Monday, November 15, 2021

समय-पूर्व शिशुक रेटिनाक रोग, Retinopathy of prematurity (ROP)

Retinopathy of prematurity (ROP)

Retinopathy of prematurity (ROP) समय पूर्व जनमल (Preterm birth) शिशुक आँखिक रोग थिक; ई रोग  आँखिक संवेदी पर्दा, रेटिना, कें प्रभावित करैछ आ दृष्टिहीनताक कारण भए सकैछ.  ज्ञातव्य थिक, समय-पूर्व (Preterm) जन्म नवजातक मृत्युक प्रमुख कारण थिक. एकर अतिरिक्त, समय-पूर्व जनमल शिशुकें अनेक आनो बीमारीक खतरा रहैत छैक; एहि में सेरेब्रल पाल्सी (लकबा ),संज्ञा-शून्यता,मंद-बुद्धि आ श्वासक रोग प्रमुख थिक. स्वास्थ्य सेवा आ शिशु-चिकित्साक क्षेत्रमें गुणात्मक परिवर्तनक कारण नवजात शिशु (जन्मसँ 28 दिन धरिक वयसक) क मृत्युक संख्या घटलैक अछि. मुदा, रेटिना क रोग- Retinopathy of prematurity(ROP)- सँ अंधताक खतराक विषय में जनसामान्य आ चिकित्सक समुदाय में जानकारी थोड़ छैक. एहि लेखक उद्देश्य Retinopathy of prematurity (ROP) क विषयमें जनसामान्यक हेतु आवश्यक सूचना देब थिक. [1,2]

समय-पूर्व शिशुक रेटिनाक रोग, Retinopathy of prematurity (ROP)

समय-पूर्व जनमल शिशुक रेटिनाक रोग, ROP, आँखिक पर्दा,रेटिना,क रोग थिक; एहिसँ अन्धता संभव अछि. जाहि नेनाक जन्म पूर-समयसँ चारि हफ्ता वा ओहिसँ बेसिए पहिने होइछ, आ जकर चिकित्सा सघन शिशु चिकित्सा केंद्र ( Neonatal Intensive Care Unit) में भेल होइछ, ओकर आँखि कें (ROP) सँ प्रभावित हएबाक खतरा होइछ.

ROP क मुख्य कारण थिक, अविकसित रेटिना पर अत्यधिक ऑक्सीजनक दुष्प्रभाव. ऑक्सीजनक दुष्प्रभावक कारण रेटिनाक रक्त-नली (शिरा आ धमनी)क अनियंत्रित विकाससँ  रेटिना में अनेक प्रकारक विकार उत्पन्न भए जाइछ जकरा वैज्ञानिक भाषा में  ROP कहल जाइछ. समय पर ROPनिदान आ चिकित्साक अभावसँ,  रेटिना अन्ततः अपन स्थानसँ हंटि जाइछ, जकरा retinal detachment कहल जाइछ. Retinal detachment   क कारण  आँखिक ज्योति नष्ट भए जाइछ. एतेक कम वयस में आँखिक ज्योतिक कम हयबाक दुष्परिणाम बूझब कठिन नहिं.  अतः, ROP सँ दृष्टिक बचावक हेतु नियमतः प्रत्येक समय-पूर्व शिशुक आँखि जाँचक हेतु राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमक अंतर्गत भारत सरकारक दिशानिर्देश छैक. तथापि, जानकारी आ आँखिक जाँचक  सुविधाक अभावक कारण दिशानिर्देशक पालन में ढिलाईक दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम कदाचित समाचारक सुर्खी अबैछ. किन्तु, ततबे. वर्ष 2019 में दिल्लीक महाराज अग्रसेन अस्पतालक ROP क कारण समाचार में आयल छल. ओहि अस्पताल में चिकित्सा ले आयल एक शिशुक ROP क कारण आँखिक रोशनी नष्ट भए गेल रहैक. सुप्रीम कोर्ट महाराज अग्रसेन अस्पतालक डाक्टर लोकनि कें एहि त्रासदीक जिम्मेदार मानि  पीड़ित परिवारकें 76 लाख टाकाक हर्जाना मंजूर कयने रहैक. तथापि, एखनो जनसामान्य आ स्वास्थ्य सेवा में ROP क विषय में जानकारीक अभाव तं अछिए, अधिकतर अस्पताल में समय-पूर्व शिशुक रेटिनाक नियमतः जाँच नहिं भए पबैछ. हाल में हमर एक मित्रक परिवार में एक समय-पूर्ण नेनाक जन्म भेल रहनि. हम ROP क हेतु आँखि जांचक सुझाव देलियनि. मुदा, बच्चाक रेटिनाक जाँच नहिं भेलैक ! ओना, प्रत्येक समय-पूर्व शिशु ( preterm infant ) कें रेटिनाक रोग नहिं होइछ,से सत्य थिक.

ROP क कारण बाधित दृष्टि 

ROP क हेतु शिशुक आँखिक जाँच (Screening for ROP)

भारत में दिशानिर्देशक अनुसार सघन शिशु चिकित्सा केंद्र ( Neonatal Intensive Care Unit) में चिकित्सा भेल निम्नलिखित शिशुक  आँखिकक पर्दाक जाँच अनिवार्य अछि :

1. गर्भ-धारणक 34 हफ्ता वा ओहिसँ पूर्व जन्मल शिशु, जकरा आनो रोग सबहक खतरा होइक वा सघन चिकित्सा भेल होइक.

2. जन्मक समय 2000 ग्राम वा ओहिसँ कम वजन

3. गर्भ-धारणक 34 हफ्ताक पछाति जन्मल शिशु जकरा आन रोग सबहक खतरा होइक.

4. शिशु-रोग चिकित्सक द्वारा समय-पूर्व (Preterm ) मानल गेल शिशु

ROP क आँखिक जाँचक समय

1. ROP   हेतु शिशुक आँखिक पहिल जाँच जन्मक 25-30 दिनुक भीतर निर्दिष्ट छैक.

2. जं शिशु जन्मक 25 दिनसँ पहिनहि अस्पतालसँ  डिस्चार्ज होइत हो  तं अस्पतालसँ डिस्चार्जसँ शिशुक आँखिक जाँच वांछित थिक.

शिशुक आँखिक  जाँच  अस्पतालक Neonatal Intensive Care Unit वा आँखि-विभाग में भए सकैत छैक. जाँचक परिणाम कें तिथिक संग शिशुक केस-रिकॉर्ड में लिखल जयबाक चाही. जं, जाँचक अनुसार शिशुक आँखि में  नुकसान करबा योग्य रोग ( sight-threatening ROP ) होइक, आ चिकित्सा आवश्यक होइक तं  जाँचक 48 घंटाक भीतर लेज़र द्वारा ROP क चिकित्सा आरंभ हेबाक चाही. संगहिं, भविष्य में शिशुक आँखिक पुनः जाँचक आवश्यकताक सूचना शिशुक माता-पिता कें उपलब्ध हेबाक चाही.

 ROP क हेतु आँखिक जाँचक विधि

ROP क हेतु  आँखिक जाँच सामान्य टॉर्चसँ  असंभव अछि. ई जाँच आँखिक पर्दाक जाँच थिक. तें, जाँचसँ पूर्व शिशुक आँखि में पुतलीक आकार बढ़यबाबला बूँद द’ कए आँखिक पुतलीक आकार बढ़ाओल जाइछ. तकर पछाति आँखिक डाक्टर अथवा प्रशिक्षित तकनीशियन विशेष यंत्र- Indirect ophthalmoscope क सहायतासँ आँखिक पर्दा-रेटिनाक- जाँच करैत छथि. जाँचक परिणामकें शिशुक केस रिकॉर्ड में तिथि आ समय सहित रिकॉर्ड कयल जाइछ. चिकित्साक आवश्यकता भेलासँ लेज़रक द्वारा रेटिना विशेषज्ञ ROP चिकित्सा करैत छथि. चिकित्सा कोना आ कहिया धरि हेतैक, से रेटिना विशेषज्ञ निर्धारित करैत छथि. ई सूचना माता-पिता कें देब आ अस्पतालक रेकॉर्ड में राखब अस्पताल / चिकित्सकक दायित्व थिक. जाहिसँ आवश्यकता पड़ला पर शिशुकें अस्पताल बजाओल जा सकय आ रोगक समुचित चिकित्सा भए सकैक.

सारांश

Retinopathy of prematurity(ROP) समय पूर्व जन्मल शिशु (Preterm birth) आँखिक पर्दाक कठिन रोग थिक. ई रोग प्रत्येक समय-पूर्व शिशुकें नहिं होइछ.  मुदा, आँखिकें नुकसान करबा योग्य रोग ( sight-threatening ROP ) भेला पर दृष्टि बाधित भए सकैछ. Neonatal Intensive Care Unit में खास कए ऑक्सीजन द्वारा सघन चिकित्सा, आ दोसर किछु शारीरिक रोगक संयोग Retinopathy of prematurity (ROP) क खतरा बढ़बैछ. तें, गर्भाधानसँ 34 हफ्ता वा ओहिसँ कम समयमें जन्मल, वा जन्मक समय 2000 ग्रामसँ कम वजनक शिशुक आँखिक रेटिनाक जाँच अस्पतालसँ डिस्चार्ज हेबासँ पहिने हयबाक चाही. शिशुक आँखिक रोशनी कें ROP  क दुष्प्रभावसँ  बचयवाक हेतु ई आवश्यक थिक. समय-पूर्व जनमल शिशुक (Preterm birth) बचबाक (survival) में लगातार सुधारक कारण ई सूचना लोकहित में प्रासंगिक अछि.

