Monday, April 28, 2014

चुनाव २०१४


चुनाव देखैत 42 वर्ष भ गेल .बहुत किछु बदलल . बहुत किछु नहिं बदलल. बदलल माने , लोक बदलि गेल. समय बदलि गेल . समाज बदलि गेल . प्रचारक तरीका बदलि गेल. नहिं बदलल, त बैमानी नहिं बदलल . छल स जितबाक प्रपंच नहिं बदलल . प्रलोभन देबाक चालि नहिं बदलल . लोक के ठकबाक बानि नहिं बदलल .
हमरा लोकनिक सांसद चुनाव में सफल होइत छथि . दिल्ली जाइ छथि आ  घूरि क पांच बरखक पछातिये , पुनः चुनाव में निर्लज्ज जकां ,भोट मंगबा लेल अबै छथि . वैह खुरपेरिया बाट  , वैह खाधि - खोड़ा . मोटर के धक्का लगा कय गौआ सब खाधि पार कय  दइ  छनि . टाका क बलें  चुनाव जिता दैत छनि . आ फेर हमर प्रतिनिधि पांच सालक दिल्लीबास पर बिदा भ जाइत  छथि . मुदा , देखी २०१४ केर चुनाव कोन गुल खिलबैत अछि !

Wednesday, April 2, 2014

कने सोचियउ त 


बगडा भ गेल निपत्ता,
मुदा गिद्ध भ गेल संरक्षित  !
माने, चाही , अफरात चरी ,
चारूभर सुरक्षा चक्र,
आ भयमुक्त विचरण !
तें तं ,सुरक्षा चक्र में गिद्ध निस्संक लगा रहल छथि  बगडा क भोग !
आ असहाय चिडइ -चुनमुनी मना  रहल अछि मनहि -मन  शोक !!

2
एकटा कोठली तीन टा  लोक ,
बाजा-ने-भुकी , मेल-ने-जोल 
पड़ोसियाक घर में लागल छै आगि ,
मचल छै अनघोल ,
धत्तोरिके ! बुझलियइ कहाँ ,
हमरा सबहक कान में लागल छल फोन !

बाबा, केहन होई छै , बम्मई आम ?
बड होइए सेहन्ता, कने बुझितियइ स्वाद  !
की करू बाउ, कोना बुझाऊ , अद्भुत अछि सवाल  ,
मुदा, पुछियनु पितामह गूगुल के ,
कदाचित् , हुनका लग होइन कोनो बराबरीक स्वाद  !
 



Tuesday, April 1, 2014



समैया बसात
अपने बोली,अपने भाखा, लगैए अजगुत 
अपने स्वर लगैए अनचिन्हार 
गामक  सुनल पुरान  गीत लगैए नव 
अपने पुरान  बानि लगैए अनसोहांत । 


चिन्हल रिआय लगैए दडकल 
चिन्हले लोकक व्यवहार देखै छी बदलल 
घोदामाली भेल परिजन सुतै छल निस्संक  निर्विकार
आब, ख़ुशफैल शान्त आवास में, लोक बरमहल अछि  अनिद्राक शिकार ।


नीक लोकक आन करितै प्रशंसा 
अनटोटल व्यवहारक होइतै उपहास 
स्वेच्छा स लोक चुनैत मुखिया 
प्रचारक कोन  दरकार


एखनि विपटा बनल अछि विशिष्ट 
सबतरि उधियाइए  प्रचार 
मुंह कोनो  खतियान छै !
 ठकि   आउ संसार  ! !




Friday, January 3, 2014

ऋतु परिवर्तन
1
ऋतु परिवर्तन अनैत अछि नव आशा 
ऋतु परिवर्तन कखनो लबैत अछि अगबे निराशा
मुदा , आशा आ निराशा थिक मनक उपज 
आ परिवर्तन थिक मनुक्खक दास 
तें , हे मन ! किएक होइत छह उदास ?

मनुक्खेक मोन थिक नीक बेजायक निकती- तराजू 
आ सत्य-असत्य , नीक-बेजायक पैमाना थिक काल 
मुदा, जीवनक परिधि अछि छोट 
तें मनुक्ख होइत अछि निराश 
मुदा लगाउ त सब मिलि एकबेर जोर
आ करी  पैमाना बदलबाक प्रयास ?
3
हवा में छै परिवर्तनक शुभ संकेत 
वायु कोन में देखैत छियैक बिहाडिक आभास
आह ! अबउ त  एकबेर कसगर झोंकी आ खसा दौ जर्जर दलान
तखने त उठतै नव घर आ नवतुरिया चलाओत  अभियान 
आ फेर बदलल ऋतु में
अओतैक क्लान्त- परिश्रान्त मनुक्ख में जान !





Tuesday, December 31, 2013

Happy New Year

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग्भवेत्।

कविवर किरण जी क शब्द में 

सब हो सुखी सबहिं नरपाल
सबके भरै अन्न भरि गाल।

एहि हम जोड़ि दैत छियई :

सब हो सुखी सबहिं हो स्वस्थ
हर्षित मन काया बलमंत
नहि हो बिपद् दुःखक नहीं भोग
हो नित  स्वास्थ्य धनक संयोग।


Wednesday, November 6, 2013

किएक ?

            किएक ?

सब किछुक सुभीता , सब किछु ऐल- फैल खूब भबइए 
मुदा पुरनका छूटल घाव किएक  टहकैए ?                                                       

सबटा लगैए मिथ्या , सबटा थिकैक फूसि 
मुदा, कंठ स बोली किए नै फूटै-ए ?

प्रगतिक दर छै अजगुत 
मुदा , सर्बहारा रसातल में कथी ले धसै -ए ?

मनुखे थिक देवता ,   सब केओ थिका संत 
तखनि , मनुख के मनुख किए ने सोहाई- ए ?

Friday, November 1, 2013

तन्हाई में


                          1
शोर में सुनाई नहीं देती थी अपने ही मन की बातें ,
आज तन्हाई में बहुत सी दास्ताँ याद आई है !

                          2 
मीलों दूर की दौड़  और बेइन्तहां  फजीहत
आज पास की दरिया और अपने ही समन्दर ने मेरा दिल जीता है !

                          3
आसमा को चूमती तुम्हारी बुत कितनी बौनी है
पीपल के नीचे का बैठा वो बुद्ध का शिर कितना ऊंचा है !

                          4
 इंसानियत  ही मजहब की खुशबू है
फिरकापरस्ती ने ही  हम सब को लूटा है  !

मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान

कीर्तिनाथक आत्मालापक पटल पर 100 म  लेख   मैथिलीकें जियाकय कोना राखब: समस्या आ समाधान  कीर्तिनाथ झा वैश्वीकरण आ इन्टर...

हिन्दुस्तान का दिल देखो