल्स परिवारक कन्या तेस)
मैथिलीमे अनुवाद
साहित्यक इतिहास नव नहि छैक. तथापि, मैथिली अनुवाद साहित्य एखनो समृद्ध नहि मानल
जायत.
एहि बीच अंग्रेजी उपन्यासकार थॉमस हार्डीक उपन्यास ‘तेस ऑफ़ द डर्बरभिल्स(Tess
of the d’Urbervilles)क मैथिली भावानुवाद पढ़बाक अवसर भेटल. अनुवादक थिकाह
डाक्टर योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’.
ई छोट आलेख एही पोथी पर संक्षिप्त पाठकीय प्रतिक्रिया थिक.
वर्ष १८९१ई. मे प्रकाशित, अंग्रेजी भाषाक सुपरिचित एवं प्रसिद्ध उपन्यास, ‘तेस ऑफ़
द डर्बरभिल्स(Tess of the d’Urbervilles)’क केन्द्रमे अछि, तेस वा टेरेसा नामक निर्धन कृषक कन्या.
एहि उपन्यासमे उनैसम शताब्दीक अंतिम भागमे, इंग्लैंडक एक काल्पनिक प्रदेश- वेसेक्स-
क ग्राम्य-जीवन, ओतुका विपन्नता, सामाजिक ताना-बाना, आ इसाई समाजक युगीन मानदंडक
बीच एही कन्याक कठिन जीवन-वृत्ति मूर्तिमान भेल अछि.
कथाक आरंभ अत्यंत रोचक ढंगसँ होइछ, जाहिमे वेसेक्स इलाकाक ब्लैकमूर गामक एक दरिद्र
फेरहा व्यापारी, जॉन डर्बीफिल्ड,कें अकस्मात् एकटा पादरी कहैत छथिन, जे ओ सुदुक डर्बीफिल्ड
नहि, सर डर्बीफिल्ड थिकाह; ओ इंग्लैंडक एक प्रसिद्ध सामंत, डर्बरभिल्स, परिवारक वंशधर
थिकाह.
एहिसँ जॉन डर्बीफिल्ड एतेक उत्साहित होइत छथि, जे ओ सोझे अपन नाम बदलि, जॉन डर्बीफिल्डसँ, डर्बरभिल्स भए जाइत छथि. संगहि, ओ
तुरंत अपन समीपमे डर्बरभिल्स परिवारक कोनो समृद्ध वंशजक खोजमे लागि जाइत छथि, जाहिसँ
हुनक परिवारक विपन्न आर्थिक दशा सुधरनि.
संयोगसँ हुनक गाम, ब्लैकमूर,सँ किछुए दूर पर एक मध्यवर्गीय परिवार रहैत छल. ई
परिवार देखाबाक हेतु, अनअवधाने, अपन पुरान पारिवारिक नाम छोड़ि, नव नाम डर्बरभिल्स
राखि लेने छल.
जखन लोभग्रस्त जॉन डर्बीफिल्ड (पछाति जॉन डर्बरभिल्स)कें एहि परिवारक पता लगलनि, तं
ओ ओही परिवारक फेरमे पड़ि जाइत गेलाह आ अपन अत्यंत सुंदरि कन्या, करीब पन्द्रह वर्षक,
तेसकें डर्बरभिल्स परिवारक ओतय नौकरीक हेतु पयरे पठा देलखिन.
ओतहिसँ आरंभ भेलैक कर्मठ एवं स्वाभिमानी कन्या, तेस केर जीवन संघर्षक गाथा, ओकर अधोगतिक
कथा.
कृषकक विपन्न आ संघर्षमय ग्राम्य जीवन, नारिक जीवनक विसंगति, धार्मिक मान्यता आ
सामंती परंपराक दंभक बीचमे झूलैत समाज. ओहि युगमे, औद्योगिक क्रांतिक आरंभिक कालमे,
इंग्लैंडक ग्रामीण मज़दूर आ किसान, दरिद्रता आ पलायन, कृषि उत्पादक घटैत मूल्य-सन अनेक
चुनौतीक सामना कए रहल छल. ई कृषिक अवनति, बेरोजगारी आ पलायन आजुक मिथिलाक सत्य थिक.
अस्तु, एहि कथामे मैथिल पाठककें बहुतो किछु अपन-सन लागि सकैत छनि. तें, ई पोथी
हमरा अंत धरि बन्हने रहल.
मूल उपन्यास पैघ छैक, तें अनुवादमे वर्णनक संक्षेपीकरण भेटत, मुदा, कथानकक संक्षेपीकरण
नहि. तैओ यदि पाठक साकांछ नहि रहथि, तँ, अंतमे तेस केर
परिणति की भेलैक, से बुझबामे कनेक समय लागि सकैत छनि. तैओ, निष्कर्ष बुझबामे भाङठ
नहिए हेतनि.
पोथीक नाम पाठककें हरसट्ठे आकृष्ट नहि करैक, से संभव. अस्तु, मैथिली सबटाइटिल(subtitle),
जेना, ‘डर्बरभिल्स परिवारक कन्या, तेस’ नीक रहितैक.
उपन्यासक कथानक एतेक रोचक
छैक आ अनुवादक भाषा एतेक सरल जे संपूर्ण पोथी लगभग एके श्वासमे पढ़ि गेलहुँ. अंग्रेजी
उपन्यासक अनुवाद रहितो एहि पोथीमे मैथिली भाषाक विपुल शब्द भंडारक सुंदर उपयोग भेल
अछि. एहिसँ कथाक सहजता अक्षुण अछि. ई अनुवादक सफलता थिक.
संभव कथाक प्रवाहमे प्रूफ रीडिंगक अशुद्धि पाठकक नजरि पर नहिओ अबनि, मुदा, बहुत
सजग पाठककें दू-चारि टा अशुद्धि भेटि सकैत छनि. पोथीक गेट-अप आकर्षक छैक. दाम कनेक
बेसी; ऑनलाइन प्रकाशनमे मूल्य निर्धारण लेखकेक हाथ टा मे नहि होइछ, से मानि सकैत
छी.
सारांशमे ‘तेस ऑफ़ द डर्बरभिल्स’
उपन्यासक अनुवाद मैथिली साहित्यमे डाक्टर योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’जीक उल्लेखनीय योगदान थिक.
ई पोथी पढ़बा योग्य अछि. एहि पोथीक स्वागत हेबाक चाही.
तेस ऑफ़ द डर्बरभिल्स’
(थॉमस हार्डीक अंग्रेजी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)
लेखक डाक्टर योगेन्द्र पाठक वियोगी
प्रकाशक: pothi.com प्रथम संस्करण 2026
पृष्ठ संख्या :247; मूल्य रु.425
प्रप्तिस्थान: प्रिंट एवं ई-बुक pothi.com

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