 

संदर्भ :

1.https://www.nhm.gov.in/images/pdf/programmes/RBSK/Resource_Documents/Revised_ROP_Guidelines-Web_Optimized.pdf accessed 15 Nov 2021

2. Shukla R, Murthy GVS, Gilbert C, Vidyadhar B, Mukpalkar S. Operational guidelines for ROP in India: A summary. Indian J Ophthalmol. 2020;68(Suppl 1):S108-S114. doi:10.4103/ijo.IJO_1827_19     

Wednesday, November 10, 2021

श्रीशैलम-यात्रा

 

 श्रीशैलम-यात्रा

कलौ स्थानानि पूज्यन्ते’. ई कहावत विद्यार्थी जीवन में सुनने रही. किन्तु, पूजा नहिओ करबाक हो तँ नव-नव स्थान में सब ठाम एकाधिक रूचिक आकर्षण भेटिए जायत. एहि  बेर  मल्लिकार्जुन स्वामीक तीर्थ आंध्रप्रदेश राज्यक श्रीशैलम  यात्रा हेतैक. श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग थिकाह आ  श्रीशैलम धार्मिक महत्व छैक.

श्रीशैलम सड़कसँ देशक सब भाग सबसँ नीक जकां जुड़ल अछि. तें, हमरा लोकनि पांडिचेरीसँ अपनहिं कारसँ सोझे ओतय जयबाक नेयार कयल. हवाई जहाजसँ दक्षिणक कोनो पैघ शहरसँ , जेना, बंगलोर, हैदराबाद, चेन्नईसँ श्रीशैलम लग नहिं. यात्रा पोंगलक पछाति, 16 जनवरी 2019 क भोरे पांडिचेरीसँ आरंम्भ भेल. संग में पत्नी आ सासु रहथि. यात्रा में बारहसँ चौदह घंटा लागत. तें, अहल भोरे विदा भेलहुँ.

यात्रा में एहि बेर हमरा लोकनि परशुराम नामक स्थानीय तमिल ड्राइवर कें संग केलहुँ. परशुराम हमरा लोकनिक संग अनेक बेर चेन्नई  यात्रा तं केनहिं छलाह ओ हमरा लोकनि कें रामेश्वरम धरि ल’ कय गेल रहथि. तें, एहि बेरुक लम्बा यात्राक हेतु हुनके संग कयल. मुदा, परशुरामक शर्त रहनि जे ‘पोंगल पाबनि में ओ बाहर नहिं जायब’. तें हमरा लोकनि पोंगलक पछातिए श्रीशैलम प्रोग्राम बनलैक. ओहुना, पर्व त्यौहारक अवसर पर तीर्थाटनसँ बचबे नीक.

यात्राक पहिल चरण, पांडिचेरीसँ  वेल्लोर करीब तीन घंटा. वेल्लोर क्रिस्चियन मेडिकल कालेज अस्पताल में उपलब्ध उत्तम मेडिकल सुविधाक हेतु सम्पूर्ण देश में प्रसिद्द अछि. मुदा, वेल्लोरक संबंध में जे गप्प बेसी लोक कें नहिं बूझल छैक ओ थिक भारतक स्वतंत्रता संग्रामसँ  वेल्लोरक संबंध. तें आइ कनेक ओकर गप्प कइए ली.

वेल्लोर किला आ सिपाही विद्रोह,1806 ई.

1806 केर 10 जुलाई केर दिन वेल्लोर किला प्रायः भारतीय स्वतंत्रता संग्रामक ओ पहिल बिगुल बाजल छल जकर प्रतिध्वनि उत्तर भारत में आधा शताब्दीक पछाति 1857 में बाजल. एहि विद्रोहक अहल भोरेक आक्रमण में ब्रिटिश सेनामें कार्यरत करीब 500 सौ सिपाहीक हाथे करीब 200 ब्रिटिश सैनिक आ अफसर मारल गेल छलाह. इतिहासकार राजमोहन गाँधी कहैत छथि, ‘10 जुलाई 1806 क अहल भोरे अकस्मात् भेल भारतीय सैनिक लोकनिक ई विद्रोह ब्रिटिशक हाथें टीपू सुल्तानक पराजयक कारण उपजल असंतोषक परिणाम छल.’

मुदा, आन श्रोतसँ एहि विद्रोह आनो कारणक उद्घाटन होइछ, जाहि में मूल छल अंग्रेज शासक द्वारा सैनिक लोकनिक धार्मिक आस्था पर प्रहार. एकर अतिरिक्त, ओहि समय में फ़कीर लोकनि दल चुपे-चुप दक्षिण भारत में  जे अभियान चलबैत रहथि. हुनका लोकनिक अभियानक संदेश छल जे ‘ अंग्रेज संख्या में थोड़ अछि , हमरा लोकनिक समुदाय पैघ अछि’, अर्थात् हमरा लोकनि अंग्रेज कें पराजित कए सकैत छी,  केर असरि सेहो एहि विद्रोह आगि कें हवा देलक से इतिहासकार लोकनि मानैत छथि. दुःखद थिक, भारतक  स्वतंत्रता संग्राम में वेल्लोर सिपाही विद्रोहकें जेहन प्रधानता भेटब उचित थिक एकरा नहिं भेटैछ.

एहि विद्रोहक आँखों देखा हाल The Sydney Gazette and New South Wales Advertiser, 14 June 1842, में प्रकाशित भेल छल. वेल्लोर विद्रोहक समय वेल्लोर किलाक कमान अधिकारी सर जॉनफ फैनकोर्ट क पत्नी, एमेलिया फर्रेर, द्वारा लिखित एहि वृत्तांत में अंग्रेज द्वारा ओहि इलाका आ ओतुका सिपाही लोकनिपर कयल अत्याचारक चर्चा निर्विवाद नहिंए छैक.

वेल्लोर नगर कें तमिल लोकनि तीन व्यंग, ‘बिना राजाक किला, विना देवी-देवताक मन्दिर, आ बिना पानिक नदी’ सँ  जोड़ैत छथि. से हमर सहकर्मी डाक्टर श्रीकान्त हमरा एक बेर कहने रहथि, ‘’ सत्यतः, उपलब्ध सामग्रीक अनुसार किला केर भीतरक जलकंडेश्वर मन्दिर में बहुत दिन धरि कोनो देवता स्थापित नहिं रहथि, वस्तुतः, ओतय अस्त्र-शस्त्रक भंडार रहैक. ई बूझब कठिन नहिं. कारण, जे किला समय-समय पर विजयनगरक राजा, मराठा शासक, गोलकुंडाक नवाब, आ अंग्रेज सरकारक हाथ में जाइत रहल ओहि में शासकक आस्थाक अनुसार जं देवी-देवताक पूजास्थल  सेहो पराभवक शिकार भेल तं कोन आश्चर्य. परवर्ती शासक लोकनि ओतय अपना सुविधानुसार चर्च वा मस्जिद तं बनाइए लेलनि. ओना कारागारक मन्दिर में परिवर्तन वा मन्दिरक सभागार बनबाक उदाहरण तं भारतक प्राचीन धार्मिक ग्रन्थहु में भेटत. राजा कंसक जाहि कारागार में देवकी आ वसुदेव बंदी रहथि ओ आस्थावान ले मन्दिर थिक. आधुनिक काल में अंडमान द्वीपक सेलुलर जेल आजुक तीर्थस्थल थिक !  

आब पुनः वेल्लोर किला आबी. एखन किलाक भीतर तमिलनाडु पुलिस केर प्रशिक्षण केंद्र छैक. एहि किला में  किला परिसरक में पैसैत दाहिना दिस मैदानक आगू एकटा विशाल मन्दिर छैक. मुदा, दर्शन करबाक समय नहिं छल. तें, आब कोनो देवी देवता ओतय छथि वा नहिं, से कहब कठिन.

पुलिस प्रशिक्षण केंद्रक अतिरिक्त एतय  एकटा संग्रहालय छैक जाहि में तमिलनाडुक विभिन्न क्षेत्रक झांकीक अतिरिक्त अनेक ऐतिहासक अस्त्र-शस्त्र आ आन वस्तु सब प्रदर्शित अछि. संग्रहालयक परिसर में ढेरो टूटल-फूटल पाथरक मूर्तिक पतिआनी लागल भेटल. संग्रहालयसँ किछुए दूर हंटि कए एकटा छोट मस्जिद  आ पैघ चर्च सेहो छैक.

आब पुनः अजुका यात्रा पर आबी. आइ वेल्लोर में यात्रा कें थोड़ेक  विराम देल. ड्राइवर सेहो अहल भोरेसँ जागल छथि; यात्राक सुरक्षामें ड्राइवरक समुचित निन्न आ आराम आवश्यक थिक. नींदक अभाव दुर्घटनाक नोतब थिक.   अस्तु, एतय गाडी रुकल. हाथ पयर सोझ भेल. आर्या भवन रेस्टोरेंट में पवित्र दक्षिण शाकाहारी नाश्ता आ उत्तम कॉफ़ीक सेवन भेलैक. आ आगू बढ़लहुँ. एखन भरि दिन बहुर दूर जेबाक अछि. एखन लगभग एक चौथाईए दूरी तय भेल अछि ! आगू रास्ता दूर आ दुर्गम दुनू अछि.

वेल्लोरसँ श्रीशैलम

एखन हमरालोकनि राष्ट्रीय राजमार्ग 40 पर छी . ई सड़क उत्तम अछि. हमर अनुमान अछि, सड़कक रखरखाव में तमिलनाडु  देश में अव्वल दर्जाक हकदार अछि. यद्यपि, संभव अछि सब एहिसँ सहमत नहिं होथि. आब गाड़ी गति पकड़तैक. मुदा, गाड़ी ड्राइवर चलाबथि, वा अपने हांकी, गति सीमा सर्वदा नियंत्रित सीमा में रहय.एहि विषय पर हम कोनो समझौता नहिं करब. उपलब्ध आंकड़ाक अनुसार वर्ष 2019  में भारत में करीब डेढ़ लाखसँ  बेसी व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारल गेलाह. गति सीमाक उल्लंघन आ लापरवाही, मौसमक खराबी,आ मदिरापान दुर्घटनाक प्रमुख कारण पाओल गेल अछि, से भारत सरकारक आंकड़ा कहैत अछि. तें, सावधानी हंटी दुर्घटना घटी, मोन राखी. तथापि, अपन सावधानीक अछैतो दुर्घटना होइते छैक. मुदा, से पछाति.

