Tuesday, November 7, 2017

लद्दाख़ :लेह



लेह
1
लेह लद्दाख़क गप्प सैनिक लोकनि सं करबनि तं बहुतो गेल हेताह सुनल तं बहुतो के हेतनि. मुदा वएह गप्प दस वर्ष पूर्व पढ़लो लिखल सं करितिऐक तं कहितथि, जम्मू-कश्मीर राज्यक हिस्सा थिकैक. ततबे. आइ-काल्हि टीवी देखनिहार बहुतो कें फोटो देखल होइनि . मुदा, केओ लेह गेल छथि, से पुछबैक तं जनसाधारणमें प्रायः अभावृत्तिए भेटताह. दूरी, दुर्गम बाट, प्रतिकूल वातावरण, खर्च, आ प्राथमिकता. ताहिपर गंगोत्री-यमुनोत्तरी, बद्रीनाथ, केदारनाथ-सन कोनो तीर्थ जं लद्दाख़ में रहितैक तं लोक तीर्थाटन ले लद्दाख़ जेबो करैत. मुदा, लद्दाख़में ओ सब किछु नहिं. ततबे नहिं, सिन्धु जं गंगा-जकां पापोद्धारिणी  होइतथि तं लोक सिन्धुमे डुबो लगबइले लद्दाख धरि जाइत, मरबाकाल गंगाजल आ 'आब-ए-जमजम' जकां सिन्धुक जल सेहो मनुखक जीह पर देल जइतैक. मुदा, तकरो परम्परा नहिं छैक. ई सर्वविदित अछि जे भारतक उत्तरी आ उत्तर-पूर्वी सीमा प्रदेशकें छोड़ि आन सब ठाम अपन देशमें बौद्ध-धर्म विलुप्ते अछि. अस्तु, लद्दाख़में बौद्ध गामे-गाम अनेको पूजा-स्थलक बावजूद देशक समतल भूमिसं केओ बौद्ध तीर्थाटनक दृष्टिए लद्दाख़ जाइत होथि से हमरा देखल-सुनल नहिं अछि. सारांश ई जे भारतक वृहत्तर जनमानसमें लद्दाख भारतकेर एक टा सुदूर भू भाग धरि थिक आ एकर रक्षा हेबाक चाही. ततबे. किन्तु, लद्दाख़ केहन अछि तकर जिज्ञाशा कतेक लोक कें हेतैक से कहब असंभव. तें एहि लेखमें आई लद्दाख़क मुख्यालय लेहक किछु मुख्य-मुख्य स्थलक गप्प करी. सत्यतः, आब जं गूगल सं परिचय हो तं बहुतो स्थानक किछु-ने-किछु चर्चा भेटि जायत. तें हम एहन स्थान सबहक चर्चा करब जे पर्यटनक आम पड़ाव सब में नहिं गनल जाइछ.
लेह लद्दाख़क मुख्यालय थिक. एक युगमें एतय स्थानीय राजाक निवास छलनि. तें राज-प्रासाद, पूजास्थल, बाज़ार, आ सेवक लोकनिक बस्ती सबटा हयब उचितो आ आवश्यको. किन्तु, कबीर कहैत छथिन:
            चांदो मरहिं सूरजो मरिहैं मरिहैं धरनि अकासा
            चौदह भुवन चौधरी मरिहैं का की करिहैं आसा
अस्तु, आब ने लेहमें राजा छथि आ ने हुनकर प्रजा. शासन सरकारक छैक. बांकी सब नागरिक थिक. किन्तु, राजप्रासाद तं छैहे. आ लेह पहुंचब तं कतहु रही, सब सं ऊँच पहाड़पर लेह-पैलेस देखबे करबै.
 पैलेसकेर भीतर बौद्ध पूजा-स्थल (गुम्बा) छैहे. लेहके पराक्रमी राजा सिंगे नामग्यालकेर माता इस्लाम धर्मक अनुयायी छलथिन. अस्तु, बाज़ारमें पैघ मस्जिद सेहो देखबैक. एखनुक युगमें बनाओल नव शान्ति स्तूप तं आब लेहकेर प्रतीक चिन्ह-जकां छैक. ई सब ठाम सं देखबामें आओत. किन्तु, आस-पास एहन अनेक स्थल छैक जे ऐतिहासिक तं छैक किन्तु, पर्यटनक हेतु विशिष्ट नहिं मानल जाइछ. तेसुरु स्तूप एकटा एहने स्थल थिक.
जं पर्यटनकेर प्रमाणिक श्रोत, लोनली प्लेनेट (lonely planet) कें मानी, तं लद्दाख़क सब सं पैघ आ कच्चा इंटा आ माटिक बनल तेसुरु स्तूपक निर्माण में भूत-प्रेतकें नियंत्रित करबाले भेल छैक. जनश्रुति छैक, पीयर रंगक एकटा विशाल पाथरक पिण्डमें भूत प्रेतक निवास छलैक. लोकक कहब छैक जे एहि पाथर पिण्डकें देखैत तत्कालीन रानी अस्वस्थ भ गेल रहथि. अस्तु, एहि स्तूप कें निर्माण भेल आ ओहि पाथर-पिण्डकें एहि स्तूपमें बान्हल गेल. सहजहिं, जतय भूत प्रेतक डेरा हेतैक लोक ओतय किएक सटय जायत. अस्तु, लद्दाख सबसँ पैघ स्तूप, ढहैत-ढनमनाइत भूमिसात हेबाक परिस्थित में पहुंचि गेल. किछु वर्ष पूर्व स्थानीय लोकक नजरि ओम्हर गलैक आ सबहक सह्योगें जीर्णोद्धार सं तिस्सुरु स्तूप भूमिसात हेबा सं बंचि गेल.


जोरावर किला
जोरावर किला
ज़ोरावर सिंह कहलुरिया जम्मूक तत्कालीन राजा गुलाब सिंहक 'वजीर' आ सेनापति छलाह जे 1834 ई. में किश्तवार इलाकासं चलि लद्दाख़पर एकाधिक बेर आक्रमण केने रहथि. अपन अंतिम लद्दाखी अभियानक क्रम में ओ लेहमें एहि किलाक निर्माण केने छलाह, जे जोरावर फोर्टक नाम सं जानल जाइछ. ई किला लेह सैनिक जनरल अस्पतालक लगहिं अछि. सत्यतः, सदातनिसं ई किला लद्दाखी लोकनिक हेतु पराजयक प्रतीक छल. तें, लद्दाखी लोकनि एकरा पर्यटन स्थल मानथि तकर आशा करब असम्भव. दस वर्ष पूर्व लद्दाखी लोकनि सएह कहने रहथि. किन्तु, हाल में लद्दाखी मूलक, भारतीय सेनाक एकटा भूतपूर्व सैनिक अफसरसं गप्प भेल. ओ कहलनि, 'असल में, जोरावर सिंहक आक्रमण लद्दाख़ले वरदान छल. अन्यथा लद्दाख़ आइ तिब्बत आ चीनक हिस्सा होइत ! एहि किला में भगवतीक मंदिर आ पेय जलक श्रोत छैक. आब लेह ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउन्सिल जोरावर फोर्ट में पर्यटनक सीजनमें सांझुक पहर नियमतः लाइट एंड साउंड कार्यक्रमक आयोजन करैछ.                                       
दातून-साहब आ गुरुद्वारा पत्थर साहेब
अवतारी पुरुष लोकनिक जीवन हमरा सतत प्रेरित करैत अछि. बुद्ध- महावीर सं ल कय गुरु नानक देव आ अदि शंकर केर जिनगी में एकटा समानता छनि; ई सब गोटे यायावर छलाह. तें दूरी, जलवायु आ शारीरिक कष्ट हुनका लोकनि यात्रामें कोनो बाधा नहिं भ सकल. दक्षिण सं उत्तर , पश्चिम सं पूब, शंकराचार्य कतय नहिं गेलाह. गुरु नानक देवक यात्राक इतिहास सेहो आश्चर्यनक छनि. मानल जाइछ, गुरु नानक देव लद्दाख सेहो आयल छलाह. यद्यपि एकर ऐतिहासिक प्रमाण ताकब कठिन. सिक्ख भक्त लोकनिक धारणा छनि, गुरु नानक देवक लद्दाख यात्राक समय गुरुक चमत्कार ओतुका पीड़ित नागरिक सबहक हेतु वरदान साबित भेल छलैक.                                  
गुरुद्वारा श्री पत्थर साहेब
लेह-कारगिल मार्गपर लेह सं करीब 25 किलोमीटर पश्चिम मुख्य मार्गक एक कातपर गुरुद्वारा श्री पत्थर साहेब एकटा प्रमुख धार्मिक स्थल थिक. भक्त लोकनिक अनुसार गुरुनानक देवकेर लद्दाख़ यात्राक युगमें बाटक कातक एकटा ऊँचका टीलापर एकटा दुष्ट दानव रहैत छल. ओ दुष्ट  उपरसं पाथर ओंघडबैत छल आ जाइत यात्री लोकनिक हेतु आतंकक कारण भ गेल छल. एक दिन यात्राक बीच गुरुनानक देव ओतहि, बाटक कातमें ध्यानस्थ छलाह. दानव हिनको साधारण मनुक्ख बूझि  हिनको संग दुष्टतासं  बाज नहिं आयल आ  पहाड़परसं  एकटा पैघ पाथर गुरुक दिस  ओंघडौलक. गुरु ध्यानस्थ छलाह. किन्तु, अपन योग-बलसं दुष्ट राक्षसक योजना हुनका बुझबामें भांगठ नहिं भेलनि. फलतः पाथरक जे भाग ध्यानस्थ गुरुक पीठसं टकरायल ओ पिघलिकय स्वतः मोम भ कय बिला गेल. गुरुक स्पर्श सं अंशतः पघिलल ओ पाथर आइ गुरुद्वारा श्री पत्थर साहेबक मुख्य स्मारक थिक. किछु स्थानीय लोकक कहब छनि 50 वर्ष एतय किछु नहिं रहैक. किन्तु, आस्था आस्था थिकैक. एहि गुरुद्वाराक देख-रेखक भार लेह स्थित मिलिटरी यूनिटसब बेरा-बेरी सहर्ष अपना उपर लैत अछि, आ सैनिक लोकनि मनोयोगसं यात्री सबहक सेवा करैत छथि. लद्दाख़क हाड़ हिलबैबला जाड़ होइक वा गर्मीक दिन गुरुद्वारा श्री पत्थर साहेबक परिसरमें चौबीसों घंटा, जाइत-अबैत यात्री-फौज़ी-पर्यटक क्षणभरि ले अवश्य सुस्ताइत छथि, मत्था टेकैत छथि, गर्म चाह पिबैत छथि, आ लंगरमें गुरुक प्रसाद पबैत छथि. मोन राखी, गरम चाहसं स्वागतक मोल तखने नीक-जकां बुझबैक जखन लद्दाख़-सन शीत प्रदेशमें यात्रा करब. एहि गुरुद्वारामें वर्ष भरि समय-समयपर धार्मिक अनुष्ठान होइते रहैछ. घरसं दूर आ फौज़सं चुनौतीपूर्ण व्यवसायले ईश्वरक ओंगठन बड कारगर होइछ. अतः 'जो बोले सो निहाल , सत श्री अकाल '.