एतयसँ  आगू हमरा लोकनि आंध्रप्रदेश केर कुरनूल दिस सोझे उत्तर मुँहे जायब. बाट में चित्तूर, कडप्पा, नन्दयाल,अत्माकुर, दोर्नाला आओत. हमरा लोकनि आगूक कुर्नूल शहरसँ पहिनहिं दाहिना दिस श्रीशैलमक बाट धरब. बीच में नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व सेहो आओत, जाहि में अनेक ठाम रहबाक आ जंगल भ्रमणक सुविधा छैक. मुदा, एहि बेर एहि अभयारण्य में रहबाक नेआर नहिं छैक.

ई इलाका खूजल मैदानी इलाका थिक. दूर-दूर धरि क्षितिज धरि कोनो अवरोध नहिं. ज़मीन अधिक ठाम बंजर. थोड़ आबादी. पानिक कमी प्रत्यक्ष छैक. सुनल छल, आंध्रप्रदेशक गुंटूर, प्रकाशम, कृष्णा, खम्मम, वारांगल आ करीमनगर जिला में लाल मरचाईक खेती होइत छैक. मुदा, से देखबाक अवसर नहिं भेल छल. बाट में एहि इलाका में मरचाईक खेती तं नहिं मुदा, सड़कक कात में सुखाइत मरचाईक पथार, आ गामे गाम पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस आर रेड्डीक मूर्ति देखल. ई नव अनुभव छल.

सड़कक कात सुखाइत मरचाई 
दिनक करीब एक बाजल हेतैक. हमरा लोकनि कुर्नूलसँ किछु दूरे रही कि अकस्मात् फोनक घंटी बाजल. अपरिचित नंबर आ अपरिचित स्वर. ई  फोन श्री कुलशेखर रेड्डी श्रीशैला देवस्थानमक कार्यालयक प्रोटोकॉल ऑफिसरक फोन छल. सुखद आश्चर्य भेल. हम तं केवल कमरा बुकिंगक हेतु एकटा ईमेल लिखि बिसरि गेल रही. मुदा, ओ लोकनि हमरा सन सेवानिवृत्त सैनिक अधिकारीक आदर करबाक कष्ट केलनि से अभिभूत केलक. सेना सेवा आ देशक नागरिक दुनू पर गौरवक बोध भेल. कहलनि, ‘धाम पर पहुंचि, हमरा फ़ोन करी. हम भेटि जायब.’ एवमस्तु. देखी, ई प्रोटोकॉल अफसर की करैत छथि.

नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व

नागार्जुन सागर इलाकाक एक डैम 

हाई वे छोड़ि नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व दिस बाट पकड़बासँ पूर्व करीब डेढ़ बाजि गेलैक. दुपहियाक भोजनक बेर. ड्राइवर सेहो  हाथ पयर सोझ करथु. अस्तु, हमरा लोकनि एकटा गाओं में बाटक कातहि, एकटा गृहस्थक घरक आगू गाछ तर  साफ़-सुथरा  सीमेंटक बेंच पर बैसलहुँ. भोजनक डब्बा खुजलैक. पानि निकालल. ताबत् ओतुका गृहणी सेहो जलपात्रमें जल लए उपस्थित भेलीह. ओ भीतर अयबाक आग्रहो केलनि. हमरा लोकनि कें श्रीशैलम पहुँचबा में समय लागत.  तें, शीघ्रे भोजन समाप्त कए आगू विदा भेलहुँ.

सड़क थोड़ेक दूर धानक खेत बीच होइत जलाशय, आ बाँधक काते कात आगू बढ़ल. चारू कात हरियरी. खुला इलाका. शहरक प्रदूषण, भीड़, ट्रैफिक सबसँ  दूर. पछाति, सड़कक दुनू कातक हरियरी जंगल में परिवर्तित होअए गेलैक. जंगल कतहु सघन नहिं. कतहु पुरान, विशाल गाछ सेहो देखबामें नहिं आयल. सालक गाछ, नव रोप. प्रायः, पुरान जंगलक समाधि पर नव गाछ वृक्ष रोपल जा रहल छैक. कतहु-कतहु बाँस सेहो.नवे लगाओल. सड़क कतहु सोझ, कतहु घुमावदार, मुदा, भूमि समतल, कोनो चढ़ाई नहिं. जंगलक बीचसँ जाइत  वन्य जीवक सुरक्षा, आ कार-बस-आ जंगलसँ काठ ल जाइत ट्रक सबहक आवागमनक कारण प्रत्येक सौ पचास मीटर पर अजस्र स्पीड ब्रेकर. तें, गाड़ीक गति 30 किलोमीटर प्रति घंटासँ  बेसी असंभव. एहि इलाका सबसँ यात्रा में परिपूर्ण समय चाही. कारण, आरंभ में जखन कारक नेविगेशन पर दूरी डेढ़ सौ किलोमीटर देखिएक आ  गूगूल अनुमानित समय चारि घंटासँ बेसी कहय तं आश्चर्य होइत छल. मुदा, जं जं आगू जाइत गेलहुँ, गाड़ीक गति देखि गप्प बुझबा में आयल. संशय होबए लागल जे अन्हार हेबासँ पूर्व श्रीशैलम पहुँचबो करब कि नहिं. आगू बढ़ला पर  बाटक बामा कात अत्माकेर डिवीज़न केर अंतर्गत, नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व केर  राजीव गाँधी वन्यजीव अभयारण्यक कार्यालय आ गेस्ट हाउस देखबामें आयल. एहि स्थानक नाम प्रायः बैरलुती थिकैक. पछाति, जखन जंगल सघन भेलैक तखन गाछ वृक्षक झोंझ में हमर पत्नी कहलनि जे  ओ अचानक एकटा बाघ सेहो देखलखिन.दिन देखार बाघक नाम पर  हम  साकांछ भेलहुँ आ गाड़ीसँ उतरि ओकरा देखबाक हेतु गाड़ी कें किछु दूर पाछू कयल. सड़कसँ नीचा सेहो गेलहुँ. मुदा,बाघ ओतय किएक बैसल रहत ! तें, जं बाघ ओतय छल तं हुनका दर्शन देलकनि आ बिला गेल. अन्यथा, गाड़ी सबहक आवागमनक बीच सड़कक कात दिन-देखार बाघक हयब सामान्य नहिं; वन्य जीव कें सबसँ बड़का भय नख-दन्त विहीन ‘सभ्य’ मनुखेसँ होइछ !

किछु काल यात्रा माध्यम गति आ आनन्द में बीतल. पछाति, सड़क संकीर्ण, उबड़-खाबड़ आ तहस-नहस छलैक. सड़कक बामा कात सुरक्षा-देवाल आ ओकर बाद खाधि. जंगल में ई कहब कठिन जे खाधि कतेक गहिंड छलैक. मोन रखबाक थिक कृष्णा तुंगभद्रा नदीक इलाका थिक. एहि दुनू नदीक जल अन्ततः श्रीशैलम डैम केर बैक-वाटर में एकत्रित होइछ. श्रीशैलम डैम भारत में पनिबिजलीक प्रमुख श्रोत म सँ एक आ आंध्रप्रदेश-तेलंगानाक पेय जलक एक श्रोत थिक.

आगू सड़क आओर ख़राब.  सड़कक काते-कात भरि-भरि ठेहुन खाधि. आमने-सामने अबैत गाड़ी कें एक दोसरासँ बचबा ले ड्राइवरक कुशलता आ फुर्ती दुनू चाही. ताहि पर सामनेसँ ट्रक अयला पर कार के अनेरे खतरा. हमर ड्राइवर साकांछ छलाह. हमरा लोकनि सुरक्षित चल जाइत रही. किन्तु, एही बीच सामनेसँ अबैत लकड़ीसँ लदल एकटा लॉरी हमरा सबहक कार कें दाहिना तरफ, पछिला पहिया लग कनेक घंसैत चल गेल. प्रायः गलती ओकरो नहिं रहैक. स्थान संकीर्ण रहैक. खाधिसँ बचबाक प्रयास में प्रायः स्टीयरिंग पर नियंत्रण कनेक ढील भए गेल छलैक. हमरो लोकनि बामा सड़कक संकीर्ण आ जगह गहीड़ रहैक. किन्तु, रक्ष एतबे रहल जे गाड़ी कें कोनो तेहन नोकसान नहिं भेलैक. तत्काल कोनो मरम्मति आवश्यकता नहिं पड़ल. हमरा लोकनि सुरक्षित रही. ट्रकवला किएक गाड़ी ठाढ़ करत. ओ तं  भगिते चल गेल. एक बेर तं मोन भेल खिहारि कए ड्राइवर कें पकड़ी. कनेक दूर दौड़बो केलहुँ. मुदा, ई व्यर्थ थिक. तामससँ नोकसाने नोकसान. टाका तं इन्स्युरेंस कम्पनी दइए दैत छैक. ड्राइवर-ख़लासीसँ ओकर इलाका में झगड़ा क कए जीति नहिं सकैत छी. जीतिओ कए लाभ की. गाड़ी चलबैत अनेक बेर गाड़ी में छोट-छोट चोट-पटक लगैत, इएह दिव्य ज्ञान भेल अछि. तामस तं असल होइत छैक जे हमर गाड़ी कें नोकसान भए गेल. ताहि में नव गाड़ी में पहिल चोटक पीड़ा बेसी होइत छैक. पहिल बेर तं गाड़ी किनलाक पन्द्रह दिनुक भीतरे बंगलोर में हमरा गाड़ीक फेंडर तोड़ि देने छल. एहू बेर, तत्काल तं अपनो लोकनि आतंकित भइए गेल रही. मुदा, जखन ई बुझबा में आयल जे अपने लोकनि सुरक्षित अछि, आ गाड़ीक कोनो नोकसान नहिं भेल, तं आश्वस्त बेल रही. मुदा, ताहि में थोड़ेक समय लागि जाइत छैक. हमर ड्राइवरो चिन्हल, विश्वस्त आ निपुण छल. तथापि दुर्घटना भए गेलैक. ताहिसँ ओ अपने आओर अप्रतिभ भए गेल छल. हमरा लोकनि ओकरा जल पियाओल, भरोसा दिअओलिऐक जे अहाँक कोनो दोष नहिं. हमार एखन आओर दूर जेबाक छल. आगुओ बहुत दूर बाट ओहने रहैक. मुदा,ड्राइवर कें प्रकृतिस्थ हेबा में समय लगलैक. संगक धर्मप्राण लोकनि भगवान कें धन्यवाद देलखिन. ई प्रसन्नताक विषय छल जे गाड़ी चलैत रहि गेल. यात्रा में ई सबसँ बड़का गप्प भेल. छोट छिन  मरम्मति लगतैक, से पछाति भए जेतैक. जं  एहन ठाम गाड़ी अशक्त भेल रहैत, तखन असली पराभव. ऊपरसँ दुर्घटना-स्थल पर जं  फंसि जैतहुँ  तं अबैत-जाइत ट्रैफिक सं गाड़ी कें आओर नुकसानक भय. अस्तु,  आगुए बढ़ब उचित छल. तें, हमरा लोकनि समय कें बचबैत,जंगलसँ निकलैत श्रीशैलमक दिस बढ़िते छल गेलहुँ.