दातून साहेब : लेह बाज़ारमें सड़क सं उत्तर मस्जिद कतबहिं में एकटा गली में एकटा पुरान मिसवाकक गाछक विशाल सुखायल, निष्प्राण गाछ देखबैक. बाबा बटेसर नाथ-जकां हिनकहु जड़ी सं एकटा गाछ फेर पनुगी लेलक आ जवान भ गेल. एहि बुढ़ा जरद्गव आ जवान वृक्षक नाम थिक दातून साहेब जकरा स्थानीय सिक्ख लोकनि अपन पूजा स्थल दातून साहेब कहैत छथिन. सुनैत छी आब एकर उपर एकटा भव्य गुरुद्वारा दातून साहेबक निर्माण भेल अछि. मुदा, स्थानीय लद्दाखी एहि वृक्षक ऐतिहासिकतासं सहमत नहिं. मुदा, वृक्ष भले ऐतिहासिक हो वा नहिं, भक्त लोकनि एतय आबि गुरुक स्मरण तं करैत छथि. सत्यतः, ईश्वरक स्मरणले केवल मन चाही. किन्तु, मन चंचल होइछ, तें मनुक्ख प्रतीक ताकि लैछ. इएह प्रतीक कतहु गाछ, कतहु मूर्ति, कतहु नदी-समुद्र वा केवल ध्वनि ईश्वरक रूप ल लैछ. आ क्रमशः स्थान गुरुद्वारा श्री पत्थर साहेब, दातून साहेब, रीठा साहेब, रिवालसर झील वा रमबाबाक मन्दिर बनि जाइछ.
किन्तु, प्रतीककेर सन्दर्भ अयलैक तं स्वामी विवेकानन्दक जीवन यात्राक बिना ई प्रसंग पूर्ण नहिं हयत. ई प्रसंग विवेकानंदक जीवनी में भेटत. गप्प किछु एना छैक. स्वामीजी भारत-यात्राक क्रममें राजस्थान पहुँचल छलाह. संयोग सं ओतुका दीवान जे मुसलमान रहथि स्वामीजी कें अपना ओतय निमंत्रित केलखिन. संयोग सं  ओहि दिन दीवानक संग मूर्ति पूजा पर चर्चा शुरू भ गेलैक आ दीवान साहेब स्वामीजीकें मूर्ति पूजापर प्रश्न पूछय लगलखिन. स्वामीजी कहलखिन, मूर्ति प्रतीक थिकैक जाहि सं हिन्दू अपन इष्टक समीप पहुंचि जाइत छथि. दीवान कहलथिन, किन्तु, प्रतीक में देवता तं नहिं होइत छलनि. स्वामीजी तेज्श्विता आ प्रत्युत्पन्नमतित्व तं जग विख्यात अछि. हुनका की फुरलनि ओ अपन स्थान पर सं उठलाह देवालपर टांगल ओतुका राजाक पेंटिंग उतारि दीवान सोझा राखि, कहलखिन, एहि पर थूकि दियौक. दीवान तरंगि उठलाह. कहलखिन, ई की कहैत छी. राजाक चित्र आ एहि पर हम थूक फेकू. स्वामीजी निर्विकार भावें कहलखिन, ई चित्र थिकैक राजा नहिं थिकाह ! कहल जाइछ, मूर्ति पूजापर ओहि दिनुका बहस ओत्तहि समाप्त भ गेल .  
रम बाबाक मन्दिर  रम बाबाक मन्दिर आम पर्यटकक रूचिक ने स्थान थिक आ ने आन पर्यटक ओतय जा सकैछ. तथापि प्रसंग आबि गेलैक तं सुनु रम बाबाक खिसा. कथा बड्ड पुरान नहिं छैक. रम  बाबा लोकनि लेह केर स्थानीय सिगनल रेजिमेंटकेर दू टा सैनिक रहथि जनिका ड्यूटी पर रम  पीबाक दण्डमें ओहि जाड़क राति लगक पहाड़ीपर ड्यूटी देबाक आदेश भेलनि. दुनू मित्र ड्यूटी पर जेबाकाल जाड़क ओंगठन ले संगमें रम केर बोतल राखि लेलनि आ पहाड़पर पहुंचि नीक जकां रम पीबि जाड़  भगेबाक उपाय केलनि. किन्तु, खोराक बेसी भेने दुनू गोटे ओहि राति ओत्तहि पाथर भ गेलाह . ओएह स्मारक भ गेल रम बाबाक मन्दिर जकर देखभाल सिगनल रेजिमेंट करैत अछि .  


Wednesday, November 1, 2017

कुरल केर मैथिली भावानुवादक संदर्भ

               कुरल केर  मैथिली भावानुवादक संदर्भ
डाकटरी लोक-संपर्कक व्यवसाय थिकैक. सेनाक नौकरी यायावरी वृत्ति थिकैक. दुनू जं मिलि जाय तं लोकसंपर्क आ देश-कोस देखबाक अवसर दुनू अनायासे भेटि जाइत छैक. हमरा संगे सएह भेल. कश्मीर सं कन्याकुमारी आ असम-अरुणाचल सं ओखा बंदरगाह धरि , कतहु नहिं छूटल. एकर लाभ हानि दुनू छैक. सब ठामक वायु फेफड़ा में भरू,, भोजन आ जल चीखू. मुदा जीवन तं यायावरी भइए जाइत छैक. केओ कहता, एहन जीवन में मनुख कतहु जडि नहिं जमा पबैछ. मुदा हमरा तकर कचोट नहिं. हम सांप जहां एकठाम चकरी नहिं मारय चाहैत छी. बल्कि, पक्षी जहां शीतल निर्मल वायु, अंधड-बिहाडि-बरखा-बाढि सब में विश्वभरिक भूमिक गंधक अनुभव करय चाहैत छी, विस्तृत आकाश क आयाम कें अपन अनुभव क तराजू पर भजारय चाहैत छी. मुदा एहिमें दोष तं नहिं, एकटा चुनौती छैक. जतेक ठाम ततेक प्रकार क लोक ,ओतबे प्रकारक भाषा. ई चुनौती हमरा वरदान बूझि पडैए. कतेक नीक होइत जतहि जैतहुं कोनोे मायावी शक्तिसं ओतुके भाषा बाजय लगितहुं. मुदा से संभव नहिं. आब असली गप कहैत छी. नौकरी क अवधि में हमरा जाहि नव भाषा से पहिल परिचय भेल छल ओ छल तिब्बती भाषा. सुनै छी, यात्रीजी तिब्बत गेल छलाह. (ओकर संकेत ' बादल को घिरते देखा है' में भेटत.) मुदा हमरा ले तिब्बत हमरहि लग आबि गेल छल. वर्ष 1983 . ओहि वर्ष जनवरी में हम दानापुर सेना अस्पताल में योगदान केने रही. अप्रैल मास में बेसिक ट्रेनिंग ले लखनउ गेल रही. जुलाईक अंत में चकराता, उ.प., में पदस्थापित भेल रही. ओतहि तिब्बती भाषा से पहिल परिचय भेल छल. कहि सकैत छी, तिब्बती भाषा क पचीस-पचास वाक्य हमरा आइओ अबैत अछि. लिपि तं मिथिलाक्षर से मिलिते छैक.
तकर पछाति अनेक वर्ष क बाद बंगलोर में कन्नड आ तमिल सं परिचय भेल. बंगलोर में कन्नड सं परिचय तं स्वाभाविक. किन्तु, कुरल आ तमिल सं परिचय संयोगे कहि सकैत छी. हमरा नहिं बुझल छल ई परिचय प्रेम में बदलि जायत, आ तमिल दक्षिण भारत में हमर मातृभाषा भ जायत.                                                                 
 2. ले. कर्नल हरिदेव काटकर शास्त्री 13 कुमांउ रेजिमेंट केर भूतपूर्व अधिकारी छलाह. 13 कुमांउ रेजिमेंट भारतीय सेनाक वएह बटालियन थिक जे 1962 भारत चीन युद्ध में शौर्य केर अद्वितीय इतिहास रचने छल. हमरा जहिया कर्नल शास्त्री से भेंट भेल छल हुनक वयस 70 वर्ष से उपरे छल हेतनि. तें सैनिक अधिकारीक रूप में ओ केहन छलाह से कहब असंभव किन्तु ओ संस्कृत केर निविष्ट विद्वान छलाह. हुनका मोतियाबिंदु रहनि आ हुनक दुनू आंखिक मोतियाबिंदु क अौपरेशन कय हमहीं लेंस लगओने रहियनि. दृष्टिमें आशानुकूल सुधार सं ओ संतुष्ट छलाह. डाकटर कें आओर की चाहियैक ? हमरालेल हुनक संतुष्टिए पुरस्कार छल. किन्तु औपरेशनक किछु दिन पछाति ओ उपहार स्वरूप स्वर्गीय राजा जी लिखल कुरल केर अंग्रेजी अनुवाद हमरा देने गेलाह. 
कुरल मे एकटा पद छैक: 
 कुरल 948
 நோய்நாடி நோய்முதல் நாடி அதுதணிக்கும்
வாய்நாடி வாய்ப்பச் செயல்.

  • मैथिली अनुवाद सुनू :

ताकी कारण करी निदान
उचित चिकित्साकेर संधान
कुरल से इएह हमर परिचय छल जे क्रमशः प्रेम में परिवर्तित भ गेल.

                                                                        3
हितोपदेश पढू वा नीतिशास्त्र, जीवन पद्धति, अर्थ वा लोक व्यवहारक सूक्ति सब ठाम भेटत. किन्तु, चिकित्साशास्त्रक गूढ गप डाकटर वैद्यक अतिरिक्त आओर के कहत ? की तिरुवललुवर वैद्य छलाह ? संभव छैक. पहिलुका युग में गुणी लोकनि एकाधिक व्यवसाय में निपुण होइत छलाह. ई परंपरा तं बीसम शताब्दी धरि हमरा लोकनि देखने छी. जं सुदूर अतीत में जाइ तं किछु लोकक मानब छनि जे महात्मा बुद्धे सुश्रुत छलाह. ई तं सर्वविदित अछि, वैद्य लोकनि कविराजक पद से विभूषित होइत छलाह. एकर पाछू की तर्क वा परंपरा छलैक से हमरा बूझल नहिं अछि. किन्तु, भले वैद्य नहिं होथु ,मुदा तिरुवलुवरकें चिकित्साक अनुभव अवश्य छल हेतनि. अगिला कुरल सुन, आ उदाहरण देखूु. ई कुरल तं हमरा एतेक नीक लागल जे एकरा हम अपन consultation room में अपन कुर्सीक पाछू लिखबौने रही:

உற்றவன் தீர்ப்பான் மருந்துழைச் செல்வானென்று
அப்பால் நாற்கூற்றே மருந்து.

हमर शब्दमें ई कुरल सुनू:
रोगी , वैद्य , सेवक, उपचार
चारि खाम्हपर रोग-विचार

डाक्टरीक पढ़ाई एहि सं बेसी नीक अनुदेश आओर की भेटत !

Sunday, October 1, 2017

पाच गोट बिसरल क्षणिका

पाच गोट बिसरल क्षणिका
1
ह'र -फार आ चौकी  
किछु नहिं थिक बपौती 
2
सब दिन छलै सेंधकट्टा , सबतरि छैक मूस 
तें तं केने छी कलेजा मजगूत 
3
कोसिक कटनियां, कमलाक बाढ़ि 
बरिसौ ग' हथिया , लेबै सम्हारि 
4
पूँजी थिक विद्या , विवेके थिक समृद्धि 
जं धने होइत तराजू तं छोड़लनि किएक महात्मा बुद्ध 
5
पूँजी थिक श्रम, बुद्धि थिक बल 
हारि जाइछ रावणों कतबो टा हो दल !

Tuesday, August 15, 2017

लंगूर नहितन !

लंगूर नहितन !

एखनुक युगमें लोक  जतेक लेख फेसबुक आ व्हाट्सएप्प पर पढ़इत अछि पहिलुक युगमें ओतेक जं शास्त्र पढ़इत तं विश्वभरिमें विद्वान आ पंडित लोकनिक बाढ़ि आबि जाइत. दोसर संभावना इहो जे सूचनाक एहन बाढ़िमें सत्य आ असत्यक भेद करब ओतबे कठिन जतेक समुद्रक पानि म सं गंगा-गोदावरीक पानिकें फुटकायब.
पहिने लोक कहैक, ‘केओ कहत कौआ कान ल कय उडि गेल, तं पहिने अपन कान हंसोथब , कि कौआक पाछू भागब ?’ मुदा एखन ओहो तर्क बेकार. एकटा टटका उदहारण देखियौक: एक दिन केओ व्हाट्सएप्प पर घोषणा केलनि, ‘ यूनाइटेड अरब अमीरातक सरकार माफिया सरगना दाउद इब्राहीमक 1500 करोड़ रुपैयाक संपत्ति जब्त केलक.’
दोसर दिन दोसर गोटे बजलाह, ‘फलां पार्टीक प्रवक्ता एना कहने छलाह ...’
तेसर दिन ओही पार्टीक प्रवक्ताक घोषणा केलनि, ‘दबंग नेताक हाथमें जं देशक शासन रहत, तं अपराधी लोकनिक इएह हाल हयत.’
चारिम दिन जाधारि आन कोनो स्पष्टीकरण आओत ई मिथ्या, पार्टीक उपलब्धिमें परिगणित भ गेल. पांचम दिन जाधरि यूनाइटेड अरब अमीरात सरकारक खंडन आयल, नव समाचारक बाढ़िमें ईहो खबरि भसिया गेल . ई भेलैक post-truth. माने सत्यक संधान के करय. मुदा सामान्य पाठक व जनता की करय ? अहाँकें मोन हो तं सुनू, गुनू आ मोन हो तं मानू ! मुदा सत्य आ फूसिक ई घोर-मट्ठा बाढ़ि बहिते रहत. मुदा, सूचनाक एहि घोर-मट्ठामें सत्यकेर संधान सम्भव छैक. किन्तु , छैक श्रमसाध्य, भयावह, आ पुरस्कार-विहीन.
सत्य पूछी तं, सूचनाक अधिकारक अधिनियम अयलाक बाद , कतेककें, गोटे जे तत्कालीन  व्यवस्था सं हताश छलाह, लगलनि जेना देशमें  स्वतंत्रताक दोसर भोर भेलै-ए . किन्तु, दिनुका इजोतमें चोर सब हठात बिला तं नहिं गेल. असल में ससंकितो नहिं भेल. बल्कि, जतय जेना जे चलैत छलैक, चलिते रहल. तकर कारणों छैक. होइत अपराध कें देखि कतेक गोटे अपराधिक हाथ कें रोकबाक साहस करै-ए ? हत्याक प्रत्यक्षदर्शी कतेक बेर गवाही देबय चाहैत अछि ? के जायत कोर्ट-कचहरी ? के मोल लेत दुश्मनी ? अस्तु, गाँधीजीक बानर सब जकां ने अनुचित देखी, ने सुनी , ने बाजी .ई भेल एकटा नैतिक आ दार्शनिक पक्ष. मुदा, व्यवहारिक  पक्ष दोसर छैक. अनुचित होइत देखि बाजब तं जीह झीकि लेत. गवाही देबय जायब तं जानक गहाकि भ जायत . तखन, कल-कुशल आन्हर , बौक , बहिर भेल पड़ल रहू. समाजमें अधिकतर लोक सएह करैत अछि . हमरो लोकनि  सएह करैत छी. तथापि किछु गोटे हिम्मत करैत छथि, Post-truth कें खिहारबाक, असत्य कें तकबाक, फूसि कें नंगरयबाक. एहि काजमें खतरा खूब छैक. किन्तु, सत्यकेर संधान में जकरा रोमांचक अनुभव  होइत छैक, से ओ खतरा मोल लैत अछि, मरितो अछि. मुदा, सरकार बहादुर एकटा आओर सुधार करबाक नेआर में अछि. माने, सत्यक संधान करैत सत्यार्थी जं सरकारी जवाब पयबासं पहिनहिं मरि गेलाह, तं प्रश्नोत्तर देबाक काजे नहिं. माने, सत्यार्थिक अन्त्येष्टिक संग सत्यकेर अन्त्येष्टि सेहो भ गेल. मुदा, सत्य पूछी तं सत्यकेर खोजक आवश्यकता छैक. असलमें, सरकारी विभाग, गैर-सरकारी प्रतिष्ठान, आ स्वयंसेवी संस्था, सब केओ अपन-अपन लक्ष्य ल कय चलैत अछि. सब अपन-अपन उपलब्धि सं गौरवान्वित होइत अछि, आ अपन उपलब्धिक प्रचार करैत अछि. मुदा, प्रचारित उपलब्धि म सं कएक टा प्रचार थिकैक, आ कोन सत्य, तकर परीक्षासं समाजक उपकार तं अवश्य हेतैक. सत्य आ आंकड़ाक बीचक खाधिक एकटा उदहारण लिअय; जिला अंधता निवारण समितिक लक्ष्य आ उपलब्धि. जिला अंधता निवारण समितिक तत्वावधानमें प्रतिवर्ष जिलामें मोतिविन्दुक हजारों ऑपरेशन होइत अछि, से मानि कय चलैत छी. केन्द्र सरकार लाखों रुपैया खर्च करैत अछि. तमिलनाडु में हमरा लोकनि-सन  दर्जनों गैर-सरकारी स्वयंसेवी संस्था एहि अभियानक अन्तर्गत अपन क्षमताक अनुकूल गामे-गाम आँखि जांचक शिविर लगबैत अछि, ऑपरेशनक योग्य रोगी सबहक चुनाव क कय  अपन गाडी में अपन-अपन मुख्यालयस्थित अस्पताल  धरि अनैत अछि आ रोगी सबहक आँखिक ऑपरेशन क कय दवाई-चश्मा सहित द कय रोगी सब कें अपन गाड़ीसं घर धरि पहुंचा अबैत अछि.   मुदा, अपना गाममें (दरभंगा,जिला) हमरा एखन धरि एहन केओ नहिं भेटलाह अछि जे कहथि जे सरकार हमर आँखिक मुफ्त ऑपरेशन करओने अछि. मुदा, हमरा नहिं विश्वास अछि एहि अभियानक अन्तर्गत बिहार सरकार केन्द्र सं टाका नहिं पबैत अछि. अतः ,एतय आंकड़ा आ सत्यके दू पलड़ापर राखि भजारबाक आवश्यकता छैक. मुदा, करत के ? सरकार तं एहि ऑडिटकें आर्थिक मदद नहिं देतैक ! ई भेल आम सरकारी विभागक उपलब्धिक लेखा-जोखा. आब एकटा एहन विभागक उपलब्धिक गप्प करी जे सामान्य अर्थमें उत्पादक नहिं बूझल जाइछ. ई विभाग थिक सशस्त्र-सेना. एहि बीच सेनाक उपलब्धि -सर्जिकल स्ट्राइक- क खूब प्रचार भेल. सैन्य अभियानक नायक लोकनिक फोटो देखार भेल. हेबनि केर चुनाव में सरकार-सेना आ शासक पार्टीक आरि-धूर कें तोड़इत सेनाक उपलब्धिक कें पार्टीक उपलब्धिक रूप में खूब प्रचार भेल. सत्यतः, जनिका  सेनाक कार्य–पद्धतिक कनेको अनुभव छनि ओ लोकनि सीमा क्षेत्रमें तैनात सैनिक दिनचर्या जनैत छथि. सीमा क्षेत्रमें प्रतिद्वंदी सेना एक दोसराक गतिविधि पर निरंतर नजरि रखैछ, आ दिन-प्रतिदिन आक्रमणक तैयारी आ प्रतिकार दुनूले प्रस्तुत रहैछ. मुदा, प्रचार सेनाक संस्कृतिक विरुद्ध थिकैक. युद्धमें सेनाक विजय आ पराजय दुनू राष्ट्र आ जनताक थिकैक. मुदा, बाँहि तं सरकारे पुजबैत आयल अछि. किन्तु, सेनाक दिन-प्रतिदिनक गतिविधिक वाहवाही लूटब नव थिकैक. आ एकर ऑडिट के करत ! जं केओ सत्यार्थी प्रश्न पूछलखिन तं ओ भेलाह देश-द्रोही. आ देश-द्रोहक सजाय फांसी थिकैक ! ताहि में लगतैक श्रम आ समय. तें, टीवीक अखाड़ापर दंगल केनिहार खलीफ़ा लोकनि सत्यार्थी लोकनि कें ततेक ने पटका देथिन जे सत्यार्थी सन्ना भ जाइत छथि. मुदा, टीवीक खलीफ़ा सब डब्लू-डब्लू एफ (WWF) केर पहलवान जकां दंगल खेलाकय घाड़ा-जोड़ी केने हंसैत-खेलैत अपन-अपन घर जाइत छथि. काल्हि फेर भोर हेतैक. फेर ओतैक कोनो समाचार आ सांझुक पहर फेर हेतैक हवाई दंगल , चिकरा-चिकरी , आरोप-प्रत्यारोप. देश मंगतैक जवाब आ जनता अवाक् भेल मुँह तकैत रहत. जा ! सबटा गप्प तं दिल्लीए लूटि लेलक. पटना धरि केर चर्चा नहिं भेलैक. तखन , दरभंगा-मधुबनी आ गाम के आओत ?
आब एकटा अओर दोसर  गप्प कहै छी सोशल मीडियाक उत्कर्षक एहि युग में एकटा आओर चमत्कार भेलैए. भोर-सांझ नव-नव अनुसन्धान ! कला, इतिहास, भूगोलक गप्प तं छोडू, विज्ञानहुक क्षेत्रमें. ई सब ततेक सफल सिद्ध भेल अछि जे आब फेक-न्यूज़ (मिथ्या-समाचार) केर पंजीकृत वेबसाइट धरि उठि बैसल अछि. पढ़ू फेक आविष्कार. मुदा, समाचारकें पढ़बासं आ सत्य बुझबासं पहिनहि समाचार कें शेयर करू, परिवार-दोस्त-मित्रकें चारू कात पठाउ जाहि सं बुझबा जोग होइक जे फलां भाई, फलां काका जीविते छथि, व्हाट्सएप्प पर ! भले, गप्प पढ़ि लोक सोचय, what an  ape ! माने, लंगूर नहिंतन !