  नागार्जुन सागर श्रीशैलम अभयारण्य 

जंगली मार्ग सं निकलि श्रीशैलमसँ करीब पचास किलोमीटर दूर दोर्नाला जंक्शन नामक कस्बा पहुँचैत बेरू पहरक करीब चारिसँ बेसी भए गेल छल. दोर्नालासँ श्रीशैलम तीर्थ धरि  फेर पहाड़ी बाट छैक. ई नल्लमल्ला जंगलक इलाका थिकैक. पर्यटनक दृष्टिऍ महत्वपूर्ण एहि इलाकाक विकास एतुका सरकारक प्राथमिकता थिकैक. पर्यटन स्थानीय नागरिक आ तीर्थस्थलक व्यवस्थापक संस्थाक हेतु आमदनीक प्रमुख श्रोत थिकैक. तें, पर्यटनक हेतु महत्वपूर्ण इलाकाक विकास में सबहक हित सन्निहित होइछ.

सड़क डबल आ चिक्कन. घुमावदार. मुदा, मनोरम. जंगली इलाकाक विपरीत खोंड़ा-खुच्चा एकदम नहिं . दिनक समय रहितैक, तं कतहु-कतहु ठमकि प्राकृतिक सुन्दरताक सेवन करितहुँ, फोटोग्राफी सेहो करितहुँ. फोटोग्राफी हमर एकटा प्रधान रूचि थिक. मुदा, लम्बा यात्रा, बीच में दुर्घटना आ संझुका समय. निकलिते चल गेलहुँ . अन्ततः हमरा लोकनि जखन श्रीशैलम तीर्थ पहुँचहुँ  तं झलफल भए गेल रहैक. मुदा, श्री कुलशेखर रेड्डी, प्रोटोकॉल ऑफिसर मल्लिकार्जुन सदन में तैनात रहथि. हमरा लोकनिक हेतु दू रातिक हेतु ग्राउंड फ्लोर पर दू टा कमरा बुक छल. इन्टरनेट बुकिंग पर अपना बुते से संभव नहिं भेल छल. प्रोटोकॉल ऑफिसर  महोदय हमरा लोकनिक कमरा दिआ, दोसर दिन भोरे दर्शनक टिकट आदिक व्यवस्था कए कहलनि, ‘काल्हि भोरे छौ बजे हम मन्दिरक द्वारि पर भेटब. समय पर चल आबी.’ हमरा लोकनि कें एहिसँ बेसी कथिक आवश्यकता छल. अस्तु, भोजन भात भेलैक आ विश्राम कयल.

 ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुनक तीर्थ श्रीशैलम

श्रीशैला देवस्थानम केर अतिथि-गृह, मल्लिकार्जुन सदन मन्दिरसँ एक चौथाई किलोमीटर, मन्दिर दिस जाइत सड़कक कातहि. भोरे उठलहुँ. बाहर मल्लिकार्जुन सदनक एक कात शाकाहारी भोजनालय छैक. ओकर कतबहि में एकटा बेलक गाछ. एकटा स्थानीय भक्त बेलक गाछ ऊँचका डारि पर चढ़ि बेलपात तोड़ैत रहथि. हम कतहु जाइत छी, जखन आन गोटे आराम करैत छथि, हम भोर आ साँझ आस-पासक इलाका देखय निकलि जाइत छी. मुदा, अजुका मोर्निंग-वाक मन्दिरे धरि हेतैक. श्रीशैलम स्थान एतेक छोट छैक जे एक घंटा में पूरा नगरक दू चक्कर लगा लेब. से आइ सांझ में हेतैक.

मन्दिर परिसरक सुन्दर भित्ति चित्रक अवलोकन 

हमरा लोकनि निरधारित समय पर मन्दिरक द्वारि पर पहुँचि गेलहुँ. जयबाकाल मन्दिर परिसरक पाथरक देवाल पर उत्कीर्ण भित्ति चित्र आकृष्ट केलक. प्रोटोकॉल अफसर श्री कुलशेखर रेड्डी महोदय पहिनहिंसँ ओतय उपस्थित रहथि. हुनका ताकय नहिं पड़ल. सफाई, समयक पाबंदी, आ गुणवत्ता, उत्तर भारत में हमरा लोकनि कें जकर सेहन्ता होइछ, दक्षिण भारतक ट्रेड मार्क थिक. आब बहुतो ठाम उत्तर भारत में एहि प्रकारक परिवर्तन आबि रहल छैक. मुदा, आम नागरिकक अभाव में ई संभव नहिं. नियम तोड़ि आगू बढ़बा में गौरवक बोध आ वी आइ पी कल्चर एकर मूल में अछि. नव पीढ़ीक अनुशासन प्रिय नागरिक एहि परिपाटी कें बदलबा में निर्णायक भए सकैत छथि. नव पीढ़ीसँ बहुत आशा अछि.

दर्शनक संतोष 

श्रीशैलम  ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुनक तीर्थ थिक. एतय शिवलिंग अतिरिक्त भ्रामरी देवीक मन्दिर सेहो छनि. भ्रामरी देवीक मन्दिर सेहो शक्तिपीठ मानल जाइछ. भक्त लोकनिक आस्थाक अनुसार शिव आ पार्वती एहि स्थान पर तहिया अपन पुत्रक समीप निवास करबा ले आयल रहथि जहिया बुद्धि, ऋद्धि आ सिद्धिक श्री गणेशक संग पहिने विवाह भए गेलासँ असंतुष्ट कार्तिकेय कुमारब्रह्मचारीक रूप में क्रौंज पर्वत पर एकान्त वास में चल गेल रहथि. आरंम्भ में मल्लिका (जूही)क फूलसँ पूजित हयबाक कारण एतय शिव मल्लिकार्जुनक नामसँ  प्रसिद्द छथि. विकिपीडियाक अनुसार एतय दोसर शताब्दीसँ  मन्दिर हेबाक शिलालेखक प्रमाण उपलब्ध अछि. शैव परंपरा में श्रीशैलम कें ‘पाडल पेट्र स्थलम्’ (प्रशस्ति गान में चर्चित स्थान ) कहल जाइछ. ‘पाडल पेट्र स्थलम्’ ओ भेल जकर चर्चा  शैव परंपराक  संत नयनारलोकनिक (शिवक) प्रशस्ति गान में  अछि. 275 ‘पाडल पेट्र स्थलम्’ में श्रीशैलम सेहो अबैछ. वैष्णव परंम्परा में आड़वाड़ संत लोकनिक प्रशस्ति-गां , ‘दिव्य-प्रबन्धम’ में जाहि  108 तीर्थ स्थलक चर्चा अछि ओकरा दिव्य-देशम कहल जाइछ. श्रीशैलम मन्दिरक परिसर में पर निर्माण में समय-समय पर सातवाहन, विजयनगर, आ रेड्डी शासक लोकनिक योगदान अछि. कहल जाइछ, 1677 ई. में शिवाजी महाराज सेहो श्रीशैलम आयल रहथि आ एहि मन्दिरक उत्तरी गोपुरम( द्वार)क निर्माण हुनके द्वारा भेल छल. तें उत्तरी गोपुरम कें शिवाजी गोपुरम कहल जाइछ.

एखन एतय कोनो पर्व त्यौहारक भीड़ नहिं. भीड़ पूजा अर्चनाक पवित्रताक नाश कए दैछ. हमर विचार थिक, दर्शनक आलावा तीर्थ स्थल आत्म-दर्शनक स्थल सेहो थिक, जाहि हेतु शान्ति आवश्यक. प्रायः ओही शांतिक अन्वेषण में संत लोकनि एहन निर्जन स्थल सब में आबि साधना कयलनि. मुदा, धर्मक पहाड़ निर्माण करबाक मनुष्यक लोभ धर्म-स्थल सबकें तेहन बना देलक जे ओतय धर्म छैक कि नहिं कहब तं मधुमाछी क छत्ता में हाथ देब थिक, मुदा, जं एहि सब ठाम शान्ति खोज करब तं प्रायः निराशाए हाथ लागए, से संभव. एहि में असहमति संभव अछि. तें, हमर विचार जे अपने भ्रमण करू, मनन करू आ अपन निष्कर्ष निकालू. आइ हमरा लोकनि प्रातःकालक मृदु आ सुखद बेला में नीक जकां दर्शन कयल. बाहर आबि रेड्डी महाशय विदा लेलनि. हमरा लोकनि हुनका धन्यवाद देलियनि. हमर अपन अनुशासनक अनुसार एतुका एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कें पत्र लिखि हम हुनकर सहायताक धन्यवाद आ श्री रेड्डीक प्रशंसा अवश्य लिखि तुरंत ईमेल कए देल. धन्यवाद देब अनुशासन थिक. प्रशंसा ककरा नीक नहिं लगैछ.