आरम्भमें हमहूँ बनलहु व्हाट्सएप्पी. किन्तु, भरि दिन प्रत्येक मेसेजक संग टुंग ! टुंग !! टुंग, सुनि दौडू. चट सं फोन उठाउ, पट सं मेसेज पढ़ू. 400 गुड मोर्निंग, चालीस टा बासि व्यंग आ दर्जनों विडियो- गीत सं ल कय रामदेवक योग, बाबा लोकनिक भोग, नव नव इतिहासकारक विद्वतापूर्ण आविष्कार, आ भाषण. जं व्हाट्सएप्प खोलल आ नीक जकां पढ़य लगलहु तं भरिओ दिन जं ओएह टा पढ़इत रहलहुं तं आन कोनो काज करबाक समय नहिं भेटत. जं पढ़िते-पढ़िते सीढ़ी उतरलहु तं हाथ पयर टूटत. पढ़इत- पढ़इत रोड पार कयल तं प्राण अपटी खेतमें. मुदा ओ तं भेल एकटा गप्प भेल. एकटा आओर समस्या. निरंतर अबैत सूचनाक (!) एहि बाढ़िमें टेलीफ़ोन रिचार्जक सबटा बैलेंस एकाएक तेना भासि जाइछ जेना बिहाडि अयलापर  जोड़ल जोगाओल सब किछु अकस्मात बसातक संग उडि जाइछ. किन्तु, एकटा गप्प छैक. हमर टाका बोहइत हो तं बोहाओ ! टेलीफ़ोन कम्पनी तं बम-बम करैये ! देशक आर्थिक व्यवस्था निरंतर सुदृढ़ भ रहल अछि !! हं, अहांक पड़ोसी मरलाह वा जीलाह ताहि सं अहाँ के की ? अहाँ व्हाट्सएपक परमानन्दमें लागल रहू !              

Monday, July 17, 2017

योरप यात्राक किछु आओर पन्ना



फ्रांस
बेल्जियम केर बेफरें शहर सं भोरे पेरिस ले बस सं विदा होइत गेलहुं. पेरिस धरि करीब अढ़ाइ घंटाक यात्रा. मुदा हमरा लोकनि सोझे पेरिस नहिं गेलहुं. शहर केर बाहरे शान्तिली ( स्थानीय लोककें  शांतीई कहैत सुनलियइ ) नामक गाओं. एकटा पैघ प्रासाद- फ़्रांसिसी भाषामें, सातो  . चारू तरफ़ गढ़-खइ, आ घोड़सार . विशाल बगीचा, मुदा फूल कत्तहु नहिं . पेरिस शहर केर बाहर ई भवन सुपरिचित टूरिस्ट स्पॉट थिक. फ़्रांसिसी टूर ऑपरेटर कहलनि, एहि भवनक बगीचाक अनुकरणमें फ्रांस केर रानी मेरी अन्तोनेत्ते वर्साय प्रासादक बगीचा बनबओने छलीह . मुदा, हमरा किछु आने पक्ष आकृष्ट केलक . भवन केर बाहर एक जोड़ा स्वस्थ आ सुदर्शन कारी शिकारी कुकुर . दोसर दिस बारहसिंगा . टूरिस्ट गाइड कहलनि , शिकार एतुका सामंत लोकनिक मुख्य पेशा छलनि . एहि सब ठाम शिकारी कुकुर सामंत लोकनिक सहचर छलनि. तें , कुकुरक मूर्ति नीक शिकारी कुत्ता  सबहक स्मारक थिकैक .

सातो शांतीई भेल एकटा प्रासाद- विशाल भवन. स्पष्ट छैक राजा वा सामन्त लोकनि जतय कतहु, जाहि भव्य भवन सब में रहैत छलाह तकर आकार एक व्यक्तिक आवश्यकता सं कतेक अधिक पैघ होइत छलैक . किन्तु, प्रत्येक व्यक्तिक आवश्यकता ओकर आवश्यकता पर आ दायित्व पर निर्भर करैछ ; भारतक राष्ट्रपति भवनमें  सेहो लगभग 360 टा कमरा छैक. अस्तु, सातो शांतीई सेहो एकटा सामन्तक भव्य आवासक प्रतीक थिक जाहिमें अनेक आवास-गृह, विशाल पुस्तकालय, चित्र-वीथी (फोटो गैलरी ), शस्त्रागार क संग मूर्तिकला, घरेलू उपस्कर, कपड़ा-लत्ता, आ भोग-विलासक  अनेक उपकरणक भव्य संग्रह छैक. वस्तुक विविधता आ संकलित वस्तु-जातक एतेक विस्तृत आयामकें देखि सकैत छी, थोड़ समयमें  सूक्ष्म दृष्टिए देखब आ बूझब असम्भव छैक.

सातो शांतीईक भ्रमण केर पछाति, ओहि परिसरमें टूर ऑपरेटर- थॉमस कुक - भोजनक व्यवस्था केने छलाह . कोनो वेजाय नहिं कहैत छैक, ह्रदय केर बाट पेट होइते जाइछ (way to the heart is through stomach). लगैत अछि,थॉमस-कुक एहि गप्पकें गेठरी बान्हि रखने छथि. सबठाम अपन रूचिक, पवित्र आ स्वादिष्ट भोजन सब कें नीक लगैत छैक. फैशन में भले कहियौक हम नव-नव भोजन चीखए  चाहैत छी , मुदा, संतुष्टि चिन्हले-जानल-स्वादले  भोजन में भेटैत छैक. तें, गरम-गरम पूड़ी, पुलाव आ आन सब किछुक आलावा अलफोंसो आमक रस एतय खूब हिट भेलैक. अंततः भरल पेट आ संतुष्ट मन. बस में बैसलहु आ बस पेरिस दिस विदा भेल.
फ्रांस केर पर्यटन कनेक संक्षिप्त बुझू. एक दिन दुपहरियामें पहुंचल रही आ दोसर दिन भोरहिं यूनाइटेड किंगडम (UK) केर लेल प्रस्थान. मोन में प्रश्न उठैछ एतबे काल में की सब देखब ! मुदा आब जखन आपस आबि गेलहुं तं लगैत अछि ओतबे काल में जे किछु देखलहु से अवश्य अविस्मरणीय.
सातो शांतीईक भ्रमण केर पछाति हमरा लोकनि सोझे दोसर पड़ाव छल सीन नदीपर नौका विहार. टूर ऑपरेटरकेर बस शांतीई गाओं सं सोझे एफिल टावर लग सीन नदीक किनेर पर उतारलक. कंडक्टेड-टूर केर बड़का गुण छैक- अपना कोनो चिन्ता नहिं. टूर ओपरटर पूरा ग्रुप ले टिकट किननहिं छलाह. बड़का मोटर बोटकेर ओपन डेक. सब कें अपन- अपन मनपसंद स्थान चुनबा ले पर्याप्त विकल्प. मोटर-बोट केर सीढ़ी-ए पर फोटोग्राफर पतियानी में ठाढ़, फोटो झिकैत.सबहक फोटो झिकल गेलैक. मुदा, अहाँकें  फोटो चाही तं टाका दियउ, फोटो ल लिअय . नहिं चाही, जुनि लिअय. डिजिटल फोटोमें फिल्म दूरि हेबाक, टाकाक बरबादी कोनो भय नहिं. सीन नदीक एहि नौका विहार सं आस पासक पेरिस देखबाक अवसर भेटल . एहि नदीक किनेर पर पेरिसवासी लोकनि कोना दिन बितबैत छथि तकरो किछु अनुभव भेल. जहिया सं ज्ञान-प्राण भेले, हमरा लोकनि पेरिसक नाम फैशनक पर्यायकेर रूप में सुनैत एलियैके. देखी, पेरिस में फैशन केहन छैक ! मुदा हमरा लगैत अछि फैशन एकटा दृष्टि थिकैक, जीवन पद्धति थिकैक जकरा केवल पहिनावा सं नहिं जोड़बाक चाही. एहि तर्क कें जं कनेक आगू धरि ल जाइ तं नेहरुक आलावा महात्मा गाँधी सेहो एकटा फैशनक प्रवर्तक छलाह. मात्र धोती, जनउ आ कान्हपर अंगपोछाक पहिरनामें गूढ़ शाश्त्रक चर्चा करैत हमरा लोकनि गामक पण्डित लोकनि सेहो एकटा एकटा फैशनकेर प्रतिनिधि छलाह, भले ओहि  फैशनक भौगोलिक आ सामयिक सीमा थोड़े छल होइक. अस्तु, हमरा लोकनि नाओपर चढ़बाक आ पेरिस देखबाक दुनू आनन्द लेल आ पुनः एफिल टावर लग आबि एहि विश्व प्रसिद्द टावर केर तेसर मंजिल धरि चढ़बाक पतियानी में लागि गेलहुं.
एफिल टावर : देस-कोस घुमनिहार आ पेपर-समाचार-पत्र पढ़निहार में अभावृत्तिए एहन केओ हेताह जे एफिल टावरक नाम सुनने नहिं होथि. तथापि नाम सुनबा, फोटो आ सिनेमामें देखबामें आ सद्यः एफिल टावरपर चढ़बाक अनुभव में अन्तर नहिं छैक से कोना कहब. की थिक एफिल टावर ? ई एकटा विश्वप्रसिद्ध ऊँच टावर थिक जकर नामकरणमें  'एफिल' गुस्ताव नामक इंजिनियरक नाम जुड़ल अछि ; एफिल गुस्ताव ओहि कम्पनीक स्वामी छलाह जे कम्पनी एहि टावरक निर्माण केने छल. एफिल टावर क निर्माण फ्रांसिसी क्रान्ति शताब्दीक अवसर पर 1889 ई. में विश्व-सम्मेलनक स्वागत द्वारक रूप में भेल छल. किन्तु, अपना युगमें ई टावर एकटा अजूबा इंजीनियरिंग कृतिक रूप में विश्व-प्रसिद्द भ गेल. आइ जखन विश्वक आन शहरकेर तं गप्प छोडू , फ्रांसहिं में एहि सं ऊँच अनेक टावर छैक, तखनो, विकिपीडियाक अनुसार  वर्ष 2015  में करीब 70 लाख यात्री एफिल टावर पर चढ़इत गेलाह. से भेल दुनियाक गप्प. हमरा लोकनि तं मेडिकल कॉलेज छात्रावस्था क जमानासं एकर यशोगाथा सुनि रहल छलहु.  हमरा लोकनिक टिकटमें टावरक तेसर महल धरि चढ़बाक अधिकार छल. लिफ्ट सं चढ़लहु. चारूकात घूमि जतय धरि नज़रि जायत बिना कोनो अवरोधक सम्पूर्ण पेरिस केर नज़ारा लियअ. मुदा रोचक लागल जे चोर उचक्का सब सेहो टिकट ल कय एफिल टावर पर चढ़इत अछि; ठाम-ठाम पर तकर चेतावनी- जेबकतरा सं सावधान ! धुर, महाराज एत्तहु  वएह हाल. ताहि पर लोकक मेला एहन जे सावधान नहिं रहब तं धक्कम-धुक्का सं बंचब असम्भव.
एफिल  टावरक भ्रमण केर पछाति हमरा लोकनि विश्व-प्रसिद्द लौव्रे म्यूजियम (louvre museum) गेलहुं. लौव्रे-म्यूजियम म्यूजियमके देखबाले एक दिन पर्याप्त नहिं, प्रायः एक मासहु नहिं. म्यूजियम केर संकलन एतेक विविध आ संकलित वस्तुक संख्या एतेक अधिक छैक जे ओकरा सबकें देखब आ बुझब ने एक व्यक्तिक रूचिमें निहित भ सकैत छैक आ ने एक व्यक्ति एकटा जीवनमें विविधाक एतेक विस्तृत आयामके अपन रूचिमें समेटि-ए सकैत अछि. मिस्रकेर प्रागैतिहासिक छोट-छोट मूर्ति सं ल कय, विशालतम स्थापत्य धरिक विभिन्नताक क बीच लेओनार्दो दा विंसीक मोनालिसाक पेंटिंग एतुका सब सं पैघ आकर्षण थिक. एहि संग्रहालयमें लोकक मेलामें एक दोसराक संग छूटब, कोनो वीथी वा हालमें भुतिया जायब खूब सम्भव छैक. तथापि, पैघ आकार आ धार्मिक आस्था सं दूर हेबाक कारणें लौव्रेमें वैटिकन सिटीक तुलनामें एतय धक्कम-धुक्की नहिं-ए बराबरि.  किन्तु, एहन विश्वप्रसिद्ध संग्रहालयमें फोटो झिकबाक कोनो मनाही नहिं, से सब कें नीक लगैत छैक. ओना तं एखनुक युगमें  विश्वक कोन एहन संग्रहालय नहिं जकर भीतर केर टूर (virtual tour) इन्टरनेट पर नहिं क सकैत छी. तथापि, सिनेमामें देखब, इन्टरनेट पर टूर करब आ प्रत्यक्ष देखबामें बड अंतर छैक.
लौव्रे-म्यूजियम (louvre museum) देखलाक पछाति वर्साय प्रासाद देखय गेल रही. वर्साय प्रासादकेर वर्णनकरब सरल नहिं. प्रायः आब तकर आवश्यकता सेहो नहिं. इन्टरनेटकेर वेब-पेज पर सूचना उपलब्ध छैक. किन्तु एखनो सब तं ने इन्टरनेट पर हवाखोरी करै-ए आ' ने सब इन्टरनेट सं परिचिते. तें, बहुत संक्षेपमें एतबा कहि सकैत छी, पेरिसक वर्साय प्रासाद आकार, ऐश्वर्य, आ ऐतिहासिकतामें विश्वप्रसिद्द अछि. ई वएह प्रासाद थिक जकर ऐश्वर्य, आ तत्कालीन राजाक निरंकुश जीवन शैली, फ़्रांसिसी जनताक असंतोष आ फ्रांसिसी क्रान्तिक कारण बनल छल आ विद्रोहक सुनगैत चिनगी अंततः एहन ज्वालामुखीक रूप लेलक जे राजा लुइस 16म आ रानी मेरी अन्तोनेत्ते क सार्वजनिक फांसीक पछाति-ए मिझायल. ओ भेल ऐतिहासिक प्रकरण. किन्तु, वर्साय पैलेस ओहुना अनेक ऐतिहासिक शीर्ष-सम्मलेन आ  कालजयी सन्धि सबहक प्रत्यक्षदर्शी थिक. प्रथम विश्वयुद्धक पछातिक प्रसिद्द वर्साय-सन्धि (treaty of Verseilles) एही वर्साय-पैलेस केर शीश-महलमें भेल छल. मानल जाइछ, वर्साय-सन्धिए (treaty of Verseilles) ओ घटना थिक जाहिमें द्वितीय विश्व-युद्धक बीजारोपण भेल छल. एखनहु, एहि शीश-महल में कतेक राजनेताक सार्वजनिक सम्मान होइछ आ कतेक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मलेनक आयोजन होइछ.                                              
एहि दुनू विश्व-पर्यटन स्थलक दर्शनक बीचक बाट कॉन्कर्ड-स्क्वायरक, सांज एलिजी (Champs Elysees), आ विजय द्वार (The Arc de Triomphe de l'Étoile) सबटा बाटे बाट देखैत गेलहुं. कॉन्कर्ड-स्क्वायरक वएह ऐतिहासिक स्थल थिक  राजा लुइस 16म आ रानी मेरी अन्तोनेत्ते कें सार्वजनिक रूपें फांसीक देल गेल रहैक. विजय द्वार (The Arc de Triomphe de l'Étoile) कें दिल्लीक इण्डिया गेट जकां बूझि सकैत छी ; पेरिस केर चार्ल्स द' गॉल चौक परक ई द्वार  फ्रांसिसी क्रान्तिक शहीद  आ नेपोलियनक नेतृत्वमें भेल युद्धसबमें वीर-गति प्राप्त सैनिक लोकनिक  स्मारक थिक. द्वारिक भीतर, छाहरि में अज्ञातनामा वीर-सैनिक समाधि  छैक जतय श्रद्धाक ज्योति अनवरत प्रज्वलित रहैछ .
एक दिनुक यात्रा ले एतेक काफी. आन ठाम रहितहु तं कतेक गोटे थाकि कय थस खा लेने रहितथि. किन्तु, योरप के अनुकूल जलवायु आ टूर ऑपरेटर केर व्यवस्था कतहु आयासक अनुभव होमय नहिं देलक.एकटा गप्प आओर: जाहि में मोन लागि गेल ताहि सं ने जल्दी मोन अघाइत छैक आ ने देह थकैत  छैक. बेमोनक काजमें थकन, नींद आ मोन अकछायब एकदम स्वाभाविक. सम्पूर्ण योरपक यात्रामें आब इंगलैंडहिं टा बांकी अछि. मुदा, पेरिस केर होटल -नोवोटेल- नीक नहिं लागल. पहिल बेर फल-मूलक क्वालिटी अनेक उन्नैस बुझबामें आयल. बाथ-रूम छोट. टब असुविधाजनक. ओढ़ना-बिछाओन ठीक. करू आराम. किन्तु, हमरा सब-सन जे यात्री लोकनि लीडो-शो देखबाक हेतु नाम लिखौने रहथि तनिका हेतु रतुका भोजन केर पछाति आओरो प्रोग्राम रहैक; लीडो-शो केर टिकट 100 यूरो, माने करीब दस हज़ार टाका. बड बढ़िया. जीवन में पहिल बेर पेरिस में छी. लीडो शो सेहो नहिं देखब तं अयबे किएक केलहुं. अस्तु, भोजन-भातक पछाति कनेक विश्राम भेलैक. निर्धारित समयपर सब गोटे शो जयबा ले तैयार भेलहुँ. टूर गाइड दिनहिं सं कतेक बेर कहने छलाह, आई राति में विशेष प्रोग्राम छैक. किन्तु, पुछलापर बाजथि नहिं. अंततः, भेद लीडो शो जेबाकाल बाट में खुजल. रातिक करीब दस बजे एफिल टावरक लाइट एकाएक जराओल जाइछ. सम्पूर्ण टावर स्वर्णमय आभामें अपूर्व रंग लगैछ . ई अनुभव तखनहिं सम्भव जं रोशनी बरबा सं पूर्व टावर लग पहुंचि गेल रही. हमरा लोकनि टूर गाइड सचढ़ छलाह सब किछु क्लॉक-वर्क- घड़ीक काँटा- जकां. हमरा लोकनि समय पर एफिल टावर लग पहुँचलहु. एफिल टावरक रातुक आभा मोन कें मुग्ध क देलक.किन्तु एहि प्रकरण एकटा आओर अनुभव भेल. जूनियर टूर ऑपरेटर केर इच्छा रहनि जे बस चालक हमरा लोकनिकें टावरक ठीक सामने उतारय जाहि सं दिन भारिक थाकल यात्रीलोकनि के बेसी चलय नहिं पड़नि, आ थॉमस कुक कें यश-यश भ जाइक. किन्तु, बस चालक किन्नहु नहिं मानलकनि. योरपमें सब ठाम  बस ठाढ़ हेबाक नियत स्थान छैक. नियत स्थान छोडि बस-कार कें आन  ठाम ठाढ़ करब दंडनीय छैक. ततबे नहिं, क़ानूनक उल्लंघनसं  ड्राईवरकेर जीविका धरि पर आघात पहुंचि सकैछ. अस्तु, ड्राईवर कें जे करब उचित छलनि, केलनि.कारण योरप-अमेरिका में ने अहां अपन धौंस जमा सकैत छियैक, आ ने, ओतय लोकक आत्म सम्मानकें आजीविकासं जोड़बाक परिपाटी छैक; जकर जे काज छैक ओकर मालिक ओएह भेल. ओहुना,  हमरा लोकनि कें कोनो असुविधा नहिं भेल. जगमगाइत स्वर्णिम आभामें नहाइत एफिल टावरकें भरि मोन देखलहु. फोटोग्राफी भेलैक, आ पुनः सब गोटे बस में जमा भेलहु आ आगू चललहु लीडो शो.
लीडो-शो: पेरिस केर लीडो शो विश्व-प्रसिद्द लाइव शो थिक जाहिमें स्टैंड-अप-कॉमेडी सं ल कय, कैबरे-शो धरि आ जिमनास्टिक्स सं ल कय सांस्कृतिक झांकी सब किछु भेटत. हमरा लोकनि तं एहि शो ले बहुत उत्साहित रही. शो केर स्थान सेहो केन्द्रीय पेरिस में सांज-एलिजी-ए पर छैक. भीतरकेर व्यवस्था एक्सक्लुसिव क्लब जकां. मद्धिम रोशनी में छोट-छोट समूह में बैसबाक व्यवस्था. स्वागतमें एक ग्लास शैम्पैन; दू गिलास रहितैक तं आओर नीक ! मुदा, हमरा तकर मलाल नहिं, हमर पत्नी, रूपमकें शैम्पेनकेर स्वाद पसिन्न नहिं छनि. तें ओ सेलिब्रेशनमें एक चुस्की ल मधुपर्क केलनि आ हम दुनू ग्लास आस्वादपूर्वक पीबि लेल.किछुए काल में शो आरम्भ भेलैक सांस्कृतिक शो सं . किछु नाच गाना-, ग्रुप शो. बीच में भव्य कैबरे; आम कैबरे जाहि वीभत्सताक दिस संकेत करैछ तकर छूति नहिं. बीच-बीच में मंचकेर अद्भुत परिवर्तन. कतय नृत्य आ तुरत आइस स्केटिंग. दर्शक केर संग कॉमेडी. कतहु गणपतिक आगमन. अंतमें हाथी आ महावत. हमरा विचारें एखनुक युग में ने लीडो शो कोनो अजूबा आ ने कैबरे किछु आश्चर्यनक. एहि प्रकारक शो आब विश्वकेर अनेक भाग में होइत छैक जे लोक घर बैसल देखैत अछि. कैबरे कें छोडि दी तं बैंकाक-थाईलैंड केर सियाम-निरामित शो सेहो एहि कोटिक थिक, मुदा एहन नहिं. किन्तु, पेरिस एलहु आ लीडो-शो नहिं देखल तं कदाचित कचोट ने रहि जाय तें देखि अवश्य ली. तथापि, प्रत्यक्ष लीडो शो देखबामें आनंद नहिं आयल से कोना कहब. विद्यार्थी जीवन में दरभंगा 1970 दशकमें उमा-सोसाइटी-नेशनल-लाइट हाउस-पूनम थियेटर में सवा तीन रुपैयामें बालकोनीमें बैसि सिनेमा देखैत रही. सिंघाडा-पकौड़ा खाई. बाद में पटना-दिल्ली-बंगलोर सब ठामक कार्यक्रम देखल. किन्तु, लीडो शो-सन शो तं देखब एखन धरि बांकीए छल. अस्तु, पेरिसक लीडो शो एकटा नव अनुभव भेल. 
लीडो शो करीब मध्यरात्रिक लगीच समाप्त भेलैक. मुदा मध्य रात्रिमें तं पेरिस जगैत अछि. तय सूर्य डूबले पर, मध्य रात्रि बितलेपर  तं पेरिस में दिन होइत छैक ! तथापि, पेरिस-बाइ-नाईट फेर कहियो ! आइ  हमरा लोकनिक गाड़ी लगहिंमें प्रतीक्षारत छल, तें बाटे-बाट जे देखबामें आयल, देखल. आ फेर होटल आबि विश्राम. भोरे यू के क हेतु ट्रेन पकड़बाक अछि.