पूजा अर्चनाक पछाति हमरा लोकनि मल्लिकार्जुन सदन अयलहुँ. मुदा, कमरा में जेबासँ पूर्व रेस्तोरां में जलखै भेलैक. इडली-दोसा आ काफी. एतुका इडली आकार में खूब पैघ. चटनी-साम्पर सब किछुक स्वाद भिन्न. असल में दक्षिणक प्रत्येक क्षेत्र में समाने खाद्यक भिन्न-भिन्न स्वाद भेटत. तमिलनाडु-पांडिचेरीक साम्पर में तेत्तरि बेसी, नारिकेर चटनी में कॉच लहसुनक गंध. आंध्र में खट्टा कम, किन्तु मरचाई बेसी. कर्नाटक में साम्पर कनेक मीठ. हमर पत्नी आ हुनक माता विश्राम करतीह. हम बेरू पहर पयरे श्रीशैलम केर धांगब. ई हम कतहु नहिं छोड़ैत छी.

शिवाजी महाराज: श्री शिवाजी  स्फूर्ति केंद्र 

पैदल यात्राक क्रम में देखल, शहर खूब साफ़ सुथरा. चौड़ा सड़क. शहर केर परिक्रमा करैत हम शहरक एक कात ऊँच स्थान पर श्री छत्रपति शिवाजी स्फूर्ति केंद्र पहुँचलहुँ. एकर स्थापना छत्रपति शिवाजीक राज्याभिषेकक तेसर शताब्दी पूर्ण भेला पर भेल छल. गुलाबी रंगक पाथरसँ  निर्मित एहि केंद्रक भूमि तल पर समर्थ सभा-मंडप में श्री शिवाजी महाराज मूर्तिक अतिरिक्त हुनक राज्यसँ संबंधित किछु नक्सा-चित्रक प्रदर्शनी आ  ऊपरक तल पर दरबार हॉल छैक जे ध्यान आ मनन ले उपयुक्त अछि. एहि केंद्रक आगूक  भूमि खुला आ बेस पैघ छैक. एतयसँ सम्पूर्ण शहर आ आगूक दूरक इलाका देखबामें कोनो अवरोध नहिं. स्फूर्ति केंद्रक दाहिना दिस मन्दिर एकटा छैक. मन्दिरक बगलक सड़कक दोसर तरफ एक पाँति में आगू पर्यटकक लेल बहुत रास छोट-छोट किरायाक कॉटेज. शिवाजी स्फूर्ति केंद्र देखि मल्लिकार्जुन सदन आपस भेलहुँ.

मल्लिकार्जुन सदन सं आ आगू जे सड़क जाइछ तकर बामा दिस बाज़ार आ सोझे आगू कृष्णा नदीक कछेर पर जयबाक सीढ़ी छैक. नदीक कछेर दिस पातालगंगा रोप वे सेहो जाइछ. तकर पछाति नाओ पर कृष्णा नदी धार पर जाइत नदीक दोसर पार अक्कामहादेवी गुफा छैक. मुदा, हम एहि बेर समयाभाव में ओम्हर नहिं गेलहुँ.  बुड़बकहाक खेती अगिला साल.

श्रीशैलम नगरक एक चौराहा पर भव्य मूर्ति 

सांझ में पत्नी आ हुनक माँ कें ल कए मन्दिरक आगूक बाज़ार में कनेक टहलान भेलैक. किछु सनेस-बाड़ी किनल. पहिने जहिया दूरस्थ तीर्थ स्थल जयबाक उपाय सुलभ नहिं रहैकतं अनको ले लोक अणाची दाना आ बद्धी अनिते छल. मुदा, से इतिहास भए गेल. आब ई यात्रा समाप्त हेबा पर अछि. काल्हि भोरे आपसक यात्रा. मुदा, घुरती में एहि नगरक चौक-चौराहा पर स्थापित भव्य मूर्ति सब देखब जुनि बिसरी. चौक-चौराहा पर स्थापित देवी देवताक एहन भव्य मूर्ति हम भारत में आन ठाम नहिं देखने छी.  

 

     

 

    

 

Saturday, November 6, 2021

अष्टदल कमल

 

अष्टदल कमल

कल्लूक अंगना में टटका पिसल पिठारक अष्टदल कमल आ ओहि पर सिन्दूरक ठोप देखि कए श्रीमती पंत कें आश्चर्य भेलनि. दू तल्लाक दू टा अलंग, चारि टा अफसर लोकनिक चारि टा फ्लैट. चारि टा सर्वेन्ट क्वार्टर. मुदा, अकस्मात् मैडम कें सेवादारक संग आम गाछ लग ठाढ़ देखि शान्ती  कें आश्चर्य भेलैक. ओ अढ़िया में आधा सानल चिक्कस कें ओहिना छोड़ि, दौड़ि कए मैडम लग आयलि. हुनका एकाएक एम्हर आयल देखि, चकित शान्तीकें श्रीमती पंत कहलखिन, पोद्दार कहलक आम गाछ सब बड्ड फड़ल छैक, तं देखबाक मोन भेल.’ 

‘त. ई गाछ कोनो साल नागा नहिं जाइछ, मेम साहेब.’ शान्ती बाजलि, ‘किछु ने किछु फड़िते छैक. कोनो बेर कम, कोनो बेर बेसी. एहि बेर तं टूटि कए फड़ल छैक.’

‘मुदा, पकबा धरि रहतैक तखन ने ! दिल्ली छावनी में हमर हाता में तेहन मीठ चौसा आ लंगड़ा आम फड़ैक जे.... आह ! एहन आम कतय भेटत !! मुदा, एखन कतेक हवा-बिहाड़ि अओतैक. बानर-लुक्खी, धिया-पुता रहय देतैक तखन ने .’ श्रीमती पंत बजलीह.

श्रीमती पंत केर गप्प सूनि शान्ती कहलकनि, ‘ हवा बिहाड़ि तं आमक मास में आबिए जाइत छैक, मुदा, एहि आम कें केओ नहिं छूअत. चुक्क खट्टा. केवल अंचार बनायब, तै ले नीक हैत. बनाउ ने. हमरा जखने कहब, फांक, कुटबी, जे कहब, हम सब काटि देब, कुच्चा बना देब.’

मुदा, श्रीमती पंत बात कटैत कहलखिन, शान्ती ई अरिपन के देलकैए ? कर्नल यादवक आया ?

‘नहिं मैडम. ई अरिपन हमही देने छियैक.’

‘अच्छा ?’ कहि श्रीमती पंत पोद्दार कें थोड़ेक आम तोड़बाले कहलखिन आ आपस भए गेलीह. जाइत-जाइत शान्ती कें कहलखिन, ‘आइ हम थोड़ेक कुच्चा अंचार बनाएब . जखन होअह आबि जैहह.’  

मुदा, डेरा आपस अयलो पर श्रीमती पंतक जिज्ञासाक आइ अंत नहिं भेलनि. कल्लूक आँगन में अष्टदल कमलक अरिपन ! लखनऊ में जतय साले-साल मुहर्रम में सिया-सुन्नीक बीचक हड़हड़-खटखट प्रशासनक निन्न हराम केने रहैत छैक ओतय तखन एहि अंगना में दू सौतिन, शान्ती आ शबनम, मिलि कए रहैछ. एके संग ईद-बकरीद सेहो मनबैत अछि. किन्तु, दुनूक बीच पूजा-पाठ, पर्व-त्यौहार ल’ कए एखन धरि खट-पट भेलैये से आइ तक केओ नहिं कहलक. ई श्रीमती पंत कें कनेक नव बूझि पड़लनि.

2

कल्लू सेनाक सिविलियन हजाम थिक. एकर पैघ परिवार दू अफसरक दू टा सर्वेन्ट क्वार्टर में रहि कए अफसर लोकनिक टहल-टिकौरा करैत अछि आ मिलि जुलि कए खुशी-खुशी रहैत अछि. सर्वेन्ट क्वार्टर छोट छैक. मुदा, तैयो एतय बहुत सुभीता छैक. छावनी में लखनऊ शहरसँ चोरि-डकैती कम छैक. बिजुलीक लाइन नहिं कटैत छैक. कल्लूक मेडिकल बटालियन सेहो एतयसँ लग पड़ैत छैक. अस्पताल-स्कूल सब लगे. आओर चाही की ? एही सबहक दुआरे सिविलन नौकर-चाकर डीही जकां पुश्त-दर-पुश्त छावनीक में रहैत आयल अछि. अफसर आ सैनिक चलन्त थिकाह. आइ एलाह, काल्हि गेलाह. नौकर-चाकर सर्वेन्ट क्वार्टर में रहैत कतेको पीढ़ी गुजारि दैत अछि. कखनो काल डेरा बदललक, कहियो काल इलाका सेहो. मुदा, ई लोकनि चुप मुँहे अफसर लोकनिक लग  रहैत छथि, अफसर लोकनिक सेवा करैत छथि, आ गुजर करैत छथि. आयालोकनि  अफसर लोकनिक बदलीक समय मेम साहिब कें नोर भरल आँखिए बिदा करैत छथिन. आ फेर, अनायास अगिला साहेब-मेम साहेबक सेवा में लागि जाइत छथि. इएह कारण थिक जे नौकर-चाकर-नाई-बाबर्ची- व्यापारी छावनीक जीवित इतिहास थिक. तें जं छावनीक मुँह जवानी इतिहास सुनय चाहैत छी तं वयसाहु  सर्वेंटसँ  सुनू, चिकन कपड़ाक व्यापारी रहीम चाचासँ  सुनू, करीम बार्बरसँ सुनू. रहीम चाचा अपन हीरो ‘पुक’ मोपेड पर जतबे चिकन साड़ी-सलवार-कमीज-कुर्ता- दुपट्टा संगे अनैत अछि, ओ अपना संग ओतबे गप्प सेहो अनैत अछि. मेम साहेब लोकनि गप्प सुनैत-सुनैत साड़ी-सलावार-कमीज-कुर्ता- दुपट्टाक चुनाव करैत छथि आ रहीम चाचा हुनका लोकनि कें साहब-मेमसाहिब लोकनिक पीढ़ी दर पीढ़ीक  खीसा-खेड़हा सुनबैत अछि. करीम हजामत बनबैत, चम्पी करैत कतेको नव-पुरान गप्प सुनि लैछ, कहि जाइछ. मुदा, छावनीक बहुतो परिपाटी मीलक पाथर जकां अचल अछि. एहि अर्थ में छावनीक पुरान भत्थन इनारक जबकल पानि थिक. मुदा, आब समयक संग छावनीक बदलि रहल अछि, तथापि, एतुका बहुतो परिपाटी जक-थक  अछि. तें, कल्लू आ शान्ती, शबनम आ कल्लूक धिया-पुता ले छावनी एहन अभयारण्य थिकैक जतय अनेक प्रकारक लोक धर्म आ परम्परा एके संग पलैछ. एतय जे नौकर-चाकर एक बेर छावनी में बसि गेल तकरा एतुका नीक-बेजाय सब किछुक हिस्सक लागि गेलैये. तें, शान्ती जे संयोगहिं एक दिन लखनऊ छावनी में आयल छलि, एतुके भ’ कए रहि गेल.