 फ्रांस सं यूके(UK) हेतु यात्रा : योरप यात्राक अंतिम चरण
योरप में अयला करीब दू हफ्ता पुरबाले अछि. एखन धरिक सब यात्रा बसहिं सं भेलैये. आब यात्रा ट्रेन सं हेतैक. UK एकटा द्वीप थिक. आन कोनो देश सं संपर्क नहिं से नहिं सकैत छियैक, किन्तु, से  UK क हेतु छातीक कांट, आयरलैंड गणराज्यक कारण. अन्यथा UK एसगरे अछि, एसगरे रहैत. अतः, स्पष्ट छैक आयरलैंड गणराज्यक अलावा एहि देसकें आन कोनो देश सं भूमिक संपर्क नहिं . सदतानि सं चल अबैत ई स्थिति 1994 में बदलि गेलैक जखन फ्रांस आ UK भूमिगत रेल-मार्ग यूरो-टनल सं जुड़ल. ई भूमिगत रेलमार्ग फ्रांस आ UK केर बीचक समुद्र- इंगलिश चैनल - केर नीचाक भूमिक सतह सं कतेक नीचा होइत डबल रेलवे लाइन सं जुड़ल अछि. यद्यपि इंगलैंड-फ्रांसक बीचक समुद्रक (इंगलिश चैनल) पाट करीब  51 कि. मी. मात्र छैक किन्तु, हमरा लोकनि पेरिस सं लंदन पहुँचबा में करीब साढ़े तीन घंटा लागि गेल; बहुत रास समय इमीग्रेशन आ समय सं पहिने पहुँचबाक बाध्यता दुआरे सेहो. दोसर पेरिस केर घड़ीक समय लंदन सं 1 घंटा पूर्वक हिसाबे चलैत छैक. पेरिस केर स्टेशन गार दे नोर्ड सं ट्रेन में चढ़ब अन्तर्राष्ट्रीय यात्रा भेल तें एतय यात्री लोकनि के प्रब्रजन ( immigration ) केर औपचारिकता. UK क अतिरिक्त योरपकेर आन सब देशक यात्राले एकहिं टा वीसा Schengen Visa चाही. केवल  UK क यात्राले सब कें फूट ब्रिटिश वीसा चाही, कारण यूरोपियन यूनियन में होइतो ( वर्ष 2014 में ) ब्रिटेन अपन राष्ट्रिय  सीमाकें  अनका सब सं फूट घेड़ने-बेढ़ने अछि. अस्तु, स्टेशन पर वीसाक जांच भेल. कनेक पूछ-ताछ आ पासपोर्ट पर ब्रिटिश इमीग्रेशन ठप्पा लागल. इमीग्रेशनक पछाति प्लेटफार्म पर अयलहुं. ट्रेन बुझू , नीक क्वालिटीक मेट्रो ट्रेन आ चेयर-कार. ट्रेन नीक गतिसं चलैत छैक. आस-पासक परिदृश्यपर नजरि गडौने रही. बीच-बीचमें स्टेशन सब एलैक. मोन लागल छल, देखियैक, कोना, कतय ट्रेन  समुद्रक तर पहुँचैत छैक. किन्तु, से कतहु नजरि नहिं पड़ल. ट्रेन जखन सुरंगमें पैसलैक से बुझलियैक. ट्रेन जखन भूमिगत मार्ग सं बहरयलैक तं हमरा लोकनि UK क भूमि में रही. हमरा लोकनिक टिकट सेंट पान्क्रास अन्तर्राष्ट्रीय स्टेशनक छल, ओत्तहि उतरलहु. सब गोटे अपन-अपन सामान उतारल आ आगू  बढ़लहु.
आब किछु  नव अनुभव. वैश्वीकरणक एहि युगमें सम्पूर्ण विश्व एकीकृत भेल जा रहल छैक. सबठाम एके रंग, एके ढंग. भारतकेर स्तर पर देखी तं छोला-भटूरा आ इडली-दोसा कश्मीर सं कन्याकुमारी तक भेटत . आ विश्वस्तर पर देखी सब ठाम वएह मैक-बर्गर आ के ऍफ़ सि चिकन, पेप्सी, आ कोका-कोला. पहिरनामें जीन्स आ जूतामें वएह रीबोक, प्यूमा आ अडिडास. शहर सब में प्यासे मरि जायब कतहु सड़कपर पीबाक पानि नहिं. न्यू यॉर्क एयरपोर्ट पर पानि पीबाक स्थान देखलिएक तं पानि बहरयबाक टोंटी नदारद. पानि कोना पीयब. आब दिल्लीअहु एयरपोर्ट पर वएह तमाशा. अस्तु, देखिएक UK में की नव भेटैत अछि. एतय रेलवे स्टेशनहिं पर एकटा नव चीज देखलियैक. समानक ट्राली लेब तं 1 पाउंडक सिक्का ओहि सिकड़ीक छेद में दियउ जाहि सं ट्राली सब एक-दोसरा सं बान्हल छैक. मुदा, अजगुत गप्प ई लागल जे अपन समान उतारलापर जं ट्रालीके नियत स्थान पर राखि आउ आ ट्रालीकें ओतय राखल राखल आओर ट्राली सबहक जंजीर में जोडि दियौक तं ट्रालीक जाहि छेदमें जंजीर फिट होइत छैक तकर दोसर भागसं 1 पाउंडक सिक्का वापस भेटि जायत. ई भेलैक ने गप्प. ई हमरा अद्भुत लागल. आखिर केओ तं एहि में बुद्धि लगौने हेतैक. हं, ब्रिटिश सरकार जं ब्रिटिश 1 पाउंडक सिक्काक आकार एकाएक बदलि दैक तं ई पद्धति भरिए राति में बेकार भ जेतैक. मुदा, ब्रिटेन में चमड़ाक सिक्का चलयबाक ई पद्धति एखनि बाकीं छैक; आखिर ब्रिटेन अनेरे विश्वविजेता राष्ट्र बनल छल !
रेलवे स्टेशन सं हमरा लोकनि बससं शहर दिस विदा भेलहुँ. दुपहरिया भ गेल रहैक, पहिने भोजन तं होइक. भोजन ले जतय गेलहुं, देखला सं लागल, भीड़-भाड सं दूर, कोनो साफ़ सुथरा शहरक छोट इलाकामें छी. छोट-सन रेस्टोरेंट. भारतीय भोजन आ हमरे लोकनिक  समूह. भोजनक पछाति लोकल टूर केर प्रोग्राम छलैक. बेसी किछु तं बाटे-बाट देखैत जाउ. जेना लॉर्ड्स केर क्रिकेट केर मैदान आ इलाका. मैडम तुसाद आ विम्बेल्डन  टेनिस क्लब. विम्बेल्डन टेनिस क्लब में भितरो जाइत गेलहुं. मैडम तुसाद तं विश्वप्रसिद्द व्यक्तित्व लोकनिक मोमक बनल मूर्ति सब ले प्रसिद्द अछि. किन्तु, आब अनेक ठाम किछु-किछु आओर चीज सब जोड़ल गेलैये. एतय म्यूजियमक भीतरे ब्रिटेनकेर इतिहासक एकटा झांकी देखाओल गेल. गाड़ीपर बैसू आ नजारा लियअ. एकर अलावा ओतय एकटा 4-D शो सेहो रहैक. की थिक ई 4-D  शो ? एहिमें सिमेमा-शो 3-D चश्मा सं देखू आ जीव-जन्तु- गोला-बारूद कें सोझे नाक दिस अबैत अनुभव करू आ रोमांचित होउ. मुदा, ई भेल 3-D. जं बरखा अबैक दृश्यमें पानिक फुहार देह पर पडय, योद्धाक मुक्का, भले हल्लुके सं, मुदा छाती आ पीठ पर बजरय तं ओ भेल 4-D. भेलै. इहो अनुभव कयल. तकर पछाति हमरा लोकनि विम्बेल्डन स्टेडियम देखल आ विजेता लोकनि जाहि मंचपर बैसि प्रेसकें संबोधित करैत छथि ताहू पर बैसि फोटो खिचाओल. ई भेलैक व्यापार. ककरो ई मोन में एलैये जे दरभंगा महाराजाक प्रासादक रखरखाव ले टिकट बेचीं आ हुनक ड्राविंग रूम में बैसि फोटो झिकयबाले फूट टिकट बेची. ई बुद्धि गोरा लोकनि कें छैक. ओ सब महलकेर अलावा महलकेर भीतरक  भूत-प्रेत कें सेहो टूरिस्ट सर्किट में सम्मिलित केने अछि. फेकू पैसा आ देखू तमाशा ! हमरा लोकनि कें एहि में बहुत दिन लागत. पहिने हमरा लोकनि अपन विरासत कें तं चीन्ही, ओकरा प्रति गौरव बोध होअय. ओकर संरक्षण करी, पर्यटन केर सुविधा बढ़ाबी तखन ने विदेशी सब गाम-घरमें आओत, एतुका अजगुत वस्तु सब कें देखत आ गाम-घरक रोजगार बढ़तैक,     आमदनी बढ़तैक. मुदा, एहि सब में एखन बहुत बाधा छैक, जाहि में पहिल थिक आधारभूत संरचनाक अभाव, शिक्षा आ व्यवसयिका बुद्धि. मुदा, एहि सब सं जहिना आर्थिक लाभ केर सम्भावना छैक , तहिना गाम-घरपर पर्यटन सं हमरा लोकनि सं विपरीत आयातित सामजिक-सांस्कृतिक दुष्प्रभावक खतरा सेहो छैक. मुदा, हमरा लोकनि अपना शहर-नगरक विशिष्टतासं कोना लाभ उठाबी से समाजकें सोचि उचित कदम उठाबहिं पड़तैक. 
भोजनकेर पछाति लन्दनकेर भ्रमण शुरू भेलैक. स्वतंत्रता पूर्वक , वा हमरा लोकनि-सन स्वतंत्रताक तुरत पछातिक भारतीय पीढ़ी, भले इंगलैंड नहिं गेल हो मुदा, इंगलैंडक दू चारि टा शहर, इंगलैंडक कवि-साहित्यकार, राजनेताक नाम, दर्शनीय स्थलक नाम सं परिचय अवश्य हयतैक. ताहि में हमरा लोकनि मेडिकल कॉलेज में पढ़ने छी. सत्तरिक दशक में मेडिकल शिक्षाक अधिकतर पुस्तक इंगलैंडहिं सं छपि कय अबैत रहैक , किछु अमेरिका सं सेहो; तहिया सस्ता थोक उत्पादकक रूप में चीन केर उदय नहिं भेल रहैक. तें, हमरा लोकनि भले भारतीय अस्पताल सबहक नाम नहिं सुनने रही, लंदनक सेंट थॉमस, मूरफील्ड, रॉयल इनफर्मरी- सन अस्पतालक नाम अवश्य सुनने रही. अस्तु, लंदन कें अपने आँखिए देखबाक मनोरथ पूर भेल. यद्यपि, हमरा लोकनिक युगक डाक्टर ले लंदन में काज करब वा पढ़ब बड़का गप्प नहिं रहैक. किन्तु हमरा लोकनि ने तकर सपना देखने रही आ ने साकार केलहुं. अतः आइ आम पर्यटक जकां बस सं लंदन में भ्रमण होइ. गाइड बाटें-बाट देखबैत गेलाह, लंदन ब्रिज, वेस्टमिन्स्टर, नोट्टिंग हिल, ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट, टाटा हाउस, 'स्क्वायर माइल' इत्यादि, इत्यादि. मुदा, पहिल ठहराव भेलैक 'लंदन आइ' लग. 'लंदन आइ' एकटा विशाल फेरिस-व्हील थिक जाहिपर बैसि सम्पूर्ण लंदन केर विहंगम दृश्य देखि सकैत छी. थेम्स नदीक एक कछेर पर वेस्टमिन्स्टर- पार्लियामेंट हाउस छैक आ  दोसर दिस लंदन-आइ. अतः, एहि जायंट- व्हील पर सं पार्लियामेंट बिल्डिंग,टावर म्यूजियम, लंदन ब्रिज सब किछु देखबा में अबैत छैक. एहि जायंट=व्हील पर गोड बीसेक कैप्सूल-नुमा केबिन छैक. व्हीलकेर संगे-संग सब किछु तेना घूमैछ जे सवारी कें चढ़बा-उतरबाले व्हीलके रोकय नहिं पड़ैत छैक. लंदन-आइकेर भ्रमणकेर पछाति हमरा लोकनि होटल आपस गेलहुं: रैडिसन-ब्लू-एड्वरडियन,हीथ्रो. एहि सबठाम थॉमस-कुक केर यात्रीले अलग निर्धारित स्थान पर रतुका भोजनक व्यवस्था छलैक. रातुक भोजन भेलैक आ विश्राम केलहुं.

लंदन में दोसर दिन
अजुका भ्रमण लंदन-टावर म्यूजियम सं आरम्भ भेलैक. टावर म्यूजियम पार्लियामेंट बिल्डिंग  केर समीपहिं वएह संग्रहालय थिक जतय ब्रिटिश महारानीकेर कोहिनूर हीरा जडल राजमुकुट राखल छनि. टावर म्यूजियमक  किलाक अपन इतिहास छैक. एखन ई किला सेनाक अधीन अछि. समय-समयपर एहि किला में राज-निवास, कारागार, चिड़ियाघर, खजाना, आ अपराधी लोकनिक वलिवेदी ( फांसी देबाक स्थान ) सब किछु छलैक. किन्तु एखन एतुका म्यूजियम  मात्र प्रमुख आकर्षण थिक. म्यूजियमक बाहर सब सं पहिने  लोहाक तार सं बनल जंगली जीव-जन्तु, जेना, बाघ-सिंह-भालु, सबहक आकृति भेटत. सैनिक साज-सामनक नाम पर किछु पुरान तोपखाना. अर्थात आब देखबाक वस्तुमें एतय केवल राष्ट्राध्यक्षक बेशकीमती मुकुटसब छनि जे ओ लोकनि विभिन्न अवसर पर पहिरैत आयल छथि. कडा सुरक्षाक बीच सबटा मुकुट सब स्लो-मूविंग कोन्वेयर बेल्टपर चलैत छैक. प्रदर्शित बहुमूल्य रत्न-जटित राजमुकुट सब कें  केओ पर्यटक लोकनि  आश्चर्य सं, केओ ईर्ष्या सं, तं केओ घृणा सं देखैत छथि. कारण, राजा-रानीक जीवन आ ऐश्वर्य आ गाथा जतबे मायावी लगैछ, ओकर पाछू प्रायः ततबे छल-छद्म-ईर्ष्या-हिंसा आ मानवीय अधिकारक हननकेर इतिहास होइछ. तें, दूरक चानकें वा राजा-रानीकें जाहि कोनो मनोभाव सं देखी, सबकेर किछु ने किछु तर्कसंगतता अवश्य छैक. अस्तु, हमरो लोकनि टावर म्यूजियम देखल आ बाहर अयलहुं. टावर म्यूजियम देखलाक बाद हमरा लोकनि दूरहिं सं ऐतिहासिक लंदन ब्रिज सेहो देखल. काल्हि टूर समाप्त भ जेतैक. हमरा लोकनि सबगोटे अपन-अपन बाट धरब. तें, टावर म्यूजियम आ लंदन ब्रिज केर पृष्ठभूमि में ग्रुप फोटोग्राफी भेलैक, हँसी मजाक भेलैक, गप्प-सप्प भेलैक. मुदा, एखन धरि हमरा लोकनिकें ब्रिटिश समाजक अनुशासन सं सोझ-सोझ भेंट नहिं भेल छल. टावर म्यूजियम भ्रमण केर पछाति पता लागल जे आइ टूर आरम्भ हयबामें करीब पांच मिनटकेर बिलम्ब भ गेल रहैक. भारत में तं 5 मिनट किछु नहिं थिकैक. किन्तु, गोरा समाजमें समयक बड महत्व छैक; 5 मिनट वा घंटाभरि , बिलम्ब बिलम्ब थिकैक. तें, अस्वीकार्य. अस्तु, हमरा लोकनिक स्थानीय गाइड, एकटा वयसाहु महिला, एहि बिलम्ब सं असंतुष्ट छलीह. अपन समयकें बचेंबाले हुनक प्रस्ताव रहनि जे ट्राफलगर स्क्वायरक भ्रमण केर छोडि देल जाय. हमरा लोकनि लग पन्द्रह दिन यात्रा में लंदन ले केवल दू दिन छल. टूर ऑपरेटर पसोपेश में पडि गेलाह. कहय लगलखिन, ' भारत सं आयल लोक कें ट्राफलगर स्क्वायरे नहिं देखेबैक, तं, की देखेबैक ! मुदा, महिला-गाइड टूर-ऑपरेटरक गप्प कें सोझे मानबाले तैयार नहिं. विलम्ब भ गेलैक, ओ समय पर वापस गेले ताकथि. खैर, बहुत मोहेजरोक पछाति गाइड तैयार भेलीह आ हमरा लोकनिकें  ट्राफलगर स्क्वायरक दर्शन भेल. 