3

माए-बाप शान्ती कें मोन नहिं छैक. गाम में लोक कहैक जे बाप मुन्ना लाल बाराबंकी शहर में काज करैत रहैक. ओत्तहि एक बेर  हैजा पसरि गेल रहैक. ओही में मुन्ना लाल शान्त भए गेल रहैक. जखन मुन्ना लाल शान्त भेल छल, शान्तीक माए सितिया कें दू टा सन्तान रहैक- करीब छौ बरखक शान्ती आ बरख दुइएक, सुरेश. लोक कहैक जे मुन्ना लालक मरलाक बरख भीतरे सितिया, शान्तीक बियाह करा कए, ककरो संग संबंध क कए, कहांदन नेपाल दिस भागि गेल रहैक. मुदा, से गप्प ततेक पुरान भए गेल रहैक जे शान्ती कें सरि भए कए मायक मुँह मोनो नहिं छैक. लोक गाओं में एतबा अवश्य कहैक जे बेटी गराक घेघ छलैक तें दूधपीबे (शान्ती) कें बियाहि देलकै आ साँए-बेटा के ल कए भागि गेल; बेटा कमा कए जे खोअओतैक !   

जहिया बुधनक संग शान्तीक विवाह भेल रहैक, ओकर वयस छौ-सात वर्खक करीब छल हेतैक. दोहारा बान्ह, गहुमा रंग, पैघ-पैघ, कुइर आँखि, आ चेहरा पर गोटीक दाग. नमती में वयससँ छरहर छलि. बजैत कम छलि, मुदा, छल काजुल. तें, शान्ती पर सब कें दया आबि जाइक. काजुल छलि, तं अपन घर-अंगनाक काजक ऊपर आन अंगनाक काज सं किछु खुदरा पाइ, फाटल-पुरान कपड़ा आ कखनो काल दू मुट्ठी काँच-पाकल अन्न सेहो भेटि जाइक.

शान्तीक घरवला,बुधन,क वयस  तहिया सोलह, नहिं तं हे सत्रह ! ताहिसँ बेसी तं  नहिंए छल हेतैक. बुधनक परिवार में बुधन आ शान्तीक आलावा एकर एकटा दूरक संबंधक केओ रहैत छलि, नाम छलैक रेशमी. बुधन कहै जे बहिन छी.एकटा खोपड़ी सन घर रहैक. ओही में एक कात चूल्हा रहैक आ दोसर दिस ई तीनू राति कए भूंइए पर पड़ि रहैत छल. दुआरि पर एकटा गाए आ एकटा बाछी सेहो रहैक. बुधन बोनि-बुत्ता करैत छल, रेशमी घर सम्हारैत छलैक, भानस करैत छलैक. शान्ती गाए बाछी चरबैत छलि, गोबर करसी करैत छल. ऊपरसँ कनेक-मनक अनको काज कए दैत छलैक. नेना वयस आ एतेक काज.  थाकल देहे, राति क’ शान्ती कें कखन निन्न भए जाइक बुझबो नहिं करैक.’  से एक दिन श्रीमती पंतक पुछला पर शान्ती कें कहने रहनि. मुदा, ओहिसँ  बेसी नहिं. शान्ती कें बूझल रहैक जे  मेम साहिब लोकनि जतबे पूछथि, ततबे बाजी. अपना दिससँ हुनकालोकनिसँ गप्प नहिं करी. हुनका लोकनिक  घरक गप्प कहियो बिसरियो कए ने पुछियनि. ने गप्पक बीचमें टोक दियनि. नौकरीक ई रिवाज एकरा मौसी कहने रहैक.

जहिया शान्ती कल्लूक संग क्वार्टर में पहिले पहिल आयल छलि तहिया परिवार में कल्लू आ शान्ती दुइए गोटे छलि. कल्लू शान्ती कें बुझबैत कहने रहैक जे ‘ककरोसँ फालतू गप्प सप्पक कोनो काज नहिं. एहि क्वार्टर केर गप्प दोसर क्वार्टर,   दोसरक गप्प तेसरक सामने भेल तं एतुका दाना पानी तं बिसरिए जैंहें. तखन कोनो मैडम अपन डेरा लग टपय नहिं देथुन.’ शान्ती कल्लूक एहि गप्प कें गेठरी में बान्हि कए राखि नेने छल.

एहि ठाम छावनी में कल्लूक डेरा में सब भोरे उठि जाइत छल. कल्लू के पाँचहि बजे उठि कए बटालियन जाय पड़ैक. एक-एक बटालियन में चारि सौ-पाँच सौ रंगरूट. मुदा, हज़ाम दुइए गोटे- एकटा फौजी आ दोसर कल्लू. केश कटैत कटैत केक दिन दुपहरिया भए जाइक. शबनमक बेटा छेटगर रहैक, स्कूल जाइक. शान्तीक बेटा, दीपू, छोट छलैक. मुदा, स्कूल ओहो जाइत छलैक. शबनम केर दू टा टेल्हगर बेटी सेहो रहैक. ओकरा सब कें घरेक काजसँ फुरसति नहिं. ऊपरसँ  दुनू दू क्वार्टर में काज सेहो धेने छलि. शबनम आ शान्ती के फूटे दू टा क्वार्टरक टहल टिकौरा  रहैक. तें दुनू सौतिन लोकनि मिलि भोरे उठि कए पहिने घरक काज सम्हारैत छल. भानस-भात संपन्न करैत छल आ तखन क्वार्टर में झाडू-पोछा-बरतन ले जाइत छल. हरेक क्वार्टर में डेराक एवज में दू टा काज बान्हल रहैक. जं भानस- भात- कपड़ा धोअब आदि आओर काज ले मैडम कहलखिन तं ओहिसँ  किछु नकदीओ आमदनी भए जाइत रहैक. एहि बीच में जं मैडम लोकनि कें कहिओ आंग-स्वांग भए जानि तं ई सब हुनका लोकनिक सेवा-बरदाइस अपन डयूटीए बूझैत छलि.

ओहि बीचे अचानक श्री मती पंत कें ठेहुनक दर्द उठि गेल रहनि. डाक्टरी दवाई आ संयम चलिते रहनि. तथापि, कष्ट रहनि. नीक स्वभाव आ मधुर बोलक कारण शान्ती कें श्रीमती पंत बड़ नीक लगथिन. हुनकासँ गप्प करब शान्ती कें नीक लगैक. कारण, श्री मती पंत ने अपने मोने कहिओ किछु खोद-बेद करथिन आ ने कोनो आन मेम साहेबक गप्प-खिधांश पुछथिन.  तें हुनका कष्ट में देखि, शान्ती अपने मोने आबि हुनका कखनो कए दवाईक मालिश कए दनि, हाथ-पयर जांति देनि. एक दिन एहिना शान्ती श्रीमती पंत केर ठेहुन में दवाई लगबैत रहनि. श्रीमती पंत आरामकुर्सी पर बैसलि कोनो पत्रिका उलटबैत रहथि. शान्ती कें की फुरलैक, पुछलकनि,  ‘मेम साहेब एहि बेर अहाँक माँ लोकनि एतय नहिं एलखिन ? दुर्गा-पूजाक छुट्टिओ बीति गेलैक.’

‘हं, एहि बेर नहिं एलखिन.’ श्री मती पंत अन्यमनस्कतासँ कहलखिन. मुदा, फेर हुनक की फुरलनि, पुछलखिन, ‘शान्ती तोहर नैहर कतय छह ? माय-बाप ?’ 

शान्तीक आँखिसँ टप-टप  नोर खसय लगलैक. शान्तीकें चुप देखि श्रीमती पंत मूड़ी ऊपर उठओलनि, तं शान्तीक नीचा झुकल मूड़ी आ गालपर टघरैत नोर पर नजरि गेलनि. पुछलखिन, की भेलह ? शान्ती किछु नहिं बाजलि, तं ओएह फेर पुछलखिन, ‘किएक कनैत छह ? कोनो आंग-स्वांग भेलैए ?’

शान्ती चुप्पे मुँहे मूड़ी डोलाकय, नहिं, केर संकेत देलकनि. श्रीमती पंत चुप भए गेलीह. हुनका चुप देखि शान्ती नोर पोछैत नहुँसँ बाजलि, ‘मैडम हमरा आन ठाम केओ अछि. हमरासँ अभागल के हयत ! माय ने बाप. हम अबोधे रही, बाप तखने मरि गेल. माए जिबैए कि मरि गेल, जानाथि भगवान.  जे अछि, एत्तहि जकरा देखै छियैक, बस सएह.’

शान्तीक गप्प सूनि मिसेज पंत शान्तीक मुँह ताकय लगलथिन, तं, शान्ती पुनः शुरू भए गेल. कहलकनि, ‘मैडम गरीबक जीवन कोनो जीवन थिकैक. नेने रही तं माए बुधन संग बियाह करा कए सासुर विदा कए देने छलि. तहिया ने वयस छल ने अक्किल. मुदा, की कहू. जिनगी हमरा संग कोन कोन ने खेल केलक. मेम साहेब, रहि तं जइतिऐक हम गामो में. मुदा, दुःखे एहन भेल, जे भेल जे जिनगीसँ मरन भला. कहबे तं केलहुँ, मेम साहेब, बियाह भेल तं नान्हिए टा रही. मुदा, जखन देह-दशा भेल, ज्ञान भेल  तं अपने आँखिए देखलिऐक जे बुधना की छल. हम बुझबो ने करितिऐक. हमरा तं कहैओ में लाज होइए, मेम साहेब. मुदा, एक राति हमरा पेट में बड्ड जोर दर्द उठि गेल रहय. हम निसाभाग राति में उठि कए बैसि गेलहुँ. तखन जे हम बुधना आ रेशमीक बीचक खेला देखलहुँ, तं,  हमर सागर देह में तं जेना आगि लागि गेल. तहिये हम बुझलियैक, मैडम, जे  ओहि घर में पहिनहिंसँ हमर सौतिन बसैत छल. पाछू जखन सर-समाज बुझलकैक, हमहूं हम बुधनाकें गारि सराप देबय लगलिऐक तं  दिन-रातिक कल्लह हुअए लागल. जखन नित्तह कल्लह, मारि-गारि-गंजनसँ मोन आजिज भ’ गेल तं एक दिन इनारमें कूदि गेलहुँ. मुदा, मरलहुँ नहिं. इनार में पानि कम रहैक. अक्किल तं छल नहिं. मगर,अरुदा बचल छल. मुदा, हम ओही दिन सोचि लेलहुँ जे बुधनक संग हमर निमहता नहिं हयत. आ जखन अपने बोनि-बुत्ता करब तं कत्तहु कमायब, दू मुट्ठी अन्न आ सूतैक ठाम में भेटिए जायत. हमर मौसी लखनऊ में रहै छल. ओ आयल, गप्प सुनलकै तं हमरा बड्ड फज्झति केलक. हम कहलियैक, हमरा बुधना आ रेशमीक संग निमहता नहिं हैत. तं, ओ अपने संग  हमरा लखनऊ नेने आयल आ अपने संग एकटा क्वार्टर में काज धरा देलक. हम राति कए ओकरे कोठली में कहुना सूति रही. किछु दिनक बाद  एत्तहि काज करैत कल्लूसँ भेंट भेल. क्वार्टर सब में साहेब सब लग ओकरा अवर्यात रहैक. ओ एत्तहि काज करैत छल, से कहलक. बोली बानी नीक रहैक. ओ हमरो नीक लागय. दुखायल मोन में केओ दू टा नीक बोल कहै छै तं नीक लगिते छै ने, मेम साहेब. हम गामसँ आयल. छौ-पाँच नहिं बुझिऐक. ओ छौ मास-बरख दिनक बाद एक दिन पुछलक, ‘हमरा संगे रहबें ?’ हम की कहितिऐक ? एसगरि रही. एसगरि मौगी, शहर बजार में कोन धरानी रहैए से हम अहाँ कें की कहब, मेम साहेब !   मौसी के पुछलिऐक, कहलक, ‘कोन बेजाय कहै छौक. बुधनासँ नीके छौ. ओ घुरिओ कए ताकए एलौ ! एबो ने करतौ, से जानि ले. कल्लू कें सरकारी नौकरी छै, एत्तहि रहैए. हमरा तं कोनो ऐब नहिं बूझि पड़ैए.’  आ हम कल्लू कें ‘हं’ कहि देलिएक. मुदा, मैडम जखन कैसरबाग़ कोर्ट में कल्लूक संग बियाह ले गेलहुँ आ कोर्ट में ई अप्पन नाम ‘करीम’ कहलकैक तं कहै छी मैडम, हमरा तं गस आबि गेल. हम कोना एकर जाति बूझितिऐक ! नामो तं जरलाहा ‘कल्लू’  रखने अइ. हम तं ठामे खसि पड़लहुँ. एक दिससँ कल्लू मुँह पर पानि छिटलक. दोसर दिससँ मौसी पंखा हौकए लागल. हाकिम पुछलकैक, ‘ क्या बात है ? मौसी गप्प सम्हारि लेलकैक, ‘ कहलकैक, माने, धूप बहुत है. सुबह से मुँह में कुछ पानी भी नहीं दिया है, चक्कर आ गया. लौंडियों का तो आप जानते है, हजूर.’ मौसी तं कहियासँ लखनऊ में छल.  आब ओकरा सब गप्प बूझल रहै, कि नहिं, से ओकर धरम जानय. हमरा ओ नरकसँ बहार क कए लखनऊ अनने छल. हम झूठ आगि उठेबै तं हमरा नरको में ठाँव भेटत, मेम साहेब ! मुदा, हम की कहू, ओइ घड़ी हमरा मन में की भेल छल. मुदा,निरुपाय रही. घुरती में हम कल्लू के बड्ड गारि-सराप देलिऐक. मुदा, जे बात छियैक. ओ ओही दिन हमरा कहलक. ‘देख, हम सरकारी नौकर छी. तोरा दुःख नै देबौ. जेना मोन होउ, रहिहें.’ बाद में इहो बुझलिऐक, एकर घर गौंडा जिला में रहैक. ओतय कलुआ कें पहिनहिसँ लोक-बेद सेहो रहैक. तहिया तामस तं बड्ड भेल. बेर बखत अप्पन अक्किल पर कचोट तं आइओ होइए. मुदा, जानथि भगवान, ककरो आगि नहिं उठाबी. जेना कलुआ हमरा कहलक, से ने ओ अपने, आ ने हमर सौतिन शबनम, आइ धरि हमरा कोनो दुःख नहिं देलक. शबनम केर बेटा-बेटी सेहो अलो-मलो केने रहैए, जे बात छियै, मेम साहेब.  हम जहिना रही, तहिना रहै छी. तुलसी में पानि ढारै छी, अरिपन दै छी. दसमी में नौ दिन फलाहार करै छी, कलश रखै छी. शबनम के जे फुरै छै, ओहो करैए. बस ! ’ कहि शान्ती चुप भए गेलि.

तखने मिसेज पंत देखलखिन, शान्तीक बरख आठेक बेटा, दीपू स्कूलसँ  आबि रहल छलैक. ओही काल शबनमक बेटी, छोटी मुन्नी, आबि कए शान्ती कें कहलकैक, ‘ छोटी मम्मी चलिए, मम्मी बुला रही है. पापा खाना के लिए आ गये हैं .’

शान्ती मिसेज पंतसँ छुट्टी कए अपन डेरा दिस बिदा भेल. मिसेज पंत सेहो उठिकए भीतर गेलीह. हुनका शान्तीसँ  फेर कहिओ आओर किछु पुछबाक आवश्यकता नहिं बूझि पड़लनि.

 

Tuesday, October 5, 2021

सरल चित्रांकित बाल-साहित्यक प्रकाशन मैथिलीक हेतु संजीवनी भए सकैछ

 

  

वैज्ञानिक योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’ मैथिली कें ‘बिनु जड़िक गाछ’ कहैत छथि. कारण, अजुका पीढ़ीक बेसी गोटे मैथिली पढ़िए नहिं सकैत छथि; ‘छात्र कें मैथिली पढ़बाक आ लिखबाक अवसर हाई स्कूल में जा कए भेटैत छैक, सेहो मातृभाषाक रूप मे नहिं, बल्कि वैकल्पिक भाषाक रूप  मे.’  एहन परिस्थिति में नव पीढ़ी मे  मैथिली पढ़बाक रूचि कोना जगाओल जाय, मैथिलीक पाठक वर्ग कोना तैयार करी ताही विषय पर एतय विचार करैत छी.

सर्वविदित अछि, मातृभाषा मैथिलीक माध्यमे शिक्षा एकटा राजनैतिक निर्णय थिक, जाहि पर हमरा अहाँ कें कोनो नियंत्रण नहिं. ऊपरसँ भाषाक ‘वर्चस्व आ मैथिली ‘साम्राज्यवादक’ विवाद अन्ततः मातृभाषा मैथिलीक माध्यमसँ पढ़ाईक विषय कें कतय ल’ जायत, कहब असंभव. तें, एखनुका चर्चा कें हम ओहिसँ फूटे रखैत छी.

निर्विवाद मैथिलीक पाठक वर्ग तैयार करबाक हेतु कोनो एकटा अचूक नुस्खा नहिं. मुदा, एहि विषय में एखन हम किछु समकालीन अनुसन्धानक निष्कर्ष प्रस्तुत कए अपन विचार प्रस्तुत करैत छी.

सिंगापुरसँ प्रकाशित ‘रीडिंग होराइजन्स’ नामक एक पत्रिकाक 2018 क एक अंक मे ‘Leisure reading behaviour of young children in Singapore’ नामक एकटा अनुसन्धान प्रकाशित भेल छल.1 धिया-पुता की पढ़य चाहैत अछि, कोना पढ़इत अछि, पढ़बाक ओकर रूचि कें कोन-कोन प्रभाव स्वरुप दैत छैक इत्यादि एहि अनुसंधानक मोट-मोट विन्दु थिक. एहि सबहक अतिरिक्त खाली समय मे पढ़बाक (leisure reading क) कारण, प्रेरणा, रूचिक विषय, आ पढ़बा मे बाधा एहि अनुसंधानक आन-आन विन्दु थिकैक. आंकड़ाक संकलन एकटा निर्धारित प्रश्नोत्तरी पर कएल गेल छल जाहि में  6-12 वर्षक करीब अढ़ाई सौ नेनासँ सम्मिलित भेल रहथि.  