ओना ट्राफलगर स्क्वायर वा आन  कोनो स्क्वायर थिकैक की ? एकटा चौराहा. छोट वा पैघ. तखन स्थान सं जुड़ल इतिहास स्थानकें आभामंडित करैछ. तहिना ट्राफलगर स्क्वायरक सेहो इतिहास छैक, यशोगाथा छैक, युद्धमें विजयक गौरवमय इतिहास छैक. रूचि हो तं सुनू, आओर रूचि हो तं पढ़ू-गुनू. चकित होउ. एखन तं एहि चौराहापर एकटा विजय स्तंभ छैक आ सेनानायक एडमिरल नेल्सनक मूर्ति. मुदा, एहि सबहक बीच दालि-भातमें मूसलचंद,एक कात, नील रंगक बड़का टा मुर्गा सेहो पीठासीन अछि. सुनैत छी, रूस्टर फ्रान्सक राष्ट्रिय पक्षी थिकैक, आ निल रंग सेहो फ्रांसहिंक प्रतीक थिकैक. ताहिपर इंगलैंड आ फ्रान्समें सब दिन सं छत्तीसकेर आंकड़ा. तें ने कहल , दालि-भातमें मूसलचंद. किन्तु, समय बदलैत छैक, समाज बदलैत छैक, सामजिक मान्यता आ सहिष्णुता-असहिष्णुता आ सौन्दर्यबोध बदलैत छैक. हमरा नहिं लगैत अछि, विंस्टन चर्चिलकेर युगक साम्राज्यवादी ब्रिटेन ट्राफलगर स्क्वायरमें सेनानायक लोकनिक एहि वीथीमें फ्रांसक प्रतीक एहि रंगीन मुर्गाकें बर्दाश्त करैत . किन्तु आब ने साम्राज्य छैक आ ने साम्राज्यवादी प्रशासन. नव साम्राज्यवादी- विश्व व्यापारी-  लोकनिमें प्रायः आब सांकेतिकताक ओतेक महत्व नहिं छैक. अस्तु, हे मुर्गा, योद्धा सबहक अभामंडित चतुस्पाटी-चौकक एक कात तोंहों कुक-डू-कू करैत रहह ! एतय अयानिहार पर्यटक सबहक बीच जर्मन कलाकारक यशोगाथा पसरतनि आ नेना-भुटका कें कौतूहल हेतैक.
लंदन केर यात्रामें शहरक बीच बसमें जाइत बहुत किछु आकृष्ट कयलक. किन्तु, लंदन ब्रिज, पार्लियामेंट हाउस केर अलावा कोनो छवि चिन्हल नहिं छल. सुनल नाम सब बहुत छल. ताहि में हेरोड्स नामक डिपार्टमेंट स्टोर्स, सेल्फ्रिद्ज स्टोर्स, रॉयल अल्बर्ट हॉलक ऑडिटोरियम आदि छलैक. एहि सब म सं टूर ऑपरेटर हमरा सब कें सेल्फ्रिद्ज-स्टोर्सक भीतर ल गेलाह. मुदा, स्टोर्स केर बाहर पहिने हमरा लोकनि कें ताजा फल में लाल-लाल चेरी पर लोभ भ गेल. अस्तु, एक पाव किनल आ दुनू गोटे लंदन में बाटें-बाट मटरगस्ती करैत चेरी खयलहु ;दरभंगा-पटना-दिल्ली-कलकत्ताक सड़क पर चना-जोर-गरम आ झाल मुरही सेहो खेने छी. मुदा, दुनू म सं ककर स्वाद बेसी नीक से सोचू . हमरा तं लगइए, खूब भुखायल मनमें जे सब सं पहिने आगू पड़ैत छैक, तकर स्वाद सबसं विशिष्ट होइछ.तें, फुटबॉल खेलाकय वापस  अयलापर वा कॉलेज सं वापस अबिते भेटल चूड़ा-मुरही- चाउर- बादामकेर करू तेल- नोन आ अंचारक मशाला में सानल झसिगर भूजा क सेहो कोनो बराबरी नहिं छैक !  जे किछु. सेल्फ्रिद्ज स्टोर्स में किनबाक बस्तुक कमी नहिं. मुदा, हमरा सब तं देखबाले गेल रही. क्रिस्टलकेर जे ग्लास पसिन्न पड़ल प्रति गिलास 55 यूरो. बड महग लागल. अस्तु, देखल आ समय पूरा भेलैक तं  आ बहार आबि गेलहुं.                           
लंदन  शहर में जतय-ततय विभिन्न प्रकारक मूर्तिकला, जीव-जन्तुक प्रतिमा चौक-चौराहाक सजावट नीक लागल.सजावट आ मूर्ति कला यूरोपके प्रत्येक शहर में आकृष्ट करत. किन्तु, लंदनकेर  चौक-चौराहा सब आकारमें अमेरिकाक वाशिंगटन वा न्यूयॉर्क केर चौक-चौराहाक बनिस्वत छोट-छोट .
अजुका दुपहरियाक भोजनक स्थान पर एकटा अलग उत्साह छल हमर माम, आ किरणजी जेठ भाई, मैथिली साहित्यक एकटा आरंभिक साहित्यकार, स्वर्गीय काशीनाथ झा( प्रसिद्द बलदेवजी) क पौत्र, हमर भातिज बब्बू -कौतुक रामन- आ हुनक परिवार सं भेंट. लंदन आब कोनो दिल्ली दूर नहिं. तथापि, अपन सम्बन्धी सं भेंट नीक लागल. दिन भरिक पर्यटन केर पछाति होटल पहुँचलहु . होटल नीक छैक. राति में रूपम केर भातिज, बनी, अयलाह. बनी पहिला क्लासमे एडमिशन ल कय बरेली में हमरा सबहक संग रहैत छलाह. पुनः, बंगलोर में पढ़इत रहथि तं किछु दिन  हमरा लोकनिक डेरा पर रहथि. आब लंदन में नौकरी करैत छथि. बहुत दिन भ गेलैक. किन्तु, कतबो दिन भ जाइक अपन लोक, अपन धिया-पुता सं भेंट भेला पर जे आनन्द होइत छैक, से भेल . बनी हमरा सबहक संग भोजन केलनि आ आपस रेडिंग गेलाह. अजुका रातुक भोजन एहि पर्यटनक पक्षक अंतिम प्रीति-भोज रहैक. तें, विशिष्ट भोजन, गप्प-सप्प, स्पीच-भाषण, फोटोग्राफी आ बिज़नेस-फीड बैक, टेलीफोन नंबर आ ईमेल आइ डी, सब कथुक आदान -प्रदान भेलैक. काल्हि भोरे जलखइ-पनिपियाइ हेतैक आ हमरा लोकनि अपन-अपन बाट पकड़ब. हमरा लोकनि एडिनबरा, स्कॉटलैंड जायब. बांकी गोटे भारत जयताह.                    

मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

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