एहि अनुसन्धानक  अनुसार अधिकतर नेना रहस्य-रोमांच, हास्य-विनोद, जीव-जन्तुक कथा पिहानी आ साहस-शौर्य विषयक पोथी कें फ़ुरसति मे पढ़बाक हेतु चुनैत छथि. पढ़बामे इबुक आ ऑडियो बुकक बनिस्बत छपल पोथी (print-book) बच्चा  लोकनिकें बेसी नीक लगैत छनि. मुदा, leisure reading मे सेहो मातृभाषाक पोथी मारि खा जाइछ ; जहां 70 प्रतिशतसँ बेसी नेना पढ़बा ले अंग्रेजीक पोथी चुनैत छथि, मातृभाषा पढ़निहारक संख्या केवल 20 % धरि पहुँचैत अछि.

मुदा, एहि अनुसन्धानक जाहि बिंदु कें हम रेखंकित करय चाहैत छी ओ पोथीक चुनावसँ  सम्बन्धित अछि. जतय करीब साठि प्रतिशत नेना विषय वस्तुक आधार पर पोथीक चुनाव स्वीकार केलनि, ओत्तहि करीब चालीस प्रतिशत नेना केवल पुस्तकक नामक आधार पर पुस्तकक चुनाव करबाक गप्प गछलनि. ततबे नहिं, करीब एक तिहाई नेना पोथीक भीतरक  रंगीन चित्रकला आ पढ़बामें सरलताक आधार पर पोथी चुनैत छथि, से स्वीकार कयलनि.

एहि अनुसन्धान में लेखक लोकनि एहू तथ्यकें उजागर कयलनिए जे जीविकाक हेतु माता-पिताक स्थान परिवर्तनक कारण नेनाक मातृभाषाक बुझबाक आ पढ़बाक दक्षता कें प्रतिकूल रूपें प्रभावित केलकैक अछि, ओकर पढ़बाक क्षमता में ह्रास भेलैए. मातृभाषाक पोथीक उपलब्धता सेहो बड़का समस्या छैके. मुदा, ताहूसँ बेसी कठिन छैक एहन पोथीक उपलब्धता जकर भाषा सरल आ सुगम होइ, आकार छोट होइक, विषय रोचक होइक, आ शब्दाबली सीमित होइक. आब जं मैथिलीभाषी नेनाक स्थितिक गप्प करी तं सर्वविदित अछि, मैथिली में नेनाक रुचिक पोथी सुलभ नहिं छैक. चित्रांकित पोथी, सरल छोट-छोट कथा, नेनाक रुचिक रहस्य रोमांच आ साहस-शौर्यक एहन कथा नेनाक कल्पनाकें आकाश मे उड़ाबय तकर मैथिली में सर्वथा अभाव छैक. स्व. मणिपद्मक ‘भारतीक बिलाड़ि’  लेफ्टिनेंट कर्नल मायानाथ झाक ‘इजोत’ आ ‘ जकर नारि चतुर होइक’ मन पड़ैछ. रहस्य-रोमांच में योगेन्द्र पाठक ‘वियोगीक उड़न छू गोला’ नवीनतम आ उत्कृष्ट योगदान थिक. किन्तु, चित्रांकित बाल-साहित्य तं मैथिली में विरले भेटत. हमरा लोकनि सुनने छी जे हरिमोहन झाक कथा पढ़बाले बहुतो गोटे  मैथिली पढ़ब सिखने रहथि. अस्तु, कोन ठेकान, रोचक कथा, आकर्षक चित्र आ सरल भाषासँ आकृष्ट भए भूमण्डलीकरण एहि युग में सुदूर महानगर में बसैत मैथिल नेना सेहो मैथिली पढ़बा ले आकृष्ट हो. तें, हमरा जनैत मैथिली में सरल आ चित्रित बाल-साहित्यक प्रकाशनक आवश्यकता छैक.

ततबे नहिं, पढ़बाक रुचिक विकास मे माता-पिताक, शिक्षकक आ  संगी-साथीक  प्रेरणा, समयक उपलब्धताक योगदान सेहो छैक. किछु माता पिता जे बच्चा के बड्ड छोटे वयससँ पोथी पढ़ि कय सुनबैत छथिन, कथा-चित्र देखबैत छथिन ओहि म सँ  अधिकतर नेना कें छोटे वयससँ  पोथी पढ़बा में रूचि जागि जाइत छैक. तें जं एहि वयस में नेना कें मातृभाषा में कथा-पिहानी सुनबाक अवसर भेटैक, मातृभाषाक चित्र-कथा देखबाक अवसर भेटैक तं पछाति मातृभाषा पढ़ब निर्विवाद सुलभ भ’ जेतैक.  हं एहि में माता-पिताक संकल्प, प्रेरणा आ योगदान चाहियैकक. मुदा, एहि सब प्रयाससँ जं हमरा लोकनि आगामी पीढ़ी में मैथिली पाठकक संख्या में किछुओ वृद्धि कए सकी तं मैथिली कें बंचयबा दिशा में एकटा ई सार्थक प्रयास हयत.

 

1. Majid, S. (2018). Leisure Reading Behaviour of Young Children in Singapore. Reading Horizons: A Journal of Literacy and Language Arts, 57 (2). Retrieved from https://scholarworks.wmich.edu/reading_horizons/vol57/iss2/5

Monday, October 4, 2021

ओ बाबू भोजन नहिं ने मंगैत छथिन !

    1

कुञ्ज बिहारी बाबू आब बेस बृद्ध भए गेल छथि. जहिया धरि देह में पैरुख छलनि, जाधरि दिन में एक बेर भरि गामक फेरा नहिं लगा अबैत छलाह, नीक जकां अन्न नहिं पचनि. आब ठेहुन कज्जी भए गेल छनि, तें बेसी काल, दिन दलाने पर बिछाओने पर बितबैत छथि.

चिक्कन-चुनमुन कोठली, सीमेंटक फ्लोर नित्य चक-चक क’ कए पोछ्ल जाइछ. कोठलीक एक भाग उंचगर पलंग पर बिछाओल उज्जर दप-दप चद्दरि पर कुञ्जबिहारी बाबू पड़ल छथि. शरीर घटने जे अशक्तता आ उपेक्षाक बोध  होइत छनि, से चेहरापर घनीभूत भेल छनि.

आइ कतेक दिन पर दीनानाथ, कुञ्जबिहारी बाबूक पुत्र मणिनाथसँ भेट करए अयलाह तं हुनकर नजरि देबाल पर टांगल बुढ़ाक फोटो पर पड़लनि. एगारह गुणा चौदह इंचक भरिगर फ्रेम में कुञ्जबिहारी बाबूक भव्य स्वेतश्याम फोटोसँ  अप्रतिम आभा टपकि रहल छलनि.

फोटो देखि दीनानाथकें मणिनाथक प्रति असीम श्रद्धाक भाव जागि उठलनि. फोटोक प्रशंसा करैत कहय लगलखिन: बाबा,अहाँक ई फोटो बहुत दिन पहिनेक हयत ने ? ‘हूं.’ – कुञ्जबिहारी बाबू अन्यमनस्कतासँ  कहलथिन.

-‘सएह देखियौक मणिनाथ कहन जोगा कए रखने छथि. लगैए, आइए फ्रेम चढ़ाओल गेलैए !

दीनानाथक प्रशंसा सुनि बुढ़ाक माथ तबि गेलनि. कहलखिन, ठीके किने. ओ बाबू  भोजन नहिं ने मंगैत छथिन !

दीनानाथक मुँह अपन सन भए गेलनि.    

2

दादी  रहैत छथि ‘मोबाइल फ़ोन में !

जहियासँ बौआ बाजब सिखलनि, दादा-दादी कें प्रतिदिन हुनकासँ मोबाइल फ़ोन पर देखा-देखी होइत छनि. किछु-किछु गप्प सेहो होइत छनि. कहियो ओ कोनो कथा आ कविता सेहो सुनबैत छथिन. आब हुनका अपन नाम-गाम, माता-पिताक नाम सेहो आबि गेलनि-ए. दादी पुछैत छथिन:

-‘अहाँ कतय रहैत छी, बौआ ?’

-‘लालपुर’

-‘डैडीक नाम की अछि ?’

-‘एम एम कुमार.’

-‘मम्मीक नाम ?’

-‘लक्ष्मी कुमार.’ 

-‘आ,दादा कतय रहैत छथि ?’

बच्चा बिसरि गेलैये, गुणाकरपुर. नान्हि टा बच्चा आ बड़का टा नाम. बच्चा मन पाड़ैक कोशिश करैछ. बाप कहैत छथिन, ‘कहियौ, गुणाकरपुर’.

‘गुणाकरपुर’ बच्चा दोहरबैत अछि.

दादी पुछैत छथिन : ‘आ दादी कतय रहैत छथि ?’ बच्चा फेर सोचय लगैछ. ओकरा प्रतिदिन दादीसँ गप्प होइत छैक. बाप पहिने अपन माएसँ फ़ोन मे गप्प करैत छथि. बच्चा फ़ोन देखैत देरी, दादी-दादी, दादा-दादा, कहय लगैछ. आ बाप विडियो कॉल ऑन के दैत छथिन. आइ बच्चा कें जवाब देबा मे कनेक बिलम्ब होइत छैक तं बाप फेर पुछैत छथिन, ‘दादी कतय रहैत छथि ? कहियौ.’

बच्चा चटसँ  जवाब दैछ: ‘मोबाइल फ़ोन में !’

सब एके संग हँसए लगैत छथि. बच्चा ख़ुशी मे थोपड़ी बजबय लगैछ.


मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो